[gtranslate]
त्रिवेंद्र रावत सरकार ने जिन गुप्ता बंधुओं के लिए पलक पांवड़े बिछा दिये, वे दक्षिण अफ्रीका में विवादास्पद रहे हैं। इतने विवादास्पद कि उनका करीबी होने के चलते पूर्व राष्ट्रपति जैकब जूमा को अपनी कुर्सी गंवानी पड़ी थी। दक्षिण अफ्रीका में भी गुप्ता परिवार की एक शादी को लेकर बवाल हुआ था। ऐसे में पर्यावरणप्रेमियों और स्थानीय जनता के विरोध को दरकिनार कर त्रिवेंद्र रावत सरकार ने  औली में शादी समारोह करने की अुमति दी तो सवाल उठने स्वाभाविक हैं
उत्तराखण्ड का सीमांत जनपद चमोली कई कारणों से इतिहास में दर्ज है। बदरीनाथ धाम के कारण इस क्षेत्र का उल्लेख शास्त्रों में भी है। विश्व की सबसे लंबी पैदल धार्मिक यात्रा नंदा देवी राजजात इसी जिले में आयोजित होती है। हेमकुंड साहिब, फूलों की घाटी और चिपको आंदोलन के कारण यह जिला ऐतिहासिक है। जब भी कभी पर्यावरण की बात होती है तो यहां की महिलाओं का पर्यावरण के प्रति प्रेम (जिसने चिपको आंदोलन को जन्म दिया) जरूर याद किया जाता है। लेकिन आजकल यह जनपद किसी दूसरे कारण से सुर्खियों में है।
पिछले दिनों जिले की जोशीमठ तहसील मुख्यालय के ऊपर स्थित औली बुग्याल में दो सौ करोड़ की शादी के कारण चमोली जिला देश भर में चर्चा में रहा। इस शादी ने पर्यावरण को कितना नुकसान पहुंचाया, इसका आंकलन शायद कभी  न हो। लेकिन भारतीय मूल के दक्षिण अफ्रीकी बिजनेसमैन गुप्ता बंधुओं के इस आयोजन ने एक सवाल जरूर खड़ा कर दिया है कि बड़े लोगों के लिए नियम कायदे नहीं होते। पैसे वालों को पर्यावरण से भी कोई लेना-देना नहीं है। स्थानीय स्तर पर कई जगारूक लोगों ने इस आयोजन का विरोध किया। मगर नतीजा कुछ नहीं निकला। उल्टा वे लोग हास्यास्पद ही बन गए।
चमोली का औली क्षेत्र अपने प्राकृतिक सौंदर्य के लिए जाना जाता है। देश-दुनिया से लोग यहां फैले मखमली घास के मैदानों को देखने पहुंचते हैं। लेकिन बीते दिनों यह इलाका ‘दो सौ करोड़ की शादी’ के चलते सुर्खियों में रहा। यह शादी विवादित कारोबारी अजय गुप्ता और अतुल गुप्ता के बेटों की थी। मूल रूप से उत्तर प्रदेश के सहारनपुर के रहने वाले गुप्ता बंधु बीते कई सालों से दक्षिण अफ्रीका में रह रहे थे। अफ्रीकी राजनीति में गुप्ता बंधुओं का बेहद मजबूत हस्तक्षेप माना जाता है।
गुप्ता बंधुओं पर आरोप है कि दक्षिण अफ्रीका के पूर्व राष्ट्रपति जैकब जूमा के साथ वे भ्रष्टाचार के कई मामलों में संलिप्त रहे हैं। जैकब जूमा के बेटे के साथ गुप्ता बंधुओं के कई व्यावसायिक संबंध रहे हैं जिनकी इन दिनों जांच चल रही है। अंतरराष्ट्रीय मीडिया की मानें तो जैकब जूमा के इस्तीफे का बड़ा कारण भी गुप्ता बंधुओं द्वारा किया गया भ्रष्टाचार ही था। उनके इस्तीफे के बाद गुप्ता बंधुओं के पास दक्षिण अफ्रीका छोड़ने के अलावा कोई विकल्प बाकी नहीं बचा था।
देश में गुप्ता बंधु बीते एक पखवाड़े से चर्चाओं में हैं। यह चर्चा तब शुरू हुई जब खबर आई कि उत्तराखंड के औली क्षेत्र में गुप्ता बंधुओं के बेटों की शादी का आयोजन होने जा रहा है। कई सामाजिक कार्यकर्ताओं और पर्यावरणविदों ने इस आयोजन का विरोध किया। इस विरोध के बाद प्रदेश के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत ने बयान दिया कि उन्होंने ही गुप्ता बंधुओं को उत्तराखण्ड में शादी आयोजित करने के लिए आमंत्रित किया है ताकि प्रदेश में ‘डेस्टिनेशन वेडिंग’ को बढ़ावा मिले। लेकिन मुख्यमंत्री का यह बयान लोगों के गले इसलिए नहीं उतरा क्योंकि उत्तराखण्ड सरकार के पास न तो ‘डेस्टिनेशन वेडिंग’ आयोजित करने की कोई नीति है, न इस संदर्भ में कभी सरकार ने कोई सार्वजनिक घोषणा या अपील जारी की है और न ही ‘डेस्टिनेशन वेडिंग’ से प्रदेश के पर्यटन को बढ़ावा देने जैसी कोई योजना त्रिवेंद्र सरकार ने कभी लागू की।
प्रदेश के मुखिया से हरी झंडी मिलते ही औली क्षेत्र में गुप्ता बंधुओं के हेलिकॉप्टरों की गड़गड़ाहट शुरू हो गई। औली के प्राकृतिक ढालों पर अस्थायी हेलिपैड काट दिए गए और जिन इलाकों में न्यायालय ने अस्थायी टेंट लगाने तक को भी प्रतिबंधित किया है उन इलाकों में गुप्ता बंधुओं के शादी समारोह के लिए बाहुबली फिल्म जैसे बड़े-बड़े सेट बनाए जाने लगे। नियमों की ऐसी अनदेखी के चलते कुछ सामाजिक कार्यकर्ता इस शादी पर रोक लगाए जाने की मांग को लेकर उत्तराखंड हाई कोर्ट भी पहुंचे। कोर्ट ने प्रदेश सरकार को फटकार लगाते हुए सवाल उठाए कि ऐसे संवेदनशील क्षेत्र में शादी के आयोजन की अनुमति कैसे दी गई और गुप्ता बंधुओं को तीन करोड़ रुपए जमा करने के भी आदेश दिए ताकि पर्यावरण को हुई हानि की भरपाई की जा सके।
हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी के बाद भी प्रदेश सरकार इस आयोजन को सही बताती रही और प्रदेश के तमाम बड़े नेता इस आयोजन में शामिल हुए। फिल्म जगत की कई हस्तियों से लेकर योग गुरु बाबा रामदेव भी इस आयोजन का हिस्सा बने और इन तमाम देशी-विदेशी मेहमानों को औली लाने के लिए गुप्ता बंधुओं के हेलिकॉप्टर लगातार तैनात रहे। इस मामले में हाईकोर्ट के आदेश के बाद इतना जरूर हुआ कि पहले जो हेलिकॉप्टर औली में ठीक विवाह स्थल के पास ही उतारे जा रहे थे अब उन्हें यहां से करीब दस किलोमीटर दूर रविग्राम में उतारा गया।
इस आयोजन को प्रदेश हित में बताते हुए मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत ने बयान दिया कि इससे स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलेगा और व्यापारियों को भी मुनाफा होगा। लेकिन कई स्थानीय लोग मुख्यमंत्री की इस बात से इत्तेफाक नहीं रखते। विवाहस्थल के पास ही बसे परसारी गांव के रहने वाले युवा अंकित पंवार कहते हैं, ‘इस आयोजन को करने वाले सभी लोग बाहर से आए थे। खाने-पीने का सारा सामान और खाना पकाने वाले भी बाहर के थे। कुछ स्थानीय लोगों को सामान ढ़ोने के लिए दिहाड़ी पर जरूर रखा गया।’
औली में ही रहने वाले वरिष्ठ पत्रकार हरीश चंदोला कहते हैं, ‘यहां ‘डेस्टिनेशन वेडिंग’ से पर्यटन को बढ़ावा देने की बात सिर्फ एक जुमला है। गुप्ता बंधु यहां इसलिए शादी के लिए आए हैं कि उनके पास अथाह पैसा है, उनके मेहमान हेलिकॉप्टरों से पहुंच रहे थे। इससे स्थानीय लोगों के लिए कोई रोजगार उत्पन्न नहीं होगा।’ कुछ समय पहले ही उत्तराखंड हाईकोर्ट ने बुग्याल क्षेत्र में किसी भी तरह के निर्माण पर पाबंदी लगाने के साथ ही ऐसे इलाकों में रात को ठहरने पर भी रोक लगाने वाला एक अहम फैसला दिया है। इस फैसले के चलते प्रदेश में साहसिक पर्यटन से जुड़े सैकड़ों लोगों का रोजगार प्रभावित हुआ।
औली प्रदेश के उन बेहद चुनिंदा हिस्सों में शामिल है जहां शानदार प्राकृतिक ढलान होने के चलते सर्दियों में स्कीइंग के विश्वस्तरीय आयोजन किए जाते हैं। यह भी एक कारण है कि पर्यावरणविद ऐसे क्षेत्रों में ज्यादा छेड़छाड़ किए जाने को घातक मान रहे हैं। 22 जून की शाम जब पांच दिनों बाद यह समारोह समाप्त हुआ तो औली की ढलानों पर कई टन कूड़ा पीछे छूट गया है। स्विट्जरलैंड से आए करोड़ों के फूल अब मुरझाकर कूड़ा हो गए हैं। पांच सितारा स्टेज अपने पीछे उन गड्ढों को छोड़ गया है जिनमें उसकी नींव डाली गई थी। अलग-अलग तमाम कामों में इस्तेमाल हुआ थर्मोकोल व प्लास्टिक तो हवा के साथ उड़कर पूरी वादी में इस कदर छितर गया है कि उसे समेटना लगभग नामुमकिन है।
गुप्ता बंधुओं से जुड़ा एक दिलचस्प तथ्य यह भी है कि साउथ अफ्रीका से उनकी विदाई भी एक शादी के चलते ही हुई थी। उनके परिवार में हुई एक शादी वहां भी ऐसी ही थी जिसमें तमाम बड़ी हस्तियों ने शिरकत की थी और वहां भी मेहमान चार्टर्ड विमान से ही पहुंचे थे। लेकिन वहां फौज के रनवे पर चार्टर्ड उतरवाना गुप्ता बंधुओं को भारी पड़ गया। क्योंकि इसी कारण उन पर सवाल उठने लगे और स्थानीय लोगों का उनके खिलाफ आक्रोश बढ़ने लगा। इस वजह से उनके खिलाफ जांच शुरू हुई और अंततः भ्रष्टाचार के इतने मामले खुलने लगे कि उनके करीबी राष्ट्रपति जैकब जूमा को इस्तीफा देना पड़ा और गुप्ता भाइयों को दक्षिण अफ्रीका छोड़ना पड़ा।
‘पर्यावरण को लेकर सरकार गंभीर नहीं’
 

 

वरिष्ठ पर्यावरणविद् सचिदानंद भारती से बातचीत

 
औली में हुई 200 करोड़ की शादी पर आप क्या कहेंगे?
इस पर क्या कहना। यह सीधे-साधे पहाड़ी लोगों का मजाक उड़ाना है। पर्यावरण को लेकर सरकार जरा भी गंभीर नहीं है। पर्यावरण उनके लिए सिर्फ सेमिनार और बैठकों तक सीमित रह गया है। ऐसी शादी की अनुमति देना आश्चर्य करता है।
सरकार का कहना है कि इसकी अनुमति ‘डेस्टिनेशन वेडिंग’ को बढ़ावा देने के लिए दी गई है?
 तो क्या अब पर्यावरण की कीमत पर यहां बाहर से लोगों को शादी कराएंगे। इस पूरी शादी से आखिर राज्य सरकार, स्थानीय निवासी, स्थानीय व्यवसायी में से किसको कितना लाभ हुआ? सरकार को इसका खुलासा करना चाहिए। ऊपर से कई वर्षों के लिए यहां का पर्यावरण खतरे में डाल दिया गया।

You may also like

MERA DDDD DDD DD