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Uttarakhand

शांत वादियों में अशांति का आगाज

देवभूमि उत्तराखण्ड को अमूमन शांत प्रदेश माना जाता है इसके पीछे यह दलील दी जाती है कि यहां अपराध और अपराधी न के बराबर हैं। लेकिन बीते वर्ष एक के बाद एक हुए अपराधों ने प्रदेश की इस धारणा को खारिज किया। अंकिता हत्याकांड की घटना ने पूरे देश में उत्तराखण्ड की शांत वादियों का सपना चकनाचूर किया। शिक्षा के मंदिर भी यौन शोषण से अछूते नहीं रहे। दिल्ली के एक वरिष्ठ अधिकारी का यौन उत्पीड़न भी चर्चाओं में रहा

बीते साल राज्य में बिगड़ती कानून व्यवस्था के मामले सरकार और पुलिस प्रशासन के लिए बड़ी चुनौतियों के तौर पर उभरते रहे। हत्या और बलात्कार के अलावा राहजनी, लूट और चोरी-डकैती तथा साईबर ठगी के मामलों ने भी पुलिस प्रशासन की नाक में दम किया। वही पुलिस प्रशासन के खिलाफ भी जम कर शिकायतें दर्ज होती रहीं। इस वर्ष सरकार के कैबिनेट मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल के भाई के घर लाखों की डकैती और कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज के ही निजी सचिव द्वारा उनके फर्जी डिजिटल हस्ताक्षर के मामले में मुकदमा तक दर्ज हुआ।

सोशल मीडिया जहां संवाद का माध्यम बना रहा लेकिन इसी सोशल मीडिया के चलते हिसंक घटनाएं भी खूब देखी गई। खास तौर पर स्कूली बच्चों के बीच पोस्ट को शेयर करने को लेकर हिंसक घटनाओं से मनोवैज्ञानिक भी चिंतित नजर आए। इश्क और मोहब्बत के मामलों में भी घरेलू हिंसा और हत्या तक किए जाने सनसनीखेज समाचार सामने आए।

विधानसभा में बैकडोर भर्ती मामला : वर्ष 2012 से लेकर 2022 तक बैकडोर से तकरीबन 224 लोगों को विधानसभा सचिवालय में भर्ती किया गया। उत्तराखण्ड अधीनस्त चयन आयोग भर्ती घोटाले के खुलासे के बाद विधानसभा में हुई भर्ती घोटाले की गूंज से राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गईं। पूर्व विधानसभा अध्यक्ष और धामी सरकार में वित्त मंत्री प्रेम चंद अग्रवाल पर गंभीर सवाल खड़े होने लगे। विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी ने इस मामले में एक कमेटी का गठन किया और कमेटी की रिपोर्ट के बाद सभी भर्तियों को रद्द कर दिया। इस मामले में हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट से भी नौकरी पाए कर्मचारियों को कोई राहत नहीं मिली।

अंकिता भंडारी हत्या कांड : उत्तराखण्ड में पहले भी कई
बालिकाओं की हत्याओं के मामले सामने आ चुके हैं लेकिन 2022 में पौड़ी जिले की यमकेश्वर तहसील के अंतर्गत गंगा भोगपुर गांव में भाजपा के पदाधिकारी विनोद आर्य के पुत्र पुलकित आर्य के वनंतरा रिसॉर्ट्स में रिशेप्सनिस्ट का कार्य करने वाली अंकिता भंडारी की हत्या का मामला इस वर्ष सबसे ज्यादा चर्चाओं में रहा। रिसॉर्ट के मालिक पुलकित आर्य और उसके मित्रों पर अंकिता भंडारी की हत्या करने का आरोप लगाया गया है। पुलिस ने पुलकित आर्य के साथ रिसॉर्ट के मैनेजर सौरभ भास्कर और सहायक मैनेजर पुनीत गुप्ता को जेल भेज दिया है।

इस मामले में पूरे प्रदेश में आक्रोश बना हुआ है। इस मामले में रिसॉर्ट पर बुल्डोजर चला कर उसे ध्वस्त करने की कार्रवाई भी की गई जो कि सरकार के ही गले की फांस बन गई। जिसे सबूतां को नष्ट करने के लिए की गई कार्रवाई के तौर पर देखा जा रहा है। आरोपियों को जमानत नहीं मिल पाई है। एसटीएफ के द्वारा 500 पेज की चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की गई है। साथ ही सभी आरोपियों का नार्को टेस्ट की कार्यवाही भी की जा रही है। अंकिता भंडारी को न्याय दिलवाने के लिए अनेक स्थानों में आंदोलन और धरना-प्रदर्शन किए जा रहे हैं। इस पूरे प्रकरण में वीआईपी कौन का सवाल आज भी सरकार के लिए सरदर्द बना हुआ है।

पिपलिया कांड से कटघरे में पुलिस
कांग्रेस के पूर्व सचिव बाजपुर निवासी अविनाश शर्मा का कसूर सिर्फ यह था कि उन्होंने दो पक्षों में चल रही एक स्टोन क्रशर की देनदारी के विवाद को खत्म करने की पहल की थी। कई पंचायतें हुईं। अविनाश शर्मा की अध्यक्षता में पौने दो करोड़ की बकाया राशि का भुगतान करने और इस एवज में स्टोन क्रशर की लीज डीड ट्रांसफर करने की दोनों पक्षों में सहमति बन गई। लेकिन बाद में एक पक्ष बकाया राशि का भुगतान करने से मुकर गया। इसके चलते पंचायत बैठी। जिसमें क्षेत्र के प्रतिष्ठित लोग मौजूद थे। इसी दौरान विवाद गहराया और मामला गोलीबारी तक पहुंचा। जिसमें 26 अप्रैल को अविनाश शर्मा के अंगरक्षक कुलवंत सिंह की हत्या हो जाती है। जिन लोगों पर हत्या के आरोप हैं वे पुलिस संरक्षण में हैं। लेकिन दूसरी तरफ जिस अविनाश शर्मा गुट के व्यक्ति की हत्या हुई और तीन लोग गंभीर रूप से घायल हुए, उनके 10 लोग जेल की सलाखों के पीछे हैं। पुलिस एफएसएल रिपोर्ट न आने की बात कह हत्या के आरोपियों का अप्रत्यक्ष रूप से बचाव करती देखी गई। इससे क्षेत्र में पुलिस के प्रति आक्रोश पनपा। मृतक के परिजन न्याय की गुहार लगाते रहे। वे अपने बेटे के हत्यारों पर कार्रवाई न होने से दुखी हैं। पुलिस पर यह भी आरोप लगा कि वह एक पूर्व मंत्री के दबाव में एकतरफा कार्यवाही करती रही।
यौन उत्पीड़न के आरोपी अधिकारी को जेल 5 अक्टूबर को अल्मोड़ा जिले के डांडा कांडा में किशोरी के यौन उत्पीड़न के मामले में दिल्ली सचिवालय में तैनात संयुक्त सचिव एडीएम एवी प्रेमनाथ को गिरफ्तार किया गया। उसके खिलाफ पॉक्सो एक्ट में मुकदमा दर्ज किया गया। गिरफ्तार प्रेमनाथ को कड़ी सजा की मांग को लेकर विभिन्न संगठनों के लोगों ने कोतवाली रानीखेत में जमकर हंगामा किया। पुलिस से तीखी तकरार भी हुई। इस बीच कड़ी सुरक्षा में आरोपित एडीएम को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से जेल भेज दिया गया। पीड़िता ने आरोप लगाया कि प्रेमनाथ पहले से ही उस पर गलत नीयत रखता था। चार माह पूर्व प्लीजेंट वैली स्कूल में उसका शारीरिक शोषण एवं उत्पीड़न किया गया। तब पटवारी से शिकायत की गई लेकिन प्राथमिकी दर्ज नहीं हो सकी। याद रहे कि दिल्ली सचिवालय में संयुक्त सचिव पद पर तैनात एवी प्रेमनाथ और उसकी पत्नी आशा यादव का डांडाकांडा गांव में प्लीजेंट वैली फाउंडेशन के नाम से स्कूल है। जिस पर अवैध अतिक्रमण सहित कई मामले दर्ज हैं।

डोईवाला डकैती कांडः प्रदेश सरकार के शहरी विकास और वित्त मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल के चचेरे भाई शीशपाल अग्रवाल के डोईवाला स्थित आवास में डकैती का मामला भी सुर्खियों में बना रहा। एक कैबिनेट मंत्री के भाई के घर में सशस्त्र डकैती की घटना से जहां राज्य की कानून व्यवस्था पर ही गंभीर सवाल खड़े हुए। पुलिस ने सभी डकैतों को गिरफ्तार कर के जेल भेज दिया लेकिन इस मामले से दून पुलिस की छवि और कार्यशैली पर कई सवाल खड़े हो गए।

मंत्री के फर्जी डिजिटल हस्ताक्षर का मामला : राज्य के इतिहास में यह पहली बार हुआ कि जब कैबिनेट मंत्री के द्वारा अपने ही निजी सचिव के खिलाफ मुकदमा दर्ज करवाया गया। इस मामले में लोकनिर्माण विभाग के मुख्य इंजीनियर अयाज अहमद को विभाग का मुखिया बनाने के लिए मंत्री के अनुमोदन के लिए उनके ही निजी सचिव आईबी सिंह द्वारा फर्जी डिजिटल हस्ताक्षर कर के मंत्री का अनुमोदन ले लिया गया। यह सब तब किया गया कि जब मंत्री सतपाल महाराज स्वयं देहरादून में ही मौजूद थे। बावजूद इसके उनके ही निजी सचिव द्वारा डिजिटल हस्ताक्षर कर फाइल शासन को भेज दी जिससे अयाज अहमद को लोक निर्माण विभाग को मुखिया के पद पर प्रमोशन मिल गया। हैरत की बात यह है कि मई 2022 में ही इस पूरे खेल का खुलासा हो गया था। तभी सतपाल महाराज के जनसंपर्क अधिकारी द्वारा डालनवाला थाने में तहरीर दी गई लेकिन कोई कार्यवाही तक नही हुई। आखिरकार मुख्यमंत्री से नाराजगी जताने के बाद डालनवाला थाने में मुकदमा दर्ज हो पाया। अपराधों से दहलती रही राज्य की राजधानी : देहरादून नगर में एक के बाद एक बड़े संगीन अपराध से नगर वासियों का अमन-चैन खतरे में पड़ता रहा। मामूली कहासुनी पर गोलियां चलाने और हत्या करने के मामले सामने आये। जिनमें अक्टूबर माह में प्रेम नगर में आपसी रंजिश के चलते गोली चलाई गई तो राजपुर में एक दुकान के सामने पेशाब करने से रोकने पर दुकानदार पर गोली चलाई गई। नवंबर माह में राजपुर रोड पर दो कार मालिकों के बीच कार को हटाने की जिद के चलते गोलीबारी की घटना समाने आई है तो वहीं पटेल नगर के मेहूंवाला क्षेत्र में दो पक्षों के बीच जमकर मारपीट और गोली चलने की घटना भी सुर्खियों में रहीं।

नवबंर माह में शहर कोतवाली के पीछे गांधी रोड में चमोली के निवासी और दून में लैब टेक्निशियन का काम करने वाले युवक को मामलू कहासुनी में बैट से मार कर बुरी तरह से घायल कर दिया गया जिसके कुछ दिनों के बाद अस्पताल में मौत हो गई। इसी माह में पटेल नगर क्षेत्र में कोचिंग से घर आ रही छात्रा के ऊपर एक युवक के द्वारा गोली चलाई गई जिसमें छात्रा बालबाल बची। दिसंबर माह में मामूली विवाद में एक युवक पर धारधार हथियार से हमला किया गया।

प्रेम और इश्क में हिंसा की घटनाएं : कभी प्यार-प्रेम में जान देने वाले अब जान लेने पर उतारू हो चले हैं। 2022 में कई ऐसी घटनाएं हुई हैं जिसमें प्रेमी-प्रेमिकाओं के बीच हिंसक वारदातें हुई हैं। हैरत की बात यह है कि शादीशुदा लोगां के बीच भी हिंसक घटनाओं से प्रदेश मे सुर्खियां रही हैं। 26 नवंबर को गुच्चुपानी क्षेत्र में रिक्शा चालक मोहसिन की हत्या उसकी पत्नी शीबा ने अपने पड़ोस में रहने वाले प्रेमी साबिर अली से करा दी, पत्नी ने अपने पति की हत्या की सुपारी दी थी। दूसरी ओर 22 नवंबर को रूद्रपुर में लिव इन रिलेशन में रह रही युवती दीपा मुखर्जी के लिव पार्टनर संजय शाह ने उस पर केरोसीन डाल कर जलाने की कोशिश की। काशीपुर में एक युवती जो कि प्रोफेसर के पद पर तैनात हैं, को शादी के लिए देखने आये युवक पर दुष्कर्म का अरोप लगा है। हरिद्वार में ही एक प्रेमी के द्वारा अपनी प्रेमिका के सिर पर सरियों से कई वार कर के अधमरा करने की घटना भी सामने आई है जिसमें प्रेमिका बुरी तरह से घायल हो गई।

शिक्षण संस्थानों में चाकूबाजी और यौन शोषण की घटनाएंः जीबी पंत कृषि विश्वविद्यालय के चिकित्सक पर छात्राओं का यौन शोषण करने के आरोप भी सुर्खियों में रहे। प्रौद्योगिकी की दो छात्राओं द्वारा डॉ दुर्गेश कुमार पर यौन शोषण का आरोप लगाया गया। डॉ दुर्गेश को पुलिस ने जेल भेज दिया है। इस मामले ने विश्वविद्यालय की छवि को खास नुकसान पहुंचाया है। वर्ष 2022 में स्कूली छात्रों के बीच हिंसक घटनाओं से सभी चिंतित रहे हैं। प्रेम नगर के डीएवी स्कूल के एक छात्र को कुछ युवकों द्वारा धारदार हथियार से गले पर वार करके घायल कर दिया गया। इसी तरह से उत्तरांचल विश्वविद्यालय के छात्र गुटों के बीच मारपीट की घटना में एक छात्र को चाकू घांप दिया गया तो दूसरी ओर पटेल नगर में एक छात्र को उसके ही छात्र मित्रों के द्वारा इंस्टाग्राम पर डाली गई पोस्ट से नाराज होकर चाकू घोंप दिया गया। हैरत की बात यह है कि सभी छात्र नाबालिक हैं।

पुलिस के खिलाफ शिकायतों का अंबार : जहां एक ओर राज्य में कानून व्यवस्था को चुनौती देने में अपराधी आगे रहे हैं तो वहीं पुलिस के खिलाफ भी वर्ष 2008 में स्थापित राज्य पुलिस शिकायत प्राधिकरण की स्थापना से लेकर अभी तक 1891 शिकायतें आई हैं। जिनमें 56 मामलों में कार्यवाही की गई है और 14 मामलों में सुनवाई चल रही है। 2018 में देहरादून और हल्द्वानी में जिला प्राधिकरण की स्थापना की गई जिसमें देहरादून जिला प्राधिकरण में 449 शिकायतें दर्ज की गईं जिसमें 366 शिकायतों का निस्तारण किया गया है इनमें 17 ऐसे मामले रहे हैं। जिसमें पलिस कर्मियों के खिलाफ कार्यवाही की गई है। शेष 83 मामलों में सुनवाई चल रही है। इसी तरह से हल्द्वानी जिला प्राधिकरण में 426 शिकायतें दर्ज की गई हैं जिनमें 298 का निस्तारण किया गया है और 9 शिकायतां पर कार्यवाही के आदेश किए गए हैं। शेष की सुनवाई चल रही है। इससे यह तो साफ हो जाता है कि स्वयं पुलिस विभाग के अधिकारी कर्मचारी भी आम जनता के खिलाफ काम करने में पीछे नहीं हैं। इसके अलावा साइबर अपराध के मामलों में भी प्रदेश में अनेक घटनाएं सामने आ चुकी हैं। इससे यह बात स्पष्ट है कि प्रदेश में साइबर अपराधियों का जाल फेल रहा है।

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