[gtranslate]
Uttarakhand

सुविधाओं से महरूम शिक्षा सदन

उत्तराखण्ड में शिक्षा को बढ़ावा देने के बड़े-बड़े दावे और वादे होते रहे हैं। लेकिन जमीनी हालात यह हैं कि इंटर कॉलेजों में छात्र-छात्राओं के लिए पानी, शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएं नहीं हैं। शिक्षकों और स्टाफ की भारी कमी है। कई जगहों पर छात्र-छात्राएं जीर्ण-शीर्ण भवनों में पढ़ने को विवश हैं

 

राज्य में शिक्षा को बढ़ावा देने एवं शिक्षा को रोजगारपरक बनाने के वादे तो सरकार और शिक्षा विभाग हमेशा करते रहे हैं, लेकिन स्कूल-कॉलेजों के हालात देखकर नहीं लगता कि शिक्षा के कभी अच्छे दिन आएंगे। नैनीताल जिले के कोटाबाग ब्लॉक में इस वक्त सात इंटर कॉलेज हैं, इन कॉलेजों में स्वच्छता नाम की कोई चीज नहीं। पानी के लिए बच्चों को भटकना पड़ रहा है। खुले में शौचमुक्त उत्तराखण्ड का दावा करने वाली सरकार के राज में छात्र-छात्राओं के लिए अलग-अलग शौचालय नहीं हैं। स्टाफ को भी शौच के लिए छात्रों के साथ लाइन में लगना पड़ता है। कॉलेजों में शिक्षकों के पद भी रिक्त पड़े हुए हैं। ब्लॉक के 7 में से 3 इंटर कॉलेज बिना प्रधानाचार्य के चल रहे हैं।

कोटाबाग के बजूनिया हल्दू स्थित राजकीय इंटर कॉलेज मुखियाविहीन चल रहा है। शिक्षकों के साथ ही कक्षाएं चलाने के लिए भवनों का भी टोटा बना हुआ है। भवन जीर्ण-शीर्ण हो चुके हैं। बरसात के दिनों में इनमें बच्चों को बैठाना भी मुश्किल है। कॉलेज की नई बिल्डिंग तो बनी, लेकिन छात्र-छात्राओं की बढ़ती संख्या की वजह से यहां प्रयोगात्मक कक्षों की कमी बरकरार है। वर्तमान में भी वर्षों पुराने जीर्ण-शीर्ण भवनों में कई कक्षाओं को संचालित किया जा रहा है। कॉलेज में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं की संख्या 400 के लगभग है, परंतु प्रधानाचार्य और शिक्षकों के तीन पद रिक्त पड़े हुए हैं। एलटी में संस्कृत, सामाजिक विज्ञान तथा विज्ञान शिक्षक नहीं हैं। कॉलेज विगत कई माह पहले प्रधानाचार्य के सेवानिवृत्त होने के बाद से प्रभारी प्रधानाचार्य के हवाले है। इसी के साथ कॉलेज में शौचालय की भी कमी बनी हुई है।

अधिकांश बच्चे स्टाफ के लिए बने शौचालय को प्रयोग में लाते हैं। शौचालय की कमी होने के कारण सबसे अधिक परेशानी का सामना छात्राओं को करना पड़ता है। राजकीय बालिका इंटर कॉलेज कोटाबाग में गणित विषय न होने से छात्राओं को दिक्कत होती है। यहां हाईस्कूल में तो गणित है, लेकिन इंटर में गणित न होना छात्राओं को बेहद खलता है। वे दूसरे कॉलेजों में दाखिले को मजबूर होती हैं। इसी के साथ इंटर में ही राजनीतिक विज्ञान प्रवक्ता का पद भी खाली पड़ा हुआ है। पिछले जुलाई माह से कॉलेज प्रधानाचार्याविहीन बना हुआ है। देखा जाए तो कोटाबाग के इस बालिका कॉलेज के सामने सरकार का ‘बेटी बचाओ- बेटी पढ़ाओ’ का नारा बेमाने साबित हो रहा है। इस समय यहां ग्रामीण क्षेत्र की लगभग 295 छात्राएं अध्ययनरत हैं। यह संख्या आगामी महीनों में बढ़ने की प्रबल उम्मीद है। लेकिन मामला आकर गणित विषय पर अटक जाता है। 19 75-76 में बने इस कॉलेज में इंटर में आज तक गणित विषय का न होना जनप्रतिनिधियों की निष्क्रियता की भी पोल खोल रहा है। इसी के साथ यहां पानी और पंखों सहित कक्ष तथा शौचालय की बात की जाए तो व्यवस्था बेहतर है। बालिका कॉलेज होते हुए भी प्रांगण के कुछ हिस्से में बाउंड्री का न होना भी परेशानियों का कारण है। कुछ हिस्से में बाउंड्री की ऊंचाई कम होने के कारण लोगों द्वारा अपने घरों के कूड़े- कचरे को कॉलेज में डाल दिया जाता है। इतना ही नहीं कॉलेज बाउंड्री से सटे कुछ लोगों द्वारा अपने घरों के गंदे पानी को भी कॉलेज में प्रांगण गिराया जा रहा है। कॉलेज प्रभारी प्रधानाचार्या और कॉलेज प्रबंधन द्वारा ऐसे लोगों से कूड़ा एवं गंदा पानी कॉलेज में न डालने की अपील की जाती रही है, परंतु इन लोगों पर कोई असर नहीं पड़ता।

आदर्श विद्यालय राजकीय इंटर कॉलेज की स्थिति कुछ ठीक अवश्य है। यहां वर्तमान में 300 के लगभग छात्र संख्या है। यहां फर्नीचर और पंखों हालत अच्छी है, स्मार्ट क्लास-शुद्ध पेयजल, माकूल शौचालय की अच्छी व्यवस्था है। सभी क्लासों पर तीसरी आंख यानी सीसीटीवी कैमरे की पैनी नजर भी रहती है। लेकिन कॉलेज के कुछ हिस्से में बाउंड्री न होने की वजह से तमाम तरह की परेशानियां होती हैं। एलटी में संस्कृत एवं व्यायाम के शिक्षकों के पद खाली पड़े हुए हैं।

कालाढूंगी के मुख्य राजकीय इंटर कॉलेज का हाल भी कुछ खास नहीं हैं। यहां पढ़ाई तो टेबल कुर्सी पर हो रही है, परंतु अधिकांश कक्षाओं में पंखे नहीं हैं। पानी की टंकी तो मौजूद हैं, मगर शुद्ध पेयजल के लाले पड़े हुए हैं। बच्चों को पानी के लिए पास के थाने, तहसील या दुकानों में भटकते देखा जा सकता है। लगभग 40 वर्ष पुरानी बनी पानी की टंकी से छात्र पानी पीना उचित नहीं मानते। यहां मिड डे मील पकाने के लिए भी पानी का एक छोटा ड्रम रखा गया है। कुछ बचा हुआ पानी बच्चों के काम आ जाता है। यह हाल है उस कॉलेज का जो कालाढूंगी नगर का मुख्य कॉलेज है और हाइवे के निकट स्थित है। ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्र के स्कूल-कॉलेजों की व्यवस्थाओं का अंदाजा बखूबी लगाया जा सकता है। इस समय कॉलेज में लगभग 450 बच्चे पढ़ते हैं। कॉलेज सौंदर्यीकरण के हिसाब से बेहतर है। कक्ष-भवनों की भी कोई कमी नहीं है, लेकिन यहां मुख्य विषयों के 4 अध्यापकों के पद रिक्त पड़े हुए हैं। हाईस्कूल में कृषि विषय तो है, परंतु इंटर में नहीं है। कुछ समय पूर्व कॉलेज में आयोजित एक कार्यक्रम में पहुंचे प्रदेश के शिक्षा मंत्री ने इंटर में कृषि विषय चालू कराने का आश्वासन तो दिया था, परंतु यहां आज तक कृषि विषय चालू नहीं हो सका है। भौतिक विज्ञान एवं अर्थशास्त्र के प्रवक्ता, एलटी में विज्ञान और हिंदी शिक्षक के पद खाली पड़े हैं।

बैलपड़ाव स्थित राजकीय इंटर कॉलेज में अभी कुछ समय पहले ही कन्या विद्यालय बैलपड़ाव को भी सम्मलित कर दिया गया है। यह कॉलेज विगत कई वर्षों से प्रधानाचार्य को तरस रहा है। इस कॉलेज में प्रयोगशाला का हाल ठीक नहीं है। अंग्रेजी प्रवक्ता को कॉलेज तरस रहा है। सफाई व्यवस्था की बात करें तो स्कूल- कॉलेजों के छात्र-छात्राओं द्वारा रैली निकालकर स्वच्छता के प्रति लोगों को जागरूक किया जाता है। इसी के विपरीत इस कॉलेज में स्वच्छता नाम की कोई चीज नहीं है। कॉलेज प्रांगण में बने शौचालयों की हालत ऐसी है कि इनमें कोई जाना तक गवारा न करे। फिर भी इन शौचालयों में जाना छात्रों की मजबूरी है। यहां इस समय लगभग 30 से 40 छात्राओं सहित लगभग 250 छात्र अध्ययनरत हैं। गंदे शौचालयों से छात्राओं को सबसे ज्यादा परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कॉलेज प्रबंधन ने बताया कि सफाईकर्मी के अपनी बेटी की शादी में लगे होने के कारण गंदगी बढ़ी है।

सरकार बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ का नारा तो दे रही है, लेकिन बेटियों की पढ़ाई की व्यवस्थाओं से सरकार को कोई लेना देना नहीं है। जिसका उदाहरण राजकीय बालिका इंटर कॉलेज कालाढूंगी है। यह क्षेत्र का एक मात्र बालिका कॉलेज है। यही वजह है कि यहां पढ़ने के लिए छात्राओं की भरमार रहती है, लेकिन कॉलेज में कक्षों का भारी आभाव बना हुआ है। कक्ष कम होने के कारण एक कक्ष में दो कक्ष के बराबर बालिकाओं को बैठाना कॉलेज प्रबंधन की मजबूरी है। यही वजह है कि कक्षा में छात्राओं की अधिक संख्या होने पर कई कक्षों से फर्नीचर हटाकर अलग रख दिया गया है। इसी के साथ यहां राजनीतिक विज्ञान का पद सृजित न होने और बालिकाओं की इस विषय में रुचि को देखते हुए वर्ष 2000 से अभिभावक संघ के खर्चे से राजनीतिक विज्ञान के शिक्षक को रखा गया है। कॉलेज में स्टाफ कार्यालय, प्रधानाचार्या कार्यालय तक नहीं बना हुआ है। वर्तमान में यहां पढ़ने वाली छात्राओं की संख्या 560 के करीब है जो जुलाई में बढ़कर 600 से अधिक भी हो सकती है। छात्राओं की संख्या के हिसाब से शिक्षिकाओं की भारी कमी है। प्रधानाचार्या निर्मला जोशी के आने के बाद कई समस्याओं का निस्तारण हुआ है। उनकी सक्रियता के चलते शौचालयों का भी निर्माण हुआ और शुद्ध पानी के लिए आरओ और फ्रीजर भी लगे हैं।

आज से दो वर्ष पहले उच्चतर माध्यमिक विद्यालय प्रतापपुर चकलुवा उच्चीकरण होकर राजकीय इंटर कॉलेज बन गया। इसमें स्थानीय जनप्रतिनिधियों की अहम भूमिका तो रही लेकिन उच्चीकरण होने के बाद से स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने यहां विद्यार्थी संख्या बढ़ाने के लिए सार्थक प्रयास नहीं किए। यही वजह है कि आज भी यहां कुल विद्यार्थी संख्या 150 के करीब है जिसमें लगभग 85 छात्र तो 65 छात्राएं हैं। इस कॉलेज के उच्चीकरण की मांग की तह तक जाएं तो इसका उद्देश्य था कि यहां आसपास के ग्रामीण क्षेत्र के लड़कों को हाईस्कूल की पढ़ाई के बाद 7 किमी दूर कालाढूंगी जाना पड़ता है। साथ ही मुख्य समस्या लड़कियों के सामने थी कि उन्हें भी हाईस्कूल के बाद बालिका इंटर कॉलेज कालाढूंगी जाना पड़ता है। जनता की मांग पर शासन द्वारा दिसम्बर 2016 में इसका उच्चीकरण कर दिया गया। लेकिन आज भी यहां के ग्रामीण क्षेत्र के लड़के हों या लड़कियां अधिकांश कालाढूंगी ही जा रहे हैं। यही वजह है कि यहां की विद्यार्थी संख्या बढ़ नहीं रही है। कॉलेज में हिंदी, इंग्लिश, भूगोल, नागरिक शास्त्र और अर्थशास्त्र के साथ ही ड्राइंग विषय भी है। ड्राइंग विषय पूरे कोटाबाग ब्लॉक में कहीं और नहीं है। कॉलेज में भूगोल के शिक्षक का पद खाली है तो साइंस विषय सृजित ही नहीं है। सभी क्लासों में पंखे लगे हैं और पानी का भी माकूल इंतजाम है। यहां पर बड़ी क्लासों में फर्नीचर तो है, परंतु छोटी क्लासों में फर्नीचर का अभाव बना हुआ है। कॉलेज प्रांगण के कुछ हिस्से में बाउंड्री न होना एक समस्या बनी हुई है। इसी के साथ यहां पर्याप्त शौचालय न होना स्टाफ व विद्यार्थियों के लिए परेशानी है। स्टाफ व छात्रों को एक ही शौचालय में जाना पड़ता है। जबकि छात्रा शौचालय अलग से बना हुआ है।

 

आदर्श कॉलेज के जर्जर भवन

कोटाबाग इंटर कॉलेज को आदर्श कॉलेज का तमगा तो दे दिया गया, लेकिन यहां गुरुजनों के लिए बने भवन आज भी खंडहर हालत में हैं। जिन्हें देखने वाला कोई नहीं है। बच्चों को शिक्षा देने वाले शिक्षक कैसे खण्डहरों में रहा रहे हैं, यह न तो सरकार देख रही है और न शिक्षा विभाग। कालाढूंगी व कोटाबाग राजकीय इंटर कॉलेज के परिसर में लगभग 40 वर्ष पुराने यह आवासीय भवन आज जीर्ण-शीर्ण हालत में पहुंच चुके हैं। टपकती छतों में शिक्षक व कर्मचारी अपने परिवार के साथ सर छिपाने को मजबूर हैं। कही भवनों के ऊपर तो कहीं भवनों के अंदर तिरपाल लगाकर काम चालाया जा रहा है। कालाढूंगी एवं कोटाबाग दोनों ही जगह राजकीय इंटर कॉलेज में बनी शिक्षक कालौनी रहने काबिल के नहीं रह गयी है। बरसात हो या गर्मी या फिर सर्दी इन जर्जर भवनों में खौफ बना हुआ है। हालात यह हैं कि कभी भी भवनों का प्लास्टर टूटकर गिर जाना आम बात हो गई है। कोटाबाग राजकीय इंटर कालेज की शिक्षक कालौनी में इस वक्त आधा दर्जन शिक्षक एवं कर्मचारी निवास करते हैं और राजकीय इंटर कालेज कालाढूंगी में भी प्रधानाचार्य सहित इतने ही शिक्षक और कर्मचारी निवास करते हैं। शिक्षा की उन्नति पर ध्यान देने वाली सरकार और विभाग को गुरुजनों का कोई ध्यान नहीं है। दोनों ही जगह लगभग 35 से 40 वर्ष पुराने यह भवन हैं देखा जाए तो यह भवन मरम्मत के लायक भी नहीं रह गए हैं। फिर भी कई शिक्षक एवं कर्मचारी ऐसे भवनों में अपने परिवार के साथ रहकर हर समय खतरों का सामना कर रहे हैं। राइंका कालाढूंगी के प्रधानाचार्य अशोक कुमार सिंह व राइंका कोटाबाग के प्रधानाचार्य एसएस रौतेला ने बताया कि भवन मरम्मत के लिए कई बार विभाग को लिखा जाता रहता है। कई बार विभाग से भी भवन मरम्मत हेतु रिपोर्ट मांगी जाती है तो उनके द्वारा रिपोर्ट बनाकर भेज दी जाती है। विभाग द्वारा ही मरम्मत कराई जानी है। जिसके लिए धनराशि की प्रतीक्षा है। नैनीताल के मुख्य शिक्षा अधिकारी केके गुप्ता का कहना है कि कालाढूंगी व कोटाबाग राजकीय इंटर कालेज की शिक्षक कालौनी के खस्ताहाल भवनों का प्रपोजल तैयार कर भवन मरम्मत के लिए शीघ्र ही सरकार से बजट की मांग करेंगे।

You may also like

MERA DDDD DDD DD