[gtranslate]
Uttarakhand

भ्रष्टाचार के आगे बेबस सरकार

उत्तराखण्ड की त्रिवेंद्र रावत सरकार भ्रष्ट अधिकारियों के सामने घुटने टेक चुकी है। हालत यह है कि अधिकारी अपने चहेतों को ठेका दिलवाने के लिए खुलेआम टेंडर की शर्तों में संशोधन कर रहे हैं और विभागीय मंत्री को इसकी भनक तक नहीं लगती। सिंचाई विभाग के हरिद्वार सर्किल में एक ऐसा ही मामला सामने आया है। यहां संबंधित अधिकारियों ने पंत दीप पार्किंग की नीलामी में उत्तर प्रदेश के एक ठेकेदार को फायदा पहुंचाने के लिए टेंडर की निर्ट्टारित शर्तों में मनमाने ढंग से बदलाव कर डाले। इसका नतीजा यह रहा कि जहां स्थानीय ठेकेदार टेंडर प्रक्रिया से बाहर हो गए, वहीं सरकार को भी करोड़ों रुपए के राजस्व का नुकसान हुआ
छात्रवृत्ति घोटाले की जांच में सुस्ती के आरोपों से घिरी त्रिवेंद्र रावत सरकार भ्रष्टाचार के आगे बेबस लगती है। भ्रष्टाचार का ताजा मामला सिंचाई विभाग के हरिद्वार सर्किल के अंतर्गत पंत दीप पार्किंग की नीलामी का सामने आया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार हरिद्वार की सबसे बड़ी पंत दीप पार्किंग की नीलामी के लिए सिंचाई कार्य मंडल हरिद्वार के अधीक्षण अभियंता आरके तिवारी ने 23 फरवरी 2019 को ई-ऑक्शन कराए जाने के लिए पत्र जारी किया। जिसके अंतर्गत ऑनलाइन पब्लिकेशन की तिथि 25 फरवरी 5ः00 बजे निर्धारित की गई, जबकि 5 मार्च 2019 डॉक्यूमेंट डाउनलोड की अंतिम तिथि निर्धारित की गई। टेंडर प्रक्रिया का पत्र जारी होते ही सिंचाई विभाग हरिद्वार में चहेतों को टेंडर देने के लिए कारपेट बिछाने शुरू कर दिए गए। नतीजा यह हुआ कि टेंडर प्रक्रिया में गुपचुप तरीके से बदलाव की शुरुआत की गई। 28 फरवरी 2019 को सिंचाई कार्य मंडल हरिद्वार के अधीक्षण अभियंता आरके तिवारी ने पत्रांक संख्या 684/सिं0का0मं0ह0/ नीलामी सूचना संख्या- 2/एस0इ0/ 2018 – 19 के तहत पूर्व में जारी नीलामी सूचना में संशोधन के लिए एक शुद्धि पत्र जारी किया। इस पत्र के जरिये पूरी नीलामी प्रक्रिया को मनमाफिक रूप से संशोधन कर डाला। यही नहीं पूर्व में जारी विज्ञप्ति के अनुसार हरिद्वार की सबसे बड़ी वाहन पार्किंग की नीलामी प्रकिया को जहां पहले ई-डेट चार्ट में अंकित ई-ऑक्शन दर्शाया गया था, वहीं संशोधन के उपरांत ई-टेंडरिंग प्रकिया बदल दी गई। ई-टेंडरिंग की जगह ऑक्शन कर दिया गया। विभागीय मंत्री की नाक के नीचे हुए इस खेल को इतने गुपचुप रूप से अंजाम दिया गया कि पार्किंग लेने के इच्छुक ठेकेदारों यहां तक कि सिंचाई खण्ड हरिद्वार डिवीजन के अधिकारियों तक को इसका पता न चल सका। हैरत की बात तो यह है कि सिंचाई कार्य मंडल द्वारा नीलामी प्रकिया में किये गए बदलाव के संबंध में जारी किए जाने वाले पत्र का प्रकाशन किसी भी समाचार पत्र में नहीं कराया गया।
गौरतलब है कि सिंचाई विभाग के मंत्री सतपाल महाराज हैं। महाराज के पास हरिद्वार जनपद के प्रभारी मंत्री का दायित्व भी है। इसके बावजूद सिंचाई विभाग के अधिकारी उनकी जरा भी परवाह न करते हुए बेखौफ होकर पूरी प्रक्रिया को अंजाम देने में लगे रहे। जिस प्रकार टेंडर प्रक्रिया को गुपचुप तरीके से बदलने की शुरुआत की गई उससे तो यही लगता है कि अपने चहेते ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने की नीयत के चलते मनमाने ढंग से नियमों में बदलाव किया गया। 25 फरवरी को ऑनलाइन अपलोड की गई पार्किंग की शर्तों को भी बदल दिया गया। बताया जाता है कि स्थानीय ठेकेदारों को पूरी प्रक्रिया से बाहर कर चहेतों को ठेका देने की मंशा बना चुके सिंचाई कार्य मंडल के अधिकारी इस प्रकार ठेके की शर्तों को बदलने में लगे रहे जैसे गाडी के गियर। जहां पूर्व में निर्धारित की गई शर्तों के बिंदु संख्या दो में पार्किंग की न्यूनतम बोली 6 करोड़ से प्रारम्भ होकर उच्चतम बोली का प्रावधान किया गया था वहीं बदली गई शर्त के अनुसार उसको 8 करोड़ करते हुए 8 करोड़ में ही ठेका दे दिया गया। चहेतों को लाभ पहुंचाने की मंशा से एक सूत्रीय कार्यक्रम पर लगे सिंचाई कार्य मंडल हरिद्वार के अधिकारियों ने खुलेआम मनमानी करते हुए पूर्व में जारी शर्तों में एक और बिंदु संख्या 5 के पहले पैराग्राफ में बदलाव किया। पूर्व में शर्त थी कि पार्किंग के लिए सिंचाई विभाग उत्तराखण्ड में ए क्लास या इससे उत्तर श्रेणी में पंजीकृत ठेकेदार ही भाग लेंगे। लेकिन 28 फरवरी को गुपचुप तरीके से नियमों में परिवर्तन करते हुए। ए$ए पंजीकरण प्रमाण पत्र मांग लिया। सिंचाई विभाग ने यह परिवर्तन तब किया जबकि पार्किंग की नीलामी में इस प्रकार के पंजीकरण प्रमाण पत्र की आवश्यकता नहीं होती है। ए प्लस प्रमाण पत्र निर्माण कार्यों के लिए आवश्यक माना जाता है। सिंचाई विभाग में ए क्लास में पंजीकøत ठेकेदार 20 करोड़ के निर्माण कार्य करने के लिए अधिकøत हैं, परंतु खुलेआम नियमों की धज्जियां उड़ा रहे सिंचाई कार्य मंडल हरिद्वार के अधिकारी नियम एवं शर्तों को बदल कर हरिद्वार और उत्तराखण्ड के पार्किंग ठेकेदारों को हतोत्साहित करते रहे। अधिकारियों ने न सिर्फ स्थानीय ठेकेदारों को टेंडर प्रक्रिया से बाहर किया, बल्कि टेंडर प्रक्रिया की शर्तों को बदलकर उन्होंने सरकार की आखें में धूल झोंककर उसे करोड़ों के राजस्व का चूना भी लगा डाला।
बताया जाता है कि सिंचाई कार्य मंडल हरिद्वार के अधीक्षण अभियंता आरके तिवारी मूल रूप से पूर्वी उत्तर प्रदेश के निवासी हैं। यही वजह है कि इस बार पंतदीप पार्किंग को उत्तर प्रदेश के चहेते ठेकेदार के नाम करने का ताना-बाना बुना गया। बदली गई शर्तों के पश्चात हरिद्वार की सबसे बड़ी पार्किंग को लेने वाले ठेकेदारों की संख्या में कमी आ गई या यूं कहें कि स्थानीय ठेकेदारों को जानबूझकर पूरी प्रक्रिया से बाहर कर दिया गया। अधिकारियों की मनमानी रणनीति के चलते मात्र दो टेंडर ही पार्किंग के लिए पड़े। चहेते ठेकेदारों को पार्किंग का ठेका देने पर आमादा अधिकारियों ने  नियमों का उल्लंघन करते हुए पार्किंग के लिए डाले गए दो टेंडर में ही स्वीकृति दे डाली। सरकार की नाक के नीचे सरकार को करोड़ों का चूना लगा रहे सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने उत्तर प्रदेश के ठेकेदार को लाभ पहुंचाने के लिए सेम डे ही टेंडर की स्वीकृति प्रदान कर दी। जिस टेंडर प्रक्रिया हेतु गठित टेंडर कमेटी में जिला प्रशासन का प्रतिनिधि होना अनिवार्य था, उसमें जिला प्रशासन का कोई प्रतिनिधि न होने के बावजूद स्वीकृति देना पूरी प्रक्रिया पर ही सवालिया निशान खड़ा करता है।
‘दि संडे पोस्ट’ के पास उपलब्ध जानकारी के अनुसार उत्तर प्रदेश अमरोहा की रिधिम एसोसिएट को पंतदीप पार्किंग का टेंडर देने की प्रक्रिया में जी जान से जुटे सिंचाई कार्य मंडल हरिद्वार के अधिकारियों ने पंतदीप पार्किंग का वह ठेका 8 करोड रुपए में दे दिया जो नीलामी की प्रक्रिया को पारदर्शिता से लागू किये जाने पर 10 करोड़ से अधिक पर जाना था। गुपचुप बदली गई नीलामी शर्तों के कारण प्रक्रिया से बाहर हुए मधुकर शर्मा का कहना था कि यह नीलामी प्रक्रिया गुपचुप रूप से की गई है। एक सोची- समझी साजिश के तहत स्थानीय ठेकेदारों को बाहर किया गया। यह रवैया सही नहीं है। जिस प्रकार टेंडर प्रक्रिया से ए क्लास में पंजीकøत ठेकेदारों को बाहर कर अमरोहा की रिधिम एसोसिएट को टेंडर देने का प्लान बनाया गया उससे पहले स्थानीय ठेकेदारों ने नीलामी वाली तिथि को ही सिंचाई विभाग हरिद्वार में इसी पार्किंग का नीलाम एक करोड रुपए अधिक यानी 9 करोड़ रुपए में लेने संबंधित पत्र सिंचाई विभाग को दिया था। बावजूद इसके सिंचाई विभाग के अधिकारी ने 7 मार्च को ही आधी रात को अमरोहा की रिधिम एसोसिएट को पार्किंग का कब्जा करा दिया। रिधिम एसोसिएट के लिए सिंचाई कार्य मंडल हरिद्वार के अधिकारियों ने जिस तरह रात-दिन एक कर नियम शर्तों को रद्दी की टोकरी में डाल पार्किंग का ठेका दिया है, उससे डबल इंजन वाली त्रिवेंद्र सरकार का भ्रष्टाचार मुक्त राज्य का दावा दम तोड़ता नजर आ रहा है। सिंचाई कार्य मंडल हरिद्वार के अधिकारियों का यह हाल तब है। जबकि विभागीय मंत्री सतपाल महाराज जनपद हरिद्वार के प्रभारी मंत्री भी हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार सिंचाई विभाग हरिद्वार के ए क्लास में पंजीकøत ठेकेदारों ने पूरी नीलामी प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए हाईकोर्ट का रुख किया है। अमरोहा निवासी ठेकेदार को पार्किंग देने के लिए नियम शर्तों को बदलकर सरकार को करोड़ों का नुकसान पहुंचाना प्रदेश के लिए शुभ संकेत नहीं है।

You may also like