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Uttarakhand

भारतीय योद्धाओं से युद्ध के गुर सीखते कज़ाकि सैनिक…

भारतीय सेना का युद्ध कौशल, साहस और गुर विश्व मे अपनी एक अलग पहचान रखते है। भारत और कजाकिस्तान का सैन्य अभ्यास काज़िन्द 2019 इन दिनों पिथौरागढ़ में चल रहा है। कजाकिस्तान भारत के मैत्रीय देशों में से एक है। बढ़ते आतंकवाद जैसी घटनाओं से निपटने को लेकर भारतीय एवं कजाकिस्तान सेना का सैन्य अभ्यास किया जा रहा है ताकि दोनो देशों को अगर कभी युद्ध के संयुक्त अभियान की स्थिति पैदा होती है उस स्थिति में आपस मे कोई दिक्कत न हो, हालांकि कजाकिस्तान में आंतरिक विवादों को छोड़ भारत जैसे आतंकवाद की चुनौतियों से नही जूझना पड़ता है। 2 राजपूत बटालियन के साथ कजाकिस्तान की बटालियन युद्ध अभ्यास कर रही है। काजिन्द 2019 में सीओ कर्नल अजीत एवम कमांडिंग ऑफिसर मेजर भूप सिंह के नेतृत्व में सैन्य अभ्यास किया गया, साथ ही अपने सैनिकों का हौसला अफ़जाई के लिए कजाक आर्मी के जनरल दौलत भी पिथौरागढ़ पहुचे है। कजाकिस्तान की सेना भारतीय सेना के योद्धाओ को एक प्रोफ़ेशनल आर्मी मेन के साथ ही भारतीय सैनिक को शाररिक रूप मजबूत मानती है। इन दिनों कजाकिस्तान बटालियन को भारतीय सेना के साथ कठिन अभ्यास के साथ ही सेना द्वारा सभी प्रकार की गतिविधियो से परिचय कराया जा रहा है। कजाक और भारत के बीच एक अच्छा तालमेल है, भारतीय और कजाकिस्तान सेना ने एक दूसरे देशो के गाने भी गा रहे है, हालांकि उन्हें बॉलीवुड के गानों के साथ साथ सुपरस्टार अमिताभ बच्चन और मिथुन चरकवर्ती बेहद पसंद है। कजाकिस्तान की राजधानी नूर सुल्तान यानी एस्टाना है, अलमाटी वहां का प्रसिद्ध शहर है जिसे लैंड ऑफ एप्पल के नाम से भी जाना जाता है। कहा जाता है घोड़ो का कैसे बेहतर प्रयोग किया जाना चाहिए वह कजाकिस्तान द्वारा ही दुनिया को सिखाया गया है। सन 1991-92 में कजाकिस्तान सोवियत संघ से अलग हुआ साथ ही इसकी मुख्य भाषा कजाकी है।

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