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Uttarakhand

हाईकोर्ट के फैसले से हड़कंप

हाईकोर्ट के एक निर्णय से कॉर्बेट नेशनल पार्क में अवैध रूप से कारोबार कर रहे लोगों में हड़कंप मचा हुआ है। पार्क क्षेत्र में अतिक्रमण पर रिजॉर्ट चला रहे वे लोग ज्यादा परेशान हैं जो ऊंची राजनीतिक पकड़ रखते हैं। कोर्ट ने हिमालय युवा ग्रामीण विकास संस्था और हिमाद्री जन विकास समिति की ओर से छह साल पहले दायर की गई जनहित याचिकाओं पर यह निर्णय दिया है
विश्व प्रसिद्ध कॉर्बेट नेशनल पार्क में अनियमितताओं को लेकर ‘हिमालयन युवा ग्रामीण विकास संस्था’ के अध्यक्ष एवं पत्रकार मयंक मैनाली ने आज से छह साल पूर्व नैनीताल हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की थी। इसी के साथ भाजपा नेता अनिल बलूनी ने भी एक जनहित याचिका हाईकोर्ट में दायर की थी। मयंक मैनाली की याचिका हिमालयन युवा ग्रामीण विकास संस्था की तरफ से थी, तो अनिल बलूनी जो कि अब राज्यसभा सांसद हैं, उनकी याचिका ‘हिमाद्री जनविकास समिति’ की तरफ से दायर की गई। एक याचिका के पैरोकार हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता दुष्यंत मैनाली तो दूसरी के अधिवक्ता राकेश थपलियाल थे। छह साल पुरानी इन याचिकाओं पर सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने 3 अगस्त 2018 को अपना फैसला सुनाया। जिसमें कार्बेट पार्क में हो रही अनियमितताओं पर पाबंदी लगाने के आदेश दे दिए गए हैं। इससे कार्बेट पार्क में कारोबार कर रहे हजारों लोगों की रातों की नींद गायब हो गई है। हालांकि इससे पूर्व 27 जून को भी हाईकोर्ट ने कॉर्बेट पार्क में कोसी नदी के किनारों के साथ ही वन भूमि पर अतिक्रमण करने वाले 44 रिजॉर्ट को आरोपी बनाया था। जबकि इससे पहले करीब एक साल पहले कार्बेट पार्क के ढिकुली एवं अन्य क्षेत्रों में 13 रिजॉर्ट को सीवर ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) लगाने के आदेश दे दिए थे। जिन रिजॉर्ट और होटल में सीवर ट्रीटमेंट प्लांट नहीं लगे थे उन्हें सील कर दिया गया था। आरोपी होटल एवं रिजॉर्ट अपनी गंदगी को सीधा कोसी नदी में बहा रहे थे। जिनसे प्रदूषित हो रहे पानी को पीकर पूरा रामनगर शहर बीमारियों का शिकार हो रहा था।
हाईकोर्ट ने हिमालयन युवा ग्रामीण विकास संस्था और हिमाद्री जन विकास समिति की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए महत्वपूर्ण फैसले सुनाए हैं। कार्बेट पार्क के आस-पास जिन रिजॉर्ट मालिकों ने हाथी पाले हैं, उनके खिलाफ कोर्ट ने एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए हैं। हाईकोर्ट ने मुख्य वन्य जीव प्रतिपालक को आदेश दिया है कि इन रिजॉर्ट से हाथियों को 12 घंटों में मुक्त कर उनको राजाजी नैनीताल पार्क में रखा जाए और उनके रहन-सहन के लिए उचित प्रबंध करें। इसके साथ ही कोर्ट ने कहा है कि पार्क में हर दिन सिर्फ 100 वाहनों को ही प्रवेश दिया जाए। कोर्ट ने कहा है कि इन वाहनों के लिए डीएफओ और आरटीओ से अनमुति लेनी जरूरी होगी। इसके साथ ही नेशनल कार्बेट पार्क में प्राइवेट वाहनों पर कोर्ट ने पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया है। कोर्ट ने सरकार से सुनवाई के दौरान ये भी कहा है कि जंगलों से वन गुर्जरों को हटाने के लिए जल्द कार्यवाही करे। वनों में शिकार करने वाले गिरोह गोपी, गामा, बाबरिया समेत अन्य गिरोहों के लोगों पर दायर मुकदमों का जल्द निस्तारण मजिस्ट्रेट कोर्ट में हो। साथ ही उच्च न्यायालय ने मुख्य सचिव उत्तराखण्ड को आदेश दिया है कि सोमवार 6 अगस्त 2018 तक वो अपना जवाब शपथ पत्र के साथ कोर्ट में पेश करें। याद रहे कि फैसला सुनाने से एक दिन पहले ही हाईकोर्ट ने सरकार से इस पूरे मामले पर अपना जवाब दाखिल करने को कहा था। लेकिन वह जवाब दाखिल नहीं कर सकी।
गौरतलब है कि पूर्व में जब प्रदेश में रमेश पोखरियाल निशंक की सरकार थी तब भाजपा नेता अनिल बलूनी को वन एवं पर्यावरण सलाहकार समिति का उपाध्यक्ष बनाया गया था। तब बलूनी के नेतृत्व में ही वाइल्ड लाइफ एडवायजरी लागू कराई गई थी। जिसमें केंद्र सरकार के हस्तक्षेप के बाद राज्य सरकार ने सख्ती की थी। पार्क से लगे रिजॉर्ट एवं होटलों की वजह से वाइल्ड लाइफ पर असर न हो, इसके लिए गाइडलाइन तय की गई थी। इसका अनुपालन न करने पर कड़ी कार्यवाही करने का प्रावधान किया गया था। यही नहीं, बल्कि उसी दौरान पार्क के निदेशक मंडल को 15 दिन के अंदर एडवाइजरी जारी करने के आदेश भी जारी किए गए थे। रिजॉर्टस एवं होटलों पर शिकंजा कसने के लिए सरकार ने गाइड लाईन तय की थी। इसमें स्पष्ट निर्देश थे कि रिजॉर्ट एवं होटलों में तेज रोशनी वाली लाईट न लगाई जाएं। वाहनों की पार्किंग अपने परिसर में ही करें। किसी भी दशा में डीजे अथवा तेज शोर वाली ध्वनियां उत्पन्न न की जाएं। पार्टियां आयोजित न की जाएं, शादी-ब्याह तो कतई न होने पाएं। सूरज ढलते ही टूरिस्टों को जंगल के इर्द-गिर्द न जाने दें। इसी के साथ कोसी नदी की तरफ अतिक्रमण न करने और कूड़ा निस्तारण केंद्रां की व्यवस्था करने के आदेश जारी किए गए थे। लेकिन सभी जानते हैं कि आज के समय में भी वाइल्ड लाईफ एडवाइजरी पूरी तरह लागू नहीं हो सकी है। हालांकि हाईकोर्ट में याचिकाओं के दायर होने के बाद इतना फर्क जरूर पड़ा है कि उन 13 रिसोर्ट एवं होटलों में आज सीवर ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) लगा दिए गए हैं जो अपनी गंदगी को कोसी नदी में प्रवाहित कर रहे थे। इसी के साथ वन भूमि और सरकारी जमीन पर अतिक्रमण के मामले में भी कोर्ट की सख्ती के बाद 44 रिजॉर्ट एवं होटलों को नोटिस दिये जा चुके हैं। जिनसे 13 के खिलाफ कार्यवाही भी की जा चुकी है। बाकी के रिजॉर्ट में पार्टियां और शादी-विवाह पर अभी तक कोई पाबंदी नहीं लग सकी है। पिछले दिनों प्रदेश के वित्त मंत्री प्रकाश पंत की पुत्री की शादी इसका ताजा उदाहरण है। इसी तरह अतिक्रमण के मामले में भी कुछ नेता पुत्र अपनी हठधर्मिता पर हैं। इनमें वरिष्ठ कांग्रेस नेत्री का एक पुत्र भी है। जिसके पिता के नाम पर बने रिजॉर्ट में अतिक्रमण होना पाया गया है।


याचिकाकर्ता पर जुर्माना

कभी-कभी पासा पलट जाता है। जिस याचिकाकर्ता ने कार्बेट पार्क में टाइगर रिजर्व क्षे से अवैध कब्जे हटाने को याचिका दायर की थी वह खुद सरकारी आवास पर अतिक्रमण कर रहने का दोषी पाया गया। न्यायमूर्ति राजीव शर्मा एवं लोक पाल सिंह ने याचिकाकर्ता विश्वनाथ सिंह पर पांच लाख का जुर्माना भी लगा दिया। कार्बेट नेशनल पार्क के न्यू कॉलोनी कालागढ़ के निवासी विश्वनाथ सिंह ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि नेशनल टाइगर कंजरवेशन अथॉरिटी ने 26 फरवरी 2016 को कालागढ़ क्षेत्र के करीब 1288 वर्ग किलोमीटर एरिया को टाइगर रिजर्व घोषित कर दिया था। लेकिन अथॉरिटी ने इस क्षेत्र को टाइगर रिजर्व घोषित करने से पूर्व क्षेत्र में रह रही करीब 10 हजार की आबादी की आपत्तियां दर्ज नहीं की। इसलिए इस क्षेत्र को टाइगर रिजर्व से बाहर कर इस नोटिफिकेशन को निरस्त कर दिया जाए। जनहित याचिका का विरोध करते हुए सरकार ने बताया कि जिस क्षेत्र को टाइगर रिजर्व घोषित किया गया है, वह अधिसूचित वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन एक्ट 1972 के तहत जारी की गई है। सरकार की ओर से यह भी बताया गया कि स्वयं याचिकाकर्ता सरकारी आवास में अनाधिकøत रूप से रह रहा है।

कोर्ट के सवाल

  • राजाजी नेशनल पार्क, कॉर्बेट पार्क सहित रिजर्व फॉरेस्ट में कितने वन गुर्जर परिवार रह रहे हैं, कितने समय में इनको यहां से विस्थापित किया जाएगा?
  • कार्बेट सहित राज्य के अन्य पार्कों में कितनी जल्दी स्पेशल टाइगर फोर्स बाघों को बचाने का कार्य शुरू कर देगी?
  • वन्य जीव अधिनियम के अंतर्गत कितने केस दर्ज किए गए और कितने निस्तारित हुए, कितने विचारधीन हैं?
  • वन्य जीव तस्कर गोपी, बालको, बाबरी और गामा गैंग को नेशनल पार्कों से हटाने के लिए क्या कदम अब तक उठाए गए?
  • रेलवे लाइनों एवं बिजली के करंट से मरने वाले बाघों के संबंध में क्या कोई नीति सरकार ने बनाई है?
  • वन भूमि पर अतिक्रमण करने वालें के खिलाफ अब तक कितने मुकदमें दर्ज हुए हैं?

बात अपनी-अपनी

मैंने जो याचिका हाईकोर्ट में दायर की थी वह वन गुर्जरों और कार्बेट पार्क में बाघों के अवैध शिकार को लेकर थी। जिसमें मेरा कहना था कि वन गुर्जरों का विस्थापन किया जाना चाहिए। इससे पार्क में हो रहे अवैध शिकार पर भी रोक लगेगी। हाईकोर्ट का जो फैसला आया है, वह लोगों के रोजगार पर भी सवाल खड़ा करता है। हम चाहते हैं जंगल से ज्यादा से ज्यादा लोगों को रोजगार मिले।
अनिल बलूनी, राज्यसभा सांसद
उत्तराखण्ड में राष्ट्रीय औसत से ज्यादा जमीन नेशनल पार्कों एवं वन्य जीव विहारों से घिरी हुई है। इसलिए पर्यावरण की मार स्थानीय लोगों पर पड़ रही है। पर्यटन रोजगार का जरिया है और इससे राज्य की आर्थिकी मजबूत हो रही है। कार्बेट, सीतावनी, राजाजी में कुल 100 गाड़ियों की सीमा तय करने के फैसले से पर्यटन को नुकसान होगा। कार्बेट के आस-पास पहले ही जमीनों की 143 रोके जाने एवं ईको सेंसेटिव जोन की वजह से पर्यटन विकास ठप हो चुका है।
गणेश रावत, सामाजिक कार्यकर्ता व पत्रकार
2012 में फॉरेस्ट ने कोर्ट में कहा था कि हमारा ग्रामीणों के साथ कोई विवाद नहीं है। फिलहाल कॉर्बेट में जो गाड़ी चल रही है। वह सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के अनुसार चल रही है। ढिकुली गांव का 1400 एकड़ का रकबा है। गांव की 400 एकड़ जमीन कोसी नदी में अंदर है। हमारा एक पूरे गांव का रकबा नदी में है। हम इस मामले में सुप्रीम कोर्ट जाएंगे।
राकेश नैनवाल, ग्राम प्रधान ढिकुली

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