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Uttarakhand

कर्मचारियों को वेतन के लाले मंत्रियों के आवासों पर जमकर खर्चा

देहरादून। एक तरफ प्रदेश सरकार अपने कर्मचारियों को नियमित वेतन नहीं दे पा रही है तो दूसरी तरफ लाखों रुपए मंत्रियों के आवासों की साज-सज्जा और मरम्मत के नाम पर खर्च कर रही है। अब तो हालात इस कदर हो चले हैं कि प्रदेश के हजारां शिक्षकां को नियमित वेतन नहीं मिल पा रहा है। इसके चलते शिक्षक संघ में भारी नारजगी देखने को मिल रही है। इसके अलावा सरकारी विभागों में संविदा ओैर आउट सोर्सिंग द्वारा अपनी सेवाएं देने वाले कर्मचारियों को भी वेतन के लाले पड़े हुए हैं।

उत्तराखण्ड जन मोर्चा द्वारा सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत राज्य संपति विभाग से जानकारी प्राप्त की गई। जानकारी के अनुसार देहरादून के यमुना कॉलोनी स्थित मंत्री आवासों के साज-सज्जा, मरम्मत और निर्माण के नाम पर 3 करोड़ 96 लाख 41 हजार रुपए सरकारी खजाने से खर्च किए गए हैं।

सूचना के अधिकार के तहत प्राप्त जानकारी के अनुसार मंत्री आवासों में मरम्मत के नाम पर 1 करोड़ 50 लाख 80 हजार खर्च किए गए हैं, तो वहीं विशेष मरम्मत का कार्य किया गया है। साथ ही मंत्री आवासों में पोर्च का निर्माण, गौशाला का निर्माण, स्टोर तथा मॉड्यूलर किचन के निर्माण में 2 करोड़ 45 लाख 61 हजार खर्च किए गए हैं। हैरानी की बात यह है कि मंत्री आवासों में पूर्ववर्ती सरकार में भी मरम्मत के नाम पर खर्च किया गया था, लेकिन वर्तमान सरकार ने मंत्रियों की इच्छा ओैर मांग के अनुसार लाखों रुपए साज-सज्जा औेर मरम्मत के नाम पर खर्च कर दिए।

हैरत की बात यह है कि प्रदेश सरकार कर्मचारियों को वेतन देने के लिए कर्ज ले रही है। बावजूद इसके हजारों कर्मचारियों को नियमित वेतन नहीं मिल पा रहा है। अभी हाल ही में राज्य सरकार को हाईकोर्ट से रोडवेज कर्मचारियों को नियमित वेतन न देने पर फटकार तक लग चुकी है। सरकार रोडवेज कर्मचारियों को कई महीनों तक वेतन तक नहीं दे पाई। हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद सरकार इसमें नाकाम ही रही। अभी भी मामला हाईकोर्ट में चल रहा है।

सरकार अपने खर्च के लिए कोरोना संकट का सहारा ले रही है और राज्य के कर्मचारियों को एक दिन का वेतन देने तक का आदेश जारी किया हुआ है। हालांकि शिक्षक संघ ने सरकार के इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी है जिस पर सुनवाई चल रही है। इससे यह तो साफ हो गया कि सरकार के खजाने में बहुत बड़ी कमी हो चुकी है और सरकार अपने ही कर्मचारियों से उनका एक दिन का वेतन कोरोना संकट से निपटने के लिए सहयोग के नाम पर ले रही है।

इस सबके बावजूद सरकार के वित्तीय हालात में कोई सुधार देखने को नहीं मिल रहा है। कर्मचारियों को नियमित वेतन देने में भी सरकार कमजोर साबित हो रही है। उच्च शिक्षा के हालात भी कुछ इस कदर हो चुके हैं कि राज्य के कॉलेजां में संविदा कर्मचारियों और शिक्षकों के सामने वेतन के लाले पड़े हैं। इसके कई कारण बताए जा रहे हैं जिसमें एक बड़ा कारण यह बताया जा रहा है कि कॉलेजों में छात्रों की संख्या बहुत घटी है और छात्रों से बसूली गई फीस से इन कर्मचारियों और शिक्षकों का मानदेय दिया जाता है। इसके बावजूद हजारों संविदा कर्मचारियों और शिक्षकों को नियमित वेतन नहीं मिल पा रहा है।

ऐसा ही हाल राज्य की माध्यमिक शिक्षा के भी हो चले हैं। फरवरी 2020 से जूनियर हाई स्कूलों के शिक्षकों और कर्मचारियों को वेतन नहीं मिला है। जिसके चलते माध्यमिक शिक्षा कर्मचारी संघ भी सरकार से नाराज बताया जा रहा है।

ऐसा नहीं है कि वेतन न मिलने का मामला केवल सरकारी कर्मचारियों के साथ ही हो रहा है। आउट सोर्सिंग और उपनल के माध्यम से सरकारी विभागों में काम करने वाले कर्मचारियों के मामले में भी ऐसा ही देखा जा रहा है। उपनल कर्मचारियों के वेतन आदि के लिए सरकारी विभाग उपनल को वेतन देने तक के पैसे नहीं भेज रहे हैं। इससे उपनल कर्मचारियों के ईएसआई और प्रोविडेंट फंड जमा करने में समस्या आ रही है।

यही हालात आउट सोर्सिंग एजेंसियों के माध्यम से कार्यरत कर्मचारियों के मामले में भी देखने को मिले हैं। सरकारी विभाग आउट सोर्सिंग एजेंसियों को कर्मचारियों के वेतन आदि का फंड तक नहीं दे पा रहे हैं। इसके चलते कर्मचारियों के वेतन से कटने वाले नियमित ईएसआई और प्रोविडेंट फंड जमा नहीं हो पा रहे हैं। कर्मचारियों के वेतन का पूरा बोझ एजेंसियों को ही भुगतना पड़ रहा है, अधिकांश एजेंसियां विभागों से फंड न मिलने का बहाना बनाकर कर्मचारियों को वेतन नहीं दे रही है।

सबसे ज्यादा परेशानी कर्मचारी स्वास्थ्य बीमा के तहत ईएसआई को लेकर सामने आ रही है। कर्मचारियों के वेतन से एक निश्चित धनराशि ईएसआई की सुविधा के लिए काटी जाती है। लेकिन नियमित वेतन न मिलने से कटौती नहीं हो पा रही है जिसके चलते कर्मचारियों को ईएसआई का लाभ मिलने में परेशानी हो रही है।

अब सवाल इस बात का है कि जब सरकार अपने ही कर्मचारियों को नियमित वेतन नहीं दे पा रही है, तो फिर लाखों रुपए अपने मंत्रियों के आवासों की साज-सज्जा और मरम्मत के नाम पर क्यों लुटा रही है? जन मोर्चा के अध्यक्ष रघुनाथ नेगी का कहना हे कि मौजूदा प्रदेश सरकार पूरी तरह से फेल हो चुकी है। कोरोना संकट को संभालने में सरकार कमजोर साबित हो चुकी है। अपने ही कर्मचारियों को वेतन देने के लिए सरकार को बाजार से कर्ज लेना पड़ रहा है। फिर भी सरकार करोड़ों रुपए मंत्रियों के खुशी के लिए उनके आवासों को सजा रही है, जबकि कोरोना संकट में सरकार को इससे बचना चाहिए था।

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