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Uttarakhand

मंत्री की मेहरबानी संदेह के घेरे में उच्च शिक्षा निदेशालय…

उच्च शिक्षा मंत्री की मेहरबानी कहो या फिर उच्च शिक्षा निदेशक की चालाकी, बिना शासनादेश की नियुक्तियां उच्च शिक्षा निदेशालय को संदेह के घेरे में खड़ा करता है। उच्चशिक्षा निदेशक दफ्तर के बाहर धरने पर बैठे विजिटिंग फैकल्टी प्राध्यापकों ने निदेशालय के अधिकारियों पर मनमाने ढंग से नियुक्ति देने का आरोप लगाया है। वर्ष 2014 से डिग्री कॉलेजों में पढ़ा रहे उनके साथ के 17 प्राध्यापकों को दूसरे कॉलेजों में तैनाती दे दी गई है। जबकि वह डेढ़ माह से नौकरी के लिए शासन से लेकर निदेशालय के चक्कर काटते-काटते परेशान हो चुके हैं। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि उन्हें जल्द ही नियुक्ति नहीं दी गई तो वह निदेशालय दफ्तर में आमरण अनशन शुरू कर देंगे। प्रदेश के अलग अलग जिलों से आये विजिटिंग फैकल्टी का आरोप है की वह सन  2014 से राज्य के विभिन्न डिग्री कॉलेजों में पढ़ा रहे हैं। आयोग से स्थाई प्राध्यापकों की तैनाती हो जाने के बाद डेढ़ माह पहले 25 प्राध्यापकों को नौकरी से हटा दिया गया था। तमाम प्रयासों के बावजूद उनके साथ के पहुंच वाले 17 प्राध्यापकों को दूसरे डिग्री कॉलेजों में तैनाती दे दी गई है। जबकि 9 प्राध्यापकों को अब तक तैनाती नहीं दी गई है। जबकि उन्हें जून 2020 तक कॉलेजों में पढ़ाने के लिए नियुक्ति पत्र जारी किया गया है। पिछले डेढ़ माह से वह निदेशालय से लेकर शासन के अधिकारियों के चक्कर काटते-काटते परेशान हो चुके हैं। लेकिन उन्हें निदेशालय से यह कहकर दूसरे कॉलेजों में तैनाती नहीं दी जा रही है कि शासन से आदेश मिलने पर ही उन्हें तैनाती दी जाएगी। लेकिन 17 प्राध्यापकों को आदेश के बगैर ही उच्चशिक्षा निदेशक के स्तर से उन्हें दूसरे कॉलेजों में तैनाती दे दी गई है।  जबकि वह डेढ़ माह से दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर हैं। निदेशक कार्यालय के बाहर धरने पर बैठे तो उच्च शिक्षा निदेशक से भी कोई जबाब देते नही बना, विभाग पर दबाव में जिन लोगों को नियुक्ति देने का आरोप लग रहा है इस मामले में उनका जबाब मिला की उन लोगो की पूरी प्रक्रिया में कोई कमी नही थी, यदि उनको भी निरस्त कर देंगे तो गाज़ सभी गेस्ट फेकल्टी पर गिरेगी, लिहाज़ा शासनादेश का इंतजार किया जा रहा है।

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