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Uttarakhand

‘इस योजना की जानकारी मेरे पास नहीं’

कौशल विकास प्रशिक्षण और सेवायोजन मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत से बातचीत

 

राज्य में कौशल विकास योजना पर सवाल खड़े हो रहे हैं?

चार महीने पहले हमारी सरकार ने कोशल विकास और प्रशिक्षण को तकनीकी विभाग से और सेवा योजन को श्रम विभाग से अलग कर के एक नया मंत्रालय का गठन किया है जिसका नाम ‘रोजगार सृजन, कौशल विकास एवं प्रशिक्षण और सेवा योजन’ रखा गया है। नये मंत्रालय के बाद ही मेरे पास यह विभाग आया है। पहले यह विभाग मुख्यमंत्री जी के पास था। हमने जिला सेवायोजन के अधिकारियां जिनकी भूमिका आज के परिप्रेक्ष्य में नगण्य जैसी हो गई थी, उनको इस योजना में नोडल अधिकारी बनाया। लेकिन पिछले चार महीने से कोई पत्रावली, प्रस्ताव जो होना है या हुआ है मेरे पास नहीं आई है। कौशल विकास से संबधित कोई निर्णय होना है, किस के स्तर पर होना है मुझे इन चार महीनो से कोई जानकारी तक नहीं मिली है। मैंने कौशल विकास सचिव पंकज पांडे जी से कई बार इसके बारे में पूछा कि राज्य में कोशल विकास की योजनाओं पर क्या चल रहा है, क्या प्रगति हुई है तो उन्हांने मुझे कहा कि अभी राज्य में मिशन मोड में ही चल रहा है।

आपने अपर मुख्य सचिव को अपने विभाग के सचिव की कार्यशैली से नारज होकर पत्र लिखा है। क्या आप अपने ही अफसरां से नाराज हैं?

मैं कई जगहों और कई केंद्रों में भी गया। वहां प्रशिक्षण देनं और लेने वालों को ज्यादा जानकारी नहीं थी। जिन लोगों ने प्रदेश सरकार या भारत सरकार से कौशल विकास का काम लिया है उन लोगां ने यह काम उत्तराखण्ड के लोगां को सबलेट किया है। सेंटर चलाने वालो को सिर्फ वही जानकारी है जो काम लेने वाली कंपनी ने उनको बताया या सिखया है। यह देख कर ही मुझे लगा कि प्रधानमंत्री मोदी जी ने कौशल विकास का जो सपना देखा है, उसको हम गम्भीरता से नहीं कर पा रहे हैं। मुझे मजबूर होकर अपर मुख्य सचिव को पत्र लिखना पड़ा।

क्या आप के नियंत्रण में अफसर नहीं हैं?

नहीं, ऐसा नहीं है। मुझे अपने विभाग के योजना की जानकारी होनी चाहिए। आखिर विधानसभा में जवाब मुझसे मांगा जाएगा। सचिव को जवाब नहीं देना है। लेकिन जो जानकारी मिली है, उससे मैं कह सकता हूं, कहीं न कहीं कुछ तो गड़बड़ है। मैंने इसकी जांच करने के आदेश दे दिए हैं। अगर कोई दोषी होगा तो निश्चित ही उसके खिलाफ कार्यवाही तय है।

आरोप है कि एक ही कंपनी को कई सेंटर आंवटित किए गए हैं?

मुझे भी इसी तरह की चर्चाएं सुनने को मिली हैं। कई लोग मेरे पास आए थे। उन्होंने भी ऐसा ही कुछ कहा है। मैंने योजना से जुड़ी जानकारी मांगी और जो सूची मुझे दी गई है उसमें भी बहुत कुछ खामियां हैं। जैसे प्रशिक्षण केंद्र कहां-कहां पर हैं। कितने लोग उसमें प्रशिक्षण लेंगे। उनको कितनी धनराशि अवमुक्त की जाएगी। प्रशिक्षण कब तक चलेगा। यह सब जानकारी उसमें नहीं है। मैंने उनसे पूरी डिटेल मांगी है अभी मुझे पूरी डिटेल नहीं मिल पाई है।

विभागीय मंत्री होने के बावजूद आपके पास जानकारी नहीं भेजी जा रही है। क्या यह सही है?

मैंने कहा न, मुझे कौशल विकास योजना की जानकारी नहीं मिल पाई है। कुछ हद तक आपकी बात सही हो सकती है। मुझे समाचार पत्र से पता चला है कि उधमसिंहनगर जिला राज्य में कौशल विकास में अब्बल आया है। इतनी बड़ी उपलब्धि हो गई और मुझे जानकारी नहीं दी गई। मैं मुख्यमंत्री जी से इस बारे में बात करूंगा। अपनी तरफ से भी समीक्षा करूंगा।

आप इस पूरे मामले में क्या कार्यवाही करेंगे?

मुझे जो भी व्यक्तिगत रूप में जानकारी मिली है और जो कुछ लोगों ने मुझे बताया है मैं उन सब पर समीक्षा करूंगा। मैं मुख्यमंत्री जी से राज्य में कौशल विकास योजना जब से आरंभ हुई है तब से लेकर अब तक हमने कितने युवाओं को प्रशिक्षण दिया है और प्रशिक्षण के बाद कितनां को रोजगार मिला है। पूरे मामले की जांच करवाएं जाने का अनुरोध करूंगा। जांच में जो भी जिम्मेदार अधिकारी दोषी पाया जाएगा उसके खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्यवाही करूंगा।

योजना में टेंडर की शर्तों को बड़ी-बड़ी कंपनियों के हिसाब से बनाया गया है। जिससे राज्य की कंपनियां टेंडर से बाहर हो गई। क्यों?

मैंने बताया न कि मैं इन सभी बातां की समीक्षा करने वाला हूं। टेंडर की शर्तों को किस आधार पर और किसके स्तर पर बदला गया है। इसे देखना जरूरी है। साथ ही यह भी देखना जरूरी है कि मूल शर्तों से तो कोई छेड़छाड़ नहीं की गई है। देखिए, काम तो उत्तराखण्ड के लोग ही कर रहे हैं। जिन कम्पनियों को टेंडर मिले हैं वे दो-तीन साल के लिए उत्तराखण्ड में सेंटर नहीं खोलने वाले। अगर उत्तराखण्ड के लोगां को काम मिला होता हो हम ज्यादा से ज्यादा बेहतर काम कर सकते हैं।

इस योजना के नाम पर विदेश यात्राएं की गई हैं। क्या इसका कोई लाभ हुआ है?

मुझे इसकी जानकारी नहीं है। कौन कितनी बार विदेश यात्राएं की हैं। मेरे पास चार महीने पूर्व ही यह मंत्रालय आया है। कोई भी अधिकारी बगैर मंत्री और मुख्यमंत्री की अनुमति के न तो ऑफिसियली और न ही निजी विदेश यात्रा कर सकता है। मुख्यमंत्री जी से विदेश यात्रा की फाइल का अनुमोदन होता है। बगैर इसके तो कोई भी विदेश यात्रायें नहीं हो सकती। मुझे बस इतनी जानकारी है कि विदेशां में कौशल विकास के लिए यात्राएं की गई हैं। मैं जांच करने वाला हूं। अगर बगैर अनुमति के यात्रायें की गई हैं तो गंभीर मामला है।

स्थानीय कंपनियों और एसोशियसन के मुताबिक योजना के कंसल्टेंट साबेज बक्श सरकारी खर्च पर अपने परिवार को भी विदेश घुमा लाए हैं। स्किल डेवलपमेंट प्रोजेक्ट का बजट विदेश यात्राओं पर कैसे खर्च हो सकता है?

मुझे नहीं पता कि यह साबेज बक्श कौन है और किसने इसकी नियुक्ति की है। मुझे कुछ जानकारी मिली है कि इस व्यक्ति के द्वारा बाहरी कंपनियों को सरकारी भवन में कार्यायल दिये गए हैं। मैं इस मामले में भी पूरी समीक्षा करूंगा और नियमानुसार कार्यवाही करूंगा। रही विदेश यात्रा करने की बात तो हो सकता है कि यह तब गया हो जब मेरे पास यह मंत्रालय नहीं था। मुझे तो ज्ञात नहीं है कि मैने कोई फाइल स्वीकृत की हो।

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