Uttarakhand

पर्यटन योजना में फर्जीवाड़ा

पर्यटन क्षेत्र में स्वरोजगार मुहैया कराने के मकसद से बनी वीर चंद्र सिंह गढ़वाली योजना में जबर्दस्त फर्जीवाड़ा हो रहा है। योजना के तहत मिलने वाली 25 प्रतिशत की सब्सिडी को हड़पने के लिए राजनेताओं, अधिकारियों और पूंजीपतियों के गठजोड़ ने जमकर मनमानी की। राजनेताओं ने अपने परिजनों, रिश्तेदारों और चहेतों को बेरोजगार बताकर योजना के तहत लाखों रुपए के ऋण हासिल किए। इसके लिए झूठे शपथ पत्र पेश किए गए। अब न्यायालय के आदेश पर इस फर्जीवाड़े में मुकदमा दर्ज होने पर सफेदपोशों और नौकरशाहों में हड़कंप मचा हुआ है
देवभूमि में पर्यटन को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए चलाई गई वीर चंद्र सिंह गढ़वाली योजना में भारी फर्जीवाड़ा सामने आया है। हालांकि योजना के तहत लाभार्थीबेरोजगारों की पात्रता को लेकर शुरू से ही सवाल उठते रहे हैं, परंतु हरिद्वार में तो 2003 से 2011 तक कुछ ज्यादा ही भ्रष्टाचार हुआ है। पर्यटन विभाग की इस महत्वपूर्ण योजना में 40 लाख रुपए तक का लोन दिए जाने का प्रावधान है। साथ ही 25 प्रतिशत का अनुदान भी दिया जाता है। इसी अनुदान को हड़पने के लिए हरिद्वार के करोड़पति अचानक से बेरोजगार हो गए और उन्होंने अपनी पहुंच का इस्तेमाल करते हुए लोन स्वीकøत करा लिए। पर्यटन विभाग की इस योजना के अंतर्गत फास्ट फूड सेंटर खोलने, टैक्सी खरीद कर उसे किराए पर चलाने, मोटर गैराज वर्कशॉप, साधना कुटीर, योग-ध्यान केंद्र की स्थापना, साहसिक खेलों के विकास उपकरण खरीदने, पीसीओ बूथ और सुविधा युक्त पर्यटन सूचना केंद्रों की स्थापना आदि के लिए लोन दिए जाने का प्रावधान है। उत्तराखण्ड राज्य के वे स्थाई निवासी योजना का लाभ ले सकते हैं जो किसी अन्य संस्था के डिफॉल्टर या आयकरदाता न हों। उनके पास रोजगार या आय का कोई साधन नहीं होना चाहिए। इस संबंध में लाभार्थी को शपथ पत्र देना होता है। लेकिन हरिद्वार के दर्जनभर से अधिक भाजपा नेता एवं उनकी पत्नियां 25 प्रतिशत सब्सिडी के लालच में असली बेरोजगारों के हक पर डाका डालते हुए अचानक से बेरोजगार हो गए। कुछ करोड़पति उद्योगपतियों ने पत्नियों के साथ-साथ अपने बेटों को भी बेरोजगार दिखाकर भारी लोन हासिल किए।
प्राप्त जानकारी के अनुसार बेरोजगारों के हक पर डाका डालने में रुड़की से दूसरी बार विधायक तथा रुड़की नगर पालिका परिषद के अध्यक्ष रह चुके प्रदीप बत्रा भी पीछे नहीं रहे। सत्तारूढ़ दल भारतीय जनता पार्टी के विधायक ने फास्ट फूड सेंटर खोलने के लिए अपनी पत्नी के नाम से योजना के अंतर्गत 10 लाख रुपए का लोन लिया। प्रदेश के कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक की खास सिपहसालार मानी जाती रही भाजपा की एक महिला नेता जो वर्तमान में उपभोक्ता फोरम हरिद्वार की सदस्य हैं, ने भी अपने पति को 22 लाख रुपए तथा एक अन्य रिश्तेदार को 20 लाख रुपए का लोन दिलाया। यही नहीं एक पूर्व विधायक के बेटे को बेरोजगार मानते हुए 15 लाख रुपए का ऋण मंजूर किया गया।
राज्य गठन के पश्चात पर्यटन को बढ़ावा देने  और पर्यटन से स्वरोजगार उपलब्ध कराने के लिए 2003 में वीर चंद्र सिंह गढ़वाली पर्यटन स्वरोजगार योजना शुरू की गई थी। इस योजना का मकसद राज्य के गरीब बेरोजगार युवाओं को 25 प्रतिशत सब्सिडी देकर लोन उपलब्ध कराना था। योजना लागू होने के बाद बेरोजगारों को कोई लाभ मिल पाया हो, या ना मिल पाए हो, लेकिन करोड़पति रसूखदार नेताओं और बड़े व्यापारियों ने सब्सिडी प्राप्त करने के लिए पत्नी, बेटों और नजदीकी रिश्तेदारों को बेरोजगार बना दिया। इस संबंध में सामाजिक कार्यकर्ता तथा सेशन कोर्ट में एडवोकेट अरुण भदौरिया ने सूचना अधिकार में जानकारी प्राप्त की। अरुण भदौरिया के अनुसार योजना के संबंध में मिली जानकारी में तथ्य सामने आए कि योजना का लाभ लेने वालों में बेरोजगार कम सफेदपोश नेताओं के परिजनों की संख्या अधिक है। अरुण भदौरिया द्वारा अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सीनियर डिविजन रजनीश शुक्ला की अदालत में दाखिल की गई याचिका को कोर्ट ने गंभीरता से लिया। कोर्ट ने इस योजना का गलत तरीके से लाभ उठाने वालों और योजना को लागू करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किए जाने के आदेश जारी किए तो हरिद्वार की राजनीति में हड़कंप मच गया।
सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार न्यायालय द्वारा मुकदमा दर्ज किए जाने के संबंध में जारी आदेश को स्थानीय पुलिस ने दबाकर रखा। बताया जाता है कि रसूखदार नेताओं और अधिकारियों को बचाने के मकसद से निचली अदालत से जारी आदेश के विरुद्ध सत्र न्यायालय में अपील डाली गई। 19 जनवरी को जारी आदेश के क्रम में पुलिस ने मुकदमा नहीं लिखा और डीजीसी की ओर से इस आदेश के खिलाफ सत्र न्यायालय में अपील दाखिल की गई। अब सत्र न्यायालय द्वारा सरकार की अपील खारिज किए जाने के पश्चात सिडकुल थाने में मुकदमा दर्ज किया गया है। इस योजना के अंतर्गत धन हड़पने वाले रसूखदारों के पुत्र, रिश्तेदार एवं पत्नियों सहित 2003 से लेकर 2011 के बीच हरिद्वार में डीएम, सीडीओ, जिला पर्यटन अधिकारी, जिला उद्योग केंद्र महाप्रबंधक और लीड बैंक अधिकारी के रूप में तैनात रहे अधिकारियों के विरुद्ध धोखाधड़ी और षड्यंत्र रचने का मुकदमा दर्ज किया गया है। बताते चलें कि उक्त अवधि में जब इस योजना के नाम पर सरकारी धन को रसूखदार सफेदपोश नेताओं द्वारा अधिकारियों की मिलीभगत से ठिकाने लगाया गया तो उस दौरान हरिद्वार में डीएम और सीडीओ पद पर तैनात रहे अधिकारियों में से ज्यादातर अधिकारी अब शासन में महत्वपूर्ण पदों पर तैनात हैं। जिस अवधि में इस योजना में भारी भ्रष्टाचार हुआ उस अवधि में यानी 2003 से वर्ष 2011 के बीच हरिद्वार में 6 जिलाधिकारी 5 सीडीईओ, 5जिला समाज कल्याण अधिकारी और पांच जिला पर्यटन अधिकारी अलग- अलग कार्यकाल के लिए तैनात रहे हैं। राज्य सरकार द्वारा राज्य के बेरोजगार युवाओं को पर्यटन के माध्यम से रोजगार देने के लिए चलाई जाने वाली इस महत्वपूर्ण स्वरोजगार योजना में पात्रता श्रेणी साफ-साफ चयन समिति में अध्यक्ष जिलाधिकारी थे। इसके साथ ही समिति में मुख्य विकास अधिकारी, जिला पर्यटन अधिकारी, अग्रणी बैंक प्रबंधक, महाप्रबंधक जिला उद्योग केंद्र, परिवहन विभाग के प्रतिनिधि, जिला समाज कल्याण अधिकारी सदस्य नामित थे। बावजूद इसके इस योजना में भारी भ्रष्टाचार इन अधिकारियों की मौजूदगी में होता रहा।
एडवोकेट अरुण भदौरिया द्वारा अदालत में दाखिल की गई याचिका में आरोप लगाया गया था कि वीर चंद्र सिंह गढ़वाली पर्यटन स्वरोजगार योजना में उन लोगों को सरकारी खजाने से ऋण की मंजूरी दी गई जो पात्र नहीं थे। वर्ष 2003 से 31 मई 2011 के दौरान जनपद हरिद्वार में इस योजना के अंतर्गत 252 लोगों को ऋण दिया गया। ऋण लेने वाले सभी लाभार्थियों से हरिद्वार का स्थाई निवासी होने, बेरोजगार होने, आयकरदाता न होने और किसी वित्तीय संस्था का डिफॉल्टर न होने का शपथ पत्र लिया गया। सभी लाभार्थियों ने चयन समिति को शपथ पत्र उपलब्ध कराया, परंतु वास्तविकता यह थी कि इनमें कई आवेदक रसूखदार करोड़पति व्यापारियों और नेताओं के परिजन थे। यहां तक कि आयकर देने वाले लोगों को भी अधिकारियों ने ऋण स्वीकृत कर दिया, जबकि योजना की पहली शर्त यही है कि लाभार्थी बेरोजगार हो और आयकरदाता न हो। याचिका में अधिकारियों पर पद का दुरुपयोग कर सरकार के साथ धोखाधड़ी करने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। अब जनपद हरिद्वार के सिडकुल थाने में इस संबंध में मुकदमा दर्ज हो गया है। इसके बाद 2003 से 2011 के बीच चयन समिति से जुड़े अधिकारियों और झूठा शपथ पत्र देकर लोन लेने वाले रसूखदार सफेदपोश नेताओं में खलबली मची हुई है।

अधिकारियों पर आएगी आफत

वीर चंद्र सिंह गढ़वाली पर्यटन स्वरोजगार योजना के अंतर्गत लाभार्थियों का चयन करने वाली जिस चयन समिति के अधिकारियों पर न्यायालय के आदेश से  मुकदमा दर्ज किया गया है, वे 2003 से 2011 के बीच हरिद्वार में महत्वपूर्ण पदों पर तैनात रहे हैं। उनमें एसके महेश्वरी अब सेवानिवृत्त हो चुके हैं, जबकि आरके सुधांशु वर्तमान में सचिव, आनंदवर्धन प्रमुख सचिव, शैलेश बगोली सचिव शहरी विकास, आर मीनाक्षी सुंदरम सचिव शिक्षा, डी सेंथिल पांडियन सचिव शासन हैं। 2003 से 2011 की अवधि के दौरान हरिद्वार में सीडीओ के पद पर तैनात रहे अधिकारियों में चंद्रशेखर भट्ट वर्तमान में राज्य निर्वाचन आयुक्त, डी सेंथिल पांडियन सचिव, रविनाथ रमन सचिव और सचिन कुर्वे प्रतिनियुक्ति पर मुंबई के जिला अधिकारी पद पर तैनात हैं। बीके संत प्रभारी सचिव शासन हैं। एनएच घोटाले में निलंबित चल रहे आईएएस अधिकारी पंकज पांडे भी सीडीओ रहे हैं। अब मुकदमा दर्ज होने से इन अधिकारियों की मुश्किलें बढ़नी तय हैं।

झूठे शपथ पत्र देकर लगाया चूना

बेरोजगार युवाओं को स्वरोजगार उपलब्ध कराने वाली वीर चंद्र सिंह गढ़वाली योजना में पच्चीस प्रतिशत अनुदान हड़पने वालों में रुड़की के विधायक की पत्नी सहित हरिद्वार भाजपा के जिला महामंत्री, उपभोक्ता भंडार सहकारी संघ हरिद्वार के चेयरमैन विकास तिवारी, जिला उपभोक्ता फोरम हरिद्वार की सदस्य अंजना चड्ढा एवं उनके परिवार के अन्य लोग, हरिद्वार की प्रमुख त्रिशूल एजेंसी के मालिक मनोज की पत्नी, तनेजा इलेक्ट्रॉनिक्स के मालिक महेश तनेजा की पत्नी सीमा तनेजा और हरिद्वार के ऐसे सैकड़ों रसूखदार लोग शामिल हैं जो झूठे शपथ पत्र देकर इस योजना के अंतर्गत सरकार को चूना लगाने में सफल रहे।

बात अपनी-अपनी

इस संबंध में अभी प्रारंभिक जांच हुई है। अभी कुछ कह पाना मुमकिन नहीं, जांच के पश्चात ही कुछ कहा जा सकता है।
कमलेश उपाट्टयाय, पुलिस अधीक्षक नगर, हरिद्वार
जहां तक भाजपा जिला महामंत्री विकास तिवारी पर इस भ्रष्टचार में शामिल होने का आरोप है, तो मैं यही कहूंगा कि कानून अपना काम करेगा। दोषी के खिलाफ कार्यवाही होनी चाहिए।
जयपाल सिंह चौहान, जिलाध्यक्ष भाजपा हरिद्वार
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