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Uttarakhand

IPS ऑफिसर अशोक कुमार की पहल पर पत्रकार अहसान अंसारी के मुकदमे हुए ट्रांसफर

IPS ऑफिसर अशोक कुमार की पहल पर पत्रकार अहसान अंसारी के मुकदमे हुए ट्रांसफर

89 बेंच के आईपीएस अधिकारी अशोक कुमार उत्तराखंड में पत्रकारों के प्रिय पुलिस ऑफिसर यू ही नहीं कहे जाते हैं। बल्कि इसके पीछे सीनियर ऑफिसर अशोक कुमार की एक सोच भी देखी जाती है, जिसमें वह देश के चौथे स्तम्भ को मजबूत देखने के पक्षधर है। इसे इस तरह से देखा जा सकता है कि जब भी उत्तराखंड में किसी पत्रकार का उत्पीडन होता है या उनके साथ अन्याय होता है तो सबसे पहले डीजीपी (कानून व्यवस्था) अशोक कुमार को याद किया जाता है।

यह पिछले साल दिसंबर की बात है, जब हरिद्वार के वरिष्ठ पत्रकार और ‘दि संडे पोस्ट’ के गढवाल ब्यूरो चीफ अहसान अंसारी पर एक फर्जी आरोप लगाकर मामला दर्ज कराया गया था। गत 10 जनवरी को इस मामले की बाबत ‘दि संडे पोस्ट’ के संपादक अपूर्व जोशी द्वारा अशोक कुमार से बात की गई। तब उन्होंने निष्पक्ष जांच कराने की बात कही थी। लेकिन निष्पक्ष जांच तब तक संभव नहीं थी जब तक कि ज्वालापुर के तत्कालीन कोतवाल योगेश देव सिंह मौजूद थे। क्योंकि इंस्पेक्टर योगेश देव सिंह की आखों में अहसान अंसारी कुर्क रहे थे, कारण अंसारी द्वारा थानाध्यक्ष की बार-बार पोल खोलना था।

तब उत्तराखंड के जीडीपी अशोक कुमार द्वारा अहसान अंसारी के मामले को ज्वालापुर थाने से अनयंत्र स्थानांतरित करने की बात कही गई थी। हालांकि, बताया जाता है कि देहरादून स्थित मुख्यालय से यह निर्देश भी दिए गए। लेकिन हरिद्वार के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सैथिल अबुदई के करीबी होने का फायदा तत्कालीन ज्वालापुर कोतवाल योगेश देव सिंह को मिला और अहसान अंसारी के केस स्थानांतरित होने का मामला फाइलों में ही दबा दिया गया।

मामला स्थानांतरित होने का यह वाक्या उस समय सामने आया जब गत 16 मई को अहसान अंसारी पर एक और फर्जी मुकदमा दर्ज किया गया। तब सोशल मीडिया के जरिए ‘दि संडे पोस्ट’ के संपादक अपूर्व जोशी ने यह खुलाशा किया कि किस तरह हरिद्वार के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सैथिल अबुलदई ज्वालापुर कोतवाल योगेश देव के प्रेम में धृतराष्ट्र बन बैठे। उन्होंने अपने आला अधिकारियों के निर्देशों का ही पालन करना नहीं समझा।

बहरहाल, एक बार फिर अहसान अंसारी प्रकरण की गूंज देहरादून स्थित पुलिस मुख्यालय तक पहुंची है। फिलहाल इस मामले में सिनियर ऑफिसर अशोक कुमार ने सख्त रूख अख्तियार किया है। जिसके चलते अब अहसान अंसारी के मामलों को अन्य दूसरे थानों में स्थानांतरित किया गया है। जिनमें दो मामलों को पथरी थाने में स्थानांतरित किया गया है। जबकि एक मामले को कोतवाली सदर के सुपुर्द कर दिया गया है।

विदित हो कि पिछले डेढ़ माह से पत्रकार अहसान अंसारी प्रकरण उत्तराखंड के हरिद्वार में चर्चा का विषय बना हुआ है जिसमे पुलिस पर कई सवालिया निशान लगे हैं। पत्रकार अहसान अंसारी ‘दि संडे पोस्ट’ के वरिष्ठ पत्रकार है जो हरिद्वार का दैनिक शाह टाइम्स भी देखते हैं। गत माह अहसान अंसारी को 16 मई की सुबह 11:24 बजे भेल के मध्यमार्ग से कोतवाल योगेश देव द्वारा अवैध रूप से हिरासत में लिया गया था व उनको 6-7 घंटे अवैध रूप से हिरासत में रख प्रताड़ित भी किया गया। उसके बाद एक ऐसे मुकदमे में उनकी नामजदगी दिखाई गई, जिसमें कई झोल पूर्व में ही नज़र आ रहे थे।

क्योंकि खुद को कथित तौर पर पत्रकार बताने वाली महिला ने जो तहरीर मुकदमा दर्ज कराने के लिए एसएसपी हरिद्वार को दी थी उसमें अहसान अंसारी का नाम का कही उल्लेख ही नहीं था। लेकिन जब वो तहरीर कोतवाल योगेश देव के पास पहुची तो उसमें फ़र्ज़ी तरीके के अहसान अंसारी का नाम जोड़ दिया गया व उनके 6-7 घंटे कोतवाल योगेश देव व पुलिसकर्मी आनंद रावत व सतेंदर यादव द्वारा 6-7 घंटे मानसिक व शारीरिक तौर पर प्रताड़ित भी किया गया। जिसके सम्बन्ध में पत्रकार अहसान अंसारी द्वारा जिला कारागार हरिद्वार से एक पत्र एसएसपी हरिद्वार को कोतवाल योगेश देव सहित तीनों पुलिसकर्मियों पर मुकदमा दर्ज कराने के लिए भी दिया गया था।

गौरतलब है कि अहसान अंसारी द्वारा पिछले 6-7 महीनों से लगातार मुख्यमंत्री पोर्टल सहित अन्य मंचो पर कोतवाल योगेश देव की गुंडागर्दी की शिकायत की जा रही थी। जिसके सम्बन्ध में अहसान अंसारी ने 16 अप्रैल 2020 को भी मुख्यमंत्री पोर्टल पर बताया गया था कि कोतवाल योगेश देव अहसान अंसारी से निजी रंजिश रखते है व उनको फ़र्ज़ी मुकदमों में फ़साने की साजिश लगातार करते आ रहे है।

लेकिन मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत करने के बाद भी अहसान अंसारी की शिकायत पर ध्यान नही दिया गया। मामले ने तूल तब पकड़ा जब कोतवाल योगेश देव द्वारा पत्रकार अहसान अंसारी कर अपहरण कर 6-7 घंटे अवैध रूप से हिसरत में रखा गया। अहसान अंसारी के दोनो फ़ोन कोतवाल योगेश देव द्वारा 11:24 मिनट पर छीन लिए गए व उनके बार बार कहने पर भी परिजनों से बात नहीं करने दी गई।

प्रदेश के एक मान्यता प्राप्त पत्रकार को 6-7 घण्टे तक प्रताड़ित किया गया। इस प्रकरण में एसएसपी हरिद्वार की भूमिका पर भी सवालिया निशान लग चुका है। क्योंकि कोतवाल योगेश देव एसएसपी हरिद्वार सेन्थिन अबुदई के खास कहे जाते है। लेकिन जब इस मामले में एसएसपी सहित पुलिस के आलाधिकारियों की किरकिरी हुई तो पुलिस मुख्यालय देहरादून में बैठे अधिकारियों को कोतवाल योगेश देव का स्थानांतरण करना पड़ा।

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