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Uttarakhand

कहीं बड़ी साजिश तो नहीं पेड़ा कांड

पतंजलि योग पीठ के महामंत्री आचार्य बालकृष्ण को जहरीला पेड़ा खिलाए जाने के मामले में साधु-संतों के बीच से तमाम सवाल उठ रहे हैं। कहा जा रहा है कि कहीं इसके पीछे कोई गहरी साजिश तो नहीं? आखिर पतंजलि की चाक-चैंबंद सुरक्षा व्यवस्था को भेदकर कोई शख्स आचार्य बालकृष्ण को जहरीला पेड़ा खिला गया तो वह कौन था? योगगुरु रामदेव ने जांच की जरूरत क्यों नहीं समझी? अपने जनता दरबार में न्याय मांगने वाली शिक्षिका के खिलाफ मामला दर्ज करवाने वाले मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत क्यों इस मामले की जांच नहीं करवाना चाहते? जो संत इस मामले की सीबीआई जांच की मांग कर रहे हैं उनमें रामदेव के गुरु भाई स्वामी कर्मवीर भी शामिल हैं
पतंजलि योगपीठ के महामंत्री और योगगुरु रामदेव के सहयोगी आचार्य बालकृष्ण को संदिग्ध जहरीला पदार्थ खिलाए जाने के मामले में संतों ने सीबीआई जांच की मांग की है। संतों ने रामदेव पर भी आरोप लगाया है कि जब वे खुद षड्यंत्र की बात कर रहे हैं, तो फिर जांच क्यों नहीं कराई जा रही है। संतों ने सिर्फ बालकृष्ण के बीमार होने का ही मसला नहीं उठाया है, बल्कि उन्होंने बातों-बातों में योगगुरु रामदेव की तरफ ही शक की उंगली उठा दी है। हरिद्वार में हिन्दू रक्षा सेना की ओर से प्रेस काॅन्फ्रेंस कर आचार्य बालकृष्ण के बीते दिनों बीमार होने के बारे में संतों ने सीबीआई जांच की मांग की।
स्वामी प्रबोधानंद का कहना है कि आचार्य बालकृष्ण के बारे में कहा जा रहा है कि वे पेड़ा खाकर बीमार हुए थे। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति पेड़ा लाया था, उसकी गिरफ्तारी क्यों नहीं की गई। स्वामी प्रबोधानंद के मुताबिक पतंजलि योगपीठ को इस मामले की गहरी जांच करानी चाहिए और आरोपी के दोषी पाए जाने पर उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई भी होनी चाहिए। उन्होंने रामदेव के गुरु शंकरदेव महाराज के लापता होने का मुद्दा भी उठाया।
स्वामी प्रबोधानंद गिरि ने कहा कि शंकरदेव महाराज लापता हो गए और आज तक उनका कोई सुराग नहीं लगा। उन्होंने आशंका जताई कि शंकरदेव की तरह ही आचार्य बालकृष्ण की हत्या की साजिश रची जा रही है। उन्होंने पतंजलि योगपीठ प्रबंधन पर सवाल उठाते हुए कहा कि इतना बड़ा मामला होने पर भी संस्था की तरफ से अब तक कोई एफआईआर  दर्ज नहीं कराई गई। स्वामी प्रबोधानंद ने कहा कि ऐसा लगता है कि पतंजलि योगपीठ से जुड़ा कोई शख्स ही आचार्य बालकृष्ण की हत्या की साजिश रच रहा है।
योग गुरु बाबा रामदेव के बेहद करीबी, पतंजलि योग पीठ के महामंत्री आयुर्वेदाचार्य बालकृष्ण दो दिनों तक ऋषिकेश एम्स से स्वास्थ्य लाभ कर 25 अगस्त को अपने घर आ गए, लेकिन आज भी यह रहस्य ही बना हुआ है कि उन्हें किसी साजिश के तहत खाने में जहर दिया गया था या फिर यह एक दुर्घटना मात्र थी। आचार्य बालकृष्ण को 23 अगस्त को आश्रम के ही किसी व्यक्ति ने पेड़ा खाने को दिया था जिससे वह गंभीर रूप से बीमार हो गए थे। योग गुरु बाबा रामदेव ने इस घटना की जांच कराने की जरूरत नहीं समझी। इसीलिए न तो कोई पुलिस रिपोर्ट दर्ज कराई गई है और न ही सरकार से मामले की जांच का आग्रह किया गया है। आचार्य बालकृष्ण का इलाज दो अस्पतालों-श्री भूमानंद अस्पताल और ऋषिकेश एम्स में हुआ। लेकिन उन अस्पतालों ने भी इसकी सूचना पुलिस को नहीं दी। वैसे, बाबा रामदेव ने खुद के स्तर पर जांच कर साजिश का पर्दाफाश कर दोषी को सजा दिलाने का दावा मीडिया के सामने जरूर किया, लेकिन इसके लिए वह क्या कर रहे हैं इसकी कोई जानकारी उन्होंने नहीं दी।
23 अगस्त को योग गुरु बाबा रामदेव ने ऋषिकेश एम्स के बाहर मीडिया से बातचीत में कहा था कि आचार्य बालकृष्ण को पेड़ा खिलाने वाला भक्त कोई अपना ही है और उसकी मंशा पर उन्हें कोई संदेह नहीं। अगले दिन भी पतंजलि प्रवक्ता एस के तिजारावाला ने कहा कि पेड़ा खिलाने वाला अपना ही कोई है, हमें फिलहाल किसी की मंशा पर कोई संदेह नहीं। दोनों के ही बयान बता रहे हैं कि आचार्य बालकृष्ण को पेड़ा खिलाने वाला उनका अपना ही कोई नजदीकी था।
रामदेव ने यह सब कुछ तो बता दिया, लेकिन उन्होंने यह नहीं बताया कि पेड़ा लाने और खिलाने वाला व्यक्ति है कौन? दूसरा सवाल यह कि बालकृष्ण की सीआरपीएफ की सिक्योरिटी से बिना चैकिंग किए हुए वह व्यक्ति बालकृष्ण तक कैसे पहुंच गया और उसने उन्हें पेड़े कैसे खिला दिए? तीसरा सवाल, बालकृष्ण के आफिस और पतंजलि में हर जगह सीसीटीवी कैमरे मौजूद हैं तो क्या जहरीले पेडे़ खिलाने वाले व्यक्ति की फुटेज कैमरो में नहीं आई है या जान-बूझकर व्यक्ति के नाम को छुपाया जा रहा है? स्वाभाविक है कि उपरोक्त तीनों सवालों का जवाब एक ही है और वह यह है कि बालकृष्ण को जहरीला पेड़ा खिलाने वाला कोई उनका अपना करीबी है। जिसकी पहचान उजागर नहीं की जा रही है।
 गौरतलब है कि बालकृष्ण पतंजलि योग संस्थान के न केवल महामंत्री हैं, बल्कि 12000 करोड टर्न ओवर वाली इस कंपनी के सीईओ भी हैं। ऐसे में बालकृष्ण की जान लेने का प्रयास किसी बड़े षड्यंत्र का हिस्सा हो सकता है। याद रहे कि इससे पहले ऐसी ही साजिश बाबा कर्मवीर, गुरु शंकर देव और राजीव दीक्षित के साथ की जा चुकी है। जिसमें बाबा करमवीर की किस्मत अच्छी थी कि वह बच गए। लेकिन काल के क्रूर हाथों से गुरु शंकर देव और राजीव दीक्षित बच नहीं सके। दोनों की मौत एक रहस्यमय कहानी बनकर रह गयी। बावजूद इसके कि गुरु शंकर देव की गुमशुदगी की तो सीबीआई जांच तक हो चुकी है।
संभवतः इसी वजह से खास तौर पर सोशल मीडिया में कई सवाल उठाए जा रहे हैं। पहला तो यह कि यह अगर सामान्य फूड प्वाइजनिंग का मामला था, तो आचार्य बालकृष्ण का इलाज तमाम असाध्य रोगों को ठीक करने का दावा करने वाले अपने पतंजलि योग पीठ के आधुनिक आयुर्वेदिक चिकित्सालय में क्यों नहीं किया गया। दूसरा सवाल यह कि इतने बड़े आयुर्वेदाचार्य और योगाचार्य होने, बेहद संयमित जीवन जीने के बावजूद महज एक पेड़ा भर खाने से आचार्य बालकृष्ण की तबीयत इस कदर क्यों और कैसे बिगड़ गई। तीसरा और बड़ा सवाल यह कि पतंजलि की भारी-भरकम निजी सुरक्षा व्यवस्था, दर्जनों सीसीटीवी कैमरों और सुरक्षागार्ड से घिरे रहने वाले आचार्य बालकृष्ण को आखिर कैसे कोई ऐसा जहरीला पदार्थ खिला गया जिससे उनकी जान पर बन आई और अब तक यह तक पता नहीं लगाया जा सका कि उन्हें दुर्घटनावश या षड्यंत्र के तहत जहरीला पदार्थ खिलाने वाला कौन था?
दरअसल, आचार्य बालकृष्ण पतंजलि की निजी गहन सुरक्षा व्यवस्था के बीच रहते हैं और उन तक या उनके कार्यालय तक पहुंचने में आधा दर्जन से अधिक सीसीटीवी कैमरों और अनेक सुरक्षा जांच से होकर गुजरना पड़ता है। वैसे भी, किसी भी आम आदमी का उन तक पहुंच पाना आसान नहीं। इस लिहाज से आचार्य बालकृष्ण को पेड़ा खिलाने वाले के बारे में पुलिस या पतंजलि की निजी सुरक्षा के लिए जानकारी जुटाना कोई मुश्किल काम नहीं।
बाबा रामदेव और आचार्य बालकृष्ण के गुरु भाई आचार्य कर्मवीर ने फेसबुक और ट्विटर पर तथा हिंदू रक्षा सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वामी प्रबोधानंद गिरि ने हरिद्वार में पत्रकार वार्ता कर आचार्य बालकृष्ण के बीमार होने की उचित जांच कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि इस घटना की जांच इसलिए भी जरूरी है क्योंकि स्वामी रामदेव के गुरु स्वामी शंकरदेव भी लंबे समय से गुमशुदा हैं और पतंजलि योग पीठ के शुरूआती दौर में योग गुरु बाबा रामदेव और आचार्य बालकृष्ण के साथी रहे राजीव दीक्षित की छत्तीसगढ़ के भिलाई में अचानक हुई मौत पर से रहस्य का परदा नहीं उठ पाया है। फिर भी, सोशल मीडिया में जारी अपने धन्यवाद संदेश में आचार्य बालकृष्ण ने व्यंग्य के तौर पर कहा कि कुछ लोग दिवास्वप्न देख रहे थे। उनके लिए इतना ही कहना है कि वे अपना समय बर्बाद न करें, बाकी उनकी मर्जी है। उन्होंने कहा कि वह एक बार फिर योग गुरु बाबा रामदेव के सपनों को पूरा करने और योग-आयुर्वेद को मजबूती प्रदान करने पूरी ऊर्जा के साथ कर्म करने को तैयार हैं।

मुख्यमंत्री ने क्यों काटी जांच कराने से कन्नी

उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत अक्सर अपनी संवेदनहीनता के लिए चर्चा में रहते हैं। गत वर्ष उन्होंने जब अपने जनता दरबार में न्याय मांगने आई एक शिक्षिका को पुलिस से बाहर कराया था तो उनकी संवेदनहीनता सामने आई थी। तब पूरे प्रदेश में मुख्यमंत्री की भरपूर निंदा हुई थी। कुछ ऐसी ही सववेदनहीनता सीएम ने इस बार बालकृष्ण के बीमारी वाले मामले में दिखाई। जिसके चलते एक बार फिर वह लोगों के लिए चिंता और चर्चा का विषय बन गए। दरअसल 23 अगस्त को हरिद्वार स्थित पतंजलि योग संस्थान में घटित हुए पेड़ा कांड के बाद मुख्यमंत्री ने यह कहकर सबको चैंका दिया कि इस मामले की जांच नहीं कराई जाएगी। जिस देश में आत्महत्या का प्रयास करने वाले व्यक्ति के बच जाने के बाद पुलिस केस किया जाता है वहां आचार्य बालकृष्ण के मामले पर एक मुख्यमंत्री का यह बयान की आचार्य बच गए हैं, वे अब ठीक हैं उनकी कोई जांच नहीं कराई जाएगी, चैकाने वाला लगता है।अपने जनता दरबार में न्याय मांगने वाली एक शिक्षिका पर रिपोर्ट दर्ज कराने वाले मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के इस बयान को लेकर लोग हैरान हैं। चर्चा है कि मुख्यमंत्री सब कुछ जानते हैं तभी वह इस मामले पर रिपोर्ट दर्ज न कराने का आदेश देकर मामले को दफ़न कराना चाहते हैं। सवाल यह है कि आखिर मुख्यमंत्री ऐसा करके किसको बचाना चाहते हैं?

बात अपनी-अपनी
बालकृष्ण मामले में पतंजलि योग पीठ या उनकी ओर से पुलिस को अब तक कोई लिखित शिकायत नहीं दी गई है। इसलिए पुलिस ने मामले की जांच शुरू नहीं की है। लिखित शिकायत मिलने पर ही पुलिस अपनी जांच शुरू करेगी। हालांकि घटना और उसके तथ्यों को लेकर पूरी सजगता-सतर्कता बरती जा रही है और सभी पहलुओं पर निगाह रखी जा रही है।
सेंथिल अबुदई, एसएसपी हरिद्वार

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