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Uttarakhand

स्वच्छ भारत मिशन पर ग्रहण

टिहरी झील की सुंदरता को देखने हर साल लाखों पर्यटक पहुंचते हैं। इस झील की सुंदरता और जल की निर्मलता पर फ्लोटिंग हट्स ने ग्रहण लगा दिया है। ली रॉय कंपनी द्वारा संचालित फ्लोटिंग हट्स की गंदगी झील में बह रही है जिसका वीडियो वायरल हुआ तो कंपनी की पोल खुली। इसके बाद हुई जांच में एसडीएम ने इसकी पुष्टि की। बावजूद इसके आज भी फ्लोटिंग हट्स का संचालन जारी है

सत्तरह मई 2018 को टिहरी झील उस समय चर्चा में आई थी जब उत्तराखण्ड में पहली बार किसी सरकार ने झील में नाव पर सवार होकर कैबिनेट मीटिंग की थी। तब ढाई करोड़ की लागत से बनाई गई मरीना रेस्तरां नामक बोट में राज्य कैबिनेट की बैठक हुई थी। इसी में पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने अपने ड्रीम प्रोजेक्ट ‘13 जिले, 13 नए टूरिस्ट डेस्टिनेशन’ का ऐलान किया था। तत्कालीन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने तब एक ट्वीट करते हुए लिखा था ‘टिहरी में कैबिनेट बैठक न सिर्फ टिहरी के प्राकृतिक सौंदर्य और पर्यटन की संभावनाओं को दुनिया के सामने लाने का प्रयास है, बल्कि टिहरी के गौरवशाली इतिहास और उज्ज्वल भविष्य से रू-ब-रू होने का अवसर भी है।’ उन्होंने आगे लिखा था कि टिहरी जैसे दुर्गम जिलों में लोगों ने पलायन और विस्थापन झेला है, उसका समाधान तलाश कर उसे टिहरी की ताकत बनाने की कोशिश की जाएगी। साथ ही उन्होंने दावा किया था कि गैरसैंण में पहली बार बजट सत्र आयोजित करवाकर सरकार ने ऐसी ही पहल की थी। लेकिन इसे बदकिस्मती ही कहेंगे कि जिस मरीना रेस्तरां नामक बोट में राज्य कैबिनेट की बैठक हुई वह घनघोर लापरवाही और बदइंतजामी की वजह से टिहरी झील में डूब गई है। इस तरह पर्यटन विभाग की लापरवाही और गैरजिम्मेदारी का प्रतीक बनी मरीना रेस्तरां बोट शुभारम्भ के बाद से ही टिहरी झील के किनारे जंग खा रही थी। जिसका अंत उसके डूबने के रूप में याद किया जाता है। जिस मरीना रेस्तरां नामक बोट में कैबिनेट के निर्णय लिए गए थे उनमें टिहरी झील में पर्यटन को बढ़ावा देना भी शामिल था जिसमें कई पर्यटक प्वॉइंट निर्धारित किए गए थे। बाद में टिहरी झील पर फ्लोटिंग हट्स को पीपीपी मोड़ पर देने का भी प्रस्ताव किया गया था।

लेकिन टिहरी बांध की झील पर बने यह फ्लोटिंग हट्स देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘स्वच्छ भारत मिशन’ पर ग्रहण लगा रहा है। फ्लोटिंग हट्स के द्वारा टिहरी झील में गंदगी डाली जा रही है। एशिया के सबसे बड़े टिहरी बांध की झील पर बनी फ्लोटिंग हट्स का सीवर मल मूत्र के अलावा वेस्ट मेटीरियल टिहरी झील में बहाया जा रहा है जिससे मां गंगा की पवित्रता और निर्मलता के साथ खिलवाड़ हो रहा है। लोग इसको लेकर आंदोलित हैं। यह मामला उस समय सुर्खियों में आया था जब इससे संबंधित एक वीडियो सामने आया था। जिसमें देखा जा रहा है कि फ्लोटिंग हट्स की सारी गंदगी को सीधे टिहरी झील में डाला जा रहा है। यही नहीं बल्कि फ्लोटिंग हट्स के शौचालयों की गंदगी के निस्तारण के लिए बनाया गया सीवर ट्रीटमेंट प्लांट भी बंद पड़ा है।

इस मामले में प्रशासन की जांच भी हुई। जिसमें भी फ्लोटिंग हट्स को संचालित करने वाली ली रॉय कंपनी को दोषी पाया गया। चौंकाने वाली बात यह है कि उसके बाद भी शासन द्वारा फ्लोटिंग हट्स को संचालित करने की अनुमति दे दी गई जो शासन को कटघरे मे खड़ा कर रहा है। इस पूरे प्रकरण में व्यापार मंडल से लेकर ठेकेदार एसोसिएशन, नागरिक मंच, राज्य आंदोलनकारी मंच सहित कई सामाजिक संगठन एक मंच पर आ गए हैं। जिन्होंने जिलाधिकारी के समक्ष झील को प्रदूषण और गंदगी से बचाने की गुहार लगाई है।
इस मामले को गत् 30 नवंबर को विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान उठाया जा चुका है। प्रताप नगर के विधायक विक्रम सिंह नेगी ने शीतकालीन सत्र में क्षेत्र की समस्याओं को लेकर विभिन्न सवाल सरकार से पूछे थे। उन सवालों में उन्होंने टिहरी झील से संबंधित सवाल पूछते हुए कहा था ‘टिहरी झील जो कि पतित पावनी जीवनदायिनी मां गंगा है, की सफाई व्यवस्था जिसमें शव, जीव-जंतुओं के मृत शरीर बह कर आते हैं। इसके साथ ही टिहरी झील में फ्लोटिंग हट बोट है। जिसका सीवर एवं होटल की अन्य गंदगी झील में गिराई जा रही है।’ विधायक ने सरकार से पूछा है कि वह कौन-सी तकनीक है, जिससे गंदगी का निस्तारण होता है। इस पर सिंचाई मंत्री सतपाल महाराज ने यह जवाब देकर मामले को घुमा दिया कि टिहरी झील की देख-रेख टीएचडीसी के अधीन है।

गौरतलब है कि टिहरी बांध को संवारने के लिए वर्ष 2012-13 में तत्कालीन राज्य सरकार ने केंद्र सरकार के मेगा प्रोजेक्ट के तहत कोटीकालोनी में झील का दीदार करने को आने वाले पर्यटकों के लिए झील में फ्लोटिंग मरीना, पर्यटकों को ठहरने को 20 फ्लोटिंग हट्स, बांध प्रभावितों को आर-पार जाने को बार्ज बोट और थ्री स्टार टिहरी लेक रिजॉर्ट का निर्माण करवाया था। टिहरी झील के ऊपर तैरने वाले होटल को फ्लोटिंग हट्स के नाम से जाना जाता है जिसे उत्तराखण्ड सरकार के पर्यटन विभाग द्वारा 60 करोड़ से अधिक की लागत से बनाया गया था। उत्तराखण्ड सरकार के पर्यटन विभाग द्वारा इस होटल को एक करोड़ प्रति वर्ष के हिसाब से 30 साल के लिए ली रॉय ग्रुप को लीज पर दे दिया गया। बताया जा रहा है कि जिस दिन से यह फ्लोटिंग हट्स बने हैं उसी दिन से टिहरी झील में गंदगी विसर्जित की जा रही है।

आस-पास के ग्रामीणों का कहना है कि फ्लोटिंग हट्स को संचालित करने वाली कंपनी ली रॉय होटल के द्वारा धार्मिक आस्था को ठेस पहुंचा रही है। ली रॉय होटल द्वारा ऐसा दो-तीन साल से किया जा रहा था। लेकिन यह मामला सबसे पहले उस समय सामने आया जब स्थानीय निवासी मनोज धनाई ने इसका वीडियों बना कर वायरल किया। बीते पांच अक्टूबर को इंटरनेट मीडिया पर टिहरी झील स्थित फ्लोटिंग हट का यह वीडियो प्रसारित होते ही लोगों में ली रॉय होटल के खिलाफ आक्रोश फैल गया था। इस वीडियो में स्पष्ट दिखाया गया था कि फ्लोटिंग हट के शौचालय और किचन का गंदा पानी टिहरी झील में गिराया जा रहा है। मोटर की मदद से पाइप के जरिए सीवर और गंदा पानी झील में डाला जा रहा था। इसकी शिकायत पूर्व कनिष्ठ प्रमुख कुलदीप पंवार ने जिलाधिकारी डॉ सौरभ गहरवार से की थी। जिसके बाद डीएम ने एसडीएम और पर्यटन विभाग को जांच के आदेश दिए थे। टिहरी झील में पीपीपी मोड में संचालित फ्लोटिंग हट्स का सात अक्टूबर को एसडीएम अपूर्वा सिंह के नेतृत्व में प्रशासन की टीम ने निरीक्षण किया था। निरीक्षण की जांच रिपोर्ट में साफ लिखा गया है कि फ्लोटिंग हट्स के कीचन से गंदा पानी ओवरफ्लो होकर झील में गिर रहा है। प्रशासन की टीम द्वारा फ्लोटिंग हट्स की यह जांच रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंप दी गई। डीएम डॉ सौरभ गहरवार के अनुसार जांच रिपोर्ट उनके पास आ चुकी है और उसमें फ्लोटिंग हट संचालन सही तरीके से नहीं होना पाया गया है।

बावजूद इसके उत्तराखण्ड पर्यटन विकास परिषद ने दोबारा निरीक्षण किए बगैर ही 18अक्टूबर को जिला प्रशासन को भेजे पत्र में फ्लोटिंग हट्स को संचालन की अनुमति देने के निर्देश दे दिए। यही नहीं बल्कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने इस मामले में लापरवाही दिखाई है। नियम है कि गंगा और उसके आस-पास बीस कमरों से ज्यादा के होटल या रिसॉर्ट संचालन के लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से भी एनओसी का प्रावधान है, लेकिन फ्लोटिंग हट्स संचालकों ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से भी एनओसी नहीं ली और बिना एनओसी के संचालन किया जा रहा है। हट्स का एसटीपी प्लांट भी बंद है। बताया जा रहा है कि हट्स के बीस कॉटेज से लगभग 8500 लीटर सीवर निकलता है। कई महीने बीत जाने के बाद भी अभी तक हट्स प्रबंधन के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई है।

इसके खिलाफ सबसे पहले धरने पर सामाजिक कार्यकर्ता सागर भंडारी बैठे। भंडारी ने कहा कि झील के ऊपर तैरने वाला फ्लोटिंग हट्स होटल इंडस्ट्री में जाने-माने ली रॉय होटल को उत्तराखण्ड सरकार ने ओने-पौने दामों में 30 साल के लिए लीज पर दिया है जो खुलेआम पूरी होटल की गंदगी को नदी में डिस्पोजल कर रहा है और गंगा मां को दूषित करने का काम कर रहा है। जिला प्रशासन जब तक इस होटल को सीज नहीं कर देता और उत्तराखण्ड सरकार के साथ इस होटल की लीज समाप्त नहीं की जाती तब तक धरना जारी रहेगा। झील में गंदगी डालने वाले फ्लोटिंग हट्स पर प्रशासन की कार्रवाई न होने से खफा स्थानीय 30 से अधिक संगठनों ने फिलहाल प्रशासन के खिलाफ आंदोलन तेज कर दिया है। ग्रामीण फ्लोटिंग हट संचालकों के खिलाफ कई बार प्रदर्शन भी कर चुके हैं। सामाजिक संगठनों का कहना है कि यह वही पानी है जो टिहरी, देवप्रयाग, ऋषिकेश, हरिद्वार तक गंगा के रूप में बहता है और गंगा के प्रति लोगों की आस्था है। लेकिन फ्लोटिंग हट्स द्वारा टिहरी झील में गंदगी डाली जा रही है। सामाजिक संगठनों ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर जल्दी ही इसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई नहीं की गई तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा।

झील का प्रदूषित होता पानी
टिहरी झील में पर्यटन गतिविधियों के संचालन से इसमें बैक्टीरिया पनपने की खबरें सामने आई हैं। झील के पानी में 11.31 एनटीयू (नेफ्लोमीट्रिक टर्बिडिटी यूनिट) गंदलापन आया है जबकि मानकों के हिसाब से पानी में पांच एनटीयू से कम गंदलापन होना चाहिए। जल संस्थान ने गत नवंबर में झील के पानी का सैंपल लेकर देहरादून स्थित लैब में भेजा था, जिसकी जांच के बाद झील के पानी में बैक्टीरिया मिलने की बात सामने आई है। जल संस्थान द्वारा भेजे गए सैंपल की जांच में भागीरथी के पानी के गोमुख से निकलने के बाद टिहरी झील में प्रदूषित होने की पुष्टि हुई है। जांच कराने के लिए सैम्पल भेजने वाले जल संस्थान का कहना है कि झील में पानी का बहाव अवरुद्ध होने और झील में पर्यटन गतिविधियां संचालित होने से पानी में बैक्टीरिया पनप गए हैं।

बात अपनी-अपनी

हमने इस मामले की पूरी जांच कराई है। अपनी जांच रिपोर्ट को हमने नवंबर में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को भेज दिया है। पर्यटन विकास परिषद से अनुमति मिलने के बाद ही फ्लोटिंग हट्स का संचालन दोबारा शुरू कराया गया है।
अपूर्वा सिंह, एसडीएम टिहरी

फ्लोटिंग हट्स प्रबंधन ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से एनओसी के लिए आवेदन किया है। टिहरी झील में पर्यटन विकास को देखते हुए उसे संचालन की अनुमति दी गई है। अतुल भंडारी, जिला पर्यटन अधिकारी टिहरी गढ़वाल अभी पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड द्वारा फ्लोटिंग हट्स प्रबंधन को एनओसी नहीं दी गई है। उसका निरीक्षण करने के बाद ही एनओसी मिल पाएगी।
डॉ. आरके चतुर्वेदी, क्षेत्रीय अधिकारी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड

भारत के प्रधानमंत्री ‘नमामि गंगे’ योजना पर अरबों रुपए खर्च कर रहे हैं लेकिन ली राय होटल खुलेआम गंदगी का डिस्पोजल झील में डाल रहा है इसलिए मेरा प्रधानमंत्री से अनुरोध है कि वह तत्काल इस होटल के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करें।
सागर भंडारी, सामाजिक कार्यकर्ता

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