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Uttarakhand

चहेतों को नियम विरूद्ध पट्टे

गरुड़ के प्रभारी एसडीएम पर लोग खुलेआम अवैध खनन को बढ़ावा देने के आरोप लगा रहे हैं। आरोप है कि एसडीएम ने अपने चहेतों को खनन पट्टे देने के लिए नियमों और उच्च अधिकारियों के आदेशों की धज्जियां उड़ाई हैं

बागेश्वर। गरुड़ तहसील में जारी अवैध खनन को लेकर प्रभारी उपजिलाधिकारी के खिलाफ आक्रोश पनपता जा रहा है। लोग यहां तक आरोप लगा रहे हैं कि अवैध खनन में लिप्त व्यक्ति तो महज मोहरा हैं, खनन के असली खलनायक तो प्रभारी एसडीएम गरुड़ हैं। आरोप हैं कि एसडीएम गरुड़ ने नियमों और उच्च अधिकारियों के आदेशों को ताक पर रखकर खनन के पट्टे अपने चहेतों को दिलाए। इसके लिए उन्होंने जिलाधिकारी को अंधेरे में रखकर रात के ८ बजे नीलामी कराई। अकुड़ाई में खनन कार्य शुरू करने के मौखिक आदेश दिए। उपजिलाधिकारी की कार्यप्रणाली विगत २ महीने से सवालों के घेरे में है।

खनन व्यवसायी जीवन सिंह खेतवाल मीडिया को बताते हैं, ‘आठ जून २०१८ को परगना गरुड़ के ग्राम अकुडाई में रिवर ट्रेनिंग के तहत एक खनन पटटा जो नीलामी द्वारा स्वीकूत होना था उस नीलामी में मैं और मेरी पत्नी कमला खेतवाल भी सम्मिलित थीं। जैसा कि पहले से तय था कि पूर्ण औपचारिता के आधार पर ही खनन पट्टे की नीलामी में सम्मिलित हुआ जा सकता था। दैनिक अखबारों के माध्यम से प्रकाशित विज्ञप्ति के आधार पर ८ जून २०१८ को सुबह १० बजे से ११ बजे के बीच में नीलामी प्रभारी उपजिलाधिकारी गरुड़ की अध्यक्षता में होनी थी। उस दिन में और मेरी पत्नी २ बजे तक उपजिलाधिकारी गरुड़ के कार्यालय में उपस्थित थे। उस बीच कार्यालय न तो उपजिलाधिकारी आए और न ही उनके कार्यालय का ताला खुला। इसके बाद करीब दो बजे बाद मैं और मेरी पत्नी जिलाधिकारी कार्यालय पहुुंचे और अपना लिखित शिकायती प्रार्थना पत्र जिलाधिकारी को दिया कि २ बजे तक नीलामी स्थल में कोई भी मौजूद नहीं था। इस नीलामी में उपजिलाधिकारी गरुड़ जो कि अध्यक्ष हैं, वे और कोई भी सदस्य मौजूद नहीं थे। मैंने लिखित पत्र के माध्यम से जिलाधिकारी से अपील की कि इस नीलामी में कोई भी सदस्य तय समय पर नहीं पहुंचा इसलिए नीलामी की तिथि और समय को निरस्त करते हुए नीलामी के लिए दोबारा नोटिस निकाला जाए। अखबारों में इश्तहार दिया जाए और प्रचार-प्रसार किया जाए जिससे नीलामी में सहभागिताओं की भागीदारी और बढ़े। नीलामी के माध्यम से अधिक से अधिक राजस्व राज्य सरकार को मिल सके।’ जीवन सिंह खेतवाल आरोप लगाते हैं कि उपजिलाधिकारी गरुड़ एवं अन्य सदस्य तय समय पर नीलामी में तो नहीं पहुंचे, लेकिन अपने चहेतों को पट्टा देने के लिए उसी रात ८ बजे दरबार लगाकर ४ लाख ६५ हजार में ही नीलामी दे देते हैं। जबकि यह नीलामी १५ लाख तक जा सकती थी जिससे सरकार का राजस्व ही बढ़ता। ९ तारीख को दैनिक अखबारों के माध्यम से मुझे नीलामी की जानकारी प्राप्त हुई। खुली नीलामी में यदि समय एवं दिन बदला भी जाता है तो सरकारी प्रणाली के आधार पर नोटिस चस्पा या श्रुत्रि पत्र के माध्यम से अखबारों में अग्रिम तिथि और समय को रखने का प्रावधान है। उसी रात ८ बजे को खनन पट्टे की नीलामी करने की क्या मजबूरी उपजिलाधिकारी गरुड़ की थी? यदि राजस्व हित में कार्य किया गया होता तो एक पल के लिए कुछ सोचा और माना जा सकता था। यहां तो उपजिलाधिकारी गरुड़ ने औने-पौने दामों में नदी को नीलाम करके अपने निजी हित में काम किया गया है जिसकी ठोस एवं गंभीर जांच होनी चाहिए। यह जान-बूझकर निजी लाभ के लिए एवं सरकारी राजस्व को चूना लगाने के उद्देश्य से किया गया काम है। यह कहीं से भी संवैधानिक नहीं है। ‘दि संडे पोस्ट’ ने प्रभारी उपजिलाधिकारी गरुड़ का पक्ष जानने उनके कार्यालय में संपर्क करना चाहा तो वे वहां उपलब्ध नहीं मिले। जिलाधिकारी रंजना राजगुरु बताती हैं कि उच्च न्यायालय के आदेशों के क्रम में उपजिलाधिकारी गरुड़ को अकुड़ाई ग्राम में रिवर टे्रनिंग के तहत उपखनिज निकालने के निर्देश दिए थे। नियमानुसार टेंडरिंग की कार्यवाही हो। इसके लिए उपजिलाधिकारी गरुड़ ने विज्ञापन जारी कर कार्यवाही की है, इस नीलामी के तहत एक आवेदक द्वारा लिखित रूप में यह शिकायत की गई है कि नीलामी का जो समय रखा गया है, उसे बदला गया था। बदले हुए समय की सूचना उन्हें किसी भी माध्यम से नहीं दी गई है और नीलामी को रातों-रात अंजाम दिया गया है।

 

मैंने अभी तक अकुड़ाई में कार्य प्रारंभ करने के आदेश नहीं दिए हैं। उपजिलाधिकारी गरुड़ से उनका स्पष्टीकरण मांगा गया है कि किन कारणों के आधार पर उन्होंने रातों-रात टेंडर करवा दिए। स्पष्टीकरण के आधार पर ही आगे की कार्यवाही की जाएगी।
रंजना राजगुरु, जिलाधिकारी बागेश्वर

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