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Uttarakhand

सरकार ने नहीं सुनी तो खुद सड़क बनाने में जुटे ग्रामीण

एक कहावत है पहाड़ का पानी और पहाड की जवानी पहाड़ के काम नहीं आती है। 2019 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उत्तराखंड में एक रैली के दौरान इस कहावत का प्रयोग किया था।लेकिन इस कहावत को उत्तराखंड के रानीखेत विधानसभा क्षेत्र जनपद अल्मोड़ा ताड़ीखेत ब्लॉक के सुदूर गांव कोटाड़ के ग्रामवासियों ने इसे गलत साबित किया है।ग्रामवासियों का एक ही मकसद है हमने ठानी है रोड लेकर आनी है।

आजादी के 73 सालों के बाद भी उत्तराखंड में ऐसे कई गांव हैं जो मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं । उनमें से एक गांव कोटाड़ भी है। यहां के ग्रामीणों का सरकारों से विश्वास उठ गया है कि वह उनके लिए कुछ करेंगी ,लिहाजा ग्रामीण खुद तीन किलोमीटर सड़क का निर्माण करने की ठान चुके हैं।और काम शुरू भी कर दिया है।

ग्रामवासियों का कहना है कि सभी राजनीतिक पार्टियों से कई बार कह के हम थक चुके हैं ,परंतु किसी ने भी हमारी समस्या नहीं सुनी।हमें कितनी दिक्कतें हैं। अगर हमारे में से किसी व्यक्ति की तबियत ज्यादा खराब हो जाती है तो उसको कंधे में रखकर या डोली में ले जाकर तीन किलोमीटर चढ़ाई चढ़ के रोड तक पहुँचाना पड़ता है। हमारे बच्चों को तीन किलोमीटर दूर स्कूल पढ़ाई के लिये जाना पड़ता है।खाने -पीने की आवश्यक चीजों के लिए भी उतना ही जाना पड़ता है।सड़क न होने पर हम लोगों को बहुत पीड़ा उठानी पड़ती है।सरकारों से भी कई बार आग्रह कर चुके हैं ।इन सभी दिक्कतों से परेशान होकर समस्त ग्रामवासियों ने स्वयं सड़क का निर्माण करने की ठानी है।

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