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Uttarakhand

जेब में सुराख करती महंगाई… 

कोरोना काल में लाखों प्रवासी अपने घरों को तो लौटे, लेकिन बढ़ती महंगाई के चलते उनका गुजारा होना मुश्किल हैं। घर के खर्चे चलाना एक बड़ी चुनौती है

उत्तराखण्ड की जनता इन दिनों जीवन के सच व सपनों के झूठ के बीच झूल रही है। कोरोना की मार, चरम पर पहुंच चुकी महंगाई, बढ़ती बेरोजगारी, शून्य आमदनी के बीच रोजमर्रा के खर्चों के नियंत्रित करने की जद्दोजहद लोगों के जीवन की सच्चाई को उजागर कर रही है, तो वहीं दूसरी तरफ सरकार लगातार सपनों के झूठ के सहारे लोगों को भटकाने का प्रयास कर रही है। सरकार को वह महंगाई नहीं दिखाई देती जो आम आदमी के जेब में लगातार सुराख कर रही है। प्रदेश की तीरथ सरकार 100 दिनों की उपलब्धियां गिना रही है तो वहीं प्रदेश की मुख्य विपक्षी कांग्रेस का आरोप है कि अच्छे दिनों वाली सरकार में लोग जीवन के सबसे बुरे दौर में जी रहे हैं। देश में मुद्रा स्फीति की दर राष्ट्रीय औसत से अधिक हो चुकी है। देश में मुद्रास्फीति की दर 1 ़64 है तो उत्तराखण्ड में यह 1 ़85 प्रतिशत है। केंद्रीय कार्यक्रम एवं सांख्यिकी मंत्रालय द्वारा जारी उपभोक्ता मुल्य सूचकांक के अनुसार पिछले महीने आम वसतुओं की कीमतों में 2 ़14 प्रतिशत वृद्धि हुई है। अप्रैल से मई 2021 के बीच गांवों में 1 ़73 तो शहरी क्षेत्रों में 203 प्रतित महंगाई में वृद्धि हुई है। उत्तराखण्ड अभी देश के सबसे महंगे पांच राज्यों में शामिल है। वर्ष 2020 से यह सिलसिला लगातार जारी है। विगत वर्ष केंद्रीय सांख्यिकी मंत्रालय ने जब उपभोक्ता मूल्य सूचकांक जारी किया तो तब प्रदेश महंगाई दर में देश के पांच शीर्ष राज्यों में शामिल था। प्रदेश ही नहीं पूरे देश में महंगाई 27 ़11 प्रतिशत पहुंच चुकी है। लेकिन भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक महंगाई को नियंत्रण में बताते हैं। उनका तर्क है कि पेय उत्पादकों में वैट कम किया गया है। सरकार हर स्तर पर नियंत्रण कर रही है। लेकिन हकीकत में यह नियंत्रण दिखता नहीं है। रोडवेज निजी बस, मैक्स, आॅटो, विक्रय का किराया बढ़ा है। पर्वतीय क्षेत्रों में ट्रांसपोर्ट कारोबारियों ने 10 प्रतिशत बेसिक ढुलाई भाड़ा बढ़ाया है। ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि बढ़ती महंगाई के चलते उन्हें माल भाड़े में बढ़ोतरी के लिए विवश होना पड़ रहा है। महंगाई का सबसे बड़ा कारण पेट्रोल, डीजल के बढ़ते दामों के साथ ही कच्चे माल की बढ़ती कीमत भी है। रेडीमेड कपड़ों के साथ ही इलेक्ट्राॅनिक्स उत्पादों के दामों में अच्छी खासी वृद्धि हुई है। राज्य में बेरोजगारी की दर राष्ट्रीय औसत से 2 प्रतिशत अधिक है। राष्ट्रीय औसत 5 प्रतिशत तो यहां यह दर 7 प्रतिशत है। प्रदेश में काम करने के इच्छुक लोगों के लिए काम नहीं है। ग्रामीण क्षेत्र में बेरोजगारी की दर 8 ़1 प्रतिशत तो शहरी क्षेत्र में यह 3 ़2 प्रतिशत है। महिलाओं में बेरोजगारी दर 11 ़8 प्रतिशत पहुंच चुकी है। महंगाई अपने चरम पर है। सीमेंट प्रति बोरी 390 रुपए से 430 रुपए पहुंच गया है। रेता, बजरी के दाम भी आसमान पहुंच गए। रसोई गैस के दामों में पिछले एक साल के भीतर 220 रुपए से अधिक की बढ़ोतरी हो चुकी है। दैनिक मजदूरी 450 से 600 में पहुंच गई है। रसोई गैस पहाड़ों में 850 रुपए से अधिक मूल्य में मिल रही है।

अर्थशास्त्र के जानकार भी मान रहे हैं कि महंगाई बेलगाम है। बेरोजगारी बढ़ी है। खाली जेब बाजारें में मांग पैदा नहीं हो सकती। उद्योग व व्यापार को पटरी पर आने में सालों लग जाने हैं। हजारां की संख्या में जो कारोबारी हैं उन्हें न सिर्फ अपने कारोबार को पटरी पर लाना है बल्कि साथ में महंगाई से भी लड़ना है। उद्योग जगत को भी नौकरियों को पैदा करने में वक्त लगता है। अर्थशास्त्रियों के इस तर्क को भी नहीं नकारा जा सकता कि जब तक लोगों के हाथ में पैसा नहीं आएगा, तब तक खरीददारी नहीं होगी। ऐसे में अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाना मुकिश्कल होगा। उत्तराखण्ड में कोरोना की पहली एवं दूसरी लहर में लाखों की संख्या में प्रवासी राज्य में वापस लाए। इसका एक कारण यह रहा कि ये सभी असंगठित क्षेत्र में काम करते थे, तो स्वाभाविक है कि लाॅकडाउन से इनका परिवार प्रभावित हुआ। ऐसे लोग भी हैं जिन पर कर्ज का बोझ काफी अधिक है। बीमारी, बेरोजगारी व महंगाई की मार से यह वर्ग खासा प्रभावित है। किशन सिंह दिल्ली की एक कंपनी में काम करते थे। पिछले साल लाॅक डाउन में नौकरी छूट गई तो बीमारी से बचने के लिए परिवार सहित पहाड़ लौट आए लेकिन पिछले दो वर्षों से बेरोजगार हैं। आमदनी शून्य है लेकिन खर्चे यथावत हैं। महंगाई के चलते चिंता में डूबे हैं कि घर के खर्चे चलाएं तो कैसे? ऐसी स्थिति प्रदेश के लाखों लोगों की है।

गृहणी दीपिका कहती हैं कि बाजार में हर वस्तु के दाम दोगुने हो चुके हैं। पिछले दिनों वट सावित्री के उपवास पर एक डोर जो हाल तक पांच रुपये में मिलती थी वह दस रूपये में बिक रही है। चारों तरफ लूट सी मची हुई है। जिसकी जितनी मर्जी वह उतना दाम बढ़ा रहा है। नियंत्रण की कोई व्यवस्था नहीं है। महंगाई के सवाल पर मनोज सिंह बिफर पड़ते हैं, सवाल करते हैं कि आमदनी शून्य लोग इस महंगाई का सामना करें तो कैसे? व्यापारी ललित जोशी कहते हैं कि कोरोना ने कारोबार पूरी तरह ठप कर दिया है। वस्तुओं के दाम बढ़े। लोगों के पास पैसा नहीं है। ऐसे में बढ़ती महंगाई के बीच घर खर्च चलाना मुश्किल हो रहा है। गणेश राम कहते हैं कि सरकार मुफ्त में गैस कनैकशन तो दे रही है लेकिन दोबारा उसे भराने के लिए हम गरीबों के पास पैसे नहीं होते। युवा विनोद पंत कहते हैं कि खाद्य तेलों की कीमतें पिछले दो महीने में दोगुनी हो गई। पेट्रोल, डीजल, गैस की कीमत लगातार बढ़ रही है। दाम बढ़ने का सिलसिला रूकने का नाम नहीं ले रहा है, ऐसे में सरकार की कुछ तो जिम्मेदारी बनती है। समाज सेवक गगन पाण्डेय कहते हैं कि कोरोना की मार बढ़ती महंगाई, बढ़ती बेरोजगारी लोगों को तेजी से गरीबी की तरफ धकेल रही है। मूल्य नियंत्रण की कोई प्रभावों प्रणाली नहीं होने से उपभोक्ता का चैतरफा लुटा जा रहा है।

टैक्सी वालों के मनमाने रेट हों या फिर बाजार में हो रही कालाबाजारी, आम आदमी हमसे सीधे प्रभावित हो रहा है। इस सच से इंकार नहीं किया जा सकता कि कीमतें हवाई जहाज की तरह आसमान छू रही हैं। देश में पहले मौसम के हिसाब से कीतों में उतार-चढ़ाव होता था लेकिन अब यह बढ़ोतरी साल भर चलती रहती है। बीते सालों में आर्थिक मंदी, मुद्रा स्फीति, कोरोना, कालाबाजारी महंगाई बढ़ने की मुख्य कारण रहे हैं। सच यह है कि महंगार्ठ को लेकर पक्ष-विपक्ष आपस में हमलावर हों लेकिन आम आदमी तो मार झेलने को मजबूर हैं। सरकार जमाखोरों पर शिकंजा नहीं कस पा रही है। चाय, खाद्य तेल, साबुन, आटा-चावल, दाल की कीमतों में बढ़ोतरी ने घर-घर का बजट बुरी तरह गड़बड़ा कर रख दिया है। लेकिन सबके बीच राहत शून्य है।

प्रदेश सरकार सौ दिन का हिसाब दे रही है लेकिन जनता पांच साल का हिसाब चाहती है। यह सरकार जन उम्मीदों पर खरी नहीं उतर पाई है। महंगाई, बेरोजगारी से आम आदमी परेशान है। आम आदमी के समक्ष रोजी रोटी का संकट पैदा हुआ है। सरकार रोडमैप बनाने के बजाय सपने दिखाने में लगी है।
प्रीतम सिंह, प्रदेश अध्यक्ष कांग्रेस

प्रदेश में महंगाई दर अन्य राज्यों से कम है। सरकार महंगाई नियंत्रण करने का हर संभव प्रयास कर रही है। महंगाई आवश्यक अनुसूचित वस्तुओं को उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। प्रदेश के लोगों का सस्ता राशन उपलब्ध कराया जा रहा है।
मदन कौशिक, प्रदेश अध्यक्ष भाजपा

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