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नैनीताल हाईकोर्ट ने जनहित याचिकाओं पर कई ऐसे अहम फैसले दिए जिनका राज्य की जनता तहेदिल स्वागत कर रही है। इन फैसलों से लोगों को न सिर्फ सीधा फायदा पहुंचा, बल्कि सरकार भी उनके हित में काम करने को विवश हुई। लेकिन राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी को पीआईएल दाखिल करने वाले विकास विरोधी लगते हैं। केंद्रीय कानून मंत्री को लिखे पत्र में उन्होंने आगाह कराया है कि पीआईएल पर हाईकोर्ट की अति सक्रियता लोगों का आक्रोश भड़का सकती है
उत्तराखण्ड हाईकोर्ट ने हाल के दिनों में जनहित याचिकाओं पर कई ऐसे अहम फैसले दिए हैं जिनका जनता को काफी फायदा हुआ है। लोगों ने इन फैसलों का तहेदिल स्वागत किया है। राज्य सरकार भी न्यायालय के इन फैसलों के बाद सक्रिय दिखाई दी है। लेकिन सूबे के एक पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी जो कि वर्तमान में नैनीताल क्षेत्र के सांसद भी हैं, जनहित में दायर याचिकाओं (पीआईएल) को विकास में बाधक मानते हैं। केंद्रीय कानून मंत्री को लिखे एक पत्र में उन्होंने कहा है कि हाईकोर्ट में दाखिल पीआईएल की वजह से विकास प्रभावित हो रहा है लोग बेरोजगार हो रहे हैं।
कोश्यारी के मुताबिक पीआईएल दाखिल करने वाले स्वार्थी लोगों के कारण जनता न्यायालय को न्याय का मंदिर की जगह अपने लिए आफत समझने लगी है। कोश्यारी ने केंद्रीय मंत्री को आगाह कराते हुए अनुरोध किया है कि जनता के इस बढ़ते आक्रोश को शांत करने के लिए उपाय करें। पीआईएल पर हाईकोर्ट की अति सक्रियता से विस्फोटक स्थिति बन सकती है।
पूर्व मुख्यमंत्री कोश्यारी को बेशक जनहित याचिकाओं पर हाईकोर्ट के फैसले विकास विरोधी लगें, लेकिन वे भूल जाते हैं कि इन्हीं अहम फैसलों से जनता को राहत मिली है। हाईकोर्ट के हाल के फैसलों पर नजर डालें तो शिक्षा को लेकर एक अहम फैसले में हाई कोर्ट ने कहा कि छात्रों के लिए स्कूलों में साफ- सफाई, पीने का पानी और शौचालय उपलब्ध होने चाहिए। जब तक राज्य के स्कूलों की हालत नहीं सुधरती है तब तक सरकार लग्जरी आइटम एसी, कारें जैसी चीजों को न खरीदे।
हाईकोर्ट का एक ताजा निर्णय नदी-नालों और शहरों से अतिक्रमण मुक्त कराने बावत आया है। इस निर्णय के बाद सरकार अतिक्रमण पर कड़ी कार्रवाई कर रही है। सरकार ने भले ही टूरिजम को उद्योग का दर्जा दे दिया है, लेकिन बिना कोई स्पष्ट नियम का हवाला देकर हाल में एडवेंचर टूरिजम पर रोक लगा दी थी। बाद में हाईकोर्ट ने टूरिजम इंडस्ट्री से जुड़े लोगों को राहत देते हुए रोक हटा ली।’ कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार को न सिर्फ पॉलिसी बनाने को कहा, बल्कि कई बिंदुओं पर वन और वन्य जीवों को आग से बचाने, किसानों को होने वाले नुकसान के साथ ही शिकारियों के संबंध में निर्देश जारी किये। गर्मियों के मौसम में हाईकोर्ट ने वनाग्नि के मामले पर खुद संज्ञान लिया था।
युवा पीढ़ी में बढ़ते नशे पर रोक लगाने के लिए बेहद प्रभावी दिशा-निर्देश भी हाईकोर्ट ने जारी किए। उत्तरकाशी में गैंगरेप की घटना का संज्ञान लेकर सरकार को जल्द मृत्युदंड का प्रावधान लागू करने को कहा। साथ ही पीड़िता के माता-पिता के जर्जर मकान को सुरक्षित बनाने के आदेश जारी किए। स्कूली बच्ची के साथ हल्द्वानी में हुए यौन दुर्व्यवहार के मामले में कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला कर स्कूलों और बसों में सुरक्षा के ठोस आदेश किये। मेडिकल कॉलेज हल्द्वानी और कैंसर अस्पताल की व्यवस्था, चिकित्सकों की नियुक्ति और नए सुपर स्पेशिलिटी विभाग बनाने के समयबद्ध आदेश जारी किए।
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश दिया कि रीवर राफ्टिंग, पैराग्लाइंडग और वाटर स्पोर्ट्स के लिए उचित नीति तैयार करे। निजी बसों और टैक्सियों की हड़ताल को जब सरकार 12 दिन तक नहीं खुलवा पाई और जनता त्राहि-त्राहि कर रही थी तो तब हाईकोर्ट ने आदेश कर 2 घंटे में हड़ताल खुलवा कर जनता को राहत दी।
रविशंकर प्रसाद को भगत सिंह कोश्यारी का पत्र

उच्च न्यायालय के गंगा में प्रदूषण को लेकर नाले बंद करने और इसे जीवित नदी घोषित करने जैसे ऐतिहासिक आदेश को फ्रांस के उच्च शिक्षण संस्थाओं के पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है।

हाई कोर्ट ने खुद को राज्य की गायों का कानूनी संरक्षक नियुक्त करते हुए कई निर्देश दिए हैं। हाई कोर्ट ने कहा, ‘गायों और दूसरे आवारा मवेशियों की भलाई के लिए कोर्ट देश के कानूनी संरक्षक होने के सिद्धांत का उपयोग करते हुए अनिवार्य निर्देश जारी करता है। फल पट्टी क्षेत्र में बगीचे काटने पर रोक, अवैध अतिक्रमण की जद में जा चुके कई शहरों में अतिक्रमण हटाने के आदेश हाईकोर्ट ने दिए। बुरी स्थिति में रह रहे कुष्ठ पीड़ितों के लिए सरकार को पुनर्वास नीति का आदेश दिया। पर्वतीय क्षेत्र के गरीब किसानों को वर्षों से बेनाप भूमि पर मालिकाना हक की मांग को हाईकोर्ट ने पूरा कर उन्हें बेनाप कृषि भूमि का भूमिधर घोषित किया

जनहित याचिकाओं पर कुछ अहम फैसले 

24 जून 2018 : हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश जारी करते हुए कहा कि चार सप्ताह के भीतर सड़कों पर दुकानों के बाहर हुए अतिक्रमण हटाए जाएं।  अतिक्रमण से शहरों में चलना मुश्किल हो गया था।
28 सितंबर 2018 : उत्तराखण्ड में नाबालिगां के साथ बढ़ रही सामूहिक दुष्कर्म की घटनाओं पर नैनीताल हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए 859 पोर्न वेबसाइट को बंद कराने के आदेश दिए। देहरादून के भाड़वाला में बोर्डिंग स्कूल में नाबालिग के साथ दुष्कर्म मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए कोर्ट ने मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह को इस मामले में जल्द से जल्द जांच करने के आदेश दिए।
20 मार्च 2017 : गंगा और यमुना को एक जीवित मानव की तरह का कानूनी दर्जा देते हुए अदालत ने नमामि गंगे के निदेशक को नदियों के कानूनी अभिभावक होने के निर्देश दिए। गंगा-यमुना और सहायक नदियों की सुरक्षा करने एवं संरक्षण के लिए ये अधिकारी बाध्य होंगे। यह आदेश हरिद्वार निवासी मोहम्मद सलीम की जनहित याचिका पर दिया गया।
22 जून 2017 :  हाईकोर्ट ने अभूतपूर्व फैसला दिया कि जब तक उत्तराखण्ड राज्य के स्कूलों की दशा न सुधरे तब तक सरकार लग्जरी के सामान जैसे एसी, फर्नीचर, परदे आदि न खरीदे।
13 सितंबर 2018 : हल्द्वानी निवासी नरेश अडोल की पीआईएल पर हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार को निर्देश दिए कि वह प्रदेश के सभी सरकारी अस्पतालों के प्रमुख स्थानों को सीसीटीवी कैमरों से सुसज्जित करे। रुद्रपुर में एक चिकित्सक द्वारा एक महिला मरीज के साथ छेड़छाड किए जाने की घटना के बाद हाईकोर्ट ने यह महत्वपूर्ण फैसला लिया।
9 सितंबर 2018 : देहरादून में जगह-जगह लगे कूडे के ढेरों से जनता को निजात दिलाने के लिए हाईकोर्ट को संज्ञान लेना पड़ा। हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि देहरादून नगर निगम सुबह-शाम दोनों समय कूड़ा हटाया जाना सुनिश्चित करे। अगर शहर की सड़कों गलियां या अन्य भागों में कूड़ा दिखाई दिया तो नगर निगम के आयुक्त को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया जाएगा।
24 अगस्त 2018 : खानपुर निवासी अख्तर मलिक की पीआईएल पर हाईकोर्ट ने राज्य में गैर कानूनी तरीके से चलने वाले सभी अस्पतालों और चिकित्सालयों को सील करने के आदेश दिए। गैरकानूनी अस्पतालों का पंजीकरण और विनियम क्लीनिकल इस्टेबलिशमेंट एक्ट 2010 के तहत नहीं किया गया है। सभी चिकित्सलयों को यह भी आदेश दिया कि वे नैदानिक परिक्षण के नाम पर बेवजह जांचें न कराएं।
14 अगस्त 2018 : अपने एक ऐतिहासिक फैसले में गौवंश की रक्षा के लिए खुद को कानूनी संरक्षक घोषित कर हाईकोर्ट ने राज्य में गौमांस और उसके उत्पादों की बिक्री पर भी प्रतिबंध लगा दिया। साथ ही हिमालयी राज्य उत्तराखण्ड में गायों और अन्य आवारा मवेशियों में कल्याण के लिए राज्य सरकार को 31 सूत्रीय दिशा-निर्देश भी जारी किए। हरिद्वार निवासी अलीम की जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद यह महत्वपूर्ण निर्णय आया।
22 जुलाई 2018 : नैनीताल निवासी प्रोफेसर अजय एस रावत की जनहित याचिका पर हाईकोर्ट ने आवारा कुत्ते और बंदरों पर अंकुश लगाने के निर्देश दिए। साथ ही बंदर और कुत्ते के काटने पर पीड़ित को दो लाख का मुआवजा देने के भी आदेश दिए।
3 अक्टूबर 2018 : हाईकोर्ट ने बिना उपचार के गंगा में गिर रहे 65 नालों को तत्काल बंद करने या उनका रुख बदलने का निर्देश दिया। गंगा नदी के प्रदूषण के मामले में एक जनहित याचिका पर यह फैसला किया गया।
20 सितंबर 2018 : हाईकोर्ट ने प्रदेश में अवैध रूप से संचालित पशु वधशालाओं को 72 घंटे के अंदर सील करने के निर्देश दिए। परवेज आलम की जनहित याचिका पर कोर्ट ने सरकार को कहा कि वह सुनिश्चित करे कि खुले स्थानों में पशुओं का वध ना हो। साथ ही कोई भी वधशाला बिना लाइसेंस के न चलाई जाए।
29 सितंबर 2018 : हाईकोर्ट ने जागेश्वर अरतोला मोटर मार्ग सहित क्षेत्र में बहुमंजिला भवनों के निर्माण पर रोक लगाते हुए विशेष क्षेत्र प्राधिकरण को निर्माण कार्यों के बायलाज बनाने के निर्देश जारी किए। साथ ही पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग को कहा कि कि क्षेत्र को एक्ट 1958 की परिधि में ले और यहां स्थित मंदिरों का जीर्णोद्धार करे।
25 सितंबर 2018 : हाईकोर्ट ने हल्द्वानी में स्कूल वैन में बच्ची के साथ दुष्कर्म की घटना के बाद कड़े दिशा-निर्देश जारी किए। संबंधित घटना की 48 घंटे के दौरान एफआईआर के साथ ही स्कूल से घर और घर से स्कूल तक के सफर के दौरान सभी विद्यार्थियों की सुरक्षा स्कूल प्रबंधन की व्यक्तिगत जिम्मेदारी ठहराई। इसके अलावा कोर्ट ने हर स्कूल बस में महिला स्टाफ तैनात करने, हर छात्र को इलेक्ट्रॉनिक चिप वाले पहचान पत्र देने सहित कई आदेश दिए। आदेशों का पालन नहीं होने पर ऐसे स्कूलों की मान्यता रद्द करने के भी आदेश दिए।
28 सितंबर 2018 : हाईकोर्ट ने स्कूलों में दाखिले और सरकारी नौकरियों में किन्नरों को आरक्षण देने के लिए उत्तराखण्ड सरकार को 6 माह में योजना तैयार करने के आदेश दिए। साथ ही किन्नरां को सम्मानजनक जीवन जीने के लिए मुख्यधारा में शामिल करने और उनके आवास के लिए भी व्यवस्था करने को कहा। यह आदेश हाईकोर्ट ने देहरादून निवासी किन्नर रजनी रावत की जनहित याचिका पर दिए।
12 अगस्त 2018 : उत्तराखण्ड हाईकोर्ट ने युवा पीढ़ी को नशे की लत से उबारने के लिए ऐतिहासिक आदेश दिया। कोर्ट ने केंद्रीय औषधि नियंत्रण बोर्ड द्वारा प्रतिबंधित 434 दवाइयों की बिक्री को राज्य में पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया। साथ ही मेडिकल स्टोरों में इन दवाइयों के मिलने पर पुलिस की मदद से नष्ट करने अथवा कंपनी को कार्य करने को कहा। ये दवाइयों वापस करने के निर्देश दिए। साथ ही सभी शिक्षण संस्थानों, निजी संस्थानों और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर ड्रग कंट्रोल क्लब खोलने को भी कहा गया। क्लब के अध्यक्ष उच्च शिक्षा निदेशक एवं नोडल अधिकारी विद्यालयी शिक्षा निर्देश होंगे। हाईकोर्ट ने यह आदेश रामनगर निवासी श्वेता मासीवाल की जनहित याचिका पर सुनाया। याचिका में कहा गया कि प्रदेश का युवा दिन प्रतिदिन नशे की गिरफ्त में जा रहा है। सरकार और पुलिस नशाखोरी पर अंकुश लगाने में नाकाम रहे हैं।
20 जून 2018 : नजूल भूमि पर मालिकाना हक को लेकर हाईकोर्ट नैनीताल ने बड़ा फैसला दिया। इस संबंध में बनाई गई सरकार की नजूल नीति को कोर्ट ने निरस्त कर दिया। यही नहीं गलत नीति बनाने के लिए सरकार पर 5 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया। रुद्रपुर के पूर्व सभासद रामबाबू एवं उत्तराखण्ड हाईकोर्ट के अधिवक्ता रवि जोशी ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर सरकार की नजूल नीति को एक मार्च 2009 को चुनौती दी थी। याचिकाकर्ताओं ने कहा कि राज्य सरकार नजूल भूमि को अवैध रूप से कब्जा कर रहे लोगों के पक्ष में मामूली नजराना लेकर फ्री होल्ड कर रही है जो कि असंवैधानिक एवं नियम विरुद्ध है।
10 जुलाई 2018 : हाईकोर्ट ने फीस बढ़ोतरी के मामले में राज्य सरकार और आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेजों को बड़ा झटका दिया। कोर्ट ने सरकार की ओर से फीस बढ़ोतरी के शासनदेश को निरस्त करके फीस जमाकर चुके छात्रों को 15 दिन के भीतर रकम लौटाने के निर्देश जारी किए। कोर्ट के फैसले से राज्य में आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेजों के 500 से अधिक छात्र-छात्राएं सीधे तौर पर लाभान्वित होंगे। 14 अक्टूबर 2015 को राज्य सरकार के निर्देशानुसार शासन ने आयुर्वेदिक कॉलेजों में शुल्क बढ़ोतरी का आदेश जारी किया था। शासनादेश में निर्धारित शुल्क 80 हजार से दो लाख 15 हजार सालाना कर दिया था। सरकार के शासनादेश को हिमालय आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज देहरादून के ललित तिवारी ने एक जनहित याचिका के माध्यम से चुनौती दी थी।
6 सितंबर 2018 : जिम कार्बेट नेशनल पार्क में ढ़ाई साल में 40 बांधों और 272 तेंदुओं की मौत हो चुकी है। ऐसे में हाईकोर्ट ने इसे गंभीर मामला मानते हुए सीबीआई जांच के आदेश दिए। इसी मामले में कोर्ट ने वन अधिकारियों की संपत्ति की जांच के लिए ईडी को भी आदेश दिए। इस मामले में कोर्ट में यिचका दायर की गई थी और जांच की मांग की गई थी।
22 अगस्त 2018 : उत्तराखण्ड में अतिक्रमण पर तेवर दिखाने के बाद अब उच्च न्यायालय नैनीताल ने राज्य में नदियों के किनारे कृषि भूमि के आवंटन पर रोक लगा दी है। देहरादून के पवन कुमार ने एक जनहित याचिका दायर करके कहा था कि सरकार राज्य में नदी किनारों के तमाम हिस्सों की जमीन का खेती एवं अन्य प्रायोजन के लिए नियम विरुद्ध आवंटन कर रही है। कोर्ट के आदेश के बाद पूरे राज्य की नदी श्रेणी की जमीन पर कब्जा कर हुए निर्माण पर तलवार लटक गई है।

बात अपनी-अपनी

लोगों की नजरों में न्याय का मंदिर न्यायालय अब आफत बन रहा है। होटल तक बंद करने की नौबत आ गई है। होम स्टे तक स्टे हो रहे हैं। हाईकोर्ट के कई आदेशों से लोगों के रोजगार प्रभावित हो रहे हैं। प्रदेश में पर्यटन खासकर रीवर राफ्टिंग और साहसिक खेलों पर असर पड़ रहा है। सरकार के अधिकारी हाईकोर्ट से सहम गए हैं। अधिकारी कोई काम करने से पहले हाईकोर्ट का बहाना ले लेते हैं।
भगत सिंह कोश्यारी, सांसद नैनीताल
न्यायपालिका को दोष देने से पहले सरकार अपनी कमजोरियों को दूर करे। न्यायपालिका के सामने अपना पक्ष सही ढंग से न रखने और अपनी कमजोरियों को मानने के बजाय आप क्यों न्यायपालिका को काली स्याही से चिन्ह कर रहे हैं।
हरीश रावत, पूर्व मुख्यंत्री
मैं तो शुरू से ही कहता आ रहा हूं कि इस प्रदेश में कहीं पर नहीं लगता कि सरकार नाम की कोई चीज है। सरकार को हाईकोर्ट संचालित कर रहा है। सरकार निर्णय लेती है, लेकिन कोई विचार-विमर्श नहीं करती। सरकार ने न्यायालय में अधिवक्ताओं की फौज इकट्ठा कर रखी है जो नकारा साबित हो रहे हैं।
प्रीतम सिंह, प्रदेश अध्यक्ष उत्तराखण्ड कांग्रेस
माननीय सांसद भगत सिंह कोश्यारी जी ने देश के कानून मंत्री से मिलकर न्यायालय की अति सक्रियता को लेकर जो प्रश्न उठाए हैं वो कहां तक प्रासंगिक हैं? उनके उठाए गए प्रश्न किसी वर्ग विशेष द्वारा प्रायोजित हैं। जब सरकार जनता के हितों की अनदेखी कर रही है तभी जनहित याचिकाओं के माध्यम से हम अपने राज्य के संसाधनों की रक्षा कर पा रहे हैं। मैं कोश्यारी जी से पूछना चाहता हूं कि क्या वन भूमि पर अतिक्रमण कर रहे रिसोर्ट पर जनहित याचिका गलत है? क्या नशे की गिरफ्त में आते राज्य में नशे के खिलाफ न्यायालय में जाना गलत है?
हिमांशु सिन्हा, वरिष्ठ अधिवक्ता हाईकोर्ट नैनीताल
पांच दिन पहले सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस मदन लोकुर की खंडपीठ ने कहा है कि सरकारें जब जनहित याचिका का विरोध करती हैं और जब न्याय पालिका और कार्यपालिका के कार्यों का विभाजन है तो ऐसे तर्क के पीछे सरकार अपनी विफलताओं को छुपाना चाहती है। अगर सरकार ने अपने दायित्व इमानदारी से निभाए होते तो जनहित याचिकाओं में कोर्ट को हस्तक्षेप करने की नौबत नहीं आती।
श्वेता मासीवाल, सामाजिक कार्यकर्ता

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