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Uttarakhand

कुंभ, कोरोना और टेस्टिंग घोटाला

अधिकारियों को बचाने का खेल शुरू

‘दि संडे पोस्ट’ ने कुंभ मेला शुरू होने से पहले ही मेले की लचर तैयारियों, खामियों और भ्रष्टाचार को लेकर एक खास अभियान अंत तक चलाए रखा। आज कोरोना टेस्टिंग घोटाले ने भी ‘दि संडे पोस्ट’ की बात पर मोहर लगाई है कि ‘कुंभ’ को सरकार और प्रशासन ने कभी गंभीरता से नहीं लिया

हरिद्वार कुंभ मेले की लचर तैयारियों और निर्माण कायोकी खामियों एवं भ्रष्टाचार को लेकर ‘दि संडे पोस्ट’ द्वारा समय- समय पर खुलासा किया जाता रहा है। इस संबंध में ‘दि संडे पोस्ट’ ने एक खास अभियान के तहत सिलसिलेवार ढंग से तमाम खामियों को पर्दाफाश किया। अब मेला समाप्ति के पश्चात श्रद्धालुओं की कोरोना टेस्टिंग में भारी घालमेल का मामला सामने आया है। श्रद्धालुओं के सेम्पल लेने के नाम पर हुए फर्जीवाड़े का खुलासा होते ही इसकी गंूज मेला प्रशासन में बैठे उच्च अधिकारियों सहित राज्य सरकार तक जा पहंची है। टेस्टिंग में हुए भ्रष्टाचार को लेकर राज्य सरकार के निर्देश पर दो पैथोलोजी लैब सहित तीन संस्थाओं के खिलाफ फर्जीवाड़े का मुकदमा सीएमओ द्वारा दर्ज कराया गया है। परंतु सवाल उठ रहा है कि लाखों के तादात में सामने आ रहे फर्जी सेंपल के नाम पर मेला प्रशासन को करोड़ों का चूना लगाने वाली एक निजी कंपनी बिना अधिकारियों की मिली-भगत के कैसे इतने बड़े घोटाले को अकेले अपने स्तर पर अंजाम दे सकती है? सीएमओ द्वारा दर्ज कराई गई एफआईआर में किसी सरकारी अधिकारी अथवा कर्मचारी को आरोपी न बनाया जाना सीधे-सीधे इस प्रकरण पर लीपा-पोती की ओर इशारा कर रहा है।

गौरतलब है कि कुंभ के दौरान नैनीताल हाईकोर्ट में योजित जनहित याचिकाओं के माध्यम से याचिकाकर्ताओं द्वारा मेला क्षेत्र में कोरोना टेस्टिंग को लेकर श्रद्धालुओं की कोरोना जांच कराने जाने की मांग की गई थी। जिस पर हाईकोर्ट ने रोजाना 50 हजार श्रद्धालुओं की कोरोना टेस्टिंग कराये जाने के निर्देश जारी किए थे। हाईकोर्ट के आदेश से बैकफुट पर आए मेला प्रशासन से जुड़े स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने हाईकोर्ट के आदेश का पालन कराने का नायाब तरीका ढूढ़ते हुए 11 फर्मों को एंटीजन जांच और आरटीपीसी की जिम्मेदारी सौंपी थी। प्राइवेट लैब और एक निजी कम्पनी द्वारा मेले में आने वाले श्रद्धालुओं की कोरोना जांच को लेकर किस प्रकार फर्जीवाड़ा किया गया अगर एक काॅल से खुलासा न हुआ होता तो सच सामने आना नामुमकिन था। पंजाब के एक श्रद्धालु की शिकायत के पश्चात कुंभ मेला द्वारा अनुबंधित एक फर्म की एक लाख से ज्यादा जांच संदेह के घेरे में आ गई। विभाग द्वारा कराई गई प्रारंभिक जांच में एक ही सेंपल आईडी और मोबाइल नम्बर से सैकड़ों लोगों की जांच रिपोर्ट जारी होने की बात भी सामने आई, जबकि जांच कराने वाले हर व्यक्ति के सेम्पल की अलग
आईडी होती है। बावजूद इसके एक ही आईडी पर हजारों जांचे कर दी गई।

सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार विभागीय जांच में यह भी सामने आया कि जांच करने वाली फर्म ने लगभग एक लाख सेंपलों की जांच की है। जिसमें पाॅजिटीव दर कम और नेगेटिव की दर ज्यादा है। सेंपल जांच रिपोर्ट में दर्ज पते भी संदेह पैदा करते हैं। एक ही जगह से मकान नंबर क्रम से लिखे गये हंै। अब भले ही सीएमओ एफआईआर दर्ज कराकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ने की कोशिश में लगे हों, परंतु हाईकोर्ट के प्रतिदिन 50 हजार श्रद्धालुओं की कोरोना जांच में हुए इस फर्जीवाड़े का जवाब स्वास्थ्य विभाग ही नहीं मेला प्रशासन को भी देना होगा। सीएमाओ डाॅ ़ एसके झा द्वारा 17 जून को नगर कोतवाली में संबधित मैक्स कारपारेट कंपनी और उसके साथ अनुबंध करने वाली दिल्ली की लालचंदानी और हरियाणा की नालवा लैब के खिलाफ लिखित तहरीर दी गई। नगर कोतवाली पुलिस ने तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी है। दरअसल पूर्व से ही हरिद्वार के अतिरिक्त उत्तराखण्ड के अन्य 12 जिलों में टेस्ट की बात की जाए तो अभी तक हरिद्वार में 6,00,291 टेस्ट किए गए जिनमें 17375 केस सामने आए। वहीं पाॅजिटीविटी रेट की बात करंे तो हरिद्वार जनपद का पाॅजिटीविटी रेट 2 .89 प्रतिशत सामने आया है। प्रदेश के अन्य 12 जिलों के पाॅजिटीविटी रेट की बात करंे तो 4,42,432 टेस्ट के मुकाबले 62,755 केस सामने आए। जिनका पाॅजिटीविटी रेट 14.18 प्रतिशत होना ही पूरे खेल की कहानी बयान करने के लिए काफी है।

सीएमओ द्वारा एफआईआर में लगाए गए आरोप के अनुसार उनके द्वारा तहरीर देते हुए बताया गया है कि एक व्यक्ति द्वारा आईसीएमआर में शिकायत दर्ज की गई कि उनके आधर नंबर और मोबाईल नंबर का इस्तेमाल रैपिड एंटीजन टेस्टिंग करने में किया गया है, किंतु उनके द्वारा कभी भी इस प्रकार का सैंपल नहीं दिया गया। आईसीएमआर को प्रेषित इस शिकायत को 14 मई 2021 को स्वास्थ्य विभाग, उत्तराखण्ड को प्रेषित किया गया। उक्त प्रकरण में रैपिड ऐंटिजन टेस्ट के लिए सैंपल के कलेक्शन सेंटर का नाम ‘‘मैसर्स मैक्स काॅरपोरेट सर्विस, कुंभ मेला’’ अंकित किया गया है व जिस लैब से इनका इनका सैंपल जांच किया जाना अंकित किया गया है, उसका नाम ‘‘नलवा लैबोरेट्रीज प्राइवेट लिमिटेड हिसार’’ है। उक्त का संज्ञान लेकर अपर मिशन निदेशक/चीफ आपरेशन आफिसर, उत्तराखण्ड स्टेट कंट्रोल रूम कोविड- 19 द्वारा पत्र संख्या -1494/UKHFWS/Covid-19/ 2019-20 दिनांक 7 जून 2021 से जांच आख्या उपलब्ध कराई गई तथा जिसके क्रम में जिलाधिकारी हरिद्वार के कार्यालय पत्र संख्या-491/पीए/ 2021 दिनांक 10 जून, 2021 के क्रम में संयुक्त्त जांच समिति द्वारा दिनांक 16 जून 2021 को
प्रारंभिक जांच रिपोर्ट प्रस्तुत की गई जो अधेहस्ताक्षरी को दिनांक 17 जून 2021 को पृष्ठांकित है, जिसमें निम्न तथ्य प्रदर्शन किए गए हैं। दिनांक 13 अप्रैल, 2021 से 16 मई, 2021 के मध्य उक्त फर्म द्वारा 104796 सैंपल लिए जाने हेतु एंट्री करते हुए एसआरएफआईडी जेनरेट की गई एवं कुल 95102 सैंपल लिए जाने हेतु पोर्टल में एंट्री की गई है, जिसके परीक्षण कर उपरोक्त सैंपल्स की पाॅजिटिविटी दर मात्रा 0.18 पाई गई जो उत्तफ अवधि की हरिद्वार की सामान्य पाॅजिटिविटी 5 .3 से काफी न्यून है जो संदेह उत्पन्न करता है और यह स्पष्ट करता है कि उत्तफ फर्म द्वारा फर्जी एंट्रियां की गई, क्यांेकि अधिकांश सैंपल को निगेटिव दिखाया गया है और कोविड-19 के दौरान समस्त पाॅजिटिव सैंपल से संपर्क किया जाता है और निगेटिव एंट्रियों से संपर्क करने की आवश्यकता नहीं होती है। इस तरह उत्तफ फर्म द्वारा जानबूझकर फर्जी एंट्रियां कर आर्थिक लाभ प्राप्त करने का प्रयास किया गया है।

(b) Empanelled lab द्वारा सैंपल कलेक्शन ICMR Guaid Lines के अंतर्गत Sample Collecters को योजित किया जाता है परंतु प्रश्नगत प्रकरण में उत्तफ फर्म द्वारा उपलब्ध कराए गए Sample Collecters  से दूरभाष पर संपर्क करने पर अवगत कराया गया कि वे उक्त फर्म अथवा दोनो लैब (Nalwa Lab Dr. Lal Chandani, Delhi) से संबंधित नहीं है। इस प्रकार स्पष्ट है कि संबंधित फर्म द्वारा Sample Collecters की भी फर्जी एंट्रियां की गई जो वर्तमान में लागू आपदा अधिनियम व महामारी अधिनियम तथा IPC की संबंधित धाराओं के अंतर्गत उल्लघंन है। (ब) उक्त फर्म द्वारा कुंभ मेला के समाप्त होने के उपरांत (30 अप्रैल) भी 51298 एंट्रियाॅ, दिनांक 1 से 16 मई 2021 तक पोर्टल पर की गई हैं तथा एक ही Sample No.  पर बडी संख्या में सैंपल्स की एंट्री की गई। जैसे कुल 27198 सैंपल ID पर 73551 Sample लिए गए जो संभव नहीं है और स्पष्ट है कि फर्जी एंट्रियां कर आपदा अधिनियम के अंतर्गत सरकारी धन को चोरी की मंशा से गंभीर अपराध किया गया है। (क) उक्त के अतिरिक्त एक ही पते पर एवं एक ही फोन नं पर अत्यधिक संख्या में सैंपल लिए जाने वाले वाले व्यक्तियों को दर्ज किया गया है। उक्त आपदा में यह आवश्यक था कि लैब द्वारा प्रत्येक Sample लिए गए व्यक्तियों का सही पता/फोन नं उनके आईडी के आधार पर दर्ज किए जाते जिससे संक्रमित होने की दशा में उनका चिन्हीकरण किया जा सके, परंतु उत्तफ फर्म द्वारा ऐसा नहीं किया गया, जैसे Haridwar Nepali Farm Address पर कुल 3825 व्यक्ति अंकित किए गए हैं तथा फोन नं ़7747028144 पर कुल 56 व्यक्ति दर्शाए गए, जिससे यह स्पष्ट होता है कि फर्म को सही नाम/पता/फोन की गंभीरता को जानते हुए भी जान-बूझकर संबंधित फर्म द्वारा प्रयोजित तरीके से शासकीय कार्य में धोखाधड़ी कर शासकीयधन के दुरुपयोग का प्रयास किया गया एवं देश-प्रदेश के सम्मुख त्रुटिपूर्ण डेटा/ गलत तथ्य प्रस्तुत कर आंकडों में भ्रांति उत्पन्न की गई है। साथ ही कोविड महामारी में मानव जीवन को गंभीरता से नहीं लेते हुए हानि पहुंचाने का कृत्य करते हुए आपदा प्रबंधन अध्निियम-2005 एवं महामारी अधिनियम-1997 का उल्लंघन का उल्लघंन किया गया है। (म) उक्त के अतिरिक्त सैंपल लिए जाने पर फर्म/ लैब की यह जिम्मेदारी है कि जियो टैग्ड एसआरएफआई के सापेक्ष आईसीएमएमएम पर प्रविष्टि सुनिश्चित की जाए, परंतु प्रश्नगत प्रकरण में अध्ययन करने पर यह पाया गया कि अधिकांश एंट्रियां जनपद से बाहर अन्य राज्यों (राजस्थान, उत्तर प्रदेश इत्यादि) में की गई है, जिससे यह स्पष्ट है कि फर्म फ्मैक्स काॅरपोरेट सर्विस कुंभ मेला/ नलवा लैबोरेटिज प्राईवेट लिमिटेड, हिसार एवं डा. लाल चंदानी लैब द्वारा फर्जी एंट्रियां उत्तराखण्ड से बाहर की विभिन्न लोकेशन पर की गयी जो पूर्णतः फर्जी है और इस प्रकार राज्य के साथ धोखाधड़ी की गई है। आरोप है कि फर्म मैक्स काॅरपोरेट सर्विस कुंभ मेला/नलवा लैबोरेटिज प्राईवेट लिमिटेड, हिसार एवं डाॅ लाल चंदानी लैब, दिल्ली के विरुद्ध फर्जी एंट्रियां, सरकारीधन की चोरी की मंशा एवं आपदा के अंतर्गत मानव जीवन को हानि पहुंचाने के NR एवं अपराधिक लापरवाही के गंभीर आरोप लगाते हुए संबंधित लैब के खिलाफ मुकदमा भले ही दर्ज करा दिया हो परंतु सवाल फिर वहीं खड़ा हो रहा है कि आखिर बिना सरकारी अधिकारियों की मिलीभगत के इतना बड़ा फर्जीवाड़ा कैसे हुआ? सवाल उठ रहा है कि आखिर सीएमओ मेला प्रशासन के किस अधिकारी को बचाने का प्रयास कर रहे हैं। एसएसपी सैंथिल अबुदई ने बताया कि सीएमओ की तहरीर पर नगर कोतवाली में मुकदमा दर्ज हुआ है जिस पर जांच कर दोषियों के विरुद्ध कार्यवाही की जाएगी।

 

इस टेस्टिंग घोटाले की सीबीआई जांच होनी चाहिए क्योंकि इसमें मेला प्रशासन के अधिकारियों की सीधी मिलीभगत है। बावजूद इस मामले को अभी भी दबाया जा रहा है। सबको बचाने की कोशिश की जा रही है। तभी इस घोटाले की निष्पक्ष जांच से सच्चाई सामने आ सकेगी। मेला प्रशासन द्वारा 14 लैब को टेस्टिंग का ठेका दिया गया था अब ये 3 लैब बता रहे हंै। प्रशासन के सभी लोग मिले हुए है। हमने उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर की हुई है। आगामी 22 जून को हाईकोर्ट में मामले की सुनवाई है तब निश्चित रूप से इस प्रकरण को उठाया जाएगा और सीबीआई जांच की मांग की जाएगी।

शिव भट्ट, सीनियर एडवोकेट नैनीताल हाईकोर्ट

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