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Uttarakhand

स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के नाम पर स्कूल संचालित करते उनके मित्र…

(संजय स्वार)

महान स्वतंत्रता से संग्राम सेनानी पद्मश्री देवकीनंदन पांडे को हालांकि भारत सरकार ने पद्मश्री से सम्मानित किया था लेकिन यह सम्मान उनके लिए नाकाफी था। 1901 में जन्मे अनेक प्रतिभा के धनी देवकीनंदन पांडे ने काशी हिंदू विश्वविद्यालय से 21 वर्ष की आयु में स्नातक किया।। इस दौरान महात्मा गांधी के असहयोग आंदोलन से प्रभावित होकर अपना अध्ययन बीच में ही छोड़कर आचार्य कृपलानी के साथ हो लिए। इस दौरान वो धीरेंद्र मजूमदार, राजा राम शास्त्री, विचित्र नारायण शर्मा के साथ मिलकर असहयोग आंदोलन का हिस्सा बन गए।राजनैतिक कुशाग्रता के साथ उनका गीता अध्ययन भी गहन था। आज़ादी से पूर्व उनका स्वतंत्रता संग्राम में महत्त्वपूर्ण योगदान था। भारत रत्न से सम्मानित गोविंद बल्लभ पंत, हरगोविंद पन्त, कुमाऊँ केसरी बद्रीदत्त पांडे के संरक्षण में देवकीनंदन पांडे ने कोंग्रेस की विचारधारा को गाँव गांव तक पहुंचाने में विशेष भूमिका निभाई। गोविंद बल्लभ पंत और हरगोविंद पन्त के कहने पर सरकारी नौकरी छोड़कर जब भगीरथ पांडे ने अल्मोड़ा जिले के ताड़ीखेत में कोंग्रेस की स्वराज प्राप्ति की पाठशाला को लोगों तक पहुंचाने के लिए ताड़ीखेत में प्रेम विधालय की स्थापना की तो देवकीनंदन पांडे उनके सहयोगी बन गये। 1921 में जब उत्तरायणी मेले के अवसर पर बागेश्वर में जब भगीरथ पांडे को गिरफ्तार किया गया तो भगीरथ पांडे के राजद्रोह की अवधि में देवकीनंदन पांडे ने बड़े ही सूझबूझ से प्रेम विद्यालय का संचालन किया।  1986 में नैनीताल में उनका निधन हो गया।
देवकीनंदन पांडे जी ने बागेश्वर के चामी में एक आश्रम स्थापित किया।इस आश्रम को स्थापित करने के लिए चामी गांव के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी राम दत्त लोहनी ने अपनी जमीन दी थी। इस आश्रम की स्थापना के बाद उन्होंने स्व.श्रीकृष्ण जोशी द्वारा अविष्कृत ऊन कताई चरखों में सुधार करके उसे आधुनिक रूप दिया और इस चरखे का नाम श्रीकृष्ण चरखा रखा। इस चरखे के आने के बाद ऊन कताई क्षेत्र में क्रांति आ गई। इस कार्य में जीत सिंह कारीगर का सहयोग पांडे जी को मिला। भगीरथ पांडे के जेल जाने के पश्चात ताड़ीखेत प्रेम विद्यालय का संचालन देवकीनंदन पांडे ने बड़ी सूझबूझ से किया। यहां बच्चों को स्वराज की शिक्षा के साथ गलीचे, कालीन बनाना सिखाया जाता था। पांडे जी बच्चों को अमरकोश, सँस्कृत व सँस्कृत व्याकरण पढ़ाते थे। स्वतंत्रता संग्राम में उनकी सक्रिय भागीदारी के चलते 1932 में ब्रिटिश सरकार उन्हें ज़िंदा या मृत पकड़ने पर पांच हजार का ईनाम घोषित किया था। देवकीनंदन पांडे के समर्पण को देखते हुवे उन्हें उतर प्रदेश सरकार ने टेरपेन्टाइट फैक्ट्री बरेली और पर्वतीय विकास बोर्ड के निदेशक पद पर बिठाया।
2005 में ताड़ीखेत के मदनमोहन पपनै ने भतरोजखान में समाजसेवियों के सहयोग से देवकीनंदन पांडे शिक्षा समिति का गठन किया। इस समिति ने क्षेत्र में उच्चकोटि की शिक्षा देने के उद्देश्य से 6वीं से 8वीं तक जूनियर हाईस्कूल खोलने का निर्णय लिया। कुछ समय पश्चात 2012 में इसे हाईस्कूल, 2016 में इंटरमीडिएट तक संचालित करने का निर्णय लिया गया। क्षेत्र की जनता की मांग पर समिति ने इसे प्राथमिक से इंटर तक अंग्रेजी माध्यम से संचालित करने का निर्णय लिया। आज डी एन पी सीनियर सेकेंडरी स्कूल भतरोजखान क्षेत्र कीअग्रणी शैक्षिक संस्था है। विद्यालय के प्रबंधक ललित मोहन करगेती का कहना है कि पहाड़ से लगातार हो रहे पलायन से हमारा विद्यालय भी अछूता नहीं है। लेकिन स्व. देवकीनंदन पांडे की स्मृति हमारा मनोबल ऊँचा बनाये रखती है। इस विद्यालय के निर्माण में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, पूर्व विधायक अजय भट्ट, राज्यसभा सांसद प्रदीप टम्टा, पूर्व विधायक स्व प्रताप बिष्ट, रेवाधर जोशीसहित अनेक समाज सेवियों के सहयोग से ये विद्यालय निरन्तर प्रगति पर है। शायद यही सच्ची श्रद्धांजलि है स्वतंत्रता संग्राम सेनानी देवकीनंदन पांडे को क्षेत्रवासियों की।
उत्तराखंड विद्यालयालयीय शिक्षा परिषद ने वर्ष 2018-2019 के लिये 50 विद्यालयों को पंडित दीनदयाल उपाध्याय शैक्षिक उत्कृष्टता पुरष्कार के लिये चयनित किया है,यह पुरष्कार 5 नवम्बर को देहरादून मे एक समारोह मे दिया जाएगा ।जिसमें अल्मोड़ा जिले में डीएनपी सीनियर सेकेंडरी स्कूल भतरौजखान ने इंटर वर्ग के क्वालिटी वेटेज मे ऐ ग्रेड के साथ 263.60 अंक प्राप्त कर जिले मे तीसरा स्थान प्राप्त किया है। वहीं हाईस्कूल वर्ग के क्वालिटी वेटेज  287.50 अंक प्राप्त कर ऐ ग्रेड के साथ भिकियासैंन तहसील के सर्वश्रेष्ठ विद्यालय  मे सम्मिलित हो गया है।

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