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कहते हैं कि सांच को आंच नहीं। देर-सबेर सच सामने आ ही जाता है। ऐसा ही उत्तराखण्ड परिवर्तन पार्टी के अध्यक्ष पीसी तिवारी के साथ भी हुआ। तिवारी जमीनों पर अवैध कब्जे और देवभूमि में भूमाफिया के खिलाफ खड़े हुए तो उन्हें फर्जी मामले में फंसाने के षड्यंत्र हुए। इसमें दिल्ली के एक वरिष्ठ अधिकारी के पैरोकार अधिवक्ता अब खुद कठघरे में हैं। यह अधिकारी कोई और नहीं बल्कि डांडा-कांडा में निर्माणाधीन प्लीजेंट वैली फाउंडेशन के कर्ताधर्ता एवी प्रेमनाथ हैं। जिन्होंने अपने आधा दर्जन अधिवक्ताओं के द्वारा तिवारी पर अल्मोड़ा के वरिष्ठ अधीक्षक के यहां एक मामला दर्ज कराया था। जिसमें कहा गया था कि तिवारी उनके क्लाइंट का उत्पीड़न कर रहे हैं। इसका आधार बनाया गया दिल्ली के प्रतिष्ठित अंग्रेजी अखबारों की कटिंग को। अखबारों में प्रकाशित खबरों की फोटो काफी की प्रतिलिपि के साथ ही अल्मोड़ा पुलिस ने तिवारी के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया था। लेकिन अंग्रेजी के जिन प्रतिष्ठित अखबारों की फोटो कॉपी की प्रतिलिपियां पुलिस के समक्ष पेश की गई थीं वह झूठी पाई गई हैं। फिलहाल पाशा पलट गया है। अब आंदोलनकारी नेता पीसी तिवारी दिल्ली के उन अधिवक्ताओं के खिलाफ केस दर्ज कर रहे हैं जिन्होंने उन पर फर्जी खबरों के आधार पर मामला दर्ज कराया था।

जन आंदोलनों के चलते चर्चा में रहने वाले पीसी तिवारी को उस समय झटका लगा जब अल्मोड़ा पुलिस ने उनसे कहा कि तुम्हारे खिलाफ दिल्ली से शिकायत दर्ज की गई है कि तुम लोगों का उत्पीड़न करते हो। पहली बारगी तिवारी को विश्वास नहीं हुआ कि दिल्ली से किसने शिकायत की क्योंकि उनका कार्यक्षेत्र दिल्ली के बजाय उत्तराखण्ड खासकर पहाड़ है। पुलिस से सूचना अधिकार अधिनियम के तहत तिवारी द्वारा उन पर लगाए गए आरोपों के साक्ष्य मांगे गए। जिसमें दिल्ली के साकेत में वकालत करने वाले विरेंद्र कुमार सहित करीब आधा दर्जन अधिवक्ताओं के हस्ताक्षरयुक्त एक शिकायती पत्र था। इसी के साथ दिल्ली से प्रकाशित होने वाले राष्ट्रीय प्रतिष्ठित अंग्रेजी अखबार ‘स्टेट्समैन’ ‘इंडियन एक्सप्रेस’ और ‘द पायनियर’ में प्रकाशित समाचार की फोटो प्रतिलिपि भी अटैच थी। तीनों अखबारों में प्रकाशित समाचार के प्रकाशन की तिथि 16 मार्च 2018 थी। तिवारी से मिले इन साक्ष्यों के आधार पर ‘दि संडे पोस्ट’ ने दो माह पूर्व ही समाचार प्रकाशित किया था। जिसमें ‘दि संडे पोस्ट’ की पड़ताल में प्रथम दृष्टया यह प्रतीत हो गया था कि दोनों अंग्रेजी अखबारों में प्रकाशित सामचार प्रकाशन तिथि को छपे ही नहीं थे। यही नहीं बल्कि अखबार की मूल प्रति और फोटो प्रति का जब मिलान किया गया था तो यह भी स्पष्ट हो गया कि दोनों के फॉन्ट में काफी अंतर था।

फोटोशॉप कर फर्जी खबर को द पायनियर का बताया
अंग्रेजी दैनिक पायनियर ने स्पष्ट किया कि फोटोशॉप के जरिए नकली खबर बनाई गई

‘दि संडे पोस्ट’ ने इसे स्पष्ट लिखा था। इसके बाद उपपा नेता पीसी तिवारी ने ‘स्टेट्समैन’, ‘इंडियन एक्सप्रेस’ और ‘द पायनियर’ के दिल्ली स्थित मुख्यालय में पत्र लिखकर पूछा कि क्या 16 मार्च 2018 को अथवा किसी भी दिन उक्त समाचार आपके समाचार पत्र में प्रकाशित किया गया था या नहीं। इस पर तीनों अखबारों के संपादक मंडल ने अल्मोड़ा पुलिस द्वारा मिली समाचार की फोटो प्रति का मिलान किया। 16 मार्च 2018 के अलावा कई दिनों आगे-पीछे के समाचार पत्रों में भी देखा गया, लेकिन ऐसी कोई खबर प्रकाशित ही नहीं हुई थी। इसकी पुष्टि खुद अखबार के मुख्यालय से हुई है। ‘द पायनियर’ के दिल्ली स्थित मुख्यालय से पीसी तिवारी द्वारा लिखे गए पत्र के जवाब में अखबारि के अधिवक्ता राजेंद्र सिंह राणा की ओर से स्पष्ट किया गया है कि हमारे अखबार में ऐसी कोई खबर प्रकाशित ही नहीं हुई है। ‘दि संडे पोस्ट’ के पास मौजूद ‘दि पायनियर’ के इस पत्र में अफसोस प्रकट किया गया है कि किस तरह अखबार की खबर के नाम पर फर्जीवाड़ा किया गया है। बहरहाल अब पीसी तिवारी उन लोगों के विरुद्ध मामला दर्ज कराने की पूरी तैयारी कर चुके हैं। फर्जीवाडा करने वाले लोगों के खिलाफ कानूनी कार्यवाही तय है। तिवारी का कहना है कि उत्तराखण्ड की जनता ऐसा फर्जीवाड़ा करने वाले लोगों को बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं करेगी। इसका दंड उन्हें जरूर मिलेगा।

फोटोशॉप कर फर्जी खबर को द पायनियर का बताया
अंग्रेजी दैनिक पायनियर ने स्पष्ट किया कि फोटोशॉप के जरिए नकली खबर बनाई गई

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