[gtranslate]
Uttarakhand

फिर कठघरे में मित्र पुलिस

उत्तराखण्ड की ‘मित्र पुलिस’ अपनी कारगुजारियों से अक्सर चर्चाओं के केंद्र में रहती है। जनपद ऊधमसिंह नगर में प्लॉट के एक विवाद को लेकर पुलिस ने कानून के खिलाफ काम किया है। जिन लोगों का प्लॉट है उन्हीं को अवैध हिरासत में रखा जाना ‘मित्र पुलिस’ पर सवाल उठता है। पुलिस पर आरोप है कि वह एक प्रभावशाली व्यक्ति के प्रभाव में आकर जमीन मालिकों को ही परेशान कर रही है। प्लॉट के मालिकों की निर्माण सामग्री तक को पुलिस ने जब्त कर लिया। पुलिसिया उत्पीड़न के खिलाफ पीड़ित पक्ष हाईकोर्ट की शरण में गया है जहां से उसे न्याय मिलने की उम्मीद है

कुछ अर्सा पूर्व रामनगर के जिम कार्बेट नेशनल पार्क में एक रिसॉर्ट मैनेजर को जिस तरह से ‘अरनेश कुमार बनाम बिहार राज्य’ मामले में सुप्रीम कोर्ट की गाईड लाईन के खिलाफ जाकर रामनगर पुलिस द्वारा गिरफ्तारी की गई उससे पुलिस की कार्यप्रणाली पर प्रश्न चिन्ह् लगे थे। ताजा मामला ऊधमसिंह नगर जिले के काशीपुर का है जहां पुलिस पर ‘डीके बसु बनाम पश्चिमी बंगाल राज्य’ मामले में दिए गए सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों की अवहेलना के आरोप लग रहे हैं। गौरतलब है कि कुछ अर्सा पहले ही नैनीताल जिले के रामनगर में प्रदेश की ‘मित्र पुलिस’ रामनगर के एक रिसॉर्ट प्रबंधक को बिना नोटिस दिए ही गिरफ्तार कर लिया था। ‘अरनेश कुमार दिशा-निर्देश’ सर्वोच्च न्यायालय का एक ऐतिहासिक निर्णय है जिसके तहत ऐसे मामलों  में गिरफ्तारी एक अपवाद होती है, जहां सात साल से कम कारावास की सजा का प्रावधान हो। कार्बेट पार्क स्थित टाइगर कैंप रिसॉर्ट मामले में कुमाऊं मंडल के डीआईजी योगेंद्र रावत ने रामनगर कोतवाल अरूण सैनी को सस्पेंड कर किसी तरह वर्दी पर लगे दाग धोने के प्रयास किए लेकिन मात्र तीन दिन भीतर ही रसूखदार कोतवाल को बहाल भी कर दिया था। एक बार फिर ऐसा ही एक मामला पुलिस विभाग को कठघरे में खड़ा कर रहा है।

रामनगर से महज 28 किलोमीटर की दूरी पर स्थित काशीपुर के जसपुर खुर्द में हुए प्रकरण से पुलिस की दबंगई सामने आई है। जिसमें आरोपी को गिरफ्तार करने की बजाय पीड़ित व्यक्ति को ही अवैट्टा हिरासत में ले लिया गया। ‘अरनेश कुमार बनाम बिहार राज्य’ मामले में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिए गए दिशा-निर्देशों की तरह ही इस प्रकरण में ‘डीके बसु बनाम पश्चिमी बंगाल राज्य’ मामले में स्थापित सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों को तार-तार कर दिया गया है। ‘डीके बसु बनाम पश्चिमी बंगाल राज्य’ मामले में सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों व्यापक रूप से अपराधिक न्यायशास्त्र में मील का पत्थर माने जाते हैं। इन दिशा-निर्देशों को बाद में दंड प्रक्रिया संहिता (संशोधन) अधिनियम 2008 के माध्यम से दंड प्रक्रिया संहिता 1973 में एकीकृत किया गया जो एक नंबर 2010 से पूरे देश में प्रभावी हो चुका है।

देश के हर पुलिस थाने, कोतवाली, चौकी में ‘डीके बसु बनाम पश्चिमी बंगाल राज्य मामले’ के दिशा-निर्देश बड़े-बड़े बोर्डो पर मोटे अक्षरों में लिखे होते हैं। जिसमें स्पष्ट है कि किसी भी व्यक्ति को बिना मुकदमा दर्ज किए हुए अवैध कस्टडी में नहीं रखा जा सकता है। लेकिन नैनीताल जिले के रामनगर निवासी सचिन मित्तल को काशीपुर कोतवाली में सात घंटे तक अवैध हिरासत में रखा जाना हैरतनाक है। यह तब है जब सचिन मित्तल खुद पीड़ित पक्ष है। वह पक्ष जिसकी पुरखों की जमीन पर न केवल अवैध कब्जा करने की कोशिश की गई बल्कि जबरन उस पर बाउंड्री भी कर दी। इस बाउंड्री को बाद में हालांकि तोड़ दिया गया था। बीते दिनों जब जमीन के असली मालिक ने वहां बाउंड्री करवाने के लिए मेटेरियल डाला तो पुलिस ने प्लॉट की रोड़ी, बदरपुर, ईट, सीमेंट और यहां तक कि मजदूरों के फावड़ों तक को जब्त कर कटोराताल चौकी में भेज दिया।

भुक्तभोगी सचिन बताते हैं कि ‘हमारे प्लांट से हमारा मेटेरियल पुलिस वाले उठाकर ले गए। ऐसा पुलिस ने अवैध कब्जा करने वाले नरेंद्र चौहान के कहने पर किया। पुलिस के सामने ही मौजूद रहकर चौहान ने हमारे प्लॉट से हमें ही उठावाकर थाने में भिजवा दिया इससे बड़ा अन्याय क्या होगा? क्या इस समय पुलिस माफियाओं को संरक्षण नहीं दे रही है?’

गौरतलब है कि 22 दिसंबर 2021 को इसी प्लॉट के मालिकाना हक से संबंधित जांच काशीपुर के राजस्व निरीक्षक के द्वारा काशीपुर तहसीलदार को सौंपी थी। यह जांच रिपोर्ट मंगल कुमार पुत्र सुदामा लाल की मांग पर की गई थी। तीन साल पूर्व इस जांच में स्थानीय राजस्व निरीक्षक ने स्पष्ट किया है कि काशीपुर के ग्राम जसपुर खुद की खतौनी फसली वर्ष 1420-1425 के खाता संख्या 00844 के खसरा नंबर 29/4 जिसका रकबा 0.4940 हेक्टेयर खसरा नंबर 30 रकबा 0.00080 हेक्टेयर मिलाकर कुल रकबा 0.5020 हेक्टेयर लगानी 12.40 रूपये भूमि वर्ग 1 क संक्रमणीय भूमिधरी में मंगल कुमार पुत्र सुदामा लाल का नाम सहखातेदारी में दर्ज अभिलेख है। संलग्न खतौनी के अनुसार उक्त खाते में खातेदार मंगल कुमार पुत्र सुदामा लाल द्वारा 0.081 हेक्टेयर भूमि विकृय कर दी गई है तथा 0.421 हेक्टेयर भूमि खातेदार मंगल सिंह के नाम रकबा शेष है।

राजस्व निरीक्षक की इस जांच में यह भी स्पष्ट कहा गया है कि प्रार्थी मानी मंगल कुमार का 0.421 हेक्टेयर भूमि पर स्वामित्व है। इस जांच रिपोर्ट पर उपजिलाधिकारी के भी हस्ताक्षर मौजूद हैं। इसी जांच रिपोर्ट के साथ एक नक्शा भी बनाया गया है। जिसमें जमीन के अगले हिस्से में मंगल कुमार का कब्जा बरकरार दर्शाया गया है। जमीन का यह हिस्सा 2700 वर्ग फुट है। पूर्व में इस जमीन के एक तरफ नहर निकली हुई थी। लेकिन कुछ दिन पहले हल्द्वानी की तर्ज पर यह नहर पाट दी गई और उस पर सड़क निकाल दी गई। तब से यह जमीन दो तरफ से सड़क से लगी हुई हो गई। जिससे इसकी कीमत अचानक आसमान छूने लगी है। इसके बाद से ही इस जमीन पर भूमाफिया की नजर पड़ी हुई थी। जमीन के मालिक मंगल कुमार की मौत हो गई। जब तक वे जीवित थे तब तक जमीन की तरफ किसी ने आंख उठाकर देखा भी नहीं। क्योंकि वे अपनी जमीन की बराबर देख-रेख कर रहे थे। वेरोजाना अपने निवास स्थान रामनगर से काशीपुर जाते रहते थे। लेकिन उनकी मौत के बाद उनके दोनों बेटे सचिन मित्तल और अंशुल मित्तल अपनी दुकान पर व्यस्त होने के कारण प्लॉट पर ज्यादा ट्टयान केंद्रित नहीं कर पाए थे। हालांकि उन्हें इसका आभाष भी नहीं था कि किसी की नजर उनकी जमीन पर लगी हुई है।

बेल पड़ाव में परचून की दुकान चला रहे पीड़ित अंशुल मित्तल बताते हैं कि यह सब राजीव लखनी के इशारों पर हुआ है। लखनी जमीनों के मामले में काफी विवादास्पद है। उन्होंने ऐसे कई गुर्गे पाल रखे हैं जिनका काम ही दूसरों की जमीन पर अवैध कब्जा करना है। उनका ऐसा ही एक गुर्गा नरेंद्र चौहान है। जिसने उनके प्लॉट पर अवैध कब्जा किया है। नरेंद्र चौहान ने यह कहकर कि उसने राजीव लखानी से यह प्लॉट लिया है उनकी जमीन कब्जानी शुरू कर दी। इसके तहत ही उसने उनकी जमीन पर अवैध चहारदीवारी बनानी शुरू कर दी थी। जब इसका उन्हें पता चला तो उन्होंने इसकी प्रशासन के समक्ष शिकायत की। फलस्वरूप 31 मई 2024 को पुलिस प्रशासन ने उनकी जमीन पर की जा रही अवैध प्लॉटिंग को रूकवा दिया।

अंशुल के अनुसार इसके बाद 14 जून 2024 को उन्होंने अपनी जमीन पर बाउंड्री कराने के लिए वहां पर ईंट, रोड़ी, बदरपुर और सीमेंट डाला जैसे ही उन्होंने बाउंड्री करानी शुरू की इसी दौरान दो अन्य लोगों के साथ वहां नरेंद्र चौहान आ धमका। उसने अंशुल और सचिन मित्तल को धमकी देते हुए जमीन पर अपना हक जताया। यही नहीं बल्कि नरेंद्र चौहान अपनी हैकड़ी दिखाते हुए अट्टिाकारियों और नेताओं संग अपने संबंधों की धोस देने लगा। चौहान ने उन्हें धमकी देते हुए कहा कि यह प्लॉट मेरा नहीं हुआ तो उनका भी नहीं होने देगा। इसके बाद उसने फोन पर पुलिस बुला ली।

पुलिसकर्मियों को सचिन मित्तल और अंशुल मित्तल ने दस्तावेजों को सामने रखकर समझाया कि यह प्लॉट उनका ही है। यही नहीं बल्कि उन्होंने यह भी बताया कि 31 मई 2024 को उनकी शिकायत पर ही पुलिस ने नरेंद्र चौहान से इस प्लॉट को कब्जा मुक्त कराया था। इसके बावजूद भी पुलिसकर्मी नहीं माने। पुलिस पर आरोप है कि वह वहां से ईंट, रोड़ी, सीमेंट सहित करीब 20 हजार का सामान उठाकर ले गई। यह समझ से परे है कि आखिर जिन लोगों का प्लॉट पर मालिकाना हक है उनका ही उत्पीड़न पुलिस के द्वारा क्यों किया जा रहा है जबकि आरोपी रौब झाड़ता हुआ खुला घूम रहा है। चौहान का दबंग प्रवृत्ति का होने के चलते मित्तल परिवार खौफजदा है। यह मामला अब हाईकोर्ट नैनीताल में विचाराधीन है।

 

बात अपनी-अपनी
इस मामले में जांच पूरी होने के बाद जो भी नियम विरुद्ध कार्य करने वाले होंगे उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल मामला कोर्ट में है।
अभय प्रताप, उपजिलाधिकारी, काशीपुर

यह तो बहुत पुराना मामला है। मामला न्यायलय में विचाराधीन है इसलिए हमारी पुलिस ने किसी भी निर्माण कार्य करने पर रोक लगाई है।
टीसी मंजूनाथ, एमएस, ऊधमसिंहनगर

मुझे इस मामले में कोई बात नहीं करनी है। क्योंकि यह मामला हाईकोर्ट में चल रहा है।
आशुतोष सिंह, कोतवाली प्रभारी, काशीपुर

मेरा मित्तल परिवार के साथ ज्वाइंट वेंचर रहा है। मंगल जी और हमने तथा दो तीन लोगों ने मिलकर नरेंद्र चौहान को प्लॉट बेचा था बाद में उस प्लॉट को लेकर क्या मामला हुआ मुझे पता नहीं है अब तो यह केस कोर्ट में है।
राजीव अग्रवाल लखानी, आस्थान प्रोपर्टीज

You may also like

MERA DDDD DDD DD