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Uttarakhand

रिवर्स पलायन कर साहसिक पर्यटन से आर्थिकी मजबूत करते युवा।  

 उत्तराखंड में जंगल से सटे कई ऐसे इलाके हैं। उनको टूरिस्ट डेस्टिनेशन के नाम पर विकसित किया जा सकता है क्योंकि यह बात भी बिल्कुल सही है कि उत्तराखंड में पर्यटन आर्थिकी का सबसे मजबूत जरिया है, जिसको देखते हुए कुमाऊं और गढ़वाल के अनेक इलाकों में पर्यटन व्यवसाय को एक नई पहचान भी मिली है। अल्मोड़ा जिले के सुदूरवर्ती क्षेत्र मर्चुला भी पर्यटन के लिहाज से किसी परिचय का मोहताज नहीं है लेकिन मूलभूत सुविधाओं के अभाव में पर्यटन व्यवसाय यहां तेजी नहीं पकड़ सका है। हालांकि कुछ लोग रिवर्स पलायन कर यहां के पर्यटन को एक नया आयाम देने की कोशिश कर रहे हैं। जिसको देखते हुए यहां 8 से 10 नवंबर तक मर्चुला महोत्सव का आयोजन भी किया जा रहा है। हल्द्वानी से करीब 75 किलोमीटर दूर कॉर्बेट से सटा हुआ इलाका है मर्चुला जो अल्मोड़ा जिले का सुदूरवर्ती गांव है, पर्यटन के लिहाज से वाह अति सुंदर यह क्षेत्र है प्राकृतिक सुंदरता ऐसी जैसे प्रकृति श्रृंगार करके बैठी हो पूरा इलाका वन्यजीव बहुल क्षेत्र है एडवेंचर, नाइट सफारी, रिवर राफ्टिंग समेत पर्यटन से जुड़े तमाम कारोबार यहां संभव है लेकिन पर्यटन व्यवसाय आगे कैसे बढ़े पर्यटन व्यवसाई इस बात से चिंतित हैं, अजीत नेगी लगभग 15 देशों में रह चुके है साथ कि वही नौकरी करते थे लेकिन पहाड़ के प्रति प्यार उनको खीच लाया औऱ मर्चुला में रिसोर्ट बना डाला, अजीत की तरह अन्य पर्यटन व्यवसाई है जो यहां पर्यटन व्यवसाय को बढ़ाना चाह रहे हैं उनके मुताबिक यदि सरकार पर्यटन की नीतियों में थोड़ा लचीलापन लाए तो प्यार करती सुंदरता से जुड़े ऐसे तमाम इलाकों को टूरिस्ट डेस्टिनेशन के नाम पर विकसित किया जा सकता है जहां पर्यटक आएगा आमदनी पर है कि लोकल लोगों को रोजगार मिलेगा और इससे पलायन भी रुकेगा।
                        मर्चुला घूमने आए पर्यटक भी यहां की सुंदरता के दीवाने हैं, उनके मुताबिक सरकार अपनी नीतियों के जरिये पर्यटन को बढ़ावा देने की कोशिश करे तो पलायन कर चुके लोग टूरिज्म को रोजगार के लिहाज़ से अपनायेंगे, जिससे पलायन भी रुकेगा, और स्थानीय लोगों की आर्थिकी भी मजबूत होगी। वही प्रदेश सरकार भी पलायन को लेकर बेहद संजीदा है, रिवर्स पलायन को देखते हुए उत्तराखण्ड का मूल निवासी अपनी प्राकृतिक श्रृंगार समेटे मातृभूमि में वापस आने की कोसिस करने लगे है। जिला प्रशासन की माने तो वह साहसिक पर्यटन के साथ साथ अन्य पर्यटन के क्षेत्र में बेहतर कार्य करने की कोसिस कर रही है जिससे उत्तराखण्ड में पर्यटन बड़ सके साथ ही स्थानीय लोगो को रोजगार मिल सके। मर्चुला जैसे टूरिस्ट डेस्टिनेशन पर जिन लोगों ने रिवर्स पलायन किया उनके जरिये कई स्थानीय लोगो को रोजगार मिला,  कुछ लोग सैफ, होटल मैनेजर के रूप में दिल्ली, मुम्बई और हरियाणा जैसे राज्यो में काम करते थे लेकिन अब घर वापसी कर पर्यटन कारोबार से जुड़ गए हैं, लिहाज़ा नौकरी भी कर रहे हैं और घर भी संभाल रहे हैं। इस तरह के कई स्थानीय लोग अपना परिवार का भरण पोषण कर रहे है। देवभूमि में रिवर्स पलायन होना उत्तराखण्ड के भविष्य के लिए अच्छा संकेत है। क्योकि पलायन के वजह से उत्तराखण्ड के हजारो गांव आज उजड़ चुके है।

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