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Uttarakhand

अवैध निर्माणों का कुंभ

उत्तराखण्ड सरकार के सबसे कद्दावर मंत्री मदन कौशिक और सोशल मीडिया पर अपनी तेज- तर्रार कार्यशैली के लिए फेमस आईएएस अधिकारी दीपक रावत की मौजूदगी में यदि जगह-जगह धड़ल्ले से अवैध निर्माण हो रहे हों, तो सवाल उठने स्वाभाविक हैं। कुंभ भूमि पहले ही अवैध निर्माणों के चलते सिकुड़ चुकी है। अब काॅलोनाइजर और भूमाफिया जिस तरह सक्रिय हैं, उस पर हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण की चुप्पी आश्चर्यजनक है। कायदे-कानूनों को ताक पर रखकर हो रहे अंधाधुंध अवैध निर्माण सोचने को विवश करते हैं कि क्या धर्मनगरी में अवैध निर्मार्णों का कुंभ तो नहीं हो रहा है

देश-विदेश के लाखों लोग इंतजारी कर रहे हैं कि कोरोना का संकट खत्म होगा और एक नए वर्ष में नए उत्साह और उमंग के साथ आस्था के महाकुंभ हरिद्वार में स्नान कर सकेंगे। कुंभ के प्रति श्रद्धालुओं की आस्था पौराणिक काल से यथावत है। यही वजह है कि कि कोरोनाकाल में भी मकर संक्रांति के दिन से हरिद्वार में श्रद्धालु पहुंचने लगे हैं। श्रद्धालुओं की आस्था कभी कम नहीं हुई, लेकिन दिक्कत यह है कि कुंभ भूमि निरंतर सिकुड़ती जा रही है। राजनेताओं, भूमाफियाओं और अधिकारियों का गठजोड़ वर्षों से इस कदर सक्रिय रहा है कि धर्मनगरी हरिद्वार में निरंतर खुलेआम अवैध कब्जे और निर्माण होते रहे और आज भी होते जा रहे हैं।

एक ऐसे समय में जबकि कुंभ शुरू हो चुका है, हरिद्वार में अवैध निर्माण रूक ही नहीं पा रहे हैं। इससे भी खास बात यह है कि हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण यानी एचआरडी के उपाध्यक्ष और कंुभ के मेला अधिकारी का दायित्व संभाल रहे तेज-तर्रार माने जाने वाले सोशल मीडिया फेम आईएएस अधिकारी दीपक रावत इन अवैध निर्माणों पर अंकुश नहीं लगा पा रहे हैं। हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण क्षेत्र में अनियोजित रूप से विकसित हो रही अनधिकृत काॅलोनी और भू-माफियाओं द्वारा हरे-भरे बागों का सफाया कर उनके स्थान पर कंक्रीट के जंगल खड़े किए जा रहे हैं। गगनचुम्बी इमारतें बना दी जा रही हैं। मगर दीपक रावत इस पर अंकुश लगाने में विफल साबित हो रहे हैं। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि हरिद्वार से विधायक मदन कौशिक जो कि शहरी मंत्री के साथ-साथ आवास मंत्री का भी दायित्व संभाले हुए हैं। सरकार में मुख्यमंत्री के बाद वे सबसे ज्यादा कद्दावर माने जाते हैं। वे भी इन अवैध निर्माणों से चिंतित दिखाई देते हैं। अब सवाल तो यह भी उठ रहा है कि यहां अवैध निर्माण को लेकर मंत्री का दखल दीपक रावत के कदमों में बेड़ियां तो नहीं डाले हुए है? या फिर विकास प्राधिकरण के अन्तर्गत होने वाले अवैध निर्माण के खिलाफ कार्यवाही को लेकर दीपक रावत खुद ही कोई कदम उठाना नहीं चाहते?

यहां सबसे बड़ा सवाल यह भी उठ रहा है कि अनधिकृत निर्माण पर अंकुश लगाने में विफल साबित हो रहे एचआरडीए के अधिकारी भले ही कामयाबी हासिल ना कर पाए हों, परंतु एचआरडीए के भवन पर लगे बोर्ड का रंग नीले से भगवा करने में जरूर कामयाबी हासिल कर चुके हैं। धर्मनगरी में गली-गली शहर से लेकर देहात तक चल रहे अवैध निर्माण को लेकर हालात इस कदर खराब हो चुके हैं कि बड़े-बड़े बागों के स्थान पर खड़ी गगनचुम्बी इमारतें आज हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण के अधिकारियों को मुंह चिढ़ाती नजर आ रही हैं।

सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार अवैध काॅलोनी काटकर राज्य सरकार को करोड़ों के राजस्व का चूना लगाने वाले काॅलोनाइजरों, भू-माफियाओं को विकास प्राधिकरण में बैठे कुछ अधिकारियों का वरदहस्त प्राप्त है। यही वजह है कि वे बिना किसी भय के सील की गई इमारतों में भी निर्माण कार्य चालू किए हुए हैं, ऐसा नहीं है कि इस प्रकार के कारनामों की भनक प्राधिकरण में बैठे अधिकारियों को न हो, पूरा मामला जानकारी में होने के बावजूद अवैध निर्माण पर कार्रवाई को लेकर अधिकारियों की चुप्पी रहस्यमय नजर आती है। हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण और भू-माफियाओं के बीच चल रहे गठजोड़ का इससे बड़ा प्रमाण भला और क्या हो सकता है कि प्राधिकरण के अधिकारियों को जहां भी अवैध निर्माण या अनधिकøत काॅलोनी काटे जाने की सूचना मिलती है, तो कार्यवाही के नाम पर मात्र एक नोटिस काटकर कर्तव्य की इतिश्री कर ली जाती है। यह गोरखधंधा पिछले कई सालों से लगातार जारी है। कार्यवाही के नाम पर नोटिस का खेल ऐसे खेला जा रहा है कि जिसका शायद ही कोई उदाहरण मिलता हो।

ऐसे एक नहीं सैकड़ों मामले सामने आ चुके हंै। जब अवैध निर्माण करने वाले माफियाओं को नोटिस जारी होने के बावजूद भू-माफिया द्वारा बड़े पैमाने पर निर्मित होेने वाले अवैध निर्माण पर लिंटर तक डाल दिया गया और प्राधिकारण में बैठे अधिकारी कुंभकर्णी नींद में सोते रहे। या फिर यह कहना उचित होगा कि सफेद हाथी बन मूकदर्शक बने रहे। यह हाल तब है जब अवैध निर्माण कर शहर की सूरत बिगाड़ रहे भू-माफिया खुलेआम विभागीय आदेशों की धज्जियां उड़ा रहे हैं। कहना अतिश्योक्ति नहीं होगी कि शहर से लेकर देहात तक के बड़े क्षेत्रों में इस प्रकार के अवैध निर्माणों का गोरखधंधा खुलेआम जारी है। बात करें तो प्राधिकरण के अंतर्गत आने वाले बहादराबाद क्षेत्र में गौरव जैन द्वारा ग्रैंड लज्जा के नाम से होटल का निर्माण किया जा रहा है। परंतु एचआरडीए के अधिकारी ग्रैंड लज्जा के स्वामी को नवम्बर 2019 में नोटिस सौंपकर कार्यवाही के नाम पर कुंडली मारकर बैठ गए। परिणाम स्वरूप अवैध रूप से बन रहा गौरव जैन का यह ग्रैंड लज्जा होटल आज भव्य रूप से तैयार है। यह प्राधिकरण के अधिकारियों को मंुह चिढ़ाता नजर आ रहा है। बहादराबाद क्षेत्र में ही कंवर पाल चैहान द्वारा मां फार्म हाऊस के नाम से चार बीघा क्षेत्र में किए जा रहे अवैध निर्माण के खिलाफ कार्यवाही को लेकर प्राधिकरण द्वारा यही रवैया अपनाते हुए मात्र नोटिस देकर अपने कर्तव्य की इतिश्री कर ली गई।

बहादराबाद से लगते हुए देहात क्षेत्र के टिहरी विस्थापित काॅलोनी, सुमननगर, सलेमपुर, दादूपुर गोविन्दपुर, आन्नेकी हेतमपुर, रोशनाबाद सहित कनखल क्षेत्र के जगजीतपुर, कटारपुर, गाडोवाली, फेरुपुर में बिना मानचित्र स्वीकृत कराए काटी जा रही अवैध काॅलोनियों पर कार्यवाही को लेकर भी प्राधिकरण सफेद हाथी साबित हो रहा है। यही नहीं हरिद्वार से रुड़की एवं उत्तर प्रदेश से लगी सीमा तक विकास प्राधिकरण को कार्यवाही का अधिकार मिलने के बावजूद रुड़की का यह क्षेत्र भू-माफियाओं के निशाने पर है। ये हालात तब है जब एचआरडीए द्वारा रुड़की क्षेत्र में होने वाले अवैध निर्माण पर अंकुश लगाने को लेकर उप सचिव स्तर के अधिकारी के नेतृत्व में सहायक अभियंता के साथ-साथ अवर अभियंता एवं अन्य स्टाफ की तैनाती की गई है। बावजूद इसके रुड़की क्षेत्र में प्राधिकरण की कार्यवाही से बेखौफ भू-माफिया धड़ल्ले से अनधिकृत काॅलोनी काटकर राज्य सरकार को करोड़ों रुपए के राजस्व की हानि पहंुचाने में लगे हुए हैं। ऐसे ही मुंडेट ग्राम गेट के सामने देवबंद-मंगलौर मुख्य मार्ग पर अनिल कुमार त्यागी द्वारा बीस बीघा के बड़े क्षेत्र में अनधिकृत निर्माण किया जा रहा है। जब प्राधिकरण की टीम वहां पहंुची तो त्यागी द्वारा कोई नक्शा प्रस्तुत न करने के बावजूद आज तक इस अवैध निर्माण के विरुद्ध कोई कार्यवाही न किया जाना भी प्राधिकरण अधिकारियों की कार्यशैली पर प्रश्न-चिन्ह लगाने के लिए काफी है।

कमोबेश यही हाल धर्मनगरी गंगा किनारे भी नजर आता है जहां एनजीटी द्वारा गंगा के 200 मीटर क्षेत्र में तमाम तरह के निर्माण पर रोक लगाने के बावजूद भारत माता मंदिर के निकट वेदांत आश्रम ट्रस्ट समिति द्वारा गंगा के ठीक किनारे आश्रम के नाम पर बड़ा निर्माण किया जा रहा है। वेदांत आश्रम समिति द्वारा किए जा रहे अवैध निर्माण को नोटिस जारी करने के बाजवूद उनके द्वारा निर्माण कार्य नहीं रोका गया। इसके बाद दिसंबर 2019 में निर्माण को सील करने का नोटिस जारी किया गया। लेकिन वेदांत आश्रम समिति द्वारा धड़ल्ले से अवैध निर्माण जारी रखा गया और अपनी चिर-परिचित कार्यशैली के अनुसार एचआरडीए कार्यवाही के नाम पर अपने नोटिस को ही ठंडे बस्ते में डालकर कंुभकर्णी नींद में सो गया। शहर से लेकर देहात तक चल रहे अनधिकृत निर्माण के कारण सरकार को लग रही करोड़ों की चपत के बावजूद प्राधिकरण अधिकारियों की लम्बी चैड़ी फौज की चुप्पी आश्चर्यजनक बनी हुई है। अब इसे तिजोरी का खेल कहें या फिर मंत्री की डंडा कार्यशैली, प्राधिकरण ही सवालों के घेरे में है। सवाल उठना लाजिमी है कि इतने बड़े क्षेत्रों में चल रहे अवैध निर्माण के विरुद्ध आखिर कार्यवाही क्यों नहीं हो रही। अवैध निर्माण के खिलाफ कार्यवाही पर दीपक रावत की चुप्पी भी रहस्यमय नजर आ रही है।

बात अपनी-अपनी

अवैध निर्माण की सूचना प्राप्त होने पर नोटिस जारी कर कार्यवाही की जाती है। प्राधिकरण नोटिस ही जारी कर सकता है किसी को जेल तो भेज नहीं सकता। कुछ मामलों में सीलिंग की कार्यवाही भी की गई है।
हरबीर सिंह, सचिव हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण

बिना मानचित्र स्वीकृत कराए काॅलोनी काटने में समस्या तो आती है लेकिन सभी बात फोन पर नहीं की जाती। आप हमारे कार्यालय में आएं, बैठकर बात करेेंगे।
सतीश त्यागी, काॅलोनाइजर रोशनाबाद हरिद्वार

नोट:- होटल ग्रैंड लज्जा के मालिक महेश जैन से जब इस संबंध में बात की गई तो उन्होंने पहले कहा कि 2016 में नक्शा स्वीकृत करा लिया गया था। लेकिन जब उनको बताया गया कि 2019 तक भी आपका मानचित्र स्वीकृत नहीं था तो महेश जैन ने होटल आकर मिलने की बात कही। महेश जैन का कहना था कि यह सब छोड़ो और आओ, मिलकर बात करते हैं।

  • नावेद अख्तर

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