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  •   अली खान

राज्य को भ्रष्टाचार मुक्त करने की दिशा में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक ओर जहां हाल ही में बड़ी पहल की शुरुआत की है। वहीं दूसरी तरफ 2017 से सत्ता पर काबिज डबल इंजन की भाजपा सरकार की जीरो टालरेंस के दावों का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि प्रदेश के सिंचाईं विभाग में भ्रष्टाचार को लेकर की जा रही शिकायतों और धरना – प्रदर्शनों के बावजूद शासन स्तर से भ्रष्टाचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के बजाय सरकार मौन साधे हुई है।
दरअसल, समाजसेवी धर्मवीर सैनी ने सिंचाई विभाग में हो रहे भ्रष्टाचार को उजागर करने का प्रयास किया। उन्होंने पहले मुख्यमंत्री और अब राज्यपाल को शिकायती पत्र प्रेषित कर भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने मुख्यमंत्री को इस संबंध में बीते 4 अप्रैल को शिकायती पत्र प्रेषित कर मामले से अवगत कराया था। लेकिन सरकार की ओर से इस मामले पर कोई कार्यवाही नहीं हुई तो अब उन्होंने 15 अप्रैल को राज्य के राज्यपाल को शिकायती पत्र प्रेषित कर दोषियों के खिलाफ विजिलेंस या एसआईटी से सख्त कार्रवाई कराने की मांग की है।

धर्मवीर सैनी ने आरोप लगाए हैं कि संजय कुशवाहा अधीक्षण अभियंता, नलकूप मंडल रुड़की द्वारा नियमों को ताक पर रखकर अपने चेहते ठेकेदारों के नाम बिना निविदाएं प्रकाशित कर और प्राधिकारियों पर दबाव डालकर विभागीय दर पर अनुबंध करा रहे हैं। उनका कहना है कि यदि कोई अधिकारी इसका विरोध करता है तो उसे मामलों में फसाकर उसके खिलाफ कार्यवाही कर दी जाती है। यही नहीं धर्मवीर सैनी ने संजय कुशवाहा पर यह आरोप भी लगाए हैं कि कुशवाहा ने अपने काले धन को सफेद करने के लिए अपनी पत्नी को एलआईसी का एजेंट बनाया हुआ है। पत्नी के जरिए वो सिंचाई विभाग के कर्मचारियों पर दबाव डालकर बीमा कराते हैं। जो इनकी पत्नी से बीमा नहीं करता है उन्हें झूठे मामलों में फंसाने की धमकी दी जाती है।

इससे पहले जब संजय कुशवाहा पिथौरागढ़ तैनात थे तो उस दौरान भी इन्होंने लगभग 80 कर्मचारियों पर अपनी पत्नी से बीमा कराने का दबाव बनाया था। जब कर्मचारियों ने मना किया तो उन्हें उनका पूरा भुगतान नहीं दिया गया। तब भी इनके खिलाफ शिकायत की गई थी लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। गौरतलब है कि पिथौरागढ़ नलकूप सर्किल में रहते हुए संजय कुशवाहा ने लघु डालखंड पिथौरागढ़ के अवर अभियंता महेश चंद गुप्ता की चरित्र पंजिका रंजिशवश खराब कर दी थी। खंड के अधिशासी अभियंता रवि दत्त और अधीक्षण अभियंता संजय कुशवाहा ने सीआर लिखने की निर्धारित अवधि 30 सितंबर निकलने के छह माह बाद मार्च में अवर अभियंता महेश चंद गुप्ता को उनकी सीआर खराब होने की सूचना दी थी। जो
सरकारी नियमों का खुला उल्लंघन है। निर्धारित समय में सीआर खराब करने के मामले में पिथौरागढ़ लघु डालखंड के अधिशासी अभियंता रविदत्त एवं अधीक्षण अभियंता संजय कुशवाहा के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। लघु डालखंड के 80 ऑपरेटरों का इपीएफ दो साल तक ठेकेदार द्वारा ऑपरेटरों के खाते में जमा नहीं किया गया है।

सच कहने की सजा
पिथौरागढ़ में लघु जल खंड में तत्कालीन अपर सहायक अभियंता के पद पर रहते महेश चंद ने सच के लिए आवाज उठाई तो उन्हें इसकी सजा दी गई। बकौल महेश चंद पिथौरागढ़ में कार्यरत रहते ठेकेदार के अधीन काम कर रहे श्रमिकों को प्रतिमाह जो वेतन दिया जा रहा था वह बहुत कम दिया जा रहा था जबकि दिए जाने चाहिए थे 7676 रुपए प्रतिमाह लेकिन उन्हें महज 3900 रुपए प्रतिमाह दिया जा रहा था। ऐेसे 80 श्रमिक थे जिनका प्रत्येक माह लाखों रुपए का गबन किया जा रहा था। तब इसके लिए जिम्मेदार तत्कालीन पिथौरागढ़ के सहायक अभियंता रविदत्त से उन्होंने कहा कि उन श्रमिकों के साथ न्याय किया जाना चाहिए। उनका वेतन पूरा दिया जाना चाहिए तथा साथ ही ईपीएफ का पैसा जो जमा नहीं किया जा रहा था वह भी दिया जाना चाहिए। इससे नाराज होकर रविदत्त जो कि मेरा जूनियर था ने अधीक्षण अभियंता (नलकूप मंडल रुड़की) से मिलीभगत कर मेरी चरित्र पंजिका गलत लिखवा दी। 2019-20 की चरित्र पंजिका मेरे खिलाफ बनवाकर मुझे इसकी जानकारी तक भी नहीं होने दी गई ताकि मैं समय रहते उसमें अपनी बातें रख सकूं। मैंने कई बार अनुरोध किया लेकिन मेरी सुनवाई नहीं की गई। इसने न केवल मेरा मानसिक उत्पीड़न हुआ है बल्कि मेरी पदोन्नति भी रुक गई है।

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