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Uttarakhand

आखिर क्यों अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है कांग्रेस…

कांग्रेस इन दिनों अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है। कांग्रेस में सब नेता हो गए पर कार्यकर्ताओ को दूरबीन से ढूढना पड़ रहा है। हल्द्वानी में कांग्रेस प्रदेश उपाध्यक्ष के एक कार्यक्रम में मंच पर बैठे कांग्रेस नेता ज्यादा थे और उनको सुनने वाले कार्यकर्ता मंच के नेताओ से कम देखने को मिले। कांग्रेस के कार्यकर्ता जितने भी कार्यक्रमो में भाग ले रहे है वह भी मायूस नज़र आने लगे है। मानो कि अब पार्टी के उभरने की उम्मीद भी खत्म हो चुकी हो। कांग्रेस के बड़े नेताओ को इन दिनों सीबीआई ने अपने रडार में रखा है। उत्तराखण्ड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत को सीबीआई अपने शिकंजे में जकड़ने का प्रयास कर रही है। इन विपरीत परिस्थितियों में हरीश रावत के साथ प्रदेश कांग्रेस कमेटी खड़े रहने की बात कह रही है। पार्टी के आंतरिक गुटबाजी के चलते जब हल्द्वानी में हरीश रावत के नाम पर कांग्रेस ऑफिस की चावियां खो जाती है।  उस स्थिति में कैसे माना जाय कि आज हरीश रावत के साथ पार्टी एक मंच पर खड़ी है। राजनीति कम कूटनीति पर ज्यादा ध्यान देने वाले ये महारथियों को हरीश रावत पिथौरागढ़ विधानसभा चुनाव के प्रबल दावेदार नज़र आने लगे है। जो आज कांग्रेस कार्यकर्ता विहीन होने की स्थितियां पैदा हो रही है वह कारण भी यही महारथी है जिनके पास अपने अलावा कोई भी समर्थक साथ खड़ा नही मिल पाता। इन नेताओ में कुर्ता झाड़कर सिर्फ मीडिया के फ्रेम में आने का हुनर कूटकूट कर भरा है।

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