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Uttarakhand

क्रूरता के शिकार होते दिव्यांग

 

कहानी दिव्यांग बच्चों के एनजीओ की

 

नैनीताल जिले के रामनगर स्थित यूएसआर इंदु समिति के दिव्यांग बच्चों के स्कूल संचालकों पर आरोप है कि वे नौकरशाहों और नेताओं से अपने  संबंधों के बल पर संस्थान में हो रहे कृत्यों की निष्पक्ष जांच नहीं होने देते हैं। यहां पढ़ रहे दिव्यांग बच्चों के साथ हुए अमानवीय व्यवहार और अत्याचार को लेकर जिलाधिकारी से लेकर मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री तक शिकायत की जा चुकी है। छात्र हर्षित परगाई, नैना मेहता, महिमा गौरा के अभिभावकों ने संस्था पर बच्चों के साथ मारपीट और दुर्व्यवहार करने का आरोप लगाते हुए मुकदमा दर्ज कराया है जिसकी सुनवाई न्यायालय में चल रही है। यहां सच कहने वाले को बाहर का रास्ता दिखा दिया जाता है तो दूसरी तरफ मानकां के विपरीत अपने उन खास लोगों को फिर से भर्ती कराया जाता है जिन पर दिव्यांग बच्चों के साथ बदसलूकी करने के आरोप हैं

दास्तान-ए-दिव्यांग/भाग-1

वर्ष 1999 में एक एनजीओ यूएसआर इंदु समिति का गठन किया गया था। यूएसआर का पूरा नाम उमेद सिंह रावत है जो समिति के मैनेजर संदीप रावत के दादा है। समिति का कार्यालय नैनीताल जनपद के रामनगर में पीरूमदारा के बसई में संदीप रावत की खुद की 6 बीघा जमीन पर बनाया गया है। यूएसआर में इंदु शब्द जुड़ने के पीछे की भी एक कहानी है। इंदु नेशनल इस्टीट्यूट ऑफ स्पीच डिसएबिलिटी, दिल्ली की छात्रा थी। जिनकी एक दुर्घटना में मौत हो गई थी। उनकी मौत के बाद संदीप रावत ने अपनी समिति में इंदु शब्द जोड़ उनको श्रद्धांजलि अर्पित की। पीरूमदारा के बसई में स्थापित होने से पहले यह दिव्यांग संस्था किराए के कमरों में चलती थी। जॉन हंट नामक एक व्यक्ति ब्रिटिश की एनजीओ लोटस फ्लॉवर ट्रस्ट लंदन में है। बताया जाता है कि उन्होंने ही 2010 में संदीप रावत और इनकी समिति की मदद की। वर्ष 2012 में पीरूमदारा के बसई में दिव्यांग बच्चों का स्कूल शुरू हुआ। जबकि 2017 से दिव्यांग बालिकाओं के लिए यहां छात्रावास की शुरुआत की गई। 2021 से छात्र-छात्राओं की अलग-अलग संस्थाएं चलाई जाने लगी। यूएसआर समिति के अंतर्गत ही एक जेएसआर नाम से स्कूल भी चलाया जाता है। जेएसआर नाम का मतलब जैनित शीड्स रॉबर्टस होता है। इस नाम की महिला स्कॉटलैंड की रहने वाली है। वर्ष 2022 में यह संस्था किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण अधिनियम 2015) के तहत पंजीकृत की गई। यूएसआर इंदु समिति का स्कूल दिव्यांग बच्चों को शिक्षा के साथ ही छात्रावास की भी सुविधा देता है। यहां कुमाऊं के अलावा गढ़वाल और उत्तर प्रदेश के रामपुर एवं मुरादाबाद तक के बच्चे शिक्षा ग्रहण करते हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ से भी यहां बच्चे शिक्षित किए जा रहे हैं। कुल मिलाकर यह संस्था 100 मानसिक रूप से कमजोर बच्चों को शिक्षित कर रही है।

हाईकोर्ट के आदेश पर हुआ मुकदमा दर्ज
सब कुछ ठीक-ठाक चल रहा था कि अचानक 12 अगस्त 2022 को यह संस्था उस समय विवादां के केंद्र में आ गई जब बालक छात्रावास के दिव्यांग छात्र हर्षित परगाई के साथ मारपीट का मामला सामने आया। हर्षित परगाई के परिजन संस्था के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने के लिए स्थानीय चौकी से लेकर थाने तक रिपोर्ट दर्ज कराने को भटकते रहे। लेकिन बताया जाता है कि संस्था के मैनेजर संदीप रावत की ऊंची पहुंच होने के चलते परगाई के परिजन एफआईआर दर्ज कराने में कामयाब नहीं हुए। अंततः उन्हें हाईकोर्ट की शरण में जाना पड़ा। वहां से आदेश होने के बाद ही संस्था के खिलाफ 22 सितंबर 2022 को पूरे एक माह बाद मुकदमा दर्ज हो सका। बताया जा रहा है कि हर्षित परगाई के साथ मारपीट मामले का पता ही नहीं चलता अगर उसकी मौसी उससे मिलने नहीं आती। हर्षित की मौसी मीनाक्षी जोशी रामनगर में ही रहती हैं, जबकि उसके परिजन हल्द्वानी में रहते हैं।
दिव्यांग के शरीर पर पाए गए मारपीट के निशान मीनाक्षी जोशी के अनुसार जब वह हर्षित से मिल रही थीं तो वह उदास और डरा-डरा-सा था। वह कुछ बोल भी नहीं रहा था। जब उसने उससे जोर देकर इसका कारण पूछा तो वह रोने लगा। उसने मीनाक्षी जोशी को बताया कि उसे मारा-पीटा गया है। स्थानीय लोग बताते हैं कि मीनाक्षी ने जब उसके कपड़े उतरवाए तो उसके शरीर पर चोट के निशान स्पष्ट दिख रहे थे। मीनाक्षी जोशी ने हर्षित की मां हेमा परगाई से इस सम्बंध में बातचीत की। हेमा परगाई ने संस्था की करतूतों को मीडिया के सामने उजागर किया। इतना ही नहीं वह अपने बेटे को लेकर सीधे बेस अस्पताल हल्द्वानी गई और वहां उसका मेडिकल चेकअप कराया। जिसमें बच्चे के साथ मारपीट की पुष्टि होने के बाद वह कोतवाली रामनगर पहुंची। वहां उसकी कोई सुनवाई नहीं हुई। हेमा परगाई बताती हैं कि संस्था के मैनेजर की राजनीतिक पहुंच के आगे पुलिस नतमस्तक हो गई। बाद में कई दिन घूमने के बाद मुकदमा दर्ज कराने की बजाय सिर्फ रिपोर्ट को प्राप्त कर मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। इसके बाद मजबूरन वह हाईकोर्ट नैनीताल पहुंची। जहां से आदेश के बाद ही एक माह बाद मुकदमा दर्ज किया गया। तब से यह मामला जिला न्यायालय नैनीताल के अंतर्गत विचाराधीन है।

हर्षित परगाई के बाद महिमा गौरा
एक बार जब संस्था में बच्चों के साथ अमानवीय व्यवहार का मामला खुला तो इसके बाद कई मामले ऐसे ही सामने आए जिनमें दिव्यांग बच्चों का वह दर्द सामने आया जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती है। जानकारी के अनुसार एक-दूसरे मामले में चंदन गौरा एवं पूजा गौरा की पुत्री महिमा गौरा के साथ भी मारपीट की गई। इसकी भी रिपोर्ट हर्षित परगाई के साथ ही दर्ज हुई। महिमा गौरा ने अपने साथ मारपीट करने वाली अनिता ध्यानी की पहचान करते हुए कहा था कि उसने उसे डंडे से मारा है। अनिता ध्यानी संस्था में काउंसलर थी जबकि एक अन्य कर्मचारी अनिता गुंसाईं तत्काल अधीक्षक थी। एक वीडियो में बच्चों ने बयान दिया है कि उनके साथ अनिता गुंसाईं ने मारपीट की है।
महिमा के बाद अरहान और नैना मेहता
ऐसा ही एक मामला 13 अगस्त 2022 का है। जब हेमा परगाई स्कूल में पहुंची थी तब एक बच्चे अरहान ने कहा कि उसे स्कूल वाले डंडे से मारते हैं। हेमा परगाई ने उसी शाम अरहान की वीडियो बनाई थी। तब सामने आया थ कि अरहान के सिर में चोट लगने से वह घायल हो गया है। स्कूल प्रशासन ने अरहान मामले में यह कहकर गुमराह करने की कोशिश की कि वह गिर गया था जबकि हेमा परगाई के अनुसार उसे मारा गया। अरहान की मेडिकल जांच भी नहीं कराई गई। इसके अलावा एक अन्य दिव्यांग बच्ची नैना मेहता का भी मामला मारपीट से जुड़ा है। जिसकी वीडियो फुटेज भी हेमा परगाई के पास है। बताया जा रहा है कि नैना मेहता के परिजन पिथौरागढ़ में रहते हैं। उन्होंने वहां के जिलाधिकारी के समक्ष इसकी शिकायत की। तब बच्चे के साथ दुर्व्यवहार को लेकर पिथौरागढ़ के जिलाधिकारी ने जांच कराने के लिए कहा था।

अंबुज कुमार भी हुआ शिकार

18 अक्टूबर 2023 को संस्था के मैनेजर संदीप रावत ने अपने यहां सफाई कर्मचारी अंबुज कुमार के साथ मारपीट की जिसकी सीसीटीवी फुटेज भी मौजूद है। अंबुज कुमार का कसूर सिर्फ यह था कि उसने रात को बच्चों के कहने पर उनके लिए खाना बनाने की जुर्रत की थी। बच्चों की भूख उससे देखी नहीं गई और उसने उनको खाना बना कर खिला दिया। संदीप रावत को सुबह जब इसका पता चला तो उसके द्वारा अंबुज कुमार से कहा- सुनी की गई जो बाद में मारपीट में बदल गई। स्थानीय निवासी व पत्रकार मयंक मैनाली ने सभी अधिकारियों के समक्ष इस प्रकरण की शिकायत करते हुए जांच कराने की मांग की लेकिन संस्था के प्रबंधक संदीप रावत ने अपने संबंधों के बल पर इस मामले को रफादफा करा दिया। बाद में उपेक्षित अंबुज कुमार ने इस संस्थान से इस्तीफा दे दिया। कहा यह भी जा रहा है कि अभी तक भी अंबुज कुमार को उसका बकाया वेतन संस्थान के द्वारा नहीं दिया गया है।

हाईकोर्ट के आदेशों बाद मिला प्रशिक्षित स्टाफ

सितंबर 2022 में हल्द्वानी की ‘रोशनी संस्था’ के अध्यक्ष गोविंद सिंह मेहरा यूएसआर इंदु समिति स्कूल के प्रकरण को हाईकोर्ट नैनीताल में ले गए। जहां हाईकोर्ट के आदेश के बाद एक जांच टीम को यूएसआर इंदु समिति में भेजा गया। जिसमें हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार के अलावा वरिष्ठ अधिवक्ता दुष्यंत मैनाली, तत्कालीन पुलिस उपाधीक्षक रामनगर और तत्कालीन कोतवाल रामनगर शामिल थे। इस टीम ने अपने निरीक्षण में पाया कि संस्था द्वारा मोटे तौर पर सभी प्रकार की सुविधाएं, सफाई, भोजन इत्यादि का संचालन सुचारू रूप से किया जा रहा है। रजिस्टार हाईकोर्ट द्वारा दी गई इस रिपोर्ट से अलग अधिवक्ता दुष्यंत मैनाली ने, जो इस जांच टीम का हिस्सा थे, एक पृथक रिपोर्ट हाईकोर्ट में दाखिल की जिसमें उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि संस्था केंद्रीय महिला एवं बाल कल्याण मंत्रालय द्वारा 23/11/2016 को जारी दिशा-निर्देशों का अनुपालन नहीं कर रही है और इस दिशा-निर्देशों के अनुरूप उसके पास प्रशिक्षित स्टाफ मौजूद नहीं है। मैनाली ने न्यायालय का ध्यान इस तथ्य पर विशेष तौर पर आकृष्ट किया कि इस संस्था के वार्डन विरेंद्र रावत स्वयं दिव्यांग हैं इसलिए वार्डन के कर्तव्यों का निर्वहन कर पाने योग्य नहीं हैं। मैनाली ने संस्था में केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों अनुसार मेडिकल ऑफिसर न होने तथा महिला सुरक्षा गार्ड न होने की बात भी सामने रखी। यहां यह गौरतलब है कि रजिस्ट्रार हाईकोर्ट ने अपनी रिपोर्ट में संस्था को एक तरह की क्लीनचिट्ट दी तो दूसरी तरफ अधिवक्ता दुष्यंत मैनाली ने कई ऐसी महत्वपूर्ण कमियों को चिन्हित किया जो केंद्र सरकार के मानकों मुताबिक स्वीकार्य नहीं हैं। हाईकोर्ट नैनीताल इसके बाद यूएसआर इंदु समिति स्कूल के लिए प्रशिक्षत स्टाफ रखने ­­­­­­­­­­­­­­­­­­और राज्य सरकार से फंड जारी करने के निर्देश दिए। इसके बाद महिला एवं बाल विकास देहरादून द्वारा मिशन वात्सल्य योजना जारी की गई जिसके द्वारा प्रशिक्षित स्टाफ और बच्चों के भरण-पोषण को फंड जारी हुआ और इसके चलते यूएसआर इंदु समिति स्कूल के लिए नियुक्तियां निकाली गई। कुल 36 पदों पर भर्तियां की गई जिसमें 18 युवक और 18 युवतियों को नौकरी पर रखा गाया। ये सभी अपने-अपने क्षेत्र में योग्यता हासिल किए हुए थे।
अयोग्य आरोपी लोगों की हुई पुनः नियुक्तियां कुछ समय तो सब कुछ ठीक-ठाक चला लेकिन इसके बाद स्कूल प्रबंधन अपनी मानमानी पर उतर आया। डिप्लोमा और डिग्रीधारी कर्मचारियों को अपनी संस्था से निकालना शुरू कर दिया गया। संदीप रावत पर आरोप है कि उन्होंने प्रशिक्षित स्टाफ को बाहर कर अयोग्य लोगों को रखना शुरू किया। इसमें अधीक्षक सहित ऐसे भी लोग शामिल हैं जो वात्सल्य योजना के तहत अर्हता पूरी ही नहीं करते हैं। जो पूर्व में प्रशिक्षित कर्मचारी थे उन्होंने अपने साथ उत्पीड़न की शिकायतें की। लेकिन उनकी शिकायतों की कोई सुनवाई नहीं हुई। इसके चलते करीब 150 कर्मचारियों ने एक साल के अंदर ही नौकरियां छोड़ दी।

सच कहना पड़ा महंगा
इनमें कुछ कर्मचारी ऐसे भी शामिल थे जिन्होंने यूएसआर इंदु समिति के प्रबंधन द्वारा बच्चों के साथ मारपीट करने के आरोप लगाते हुए शिकायतें भी दर्ज कराई थी। इनमें महिला और बाल विकास विभाग द्वारा संचालित मिशन वाल्सल्य योजना के अध्यक्ष रहे रोहित जोशी, प्रोबेशन अधिकारी मयंक मैनाली, काउंसलर तनुजा पांडेय, पैरामेडिकल दीपक चंद्र, खेल प्रशिक्षक संजीव प्रकाश, खेल प्रशिक्षक (बालिका) मनीषा मावडी आदि ऐसे कर्मचारी थे जिन्होंने संस्था में हो रहे बच्चां के साथ दुर्व्यवहार को अनदेखा न करते हुए निदेशालय महिला कल्याण बाल विकास विभाग, जिलाधिकारी नैनीताल एवं कुमाऊं के मंडल आयुक्त सहित उच्चधिकारियों को पत्र लिखकर कार्यवाही करने की बात कही थी। जिसका नतीजा यह निकला कि सच का साथ देने वालों को स्कूल छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा। इसके अलावा हल्द्वानी के आरटीआई कार्यकर्ता हेमंत गोनिया द्वारा भी इस संस्था में बच्चों के साथ मारपीट और उनसे काम करवाने का आरोप लगाते हुए भारत सरकार के गृह मंत्रालय को पत्र भेजकर जांच कराने की मांग की गई। जिसके बाद जांच तय की गई। यूएसआर इंदु समिति के प्रबंधन संदीप रावत द्वारा गोनिया पर 5 करोड़ की मानहानि का मुकदमा भी दर्ज कराया जा चुका है।
कमिश्नर की असंवेदनशीलता 15 मार्च 2024 को कुमाऊं कमिश्नर दीपक रावत के जनता दरबार में रामनगर निवासी मयंक मैनाली और तनुजा पाण्डेय अपनी फरियाद लेकर पहुंचे थे। समस्या रामनगर के बसई स्थित एक दिव्यांग स्कूल यूएसआर इंदु समिति के बच्चों से संबंधित थी। बच्चों के साथ स्कूल कर्मचारियों द्वारा बदसलूकी और मारपीट की घटना को अंजाम देने के आरोप इस संस्था में काम कर चुके मयंक मैनाली और तनुजा पाण्डेय द्वारा लगाया जाना एक गंभीर मसला है। कुमाऊं कमिश्नर ने लेकिन बगैर मामले की गंभीरता को समझते हुए पूरे घटनाक्रम में जिस जिला प्रोबेशन अधिकारी पर लापरवाही और लीलापोती के आरोप है, उसी को जांच अधिकारी बना डाला। जनता दरबार में मौके पर ही समस्या का निवारण करने की औपचारिकता के तहत ऐसा आनन-फानन में कर दिया गया।

18 मार्च 2024 को कुमाऊं कमिश्नर कार्यालय नैनीताल में एक बार फिर से मयंक मैनाली और तनुजा पाण्डेय ने अपनी बात रखने का प्रयास किया। कुमाऊं आयुक्त से मुलाकात कर उन्हें एक पत्र सौंपा। इस पत्र में उन्होंने लिखा कि ‘महोदय हमारे द्वारा आपको जिला प्रोबेशन अधिकारी और जिला बाल कल्याण समिति द्वारा विधिवत कार्य नहीं करने और यूएसआर इंदु समिति की शिकायतों पर कोई कार्यवाही न करने की सूचना दी गई थी। लेकिन आपके द्वारा जारी किए पत्र में जिला प्रोबेशन अधिकारी को सुनवाई करने के निर्देश दे दिए गए। जिनको हमने आपके समक्ष पक्षकार बनाया है उनके द्वारा हमारी शिकायत किस प्रकार सुनी जा सकती है?’

मयंक मैनाली और तनुजा पाण्डेय की शिकायत पर कुमाऊं कमिश्नर दीपक रावत ने कैम्प कार्यालय, हल्द्वानी में जनसुनवाई करते हुए जिला प्रोबेशन अधिकारी और यूएसआर इंदु समिति के प्रबंधक संदीप रावत को सुनवाई में तलब किया। जिस पर प्रोबेशन कार्यालय से आए कार्मिक पंकज सती और प्रकाश कांडपाल ने कमिश्नर दीपक रावत के समक्ष यह स्वीकार किया था कि अधीक्षक, अधीक्षिका सहित कई पदों पर कर्मचारियों की योग्यता सरकार द्वारा संचालित मिशन वात्सल्य परियोजना के मानकों के अनुसार नहीं है। कमिश्नर ने सभी पदों पर नये सिरे से भर्ती का विज्ञापन जारी कर पदों को मानकों के अनुसार भरने के प्रोबेशन कार्यालय को निर्देश जारी किए। लेकिन मानकों पर भर्ती नहीं करने पर कार्यवाही करने की बात कह स्कूल संचालकों पर कठोर कार्यवाही करने से बचते नजर आए।

उपसंहार
अभी तक इस संस्था पर कोई भी तर्कसंगत कार्यवाही न कि जाना और उच्च न्यायालय के आदेशों का समुचित पालन न होना राज्य सरकार और राज्य की नौकरशाही पर बड़ा प्रश्न चिन्ह खड़ा करता है। ऐसा तब है जबकि देश के प्रधानमंत्री दिव्यागों के प्रति अतिसंवेदनशील हैं। उल्लेखनीय है कि 27 दिसंबर, 2015 को अपने रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ में देशवासियों से पीएम मोदी ने अपील करते हुए विकलांगों को ‘दिव्यांग’ कहने की अपील की थी। बतौर मुख्यमंत्री गुजरात और बाद में प्रधानमंत्री रहते मोदी ने दिव्यांगों को नाना प्रकार से प्रोत्साहित करने संबंधी योजनाएं भी चलाई हैं। ऐसे में उत्तराखण्ड सरकार, विशेषकर उसकी नौकरशाही का इंदु समिति के खिलाफ कठोर कार्यवाही न करना सरकार और नौकरशाही को कठघरे में खड़ा कर रहा है।

बात अपनी-अपनी

मैंने यूएसआर मामले में किसी को भी जांच अधिकारी नहीं बनाया बल्कि मेरा जांच करने का स्टाईल ही अलग है और मैं खुद जांच करता हूं। मैंने प्रोबेशन अधिकारी को और संदीप रावत को बुलाया और उनसे स्पष्ट कहा कि दोबारा से नियुक्ति कीजिए। प्रशिक्षित स्टाफ रखिए। उन्होंने ऐसा करने का वादा भी किया था। मैंने डेढ़ महीने पहले की बात है। इसके बाद में फॉलो नहीं कर पाया। शायद आचार संहिता की वजह से स्टाफ की नियुक्ति नहीं हुई होगी।
दीपक रावत, कमिश्नर कुमाऊं मंडल

दो साल पहले मैंने जब ज्वाइनिंग किया था तो स्कूल में एक बच्चा गिर गया था तो उसे चोट लग गई। बच्चे की माता जी के द्वारा बताया गया कि वह स्कूल स्टाफ के द्वारा पीटा गया था। तत्कालीन जिलाधिकारी धीरज गर्ब्याल ने एक जांच कमेटी गठित की भी। जांच टीम ने बच्चे की पिटाई की पुष्टि की थी। हमने आरोपी को तत्काल हटाने के आदेश दिए थे। यह मामला होईकोर्ट भी पहुंचा जहां कोर्ट ने सुधार करने के आदेश दिए फिलहाल वहां सुधार है। हम भी वहां मंथली निरीक्षण करने जाते हैं।
वर्षा रानी, जिला प्रोबेशन अधिकारी, नैनीताल

दो साल पहले कई बच्चों के मामले सामने आए थे लेकिन उन मामलों में कार्रवाई हो चुकी है। मुकदमे दर्ज हो चुके हैं, फिलहाल कोर्ट में विचाराधीन हैं।
आर.के. पंत, अध्यक्ष जिला बाल कल्याण समिति

मैंने यूएसआर स्कूल की शिकायत की थी तो स्कूल के प्रबंधक संदीप रावत ने मुझ पर 5 लाख रुपए की रंगदारी मांगने के आरोप लगा दिए गए जिसके खिलाफ मैंने डीजीपी को लिखा और मानहानि का नोटिस भिजवाया संदीप रावत पर मेरे खिलाफ पैसे मांगने का आरोप सिद्ध नहीं हो सका।
हेमंत मोनिया, आरटीआई कार्यकर्ता

यूएसआर इंदु समिति में मानकों पर स्टाफ नहीं है, सरकार की मिशन वात्सल्य परियोजना का जमकर दुरुपयोग किया जा रहा है। कर्मचारियों का शोषण किया जाता है, दिव्यांग बच्चों के साथ दुर्व्यवहार किया जाता है। दिव्यांग बच्चों को मारा-पीटा तक जाता है। जिसमें प्रबंधक संदीप रावत की पूरी भूमिका है। दिव्यांग पाल्य सुभाष की गुमशुदगी में संशय है, जिसकी निष्पक्षता से जांच करने की आवश्यकता है। नैनीताल जिले की जिला बाल कल्याण समिति और जिला प्रोबेशन अधिकारी दोनों ही यूएसआर इंदु समिति के इस भ्रष्टाचार में लिप्त हैं। दोनों ही संस्था और जिला प्रोबेशन अधिकारी को बर्खास्त किया जाना चाहिए, यह अभिभावकों की शिकायत सुनने के बजाय उल्टा उन्हें ही धमकाते हैं।
मयंक मैनाली, पूर्व प्रोबेशन अधिकारी, यूएसआर इंदु समिति

यूएसआर इंदु समिति में मिशन वात्सल्य परियोजना के किसी भी मानक पर पदों में नियुक्ति नहीं की गई है। पूर्व में जो स्टाफ दोषी था, उसे ही फिर से नियुक्ति दे दी गई है। दिव्यांग बच्चों के साथ भी गलत व्यवहार किया जाता है। बच्चे अपनी पीड़ा तक नहीं कह पाते। कर्मचारियों का भी शोषण किया जाता है।
तनुजा पाण्डेय, पूर्व कांउसलर, यूएसआर इंदु समिति

यूएसआर इंदु समिति में मिशन वात्सल्य परियोजना के किसी भी मानक पर पदों में नियुक्ति नहीं की गई है। जिसके संबंध में निदेशक, महिला एवं बाल कल्याण विभाग और कुमाऊं कमिश्नर तक को अवगत कराया गया। लेकिन कोई उचित कार्यवाही होती हुई नहीं दिखाई दी। मुझे अकारण ही अधीक्षक पद से हटने पर मजबूर कर दिया गया।
रोहित जोशी, पूर्व अधीक्षक, यूएसआर इंदु समिति

यूएसआर इंदु समिति में मिशन वात्सल्य परियोजना के किसी भी मानक पर पदों में नियुक्ति नहीं की गई है। पूर्व में जो स्टाफ दोषी था, उसे ही फिर से नियुक्ति दे दी गई है। कर्मचारियों का भी शोषण किया जाता है। समय पर वेतन भी नहीं दिया जाता है। पद के अनुसार कार्य नहीं करवाए जाते हैं।
दीपक चंद्र, पूर्व पैरामेडिकल, यूएसआर इंदु समिति

मैं यह कहना चाहती हूं कि मेरा बेटा हर्षित परगाई पूरे 6 महीने तक इस विद्यालय में रहा है। इस बीच मैंने देखा कि विद्यालय में बच्चों के साथ अच्छा व्यवहार नहीं हो रहा था। उनके खान-पान पर ध्यान नहीं दिया जाता था, उन्हें अधिकतर माइक्रोनी तथा मैदायुक्त चीज दी जा रही थी। गर्मी के दिनों में शादियों का बचा हुआ और पीपल पानी का खाना बच्चों को दिया जा रहा था। जिसका मेरे द्वारा विरोध् भी किया गया। इसके बाद भी यह सब कुछ बंद नहीं किया गया। इन 6 महीनों में मैंने देखा कि कभी भी पेरेंट्स टीचर मीटिंग नहीं होती थी। बच्चों के कपड़े बहुत ही गंदे होते थे और जो बच्चों को घर से कपड़े दिए जाते थे, वे कपड़े भी बच्चों को नहीं पहनाए जाते थे। टीचरों द्वारा बच्चों के साथ अभद्र व्यवहार किया जाता था, और मारपीट भी की जा रही थी। इसका मेरे द्वारा विरोध किया गया। वहां पर सरकार द्वारा संचालित मिशन वात्सल्य योजना भी चल रही थी इसके बावजूद भी वहां पर न तो बच्चों के स्वास्थ्य परीक्षण की चीज थी न तो स्टाफ था और न ही महिला व पुरुष गार्ड थे।

वहां पर बच्चों के लिए न तो स्पेशल एजुकेटर था और न ही प्रशिक्षित स्टाफ। दिव्यांग बच्चों को देखने के लिए एक ऐसे स्टाफ को रखा गया था जो कि खुद भी चलने फिरने में असमर्थ था जबकि संस्था में सरकार द्वारा फंडिंग की जा रही थी उसके बावजूद भी बच्चों के माता-पिता से डोनेशन के नाम पर पैसे लिए जाते थे और रसीद भी नहीं दी जा रही थी। वीरेंद्र रावत वार्डन द्वारा मुझे 12 अगस्त 2022 की रात को बताया गया कि एक अनाथ बच्चा सुभाष (संस्था द्वारा रखा गया नाम) इस संस्था से लापता है इसकी सूचना मैंने 16 जुलाई 2022 को जिला प्रोविजन अधिकारी और बाल कल्याण समिति अध्यक्ष को दी। जब इनके द्वारा इतने लंबे अंतराल तक जिला प्रोविजन अधिकारी और बाल कल्याण समिति को सूचित नहीं किया गया था तो बाल कल्याण समिति और प्रोविजन अधिकारी ने एक्शन लेना चाहिए था जो उनके द्वारा नहीं लिया गया। बाल कल्याण समिति और प्रोविजन अधिकारी बच्चों के हित में कम और संस्था के संचालक के हित में अधिक काम करते हैं।
हेमा परगांई, अभिभावक

हमारे स्कूल में बच्चों के साथ कोई मारपीट नहीं हुई है। कोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया है। इस बाबत हमारे पास कोर्ट के रजिस्ट्रार की रिपोर्ट है। हाईकोर्ट ने जो पीआईएल डाली गई थी उसमें भी हमारे हक में बात कही गई है। वह 300 पेज की पीआईएल है। यह सब रोशनी सोसायटी वालों का मामला है जो चाहते हैं कि दूसरे को गिरा दो और अपने आप आगे बढ़ो। कोर्ट ने तो हमारे पक्ष में यह भी कहा है कि इसे पैसा दो।
संदीप रावत, मैनेजर यूएसआई इंदु समिति स्कूल, रामनगर

अगले अंक में पढ़िए सुभाष की रहस्यमय गुमशुदगी का राज।

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