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उत्तराखण्ड के उच्च शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत ने पहली बार प्रदेश में एक अनूठा प्रयोग किया है। विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों के छात्र संघ चुनाव एक ही दिन संपन्न करवाकर उन्होंने संदेश दिया है कि ‘एक देश, एक चुनाव’ की जो परिकल्पना प्रधानमंत्री मोदी ने की है, उसे व्यवहार में साकार किया जा सकता है

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक देश, एक चुनाव की परिकल्पना भले ही परवान नहीं चढ़ पा रही हो। लेकिन उत्तराखण्ड के उच्च शिक्षा राज्यमंत्री डॉ धन सिंह रावत ने अपने राज्य में विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों के छात्रसंघ चुनावों के बहाने ही सही ‘एक प्रदेश, एक चुनाव’ का फॉर्मूला लागू कर दिया। उन्होंने एक ही दिन पूरे प्रदेश में विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों के छात्र संघ चुनाव संपन्न कराए हैं। उत्तराखण्ड में छात्र संघ चुनाव किसी बड़े चुनाव से कम नहीं होते। खासकर जब भारतीय जनता पार्टी एवं कांग्रेस से जुड़े छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी), भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (एनएसयूआई) इनको अपनी प्रतिष्ठा से जोड़कर चुनाव को लड़ते हैं।

पिछले कुछ वर्षों के चुनावों पर नजर डालें तो छात्र संघ के चुनावों में अराजकता का बोलबाला रहा है। इन चुनावों में राजनीतिक दलों के बड़े नेताओं का हस्तक्षेप इन्हें प्रतिष्ठा के चुनाव बना देता है। पिछले वर्ष इसी प्रतिष्ठा की लड़ाई के चलते उच्च शिक्षा निदेशक, दो प्राचार्य सहित अन्य कर्मचारियों को निलंबन झेलना पड़ा था। इस बार के छात्र संघ चुनाव राजनीतिक दलों के लिए मिले-जुले साबित हुए। कुमाऊं के सबसे बड़े महाविद्यालय एमबीपीजी कॉलेज में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के गौरव कोरंगा विजयी हुए। हालांकि डीएसबी कैंपस नैनीताल में एबीवीपी का बागी अध्यक्ष पद पर जीत गया। वहीं रामनगर में भी बाजी एबीवीपी के बागी के हाथ लगी। कुल मिलाकर शांतिपूर्वक संपन्न हुए छात्र संघ चुनावों में कुमाऊं में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद 38 में से 12 अध्यक्ष एवं गढ़वाल में 28 में 12 अध्यक्ष बना पाई। वहीं भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (एनएसयूआई) गढ़वाल में 3 और कुमाऊं में 8 अध्यक्ष बनवा पाया। छात्र संघ चुनावों में निर्दलीय या बागियों का दबदबा रहा।

चुनावों में हार जीत के इतर देखें तो उच्च शिक्षा मंत्री ने इन चुनावों में कुछ प्रयोग किए। जिसमे पूरे प्रदेश के महाविद्यालयों में एक ही दिन में चुनाव करवाना प्रमुख है। प्रदेश के इतिहास में ये पहली बार था जब एक ही दिन पूरे प्रदेश में छात्र संघ चुनाव संपन्न हो गए। उच्च शिक्षा मंत्री की इस पहल को प्रशासन एवं पुलिस का पूरा सहयेग मिला। कुछ छिटपुट घटनाओं को छोड़ दें तो पुलिस की मुस्तैदी से छात्र संघ चुनाव पिछले वर्षों की तुलना में अपेक्षाकृत शांति से निपट गए। दूसरा प्रयोग था प्रत्याशियों की सामान्य सभा जिसमें प्रत्याशी अपनी भावी योजनाओं को विद्यार्थियों के समक्ष रख सकते थे। वो बात अलग है कि 5 हजार से अधिक संख्या वाले एमबीपीजी कॉलेज में इस सामान्य सभा में 150 से अधिक छात्र उपस्थित नहीं थे। इस बार गलत रीके से प्रवेश लेने के मामले प्रकाश में नहीं आए। पिछले वर्ष एमबीपीजी कॉलेज हल्द्वानी में छात्र संघ चुनाव के दौरान एनएसयूआई प्रत्याशी मीमांसा आर्य प्रकरण में सख्ती दिखाते हुए उच्च शिक्षा निदेशक, दो प्राचार्य, प्राध्यापक सहित अन्य को निलंबित कर दिया गया था। उनके इस निर्णय की आलोचना या असहमति हो सकती है। लेकिन इसका असर महाविद्यालयों में प्रवेश प्रक्रिया में दिखा जहां प्रवेश सावधानीपूर्वक हुए और सिर्फ चुनाव लड़ने के लिए होने वाले फर्जी प्रवेशों पर रोक लगी।

यूं तो भारी-भरकम बहुमत के साथ सत्ता पर विराजी भाजपा सरकार के मंत्रिमंडल में प्रकाश पंत, मदन कौशिक जैसे खांटी भाजपाई अनुभवी नेता हैं, कांग्रेस से भाजपा में आए यशपाल आर्य, हरक सिंह रावत और सतपाल महाराज जैसे नेता भी हैं। लेकिन इन डेढ़ सालों में डॉ ़ धन सिंह रावत ने जिस तेजी से काम किया है उसने उनकी छवि एक काम करने वाले मंत्री के रूप में बनी है। उनके पास उच्च शिक्षा, सहकारिता दुग्ध विकास एवं प्रोटोकॉल जैसे विभाग हैं। अपनी सक्रियता का प्रमाण उन्होंने भाजपा सरकार बनते ही दे दिया था जब उन्होंने राज्य सहकारी बैंक के अध्यक्ष पद से कांग्रेस को अपदस्थ कर भाजपा के दान सिंह रावत को राज्य सहकारी बैंक का अध्यक्ष निर्वाचित करवा दिया। जहां शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक नगर निकाय चुनावों को करवाने में असफल साबित हो रहे, वहीं सहकारी समितियों के चुनाव सफलतापूर्वक संपन्न करवा लिए और अधिकांश समितियों में भारतीय जनता पार्टी से जुड़े लोग चुने गए। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की पृष्ठभूमि से आए डॉ ़ धन सिंह रावत भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व के भी करीबी माने जाते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के केदारनाथ भ्रमण के दौरान उनके सबसे करीब रावत को ही देखा गया था। उच्च शिक्षा के क्षेत्र में उन्होंने कायाकल्प किए हैं। उच्च शिक्षा के क्षेत्र में उनकी शुरुआत शौर्य दीवार की स्थापना से हुई। प्रत्येक महाविद्यालय एवं विश्वविद्यालय में वीरें के शौर्य को याद करते हुए शौर्य दीवार की स्थापना की। कुमाऊं विश्वविद्यालय का सत्र नियमित करना उनकी एक बड़ी उपलब्धि रही है। कई वर्षों से अनियमित सत्र को नियमित करने के उन्होंने सख्त निर्देश दिए थे। इस बार कुमाऊं विश्वविद्यालय ने बिना दबाव में आए परीक्षाएं समय पर संपन्न कराई। विश्वविद्यालयों में होने वाले दीक्षांत समारोह भी उनके उच्च शिक्षा मंत्री बनने के बाद नये कलेवर में नजर आए जिनमें पुरातन गाउन को त्याग कर हिन्दुस्तानी संस्कृति का पुट लेते हुए नया ड्रेसकोड लागू किया गया।

सहकारिता के क्षेत्र में विशेष रुचि रखने वाले धन सिंह रावत ने सात दिवसीय सहकारिता सम्मेलन देहरादून में आयोजित करवा कर खूब बाहवाही लूटी जिसमें केंद्रीय कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह भी आए थे। सहकारिता क्षेत्र में 759 नैक्स कंपनियों को कम्प्यूटरीकृत करने की पहल भी की गई है। सहकारी बैंकों का कम्प्यूटरीकरण एवं एटीएम लगाने की शुरुआत हो चुकी है। किसानों की हालत सुधारने के लिए घाटे में चल रही दुग्ध समितियों के लिए विशेष पैकेज एवं दुग्ध समितियों के आधुनिकीकरण की दिशा में गंभीर कदम उठाए हैं।

संघ की पृष्ठभूमि से आए डॉ. धन सिंह रावत उत्तराखण्ड भाजपा के संगठन महामंत्री भी रह चुके हैं। वर्ष 2015 में एक बार उनका नाम उत्तराखण्ड भाजपा के अध्यक्ष पद के लिए भी उछला था। प्रदेश भाजपा में विकसित होती नई पीढ़ी, अपने विभागों पर सख्त निगरानी और कार्य करने वाले मंत्री के रूप में उन्होंने पिछले डेढ़ वर्षों के दौरान छवि बनाई है।

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