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त्रिवेंद्र रावत सरकार ने पिछले वर्ष राज्य में करोड़ों रुपए खर्च कर इन्वेस्टर समिट कराई। जनता को विश्वास दिलया कि राज्य को सवा लाख करोड़ रुपए का निवेश मिलने जा रहा है। निवेशकों से 673 एमओयू साइन हो चुके हैं। लेकिन सरकार के इन दावों की पोल अब उसके विभाग ही खोल रहे हैं। उद्योग मंत्रालय ने सूचना अधिकार के तहत जानकारी दी है कि अभी तक राज्य में महज 13,226 करोड़ के 98 प्रोजेक्टों पर ही काम चल रहा है। गौर करने वाली बात यह भी है कि एमएसएमई सेक्टर के जो उद्यम रोजगार का बेहतर जरिया बन सकते थे उनके प्रति सरकार का रवैया बेहद उदासीन रहा है। ऐसे में प्रदेश की बेरोजगारी हटाने के दावे कोई मायने नहीं रखते। प्रदेश में लाखों की संख्या में बेरोजगार हैं। जन संगठन तो निवेश और बेरोजगारी हटाने के मामले में सरकार को झूठा करार दे रहे हैं। उसके खिलाफ केस तक चलाने को आतुर हैं

 

पहले राजनीति में जनता से झूठ बोलना गंभीर अपराध माना जाता था, लेकिन मौजूदा दौर की राजनीति में झूठ बोलना भी एक बहुत बड़ी कला मानी जाती है। कहा जाने लगा है कि जो जनता से जितना बड़ा झूठ बोलता है, वह उतना ही बड़ा राजनेता। इसमें एक बात यह भी उभरकर सामने आई है कि यदि जनता से पूरे आत्मविश्वास के साथ झूठ बोलने वाला ही शासन करता है, तो वह सफल राजनेता माना जाता है। उत्तराखण्ड की मौजूदा सरकार पर कुछ ऐसे ही आरोप लग रहे हैं कि सरकार ने राज्य में निवेश के नाम पर झूठ बोला है, जबकि निवेशकों को प्रोत्साहित करने के नाम पर ही वह करोड़ों रुपए सरकारी खजाने से लुटा चुकी है। जनसंघर्ष मोर्चा के रघुनाथ सिंह नेगी ने राज्य सरकार पर निवेश की आड़ में सफेद झूठ बोलने का आरोप लगाया है। उन्होंने इसके लिए सरकार के खिलाफ मुकदमा दर्ज करवाने की बात कही है। मोर्चा जल्द ही राज्यपाल से मिलकर शिकायत दर्ज करवाने की बात कह रहा है।

प्रदेश सरकार ने पिछले वर्ष राज्य में करोड़ों रुपए खर्च करके इन्वेस्टर समिट का आयोजन किया था। जिसमें जनता को यह विश्वास दिलाया गया था कि राज्य को सवा लाख करोड़ का निवेश मिलने जा रहा है। तकरीबन 673 एमओयू सरकार ने निवेशकों के साथ साईन किए जिससे राज्य को पहली बार बड़े भारी पैमाने पर निवेश मिलने जा रहा है। कार्यक्रम वास्तव में इस दृष्टि से बड़ा औेर भव्य था कि स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने हाथां से इसका शुभारंभ किया। इससे एक बार तो यह लगा कि वास्तव में प्रदेश के 18 वर्षों के राजनीतिक इतिहास में पहली बार कोई सरकार या कोई मुख्यमंत्री प्रदेश में निवेश के लिए खासी मेहनत कर रहे हैं और इससे प्रदेश के लाखों बेरोजगारों को रोजगार मिलेगा।

आश्चर्यजनक है कि जो सरकार निवेश को लेकर बड़े-बड़े दावे कर रही थी उसके दावों की हकीकत एकदम से उलट दिखाई दे रही है। मुख्यमंत्री का दावा है कि राज्य में अब तक 109 प्रोजेक्टों से 14545 करोड़ का निवेश धरातल पर उतर चुका है, जबकि ताजा अपडेट के अनुसार 98 प्रोजेक्टों पर ही काम चल रहा है जिससे 13261 करोड़ का निवेश होगा। लेकिन यह कब पूरे होंगे इसका कोई जबाब किसी के पास नहीं है। अभी तक इनमें काम ही चल रहा है।

यह भी गौर करने वाली बात है कि इसी वर्ष मार्च माह में जब राज्य में लोकसभा चुनाव का दौर चल रहा था तो मुख्यमंत्री ने राज्य में 40 हजार करोड़ का निवेश होने की बात कही थी। इससे यह तो साफ हो गया है कि सरकार के दावों में ही एकरूपता नहीं है। कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक ने परेड ग्राउंड में उद्यमिता कार्यक्रम में कहा था कि इन्वेस्टर समिट से राज्य को 40 हजार करोड़ का निवेश मिल चुका है जिससे कम से कम 20 हजार लोगां को रोजगार मिलेगा।

इसके विपरीत औद्योगिक विभाग के ताजा अपडेट से यह बात साफ हो चुकी है कि सरकार के दावे खोखले ही थे। आंकड़ों को देखें तो 2018 -19 में राज्य में शूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) क्षेत्र में 3640 यूनिटों और लार्ज स्केल सेक्टर में महज एक ही यूनिट का सेटअप हो पाया है। इन दोनों ही सेक्टरों में 918-51 करोड़ का निवेश हुआ है ओैर इनसे 18941 लोग रोजगार से जुड़े हैं। गोर करने वाली बात यह है कि 18811 रोजगार केवल एमएसएमई सेक्टर से मिले हैं, जबकि लार्ज सेक्टर से महज 130 ही रोजगार प्राप्त हो पाए हैं।

उत्तराखण्ड सरकार ने जिस तरह से छोटे उद्योगों के बजाय बड़े उद्योगों के लिए इन्वेस्टर समिट का आयोजन किया उससे तो महज को ही रोजगार प्राप्त हो पाया है। जबकि छोटे उद्योगों से रोजगार के साधन सबसे जयादा प्राप्त हुए हैं। इनमें अधिकतर घरेलू और छोटे उद्योग हैं जैसे कि आटा चक्की, किराने की दुकान आदि। प्रदेश में निवेश के लिए जो सरकार ने ढोल पीटा था वह बेसुरा साबित हुआ है।

इन्वेस्टर समिट के कार्यक्रम में सरकार ने बताया था कि 673 एमओयू उसे प्राप्त हुए हैं और इससे उत्साहित होकर सरकार ने दावा किया था कि जल्द ही सभी पर काम आरंभ हो जाएगा। लेकिन स्वयं उद्योग निदेशालय से सूचना के अधिकार के तहत प्राप्त जानकारी को देखें तो अभी तक महज 13226 करोड़ के 98 प्रोजेक्टां पर ही काम चल रहा है। 28686 लोगों को रोजगार मिलने की बात कही जा रही है। देखने और सुनने में यह आंकड़े वास्तव में उत्साहित करने वाले प्रतीत होते हैं, लेकिन एक वर्ष से भी ज्यादा समय होने के बावजूद अभी तक ये उद्योग धरातल पर नहीं उतर पाए हैं।

इसी तरह राज्य के 2001 से लेकर 2017 तक के आंकड़ों को देखें तो 2001 से लेकर 2004 तक एमएसएमई सेक्टर में तेजी से उछाल आया था और 2470 उद्योग एमएसएमई सेक्टर में स्थापित हुए थे। 2007 तक इनकी तादात बढ़ती रही, लेकिन 2007 में यह घटकर महज 1500 तक पहुंच गए। इसके बाद 2008 से लेकर 2017 तक एमएसएमई सेक्टर में बहुत उछाल आया और इन दस वर्षों में हर वर्ष संख्या में बढोतरी होती रही और इनकी संख्या 3080 पहुंच गई।


एमएसएमई सेक्टर के उद्योगों से रोजगार के साधन भी बड़े पैमाने पर उपलब्ध हुए और जहां वर्ष 2001 में महज 2336 लोगों को ही इस क्षेत्र से रोजगार मिला तो वहीं वर्ष 2016-17 में रोजगार पाने वालों की संख्या 22 हजार तक पहुंच गई।

लार्ज सेक्टर में राज्य को एमएसएमई से कम निवेश मिला और जहां 2001 से 04 तक महज एक ही उद्योग इस सेक्टर का राज्य में लग पाया। इसी प्रकार से 2005 से 2007-08 तक इस क्षेत्र के उद्योगों की तादात में बहुत तेजी देखने को मिली और प्रदेश में 66 लार्ज स्केल सेक्टर की औद्योगिक ईकाइयां स्थापित हो गई। लेकिन अगले ही वर्ष 2008-09 में महज 33 ही लार्ज स्केल सेक्टर के उद्योग लग पाए। फिर इसमें कुछ गति देखने को मिली ओैर 2011 में 57 लार्ज स्केल सेक्टर के उद्योग राज्य में आए। लेकिन 2011 के बाद लगातार लार्ज स्केल सेक्टर में भारी गिरावट देखने को मिली और 2-4 हर वर्ष स्थापित तो हुए, लेकिन 2017 में दस ही लार्ज स्केल सेक्टर के उद्योग प्रदेश को नसीब हो पाए। वर्ष 2018-19 में केवल एक ही लार्ज स्केल सेक्टर का उद्योग राज्य में लग पाया जबकि इसके लिए प्रदेश सरकार ने करोड़ों रुपए खर्च कर इन्वेस्टर समिट का आयोगजन किया था।

अब इन दोनों सेक्टरों से रोजगार मिलने की बात करें तो आंकड़ां में स्पष्ट है कि विगत 18 वर्षों में रोजगार की तस्वीर में कोई खास बदलाव देखने को नहीं मिल रहा है। एक औसत लिहाज से देखें तो अभी तक महज 18 से बीस हजार प्रति वर्ष ही रोजगार मिलने के आंकड़े हैं। स्वयं सरकार के सेवायोजन विभाग में ही तकरीबन 9 लाख बेरोजगार रजिस्टर्ड हैं। इसमें यह तादात तो केवल उन बेरोजगारों की है जो सरकारी आंकड़ों में पंजीकøत हैं। माना जा रहा है कि गैर पंजीकøत बेरोजगारों की तादात इन आंकड़ों से भी कहीं ज्यादा है।

आंकड़ां के 18 वर्ष यानी 2001 से लेकर 2018-19 तक लार्ज स्केल सेक्टर से प्रदेश को अभी तक कुल 10 लाख 5 हजार 527 ही लोगों को रोजगार मिला है, तो एमएसएमई सेक्टर से 2 लाख 98 हजार 774 लोगां को रोजगार से जोड़ा गया है। यहां पर साफ तौर पर यह देखा जा रहा है कि जहां सरकार लार्ज स्केल सेक्टर के लिए प्रदेश में रेड कारपेट बिछाकर उनके लिए माहौल बनाने का काम कर रही है, वहीं दूसरी एमएसएमई सेक्टर जो कि सरकार की उदासीनता से त्रस्त बताया जाता है उसी क्षेत्र में इन 18 वर्षों में तकरीबन 3 लाख लोगों को रोजगार मिला है।

इन्वेस्टर समिट कार्यक्रम के दौरान सरकार पर यह आरोप भी लगा था कि सरकार एमएसएमई सेक्टर की अनदेखी कर रही है, जबकि यह क्षेत्र प्रदेश की स्थापना से पूर्व ही क्षेत्र के लोगों को रोजगार मुहैया करवाने में सबसे आगे रहा है। बावजूद इसके सरकार इस क्षेत्र के बजाय लार्ज स्केल सेक्टर के प्रति ज्यादा मोह रख रही है। गौर करने वाली बात यह है कि जब प्रदेश में विगत वर्ष इन्वेस्टर समिट का आयोजन हो रहा था ठीक उसी समय प्रदेश के एमएसएमई सेक्टर के ढाई सौ उद्योगों को पर्यावरण मानकों के नाम पर बंद कने का आदेश भी जारी हुआ था। तब इस सेक्टर में सरकार के प्रति भारी नारजगी देखने को मिली थी।

हालांकि सरकार का पूरा फोकस लार्ज स्केल सेक्टर पर ही है और जिस तरह से इन्वेस्टर समिट में बड़े-बड़े प्रोजेक्ट के प्रस्ताव सरकार को मिले थे उससे यह तो निश्चित है कि अगर यह सभी उद्योग प्रदेश में स्थापित हो जाते हैं तो लाखों लोगों को रोजगार मिल सकता है। जिस तरह से प्रदेश की मशीनरी काम कर रही है उससे तो यह नहीं कहा जा सकता कि सरकार के दावे कब तक धरातल पर उतर पाएंगे। यह तब है कि जब सरकार लगातार निवेश के नाम पर अलग-अलग बातें कर रही हैं और उसके ही विभाग के आंकड़े तस्वीर कुछ और बता रहे हैं।

 

बात अपनी -अपनी

सरकार और मुख्यमंत्री जनता के सामने कहते हैं कि इन्वेस्टर समिट से प्रदेश को 40 हजार करोड़ का निवेश मिल चुका है, जबकि उनका ही विभाग सूचना में जानकारी दे रहा है कि अभी तक राज्य में महज 13261 करोड़ के निवेश पर काम चल रहा है। यानी अभी प्रदेश को कोई निवेश मिला ही नहीं है। जो प्रोजेक्ट मिले हैं उन पर काम चल रहा है और कितना चल रहा है, कब तक पूरे होंगे यह न तो सरकार बता रही है और न ही सरकार का औद्योगिक विभाग बता पा रहे है। सब धुप्पलबाजी चल रही है। सरकार कह रही है कि राज्य में एमएसएमई सेक्टर से बड़ा निवेश मिला है। इनमें अधिकतर घरेलू और व्यक्तितगत उद्योग हैं जैसे दुकान आटा-चक्की आदि। इनमें से व्यक्तिगत रोजगार तो मिल सकता है, लेकिन प्रदेश के बेरोजगारां को कहां रोजगार मिला है। 9 लाख बेरोजगार सरकारी आंकड़ों में हैं और आपने अभी तक क्या किया यह सरकार को बताना होगा। सरकार ने प्रदेश की जनता से झूठ बोला है। यह एक बड़ा अपराध है। क्या सरकार अपनी जनता से झूठ बोल सकती है। जनसंघर्ष मोर्चा माहामहिम राज्यपाल से मुलाकात करके सरकार के खिलाफ केस दर्ज करवाने की मांग करेगा।
रघुनाथ सिंह नेगी, अध्यक्ष जन संघर्ष मोर्चा

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