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Uttarakhand

परिवार में फूट डालता भाजपा विधायक…

कहते है राजनीति में कूटनीति का अहम योगदान है। राजनीति के साथ साथ कूटनीति उत्तराखण्ड में इन दिनों जमकर देखने को मिल सकती है। सूबे में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव का रण छिड़ चुका है सब अपने अपने उम्मीदवारों के साथ जनता के बीच अपने पक्ष में वोट की अपील करते नज़र आ रहे है। इसी बीच लालकुआं विधायक की कूटनीति भी अजब थी जिसमे एक ही परिवार का एक भाई भाजपा का खाँटी नेता उसे जिला पंचायत सदस्य में भाजपा का समर्थन न दिलवा कर उसी के दूसरे भाई को समर्थन दिलवा दिया। विधायक महोदय द्वारा भाजपा को कार्यकर्ता की पार्टी का तमका लगाकर डुगडुगी बजवाई जाती है, उसके उलट कार्य करने और अपने निजी स्वार्थ को लेकर एक परिवार में फूट डालने का काम कर दिया, कोई नही अब आपको चुनने वाली जनता आपके फैसले को हर चौराहों पर मनोरंजन का साधन बना चुकी है। हल्दूचौड़ जग्गी बंगर से जिला पंचायत सदस्य प्रत्याशी मोहन बिष्ट और इंदर बिष्ट दोनो भाई है। मोहन बिष्ट भाजपा के कार्यक्रमो की जीवन भर दरी बिछाता रहा पर विधायक की तानाशाही इतनी हावी थी कि मज़बूरन निर्दलीय चुनाव लड़ने का मन बनाना पड़ा, बागी मोहन बिष्ट के लिए जनता भी समर्थन में आने लगी। कही चुनावी दंगल में दोनो भाइयों के बीच वर्चस्व की लड़ाई में तीसरा कांग्रेस समर्थित हिमांशु कबड़वाल बाजी न मार जाए। भाजपा के बागी प्रत्याशी मोहन बिष्ट ने लालकुआं विधायक पर आरोप लगाते हुए कहा कि विधायक ने उनके साथ विश्वास घात किया है, उनके परिवार से विधायक ने उन्ही के भाई को भाजपा समर्पित जिला पंचायत सदस्य का टिकट दिलवा कर आपसी मतभेद करवाने और दोनों भाइयों का राजनैतिक कैरियर खत्म करने में तुले है। वही दूसरी तरफ कालाढूंगी विधायक भी अपने क्षेत्र दो जिला पंचायत सदस्य प्रत्याशियों के नामंकन में शिरकत करते नज़र आए, यानी चिट भी अपनी और पट भी अपनी, क्योंकि विधायक महोदय को विधानसभा चुनाव में दोनो का समर्थन चाहिए चाहे कोई हारे या जीते। पहाड़ में साक्षात देवी देवताओं का वास होता है पर अब राजनीति के शूरवीरों ने पहाड़ की भोली भाली जनता पर सिर्फ और सिर्फ वोट बैंक को लेकर राजनीति की उनके उत्थान के नाम पर सफेदपोशो को सांप सूंघ जाता है।

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