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Uttarakhand

गौ भक्त राज में गौ माता की सरकारी नीलामी

त्रिवेंद्र रावत के शासनकाल में दशकों से वृद्ध गायों का संरक्षण करते आ रहे ऋषिकेश स्थित गौसदन को सरकारी जमीन पर अतिक्रमण करार देकर ध्वस्त कर दिया था। गौशाला को अपना आदर्श मानने वाली भाजपा के राज में अब राज्य का पशुपालन विभाग वृद्ध हो चुकी गायों की नीलामी कर ‘गौसेवा’ का अद्भुत उदाहरण सामने रख रहा है

उत्तराखण्ड की भाजपा की सरकारें गौ सेवा के नाम पर बड़े-बड़े दावे करती रही है। करोड़ों रुपए गौशालाओं के निर्माण और निराश्रित गौ वंशीय पशुओं के लिए हर वर्ष अनुदान दिया जाता है। यह अनुदान राज्य भर में निराश्रित गौ वंश के जीवन-यापन और उनकी देखभाल के लिए दिया जाता है। लेकिन इसी गौ सेवा की असल हकीकत स्वयं सरकार के पशुपालन विभाग ने ही खोल कर रख दी है। जिसमें जो गाय अब दूध कम दे रही है उनको सार्वजनिक नीलामी के जरिए बेचा जा रहा है। हैरत की बात यह है कि इन गायों में कई गाय ऐसी भी है जो अब दूध नहीं दे रही है उनको भी नीलाम किया जा रहा है। साथ ही कम आयु के बछड़ों को फ्री में दिया जा रहा है।

पशुपालन विभाग के ऋषिकेश स्थित पशुलोक के परियोजना निदेशक भेड़ एवं उन प्रसार संस्थान पशुलोक द्वारा समाचार पत्रों में एक टेंडर 21-04-2022 जारी किया गया है जिसमें पशुलोक के द्वारा संचालित डेयरी यूनिट के अनुपयोगी गौवंश्ीय पशुओं जिसमें 37 गाय और 17 नर बछड़े शामिल हैं, की नीलामी की सूचना दी गई है। नीलामी के लिए चिन्हित पशुओं की जानकारी विभाग की बेवसाइड पर दी गई है। इन सभी को 5 मई 2022 को सार्वजनिक बोली के तहत बेचा जाएगा। इसमें ‘पहले आओ, पहले पाओ’ का भी उल्लेख किया गया है। बेवसाइड के अनुसार नीलामी द्वारा बेचे जाने वाले पशुओं में 11 जर्सी नस्ल की गाय हैं तो 24 फ्रीसवाल नस्ल की है तथा दो गाय अन्य नस्ल की है। इसके साथ 9 जर्सी नस्ल और 5 फ्रीसवाल नस्ल तथा तीन अन्य नस्ल के नर बछड़े हैं। इन पशुओं की आयु और दूध देने की क्षमता का भी उल्लेख किया गया है। सबसे अधिक आयु की गाय दस वर्ष तथा सबसे कम आयु की गाय पांच वर्ष की है। इन सभी गायों का अनुमानित नीलामी मूल्य 4 हजार से 22 हजार रुपए रखा गया है। नर बछड़ों की कोई कीमत नहीं रखी गई है।

यह एक सरकारी विभाग खास तौर पर पशुलोक की सामान्य प्रक्रिया हो सकती है जिसके चलते विभाग इस तरह के पशुओं की नीलामी कर रहा है। लेकिन यही पशुलोक है जिसने ऋषिकेश में वर्षों से बगेर किसी सरकारी अनुदान के संचालित होने वाला गौधाम ध्वस्त कर दिया था और उसकी सभी बूढ़ी बीमार और निराश्रित गायों की देखभाल तथा उनके चारे पानी की व्यवस्था का जिम्मा लिया था। ‘दि संडे पोस्ट’ ने उत्तराखण्ड की कथित गौसेवक भाजपा सरकार द्वारा 20 वर्षों से बगैर किसी सरकारी सहायता से चलाए जा रहे गौधाम को ध्वस्त करने का समाचार ‘गौ भक्त राज में बेबस गाय’ शीर्षक से प्रकाशित किया था जिसमें खुलासा किया गया था कि प्रदेश की भाजपा सरकार और खास तौर पर गौ सेवक के तौर पर अपने आप को प्रचारित करने वाले पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की सरकार द्वारा शासन और स्थानीय प्रशासन के साथ-साथ पशुपालन विभाग द्वारा हाईकोर्ट के एक आदेश की आड़ में किस तरह से बड़ा षड्यंत्र रचकर गौधाम को ध्वस्त किया। साथ ही इस बात की भी आश्ांका भी जताई थी कि करोड़ों की भूमि को वेलनेस सेंटर की नीति के तहत दिए जाने के चलते गौधाम को हटाया गया।

गौरतलब है कि ऋषिकेश नगर और उसके आस-पास की निराश्रित और असहाय, बीमार गायों की देखभाल एवं गौधाम के संचालन के लिए पशुलोक द्वारा स्वयं श्री गौमाता एवं सर्वजीव सेवा समिति ऋषिकेश को गौधाम स्थापित करने के लिए अनुउपयोगी तिकोनिया भूमि दी गई थी। तत्कालीन एनडी तिवारी सरकार के समय इसके लिए शासनादेश भी जारी किया गया था और पशुलोक द्वारा गौ तस्करी से छुड़ाई गई और बीमार बूढ़ी तथा आवारा गौवंश के निर्वाह के लिए चारे की व्यवस्था, स्वास्थ्य परीक्षण आदि के लिए बकायदा एक चिकित्सक की नियुक्ति तक पशुलोक द्वारा की गई थी। इन सबके बावजूद राज्य सरकार ने गौधाम को अवैध कब्जे की श्रेणी में रख हाईकोर्ट के आदेश की आड़ में ध्वस्त कर दिया। जबकि गौधाम और पशुलोक के बीच विवाद देहरादून न्यायालय में विचाराधीन था लेकिन ऋषिकेश उपजिलाधिकारी की अदालत में समिति के पक्ष को चुने बगैर उसे ध्वस्त कर दिया गया। भारी जन विरोध को देखते हुए पशुलोक द्वारा यह निर्णय लिया गया कि गौधाम में रहने वाली सभी गौवंशों की देखभाल और उनके स्वास्थ्य के अलावा चारा-पानी आदि की व्यवस्था पशुलोक द्वारा की जाएगी। इसके बाद सभी गायों आदि को पशुलोक के बंद मैदान और टीनशेड में रख दिया गया।

टेंडर निकालकर हुई गायों की नीलामी

पशुलोक प्रशासन की गौवंशों की हकीकत कुछ ही समय के बाद खुलकर सामने आ गई जब गौधाम की 23 गायों की मौत हो गई। श्री गौमाता एवं सर्वजीव सेवा समिति ऋषिकेश इन मौतों के लिए पशुलोक प्रशासन को ही जिम्मदार मानते हैं। उनका कहना है कि गौधाम की गायों को केवल कुछ समय के लिए पशुलोक में रखा गया जिससे लोगों की नाराजगी समाप्त की जा सके। जैसे ही मामला शांत हुआ पशुलोक ने जानबूझ कर गायों को बाड़े से बाहर निकालकर भगा दिया। न तो इन गायों को चारा दिया गया और न ही इनके लिए दवा आदी का प्रबंध किया गया जिससे 23 गायों को एक महीने में ही मर गई थी। अब पशुलोक अपनी उन गायों को जो उसकी दूधशाला में दूध कम दे रही है, को नीलाम कर रहा है। इन गायों की आयु अब इतनी हो चुकी है कि उनकी दूध देने की क्षमता लगातार कम हो रही है। जिसके चलते पशुलोक विभाग इन गायों की सेवा करने के बजाय इन्हें नीलाम कर रहा है।

श्री गौमाता एवं सर्वजीव सेवा समिति ऋषिकेश के सदस्य और पूर्व में पशुलोक विभाग में कार्यरत रहे जेपी त्रिपाठी का कहना है कि भाजपा सरकार गौसेवा का दावा करती है। गौसेवा के लिए पशुलोक सबसे ज्यादा उपयोगी है। इन गायों को अब दूध के लिए ज्यादा से ज्यादा दो साल तक ही पाला जा सकता है। इसके बाद इन गायों का पालन करना बेहद मुश्किल होगा तब यह गायें गुपचुप तरीके से कसाई खानों में काट दी जाएगी या फिर सड़कों पर आवारा फिरती रहेगी। इसी तरह से नर बछड़ों का भी हाल है। इनको भी बगैर कीमत के पशुलोक दे रहा है। इनका हाल भी आवारा पशुओं के जेसे ही होगा।

वर्षों से संचालित होने वाले हमारे गौधाम को ध्वस्त करके हमारी गायों को पशुलोक विभाग देखभाल के लिए ले गया था जिनमें एक महीने में ही 23 गाय मर गई थी। तब पशुलोक ने कोई देखभाल नहीं की। अब अपनी गायों, जो कि दूध कम दे रही है को नीलाम कर रहा है। हमने तो बगैर किसी लोभ-लालच के बीमार गायों की सेवा की है जबकि पशुलोक तो इन गायों का दूध अपने कर्मचारियों और अपने लिए बेचता रहा है। जब दूध कम हो गया तो बेचने की तैयारी कर रहा है। पशुलोक विभाग कभी भी गौसेवा न करता था और न करने वाला है।
संजय शास्त्री, महासचिव, श्री गौमाता एवं सर्वजीव सेवा समिति

हम लोग तो बगैर किसी लालच के गायां की सेवा कर रहे थे। हमारे यहां तो बगैर दूध देने वाली गायें थी। देश-प्रदेश में भाजपा की सरकार है जो अपने आप को सच्चा गौ भक्त कहती है। इसी भाजपा सरकार में हमारे गौधाम को बुल्डोजर लगाकर तोड़ दिया, कोई कुछ नहीं कह पाया। हमारे गौधाम की गायों को पशुलोक देखभाल के लिए ले गया लेकिन उनमें अब तो शायद सभी मर चुकी होगी। अब पशुलोक अपनी ही गायों, जो दूध कम दे रही है और उनमें अब दूध देने की क्षमता कम हो चुकी है, को नीलाम कर रहा है। यह नीलामी भाजपा सरकार के मुंह पर एक तमाचा है जो अपने आप को गौ सेवक कहती है। जब गाय को मां मान लिया है तो अपनी मां की नीलामी कोई कैसे कर सकता है। लेकिन इस भाजपा सरकार में सब संभव है। हम इसका विरोध करते हैं और इस झूठी गौ सेवक सरकार की कड़ी से कड़ी निंदा करते हैं।
डॉ. दिनेश शर्मा, अध्यक्ष, श्री गौमाता एवं सर्वजीव सेवा समिति

यह नियम के अनुसार किया जा रहा है। पशुलोक में विभाग की डेयरी यूनिट में इस तरह पशुओं को पशुपालकों को दिया जाता है जिसके लिए नियमानुसार नीलामी के तहत बिक्री की जाती है। बछड़ों को फ्री नहीं दिया जा रहा है। इस तरह के बछड़े डेयरी वालों और गौशालाओं को दिए जाते हैं। लेकिन अब पशुलोक ऋषिकेश की यह यूनिट बंद करने का निर्णय लिया गया है। इसी तरह से भराड़ीसैंड में भी एक यूनिट स्थापित की गई है। अब दोनों यूनिटों को एक कर दिया गया है और केवल भराड़ीसैंण में ही यह यूनिट काम करेगी। जहां दुधारू गाय की बछियों को ही रखा जाएगा। नई तकनीक से अब केवल बछिया ही पैदा की होगी जिसे हम दो वर्ष तक देखरेख और पालन-पोषण करेंगे फिर उसे 50 हजार प्रति बछिया में पशुपालकों को दिया जाएगा। इसमें संकर नस्ल और भारतीय नस्ल दोनों ही प्रकार की प्रजातियां होंगी। गौ सदन की गायों के लिए पशुलोक में हमने जरूर रखा था लेकिन इसके लिए कोई बजट नहीं होता है। पशु कल्याण बोर्ड से ही इसके लिए खर्च दिया जाता है। पशुलोक और पशुपालन विभाग केवल निराश्रित पशुओं के स्वास्थ्य और चिकित्सा आदी का काम करता है उसका पालन, रखरखाव आदी विभाग नहीं करता है। यह पशुपालन बोर्ड के ही अधीन होता है।
जगमोहन सिंह असवाल, परियोजना निदेशक, भेड़ एवं उन प्रसार संस्थान पशुलोक ऋषिकेश

 

 

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