[gtranslate]

उत्तर प्रदेश और उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री रहे एनडी तिवारी के पुत्र रोहित शेखर की 16 अप्रैल को दिल्ली में संदिग्ध मौत के बाद चारों तरफ शेक की लहर है। हर तरफ रोहित के संघर्ष भरे जीवन को लेकर काफी चर्चे हो रहे हैं। कोई रोहित शेखर की जीवनी को ‘लावारिस’ फिल्म की कहानी की तरह देख रहा है, तो कोई इस बात को याद कर रहा है कि कैसे इस युवा ने कड़ा संघर्ष कर अपना हक हासिल किया। जब रोहित शेखर को अदालत से न्याय मिला था तब उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा था, ”शायद मैं दुनिया का पहला आदमी हूं जिसने खुद को जायज साबित होने के लिए मुकदमा लड़ा। रोहित ने सात साल तक देश के सबसे प्रभावशाली नेताओं में से एक नारायण दत्त तिवारी के खिलाफ पितृत्व का केस लड़ा। सूबे के पूर्व मुख्यमंत्री स्व एनडी तिवारी के बेटे रोहित शेखर तिवारी ने अपना हक पाने के लिए सात साल तक लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी थी। रोहित ने 2005 में अदालत में यह दावा किया था कि नारायण दत्त तिवारी ही उनके असली पिता हैं। नौबत डीएनए टेस्ट तक पहुंची, जिसमें रोहित की बात सही साबित भी हुई। हालांकि नारायण दत्त तिवारी हमेशा इस बात से मुकरते रहे, लेकिन अंततः उन्हें रोहित को अपनाना पड़ा। अपनी कानूनी लड़ाई के दिनों में रोहित ने कहा था कि वे मेरे पिता हैं।

रोहित ने अपने हक के लिए जो संघर्ष किया वो भारतीय समाज में असाधारण है। उज्जवला शर्मा भी इसे खुलकर बेटे रोहित शेखर के साथ अपना हक पाने के लिए संघर्ष किया। इसी संघर्ष का नतीजा रहा कि उम्र के आखिरी पड़ाव में एनडी तिवारी को 89 साल में उज्जला शर्मा से शादी भी करनी पड़ी। तब 70 साल की उज्जवला को वैधानिक विवाह का दर्जा मिला था। हालांकि इस घटना को लेकर बाद में तमाम हास-परिहास होते रहे, लेकिन रोहित के संघर्षों ने समाज के सामने अलग मानक स्थापित किए।

याद रहे कि 70 के दशक में उज्जवला शर्मा ने अपने पति का घर अपने दो साल के बेटे, (रोहित के बड़े भाई) के साथ छोड़ दिया था। इसके बाद वे अपने पिता प्रोफेसर शेर सिंह के घर आकर रहने लगी थीं। उसी दौरान उनकी मुलाकात एनडी तिवारी से हुई। उस वक्त तिवारी एक उभरते हुए नेता थे और शेर सिंह के पारिवारिक दोस्त भी। इसी दौरान तिवारी और उज्जवला करीब आए और एक-दूजे के हो गए। रोहित शेखर के रूप में उन्हें एक पुत्र भी मिला। लेकिन तिवारी ने बच्चे को अपना नाम देने से इनकार कर दिया, क्योंकि वह एक शादीशुदा व्यक्ति थे और ये बात जब सार्वजनिक होती तो उनके राजनीतिक जीवन को धक्का लगता। इसलिए शेखर के जन्म प्रमाणपत्र पर उनकी मां के पति बीपी शर्मा का नाम लिखा गया। जब ये बात शेखर को पता चली तो उन्हें गुस्सा आया और अपमानित महसूस हुए। रोहित जब 15 साल के थे तो मां उज्जवला के साथ नारायण दत्त तिवारी से मिलने उनके घर पहुंचे थे। लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद भी उन्हें मिलने नहीं दिया गया था।

निराश होकर जब रोहित अपनी मां के साथ घर लौटे तो उनकी नानी ने सच उजागर करते हुए कह दिया कि वह नारायण दत्त तिवारी का बेटा है। इसके बाद रोहित छोटी उम्र में ही कोर्ट- कचहरी के चक्कर लगाते रहे। यहां तक कि कोर्ट ने जब यह कह दिया कि नारायण दत्त तिवारी का डीएनए टेस्ट कराया जाए तो इस पर भी वह बचते रहे। आखिर में कोर्ट की सख्ती के बाद डीएनए टेस्ट हुआ जिसमें साबित हुआ कि रोहित नारायण दत्त तिवारी के ही बेटे हैं। इसके बाद तिवारी ने ना केवल रोहित को अपना बेटा स्वीकार किया, बल्कि अपनी संपत्ति भी उसके नाम कर दी। बाद में तिवारी रोहित को अपनी राजनीतिक विरासत का वारिस बनाने के लिए भी तैयार थे। इसके लिए उन्होंने कांग्रेस से लेकर सपा और बाद में भाजपा के साथ भी हाथ मिलाया। लेकिन सिर्फ मुलायम सिंह यादव और उनके पुत्र अखिलेश यादव के सिवा कोई भी रोहित को राजनीतिक सहारा देने के लिए तैयार नहीं हुआ। तब रोहित को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने राज्यमंत्री का दर्जा देकर तिवारी की लाज रखी। गत वर्ष रोहित की मध्य प्रदेश की अपूर्वा से शादी भी हो गयी थी। इस दौरान वह दिल्ली में मां उज्जवला और पत्नी अपूर्वा के साथ रह रहे थे। 11 अप्रैल को रोहित अपनी मां के साथ हल्द्वानी वोट डालने भी गए थे। 13 अप्रैल को वह उत्तराखण्ड से दिल्ली लौट आए थे।

You may also like

MERA DDDD DDD DD