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Uttarakhand

आखिर क्यों तेजी से बढ़ रहा है मानव-वन्यजीव संघर्ष…

उत्तराखंड में मानव -वन्यजीव संघर्ष लगातार बढ़ता ही जा रहा है। हाल ही में इन घटनाओं में बहुत तेजी से वृद्धि हुई है, कुमाऊ से लेकर गढ़वाल तक अनेक जगहों पर तो वन्यजीवों ने लोगों के घरों में घुसकर आदमी को अपना निवाला तक बना डाला है, इससे वन विभाग में हड़कंप तो मजा ही है साथ ही यह वन विभाग के उच्च अधिकारियों के लिए बहुत ही चिंता का विषय भी बनता जा रहा है, खासकर पौड़ी, बागेश्वर और अल्मोड़ा जैसे जिलों में गुलदार का खौफ काफी हद तक बढ़ चुका है, जिसको देखते हुए लोग सहमें हुए है तो अधिकारियों के माथे पर भी चिंता की लकीरें बढ़ गई है, मुख्य वन संरक्षक जयराज के मुताबिक अब समय आ गया है की मानव और वन्यजीवों को साथ साथ रहना पड़ेगा और इसकी आदत भी मानव को अपने रोजमर्रा की जिंदगी में अपना लेने की आवश्यकता है, क्योंकि यह बात सच है कि जंगलों में वन्यजीवों के खाने-पीने और उनके लाइफ स्टाइल में बहुत सारे परिवर्तन हुए हैं, साथ ही जंगलों में मानव का हस्तक्षेप भी बड़ा है जिससे वन्यजीव खासी प्रभावित हुए हैं, इसलिए लोगों को यह समझना होगा की ही जंगलों में बढ़ती मानव की गतिविधियों को रोका जा सकता है, ना ही वन्यजीवों की गतिविधियों को रोका या बदला जा सकता है, इसलिए दोनों को समन्वय बनाकर चलना पड़ेगा, हालांकि जिन जगहों में वन्यजीवों का बड़ा आतंक है वहां नियमों के मुताबिक उनको मार गिराया भी जा रहा है, लेकिन जिस लिहाज से मानव वन्यजीव संघर्ष में तेजी आई है उससे मानव को यह तय करना पड़ेगा कि वह अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में बदलाव लाएं जिससे वन्य जीव संघर्ष की नौबत ही ना आए और आदमी ऐसी घटनाओं के प्रति सजग रहें, क्योंकि यह बात तो तय है कि मानव को भी इसी धरती पर रहना है और वन्यजीवों को भी अपनी जिंदगी जंगलों में ही बितानी है, इसलिए जहां ऐसा लगेगा कि वन्यजीवों का खौफ आदमी के लिए घातक होता जा रहा है वहां पर पिजरा लगाकर इन घटनाओं को नियंत्रित किया जा सकता है, और बहुत ही ज्यादा पैनिक होने पर वन्यजीवों को मारा भी जा सकता है।

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