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Uttarakhand

आवास कब्जाने में आगे माननीय

सिंचाई विभाग के कर्मचारी खफा हैं कि जो आवास उन्हें आवंटित होने थे उन पर विधायक कब्जा जमाए हुए हैं

रुड़की (हरिद्वार)। सिंचाई विभाग के आवासों पर जनता के चुने हुए प्रतिनिधि जिस तरह कब्जा जमाते जा रहे हैं, उसे देख विभागीय कर्मचारियें में भारी आक्रोश है। सिंचाई विभाग कर्मचारी महासंघ ने हरिद्वार जिले के कुछ विधायकों पर आरोप लगाया है कि उन्होंने रुड़की में सिंचाई विभाग के सरकारी आवासों पर कब्जा कर रखा है। कर्मचारियों ने अधीक्षण अभियंता को पत्र लिखकर आवासों को कब्जामुक्त कराने की मांग की है।

सिंचाई विभाग कर्मचारी महासंघ की रुड़की शाखा के अध्यक्ष सतपाल सैनी और सचिव संजय कुमार कश्यप ने विभाग के अधीक्षण अभियंता और अध्यक्ष आवास आवंटन समिति को एक नाराजगी भरा पत्र भेजा है। पत्र में कहा गया है कि विधायक देशराज कर्णवाल की पत्नी वैजयंती माला के नाम पर रुड़की मुख्यालय में आवास संख्या ए-71/2 आवंटित है। विधायक ने रुड़की मुख्यालय पर एक अन्य आवास ए-71/4 पर भी अवैध रूप से कब्जा किया हुआ है। रुड़की मुख्यालय पर कार्यरत अधिकारी एवं कर्मचारी आवास आवंटित के लिए प्रतीक्षारत हैं। लिहाजा दोनों आवास खाली कराकर पात्र अधिकारी-कर्मचारियों को आवंटन किए जाए। इस संबंध में झबरेडा के विधायक देशराज कर्णवाल का कहना है कि उनको शिविर कार्यालय के लिए एक आवास आवंटन हुआ है। दो साल पहले उनकी पत्नी के नाम एक आवास आवंटित हुआ था। उसके नीचे का आवास उनका कैम्प कार्यालय है। उनके पास रुड़की में अपना आवास नहीं है, जबकि कर्णवाल की निजी कोठी रेलवे स्टेशन के पास मौजूद है। आरोप है कि विधायक झूठ बोलकर जहां सिंचाई विभाग को भ्रमित कर रहे हैं।


कर्मचारी महासंघ के मुताबिक नहर किनारे भी विधायकों को कोठियां आवंटित की गई हैं। खानपुर के विधायक कुंवर प्रणव सिंह का रुड़की विधानसभा क्षेत्र से कोई संबंध नहीं है, लेकिन उन्होंने भी सिंचाई विभाग की कोठी में कैम्प कार्यालय बना रखा है, जबकि उन्हें अपने विधानसभा क्षेत्र में कार्यालय बनाना चाहिए था। सवाल यह है कि खानपुर रुड़की से लगभग 45 किलोमीटर दूर है, फिर भी चैम्पियन ने रुड़की में किस आधार पर कार्यालय बना रखा है?

सिंचाई विभाग कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष रमेश रमोला का कहना है कि इस मामले की शिकायत सिंचाई मंत्री, प्रमुख सचिव और प्रमुख अभियंता से की जा चुकी है। लेकिन उनके स्तर से भी आज तक कोई कार्यवाही नहीं की गई है। उन्होंने कहा कि एक ओर तो हाईकोर्ट के निर्देश पर पूर्व मुख्यमंत्रियों से सरकारी आवास खाली कराये गए, और बाजार दर से किराया भी वसूला जा रहा है। दूसरी ओर जनप्रतिनिधि सरकारी आवासों को कब्जा रहे हैं। जो अधिकारी नियम विरुद्ध इन नेताओं को आवास आवंटित कर रहे हैं। ऐसे अधिकारियों की जांच कराकर उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाए।

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