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Uttarakhand

सब्सिडी की लूट, लूट सके तो लूट

 

कृषि एवं उद्यान विभाग महाघोटाला-2

 

नैनीताल उच्च न्यायालय ने राज्य के उद्यान विभाग में व्याप्त कथित भ्रष्टाचार से सम्बंधित तीन जनहित याचिकाओं पर सुनवाई के बाद सीबीआई को मामले की जांच करने के निर्देश अक्टूबर 2023 में दिए थे। राज्य सरकार इस आदेश से भयभीत हो उच्चतम न्यायालय की शरण में पहुंची लेकिन जांच रुकवा पाने में विफल रही। सीबीआई की देहरादून ईकाई ने अपनी जांच में याचिकाकर्ताओं दीपक करगेती और गोपाल उप्रेती द्वारा लगाए गए आरोपों को सही पाया है। सीबीआई द्वारा इस प्रकरण पर दर्ज तीन एफआईआर राज्य में व्याप्त भ्रष्टाचार की पोल खोल रही हैं। प्रधानमंत्री मोदी की महत्वाकांक्षी ‘डायरेक्ट बैंक ट्रांसफर’ परियोजना को पलीता लगाते हुए भाजपा शासित उत्तराखण्ड में करोड़ों की सब्सिडी किसानों के बजाय निजी नर्सरियों को सौंप डाली। हैरानी की बात यह है कि भ्रष्टाचार मुक्त प्रदेश का संकल्प दोहराते रहने वाली सरकार ने सीबीआई द्वारा सारे मामले का पर्दाफाश करने के बाद भी आरोपी अधिकारियों को उनके पदों में यथावत बनाए रखा है

पटकथा

वर्ष 2023 में सामाजिक कार्यकर्ता दीपक करगेती दो जनहित याचिकाएं उच्च न्यायालय में दायर करते हैं। यह याचिकाएं उत्तराखण्ड सरकार के बागवानी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग में व्याप्त भारी भ्रष्टाचार की जांच कराए जाने के बाबत थीं। इसी वर्ष ख्याति प्राप्त बागवानी व्यवसायी एवं सामाजिक कार्यकर्ता गोपाल उप्रेती भी इसी मुद्दे को एक पृथक जनहित याचिका के जरिए उच्च न्यायालय के समक्ष उठाते हैं। 11 अक्टूबर 2023 को उच्च न्यायालय इन तीनों जनहित याचिकाओं पर एक कॉमन निर्णय देते हुए इस कथित भ्रष्टाचार की जांच को केंद्रीय जाांच एजेंसी सीबीआई को सौंपने का आदेश देती है। इससे पूर्व राज्य सरकार के वकील इन जनहित याचिकाओं की सुनवाई के दौरान हरसम्भव प्रयास करते हैं कि न्यायालय इस कथित भ्रष्टाचार की जांच सीबीआई को न सौंपे। अक्टूबर 2023 में न्यायालय द्वारा सीबीआई जांच के आदेश बाद राज्य सरकार इस आदेश को उच्चतम न्यायालय में चुनौती देने का प्रयास करती है लेकिन उच्चतम न्यायालय उसकी याचिका को खारिज कर देता है और सीबीआई की देहरादून स्थित ईकाई मामले में जांच शुरू कर देती है। सीबीआई की जांच में हैरतनाक खुलासे हुए हैं जो दीपक करगेती और गोपाल उप्रेती द्वारा दायर जनहित याचिकाओं में लगाए गए आरोपों की मय प्रमाण पुष्टि करते हैं। यह जांच यह भी प्रमाणित करने का काम करती है कि 24 बरस के उत्तराखण्ड की शाासन व्यवस्था लूट का अड्डा बन चुकी है और इस लूट को राजनेता और नौकरशाह मिलकर अंजाम पहुंचा रहे हैं।

सीबीआई की निष्पक्ष जांच ने खोला भ्रष्टाचार का पिटारा

उच्च न्यायाललय नैनीताल के आदेश उपरांत सीबीआई की देहरादून ईकाई ने सुनील कुमार पाल, पुलिस उपाधीक्षक के नेतृत्व में अपनी जांच शुरू की। इसकी शुरुआत 6 नवंबर 2023 में हुई। इस जांच ने दो बातें स्पष्ट रूप से प्रमाणित करने का काम किया है। पहली बात उत्तराखण्ड की शासन व्यवस्था में गहरे पसर चुके और दिनोंदिन पनप रहे भ्रष्टाचार को प्रमाणित करती है। दूसरी बात यह भी प्रमाणित करती है कि यदि सीबीआई को राजनीतिक दबाव से मुक्त रखा जाए तो उसके जांच अधिकारी भ्रष्टाचार के किसी भी राज का पर्दाफाश करने की क्षमता रखते हैं। पुलिस उपाधीक्षक (सीबीआई) सुनील पाल ने अपनी जांच में कृषि एवं बागवानी विभाग में चल रहे सब्सिडी की लूट के खेला का पर्दाफाश कर दिखाया है। इस जांच के बाद सीबीआई ने तीन एफआईआार दर्ज की है।

एफआईआर संख्या आरसी0072024A0009

यह एफआईआर उत्तरकाशी जनपद में हुए करोड़ों की लूट का सच बयान करती है। सीबीआई के अनुसार तत्कालीन बागवानी एवं खाद्य प्रसंस्करण निदेशक हरमिंदर सिंह बवेजा ने एक फर्जी नर्सरी के मालिक नीतिन शर्मा और जनपद के तत्कालीन मुख्य बागवानी अधिकारी अनिल कुमार मिश्रा संग आपराधिक साजिश रच उत्तराखण्ड सरकार को कई करोड़ का चूना लगाया है। उनको इस आपराधिक षड्यंत्र रचने का अपराधी मानते हुए सीबीआई ने बवेजा, मिश्रा, नितिन शर्मा इत्यादि को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम-1980 की धारा 120बी, 7, 8 और 13(2) के अंतर्गत नामजद किया है।

सेब की खराब पौंध और करोड़ों की सब्सिडी का खेला

सीबीआई ने अपनी जांच में खुलासा किया है कि तत्कालीन निदेशक हरमिंदर सिंह बवेजा और तत्कालीन मुख्य बागवानी अधिकारी अनिल मिश्रा ने 5 जनवरी 2023 को धोखाधड़ी कर बाराकोट तहसील निवासी नितिन शर्मा की कम्पनी मैसर्स अनिका ट्रेडर्स को नर्सरी का लाइसेंस तमाम नियमों का उल्लंघन कर दे डाला। नितिन शर्मा को बकौल सीबीआई नर्सरी का कोई अनुभव नहीं है। इसके बावजूद 4 जनवरी 2023 को वह नर्सरी हेतु एक जमीन को लीज पर लेता है और उसके ठीक एक दिन बाद 5 जनवरी को उसे नर्सरी लगाए जाने का लाइसेंस दे दिया जाता है। इसके बाद लूट का ‘खेला’ शुरू होता है। हरमिंदर सिंह बवेजा इस नर्सरी से, जो जमीन पर थी ही नहीं, कई करोड़ की पौंध खरीदने के लिए 15 वर्क ऑर्डर जारी कर देते हैं। सीबीआई की जांच में पाया गया है कि मैसर्स अनिका ट्रेडर्स ने 480 रुपया प्रति पौंध के हिसाब से 1,01,189 सेब की पौंध उत्तरकाशी के किसानों को ‘मुख्यमंत्री एकीकृत बागवानी विकास योजना’ के अंतर्गत बेच उद्यान निदेशालय में 4,85,70,720 रुपयों के बिल जमाकर इस योजना के अंतर्गत 50 प्रतिशत सब्सिडी दिए जाने की मांग की। सरकार के शासनादेश संख्या 535/X111-2/2021-5(28)/2014 दिनांकित 17/05/2021 अनुसार सब्सिडी ‘बैंक ट्रांसफर बेनिफिट’ योजना के अंतर्गत सीधे किसानों के खाते में भेजी जानी जरूरी है। बवेजा और मिश्रा ने तमाम नियमों को धता बताते हुए अनिका ट्रेडर्स के खाते में सब्सिडी की रकम 1,92,00,000 रुपया ट्रांसफर कर डाली। इस सब्सिडी की लूट को रोकने के लिए ही दीपक करगेती ने उच्च न्यायालय में जनहित याचिका डाली थी। इस याचिका पर अंतरिम आदेश जारी करते हुए मार्च 2023 में उच्च न्यायालय ने मैसर्स अनिका ट्रेडर्स को कोई भी भुगतान न किए जाने का निर्देश दिया था लेकिन इस आदेश की खुली अवहेलना करते हुए बवेजा ने मैसर्स अनिका ट्रेडर्स को दोबारा से 1,56,00,000 रुपए ट्रांसफर करने का दुस्साहस कर दिखाया।

बवेजा ने कैश में ली करोड़ों की घूस
सीबीआई की एफआईआर में लिखा गया है कि इस लूट में अपना हिस्सा बवेजा ने 1.4 करोड़ रूपए नकद रकम बतौर प्राप्त की है।

एफआईआर संख्या आरसी0072024A0008

इस एफआईआर में सीबीआई ने सेब व कीवी की पौंध खरीद में भारी घोटाले का पर्दाफाश किया है। बागवानी निदेशक हरमिंदर सिंह बवेजा ने 15/05/2021 को कीवी की पौंध का मूल्य प्रति पौंध 35 रुपए से बढ़ा 75 रुपया तय की थी। ग्राफ्टिंग तकनीक वाले कीवी की पौंध का मूल्य उन्होंने 75 रुपए से बढ़ा 175 रुपया प्रति पौंध किया। इसके कुछ ही समय बाद सामान्य कीवी पौंध की खरीद मूल्य 75 रुपया प्रति पौंध से बढ़ा 225 रुपया और ग्राफ्टिंग तकनीक वाली पौंध का मूल्य 175 से बढ़ा 225 रुपया प्रति पौंध कर डाला। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि इस पौंध का मूल्य हिमाचल और जम्मू-कश्मीर में बेहद कम है। बगैर समुचित प्रक्रिया अपना पौंध का मूल्य दो बार बढ़ाने के पीछे सरकारी धन की लूट मात्र था।

सेब पौंध की खरीद में करोड़ों की लूट

दो बार कीवी पौंध के दाम बढ़ाने के बाद बवेजा ने ऊधमसिंह नगर जनपद में तैनात नर्सरी विकास अधिकारी त्रिलोकी राय को इस लूट का हिस्सेदार बना एक नए घोटाले को परवान चढ़ाया। राय की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन बवेजा ने किया जिसका काम उन नर्सरियों का निरीक्षण करना था जो सरकार को अपनी पौंध बेचना चाहती थी। इस कमेटी ने जम्मू-कश्मीर की कई नर्सरियों का निरीक्षण कर अपनी रिपोर्ट 17/12/2022 को बवेजा को सौंपी जिसमें जम्मू-कश्मीर की नोपारा स्थित मैसर्स पाला नर्सरी के पास 4,35,000 ग्राफ्टिंग तकनीक से विकसित सेब की उन्नत पौंध होने का उल्लेख किया गया था जो 300 रुपया प्रति पौंध की दर से खरीदे जा सकते थे। बवेजा ने त्रिलोकी राय, राजेंद्र कुमार सिंह और नारायण बिष्ट के साथ मिलकर आपराधिक षड्यंत्र रच कर इस रिपोर्ट को बदल नई रिपोर्ट तैयार कर डाली जिसमें पाल नर्सरी के पास इस पौंध के न होने की बात लिखी गई। ऐसा इसलिए किया गया ताकि अन्य नर्सरियों से अधिक कीमत पर पौंध खरीदी जा सके। 28/12/2022 को बवेजा ने जम्मू-कश्मीर की 6 नर्सरियों तथा हिमाचल प्रदेश की एक नर्सरी से पौंध खरीदने का आदेश जारी कर दिया। इन नर्सरियों में सबसे अच्छी और सस्ती पौंध देने वाली पाल नर्सरी को शामिल नहीं किया गया था।

इसके बाद लूट के खेल को परवाना चढ़ाया गया। नैनीताल जनपद के मुख्य बागवानी अधिकारी राजेंद्र कुमार सिंह ने किसानों संग सलाह-मशविरा किए बगैर ही फर्जी तरीके से सेब की पौंध का वर्क ऑर्डर बना जम्मू-कश्मीर की एक पूरी तरह से फर्जी नर्सरी मैसर्स बरकत एग्रो फॉर्मस को 465 रुपया प्रति पौंध की दर पर 1,83,625 सेब की पौंध का ऑर्डर जारी कर दिया। सीबीआई ने अपनी रिपोर्ट में इस नर्सरी को फर्जी करार दिया है। इस नर्सरी ने वर्क ऑर्डर के आधार पर 1,09,950 सेब की पौंध सोपाई कर 2,55,63,375 रुपयों का बिल सौंप दिया। यह पौंध अधिक कीमत की होने के साथ-साथ बेहद घटिया स्तर की निकली। बागवानी विभाग ने तुरंत ही इस पौंध के लिए 1,71,29,638 की सब्सिडी मैसर्स बरकत एग्रो फॉर्मस को जारी कर राज्य को करोड़ों रूपए का चूना लगा डाला। बवेजा और उसके साथी सरकारी अधिकारियों की लूट इतने पर ही नहीं थमी। पिथौरागढ़ जनपद के लिए बवेजा के एक करीबी विनोद शर्मा की नर्सरी मैसर्स विनोद सीड्स से 69,960 सेब की पौंध 480 रुपया प्रति पौंध खरीदी गई जबकि पिथौरागढ़ जनपद में किसानों को इस पौंध की जरूरत बेहद कम थी। विनोद सीड्स द्वारा भी बेहद घटिया पौंध सप्लाई की गई। इस पौंध का कोई सैम्पल टेस्ट विभाग ने नहीं कराया और इस कम्पनी को भी पेमेंट तुरंत कर दी गई।

बैंक खाते में ली गई घूस
बवेजा और उनके साथी अधिकारियों का अब तक हौसला इतना बुलंद हो चला था कि उन्होंने रिश्वत का एक हिस्सा सीधे बैंक ट्रांसफर के जरिए तक ले डाला। सीबीआई ने अपनी एफआईआर में प्रमाणित किया है कि नैनीताल जनपद के मुख्य बागवानी अधिकारी राजेंद्र कुमार सिंह ने मैसर्स बरकत एग्रो फॉर्मस से रिश्वत के 12 लाख बैंक खाते में ली तथा 43 लाख रुपए नकद में प्राप्त किए।

पौंध की सप्लाई नहीं लेकिन भुगतान तुरंत

सीबीआई ने अपनी जांच में यह भी पाया कि घटिया किस्म की पौंध भी आधी-अधूरी सप्लाई की गई। 1,09,950 पौंध के वर्क ऑर्डर में से 73,675 पौंध सप्लाई हुई ही नहीं लेकिन नैनीताल जनपद के सहायक बागवानी विकास अधिकारी ने फर्जी इंट्री कर इस पौंध की सप्लाई भी रिकॉर्ड में दर्ज कर डाली।

एफआईआर संख्या आरसी0072024।0009

यह एफआईआर राजधानी देहरादून के मुख्य बागवानी अधिकारी के भ्रष्टाचार का पिटारा खोलती है। सीबीआई के अनुसार बागवानी निदेशक बवेजा की शह पर देहरादून जनपद की मुख्य बागवानी अधिकारी मीनाक्षी जोशी ने पहले तो फर्जी दस्तावेजों के आधार पर अनिल रावत नामक एक व्यक्ति को यूके हाईटेक नर्सरी नाम से लाइसेंस जारी किया और फिर उत्तराखण्ड फल नर्सरी अधिनियम का खुला उल्लंघन करते हुए इस नर्सरी से कई प्रकार के पौंध खरीदी और ‘डायरेक्ट बैंक ट्रांसफर’ नीति को दरकिनार कर किसानों के बजाय इस नर्सरी को ही करोड़ों की सब्सिडी का भुगतान कर डाला।

फर्जी नर्सरी, घटिया पौंध, तत्काल भुगतान

सीबीआई ने अपनी जांच में पाया है कि बवेजा के कहने पर मीनाक्षी जोशी ने 29/12/2022 को मैसर्स यूके हाईटेक नर्सरी को विभिन्न प्रकार की पौंधा तैयार करने का जो लाइसेंस दिया वह फर्जी दस्तावेजों पर आधारित था। इस नर्सरी के मालिक अनिल रावत ने खुद को नर्सरी विशेषज्ञ बताते हुए पंतनगर कृषि विश्वविद्यालय का जो प्रमाण पत्र लगाया था वह फर्जी निकला। इस लाइसेंस के जारी होने के साथ ही हरमिंदर सिंह बवेजा ने उत्तराखण्ड के सभी जनपदों के बागवानी अधिकारियों को इस नर्सरी से पौंध खरीदने सम्बंधी आदेश दे डाले। देहरादून की मुख्य बागवानी अधिकारी मीनाक्षी जोशी ने इस आदेश को पाते ही 1,18,075 सेब की पौंध खरीद का वर्क ऑर्डर इस फर्जी नर्सरी को दे दिया। मैसर्स यूके हाईटेक नर्सरी ने 1,18,075 सेब की पौंध को 480 रुपया प्रति पौंध की दर से 62016 ग्राफ्टिंग तकनीकी की सेब पौंध को 80 रुपया प्रति पौंध तथा 15,081 कीवी की पौंध को 275 रुपया प्रति पौंध की दर से सप्लाई किया। यह तीनों पौंध बेहद घटिया स्तर की निकली। इसके बावजूद मीनाक्षी जोशी ने किसानों को ‘डायरेक्ट बैंक ट्रांसफर’ योजना के अनुरूप सब्सिडी न देकर इस सब्सिडी के मद में 3,28,92,027 रुपया इस फर्जी नर्सरी के खाते में डालने का कीर्तिमान स्थापित कर डाला।

उपसंहार
सीबीआई ने इस तरह से अपनी निष्पक्ष एवं तार्किक जांच के आधार पर सामाजिक कार्यकर्ता दीपक करगेती और गोपाल उप्रेती द्वारा लगाए गए आरोपों की पुष्टि करते हुए सभी भ्रष्ट अधिकारियों तथा इस घोटाले में शामिल अन्य लोगों के खिलाफ कड़ी धाराओं में मुकदमा दर्ज कर दिया है। राज्य सरकार ने लेकिन इस भ्रष्ट अधिकारियों को निलंबन तक करना उचित नहीं समझा है। उद्यान तथा बागवानी विभाग के निदेशक हरमिंदर सिंह बवेजा को जरूर सरकार ने पहले ही सस्पेंड कर दिया था लेकिन सीबीआई द्वारा एफआईआर दर्ज किए जाने के बाद भी अन्य अधिकारियों का अपने पद पर बने रहना राज्य सरकार की नीयत और नीति पर गम्भीर सवाल खड़े करता है।

पात्र-परिचय
1. हरमिंदर सिंह बवेजा: भ्रष्टाचार के सिरमौर जिन्हें राज्य के उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण का मुखिया 27 जनवरी 2021 में राज्य के
तत्कालीन कृषि एवं कृषक कल्याण मंत्री सुबोध उनियाल के कार्यकाल में बनाया गया था।

2. अनिल कुमार मिश्रा: उत्तरकाशी जनपद के तत्कालीन मुख्य
बागवानी अधिकारी।

3. त्रिलोकी राय: पिथौरागढ़ जनपद के तत्कालीन नर्सरी विकास
अधिकारी।

4. राजेंद्र कुमार सिंह: ऊधमसिंह नगर जनपद के तत्कालीन आलू विकास अधिकारी।

5. नारायण सिंह बिष्ट:
देहरादून जनपद के तत्कालीन वरिष्ठ बागवानी निरीक्षक।

6. भोपाल राम: नैनीताल जनपद के सहायक बागवानी विकास
अधिकारी।

7. श्रीमती मीनाक्षी जोशी: देहरादून जनपद की तत्कालीन मुख्य
बागवानी अधिकारी।

8. विभिन्न नर्सरियों के मालिकान जो सब्सिडी की लूट में हिस्सेदार थे।

बात अपनी-अपनी

हमारी एजेंसी एसआईटी इस प्रकरण की जांच कर रही थी। माननीय न्यायालय ने सीबीआई जांच के आदेश दिए तो जांच हो रही है। अभी जांच चल रही है जो भी दोषी पाया जाएगा उसके खिलाफ कार्रवाई होगी। वह सस्पेंड ही क्या टर्मिनेट भी होगा।
गणेश जोशी, उद्यान मंत्री उत्तराखण्ड सरकार

मैं सहमत नहीं हूं, मुझ पर जो भी आरोप लगाए जा रहे हैं वे सभी गलत हैं, ये भी झूठा आरोप है कि मैंने अपने बैंक खाते में 12 लाख रुपए लिए। पता नहीं क्यों मुझ पर ऐसे आरोप सीबीआई लगा रही है।
राजेंद्र कुमार सिंह, मुख्य उद्यान अधिकारी, ऊधमसिंह नगर

मेरी समझ में नहीं आ रहा है कि मुझे क्यों सीबीआई ने आरोपी बनाया है। मेरा तो कुछ मामला भी नहीं है फिर भी मुझे इस मामले में आरोप लगाया जा रहा है। इससे ज्यादा मैं कुछ नहीं कह सकता।
भोपाल राम आर्य, सहायक बागवानी विकास अधिकारी, नैनीताल

मैंने अपना बयान क्या देना है जो दूंगा सीबीआई को दूंगा। मुझे जबरदस्ती लपेटा गया है। अखबार वालों ने मेरे खिलाफ उल्टा-सीधा लिखकर मुझे दोषी ठहरा दिया है। जांच तो होने दो, पहले ही मुझे अपराधी बना रहे हैं सब। अखबार वाले और सीबीआई सभी मुझे अपराधी मान रहे हैं। मेरा भी परिवार है और इससे मैं और मेरे परिवार की सामाजिक प्रतिष्ठा खराब हुई है। मेरा पूरा परिवार मानसिक तनाव से गुजर रहा है।
नारायण सिंह बिष्ट, वरिष्ठ बागवानी निरीक्षक, देहरादून

इस मामले में मुझे कुछ नहीं कहना है।
मीनाक्षी जोशी, पूर्व मुख्य उद्यान अधिकारी, देहरादून

हरमिंदर बवेजा जी जनवरी 2021 में उत्तराखण्ड में डेपुटेशन पर आए। फरवरी महीने से ही प्रदेश में चल रहे एप्पल मिशन में उन्होंने सोलर मिशन को डालने का काम शुरू किया। तभी से इनके और हमारे किसानांे के बीच टकराव आरंभ हुआ। जिस एप्पल मिशन को भारत सरकार चला रही थी उसमें सोलर पंप किसानों को जबरन खरीदने के लिए बाध्य किया जाने लगा। 12 लाख प्रति किसान एप्पल मिशन का प्रोजेक्ट था जिसमें 7 लाख सोलर पंप योजना डाल दी गई। हमने इस सम्बंध में तत्कालीन उद्यान और कृषि मंत्री सुबोध उनियाल से शिकायत की जिस पर मंत्री जी ने एप्पल मिशन में सोलर पंप योजना को खारिज कर दिया। लेकिन बवेजा के भ्रष्टाचार पर कोई लगाम तब भी नहीं लगी और वह नए-नए तरीके से भ्रष्टाचार करते ही रहे। चौबटिया उद्यान विभाग का पैसा देहरादून में लगाया गया और देहरादून का पैसा अपने आवास की मरम्मत और साज-सज्जा में खर्च कर दिया गया। इसी तरह से किसानों की योजनाआंे का पैसा संगठित तरीके से लूटा जाने लगा तो जुलाई 2021 में मैंने सबसे पहले इनके भ्रष्टाचार के खिलाफ शपथ पत्र दिया। चौबटिया में बवेजा कभी नहीं बैठा, वह देहराून में ही बैठते थे। इसके खिलाफ आंदोलन शुरू किया जिसका हमें भरपूर समर्थन मिला। हमने प्रदेश सरकार से सभी प्रमाणों के साथ विभाग और निदेशक के भ्रष्टाचार की शिकायतें की लेकिन सरकार ने हमारी बात को अनसुना कर दिया तो मजबूरन हमें हाईकोर्ट में पीआईएल दायर करनी पड़ी। पीआईएल में हमने एक बिंदु यह भी रखा था कि निदेशक को चौबटिया में बैठने का आदेश दिया जाए। हमारी पीआईएल पर माननीय हाईकोर्ट ने सीबीआई जांच के आदेश दिए जिस पर जांच हुई और मुकदमें भी दर्ज हो गए हैं। अब हमें न्याय मिलने की पूरी उम्मीद है। लेकिन अभी तक सरकार ने उद्यान निदेशक को चौबटिया में बैठने का निर्देश जारी नहीं किया है जबकि हाईकोर्ट ने साफ तौर पर कहा है कि निदेशक को चौबटिया में ही बैठना होगा। यह साफ तौर पर न्यायालय की अवमानना ही है।

गोपाल उप्रेती, याचिकाकर्ता

किसानों और बागवानों के हित में एक लंबे संघर्ष के बाद माननीय उच्च न्यायालय ने सीबीआई जांच के आदेश दिए और उद्यान विभाग में हुए करोड़ों के घोटालों की परतें खुलने लगी हैं। माननीय उच्च न्यायालय, आमरण-अनशन, उद्यान बचाओ यात्रा से आज तक मेरे साथ जुड़े रहे राज्य के सभी किसानों-बागवानों का मैं हृदय से आभार प्रकट करता हूं और इस पूरे घटनाक्रम के बाद खेद के साथ कहना पड़ रहा है कि उद्यान विभाग के जिन अधिकारियों की सीबीआई ने प्राथमिकी दर्ज करवाई है उन्हें आज भी उनके पदों से हटाया तक नहीं गया है। इस घोटाले में बवेजा का सहयोग तत्कालीन उद्यान मंत्री सुबोध उनियाल, वर्तमान उद्यान मंत्री गणेश जोशी, और रानीखेत के विधायक ने सबसे अधिक किया। रानीखेत विधायक कोे तो इसी सहयोग के चलते 2400 सेब के पेड़ों का अवैध बगीचा भी निःशुल्क प्रदान किया गया और सरकार अभी तक मौन है।
दीपक करगेती, याचिकाकर्ता एवं सचिव, पर्वतीय कृषक कृषि बागवानी उद्यमिता संगठन

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