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Uttarakhand

चौपट हुआ फूलों का कारोबार

लॉक डाउन की वजह से कई व्यवसाय तो चौपट हुए ही हैं लेकिन इसका सीधा असर उन कारोबारियों पर भी पड़ा जो सीजनल कारोबार करते थे, यूँ तो हर साल अप्रैल से जून के महीने में सैकड़ो शादियां होती हैं, लेकिन इस साल लॉक डाउन के बीच पूरा सीजन चौपट हो गया है, हल्द्वानी से बड़े पैमाने पर फूलों का कारोबार और खेती भी होती है, लेकिन इस साल शादी समारोहों समेत अन्य कई समारोह सोशल डिस्टनसिंग की वजह से प्रभावित हैं।

इसका बड़ा असर फूलों के कारोबार पर पडा है, हल्द्वानी से फूलों की सप्लाई उत्तरप्रदेश, दिल्ली समेत कई अन्य राज्यों तक होती थी लेकिन फूल कारोबारी, ब्यबसाई फूलो का कारोबार ठप होने से चिंतित नजर आ रहे हैं। अगले सीजन का भी कुछ पता नही है, जरबेरा, ग्लैड के फूल बर्बाद हो रहे हैं, एक महीने में करीब 3 बार जरबेरा के फूल सप्लाई किये जाते हैं, करीब 1000 स्क्वायर फीट में लगाये गए जरबेरा के 7000 पौंधे एक महीने में 21 हज़ार फूल पूजा, शादी, और अन्य शुभ संस्कारों में सप्लाई होते हैं लेकिन अप्रैल से अब तक के सीजन में एक फूल ब्यबसाई को लगभग 10 से 12 लाख का नुकसान हो चुका है,

जरबेरा के एक फूल की क़ीमत बाजार में 20 से 25 रुपये है, तो इससे सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है की फूल कारोबार औंधे मुंह गिर गया है, करीब 11 रंगों के जरबेरा के फूल लगातार खराब होते जा रहे हैं, फूल ब्यबसाई प्रतिदिन इन फूलों को तोड़कर गांव और आस पास के लोगों को फ्री में दे रहे हैं, क्योंकि दुबारा फूल उगाने की तैयारी भी करनी है लेकिन संशय इस बात का है की लॉक डाउन जारी रहा तो मार्किट कैसे मिलगी, यहां तक की पूजा , नामकरण, बर्थडे, सालगिरह की भी बुकिंग नही मिल रही , ऊपर से पाली हाउस और उसकी देख रेख का खर्च, दवाई, मजदूरों का खर्च, लिहाज़ा लागत निकलनी भी मुश्किल है, हल्द्वानी और आस पास फ़ूलो के कई ब्यबसाई हैं जो कोरोना काल में कंगाल होने की कगार पर हैं ।

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