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Uttarakhand

घोटालों के बावजूद पद पर जमे हैं अधिकारी

कुंभ शुरू होने से पहले ही भ्रष्टाचार का जो सिलसिला शुरू हुआ वह आज खत्म होने पर भी जारी है। नित नए घोटाले सामने आ रहे हैं। लेकिन मेला अधिकारी दीपक रावत और अपर मेला अधिकारी ललित नारायण मिश्रा की सरकार अभी तक विदाई नहीं कर पाई है। इन अधिकारियों के रहते घोटालों की निष्पक्ष जांच होनी मुश्किल है

कोरोना टेस्टिंग में हुए करोड़ों रुपये के घोटाले ने कुंभ की अव्यवस्थाओं की पोल खोलकर रख दी है। कुम्भ मेला 2021 में हुए घोटालों की कथा अनन्त होती दिख रही है। कुंभ के बाद भी नित नए घोटाले सामने आ रहे हैं। इसके बावजूद मेलाधिकारी दीपक रावत और अपर मेलाधिकारी ललित नारायण मिश्रा की कुम्भ प्रशासन से अभी तक विदाई न होने को लेकर भी राज्य सरकार की मंशा पर अब सवाल खड़े होने लगे है। यहीं नहीं कुम्भ में हुए टेस्टिंग घोटाले को लेकर हुई एफआईआर के बावजूद कुम्भ प्रशासन से सीएमओ कुंभ सहित मेला अधिकारी व अपर मेलाधिकारी की तैनाती हरिद्वार में ही बने रहने पर घोटाले की निष्पक्ष जांच को लेकर तरह-तरह की चर्चाए धर्मनगरी में चारों ओर फैल रही हैं। कुंभ के पश्चात हुई मानसून की पहली वर्षा ने करोड़ों रुपये के कुंभ कार्यों की असलियत खोलकर रख दी है। कहीं घाट बह गये है तो कहीं करोड़ों रुपये के घाट गंगा में समा गये है। यही नहीं नमामि गंगे के बजट से विभिन्न स्नान घाटों पर लगाए गए लाखों रुपए लागत वाले आस्था कलश भी कुंभ कार्यों की गुणवत्ता पर सवालिया निशान लगाते हुए गंगा में औंधे मुंह पड़े कुंभ प्रशासन का मुंह चिढ़ाते नजर आ रहे हैं। कुंभ योजना की बहुप्रचारित सौगात आस्था पथ पर ही मानसून की पहली बारिश में आस्था डोलती नजर आई। उच्च गुणवत्ता के दावों के विपरीत वर्षा से पूर्व आस्था पथ के द्वार पर विराजमान शिवजी महाराज वर्षा के पश्चात जमीन पर आ गए हैं। यही नहीं गणेश जी भी शिव जी महाराज के पास आस्था पथ पर ही जमीन पर विराजमान हैं।

सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार घोटाला का कुंभ बन चुके कुंभ मेला 2021 में हुआ कोरोना टेस्टिंग जांच घोटाला तो भ्रष्टाचार का मात्रा एक नमूना माना जा रहा है। सूत्रा बताते हैं कि सोशल मीडिया फेम आईएएस अधिकारी दीपक रावत के नेतृत्व में सम्पन्न हुआ पूरा कुंभ ही घोटालों का कुंभ है। कुंभ के दौरान अस्थाई रूप से निर्मित सात करोड़ की लागत वाले मीडिया सेंटर के निर्माण में भी अब घोटाले की बू आ रही है। कुंभ में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए अस्थाई रूप से निर्मित आधार बेस अस्पताल में भी बड़ा घोटाला हुआ है। यहीं नहीं मीडिया सेंटर में व्यवस्थाए संभालने वाले गढ़वाल मंडल विकास निगम द्वारा पत्राकारों के खाने-पीने पर दिखाए गए नौ लाख रुपये में भी घोटाले की बू आ रही है। दिव्य व भव्य कुंभ कराने का दावा करने वाली राज्य सरकार और कुंभ मेला प्रशासन की महत्वकांक्षी योजना 23 करोड़ के आस्था पथ में भी घोटाले की बू आ रही है। मौसम की पहली वर्षा ने कुंभ निधि से हुए धर्मनगरी के अलग-अलग घाटों के निर्माण की पोल खोलकर रख दी है। चंडीघाट से वीआईपी पार्किंग तक एक किमी लम्बे आस्था पथ की सूरत पहली वर्षा ने बिगाड़ कर रख दी है। यह हाल तब है जब इस आस्था पथ के उद्घाटन अवसर पर सूबे के मुखिया सहित मेलाधिकारी दीपक रावत ने इसकी खूबसूरती को लेकर लम्बे चैड़े दावे किए थे। आस्था पथ पर आने वाले श्रद्धालुओं के लिए करोड़ों रुपये की लागत से बने स्नान घाट की पहली वर्षा से हुई दुर्गति को लेकर स्थानीय नागरिकों सहित साधु संत भी अब आस्था पथ की गुणवत्ता और योजना को लेकर मेला प्रशासन पर सवाल खड़े कर रहे हैं। आस्था पथ के घाट का हाल यह हो चुका है कि श्रद्धालुओं के स्नान हेतु बनाया गया पूरा स्नान घाट गंगा में समा चुका है तथा पूरे घाट को सील्ट ने अपनी चपेट में ले लिया है। मौके पर चमक रही रैलिंग से ही पता चल रहा है कि कभी यहां घाट हुआ करता था।

जिस समय मेलाधिकारी के पद पर दीपक रावत की तैनाती की गई थी हमने उसी समय बता दिया था कि अधर्मी व्यक्ति की तैनाती मेले के लिए अशुभ साबित होगी। जिस प्रकार निर्माण कार्यों सहित कोरोना टैस्टिंग में करोड़ों का घोटाला सामने आया है। तो इसकी जांच सीबीआई से कराई जानी आवश्यक है। उससे पूर्व मेलाधिकारी को हरिद्वार से हटाया जाना चाहिए।
स्वामी शिवानन्द महाराज, परमाध्यक्ष मातृ सदन

लापरवाही का आलम देखिए कि सोशल मीडिया पर फोटो वीडियो अपलोड कर सुर्खियां बटोरने वाले मेलाधिकारी दीपक रावत ने अपनी इस महत्वाकांक्षी योजना की हुई बदहाल स्थिति को लेकर अभी तक कोई सुध नहीं ली है। यहीं नहीं आस्था पथ के निर्माण के पश्चात लावारिश छोड़ दिया गया है। सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार आस्था पथ के सौंदर्यीकरण के नाम पर भी बड़ा घोटाला हुआ है। आस्था पथ ही नहीं मेला प्रशासन द्वारा कुंभ निधि से निर्मित धर्मनगरी के अधिकतर घाट पहली वर्षा में ही अपनी गुणवत्ता और भ्रष्टाचार की कहानी बयां करते नजर आ रहे हैं। कनखल शमशान घाट के सामने की ओर कुंभ निधि से निर्मित घाट और पुल की एप्रोच रोड़ पहली वर्षा में ही तबाह हो चुकी है। योजना बनाने में हुई लापरवाही कहें या फिर कुंभ निधि के अन्तर्गत प्राप्त बजट को ठिकाने लगाने का प्रयास क्योंकि कनखल में भी कुंभ निधि से निर्मित किए जाने वाले घाट इस प्रकार बनाए गए हैं जो हलकी वर्षा में ही पानी में समा गए। अधिकतर घाटों पर सल्ट जमी होने के चलते घाट नजर नहीं आ रहे हैं।

यहीं नहीं धर्मनगरी में अलग- अलग स्थानों पर लगाए गए आस्था कलश भी कहीं मिट्टी में दबे नजर आ रहे हैं तो कहीं गंगा में औंधेमुंह पड़े अपनी गुणवत्ता की कहानी बयान कर रहे हैं। जिस प्रकार मौसम की पहली वर्षा में  कुंभ निधि के करोड़ों रुपये गंगा में प्रवाह हुए है उसको लेकर भले ही कार्यवाही को लेकर राज्य सरकार आश्र्चयजनक रूप से चुप्पी साधे हुए हो, लेकिन कोरोना टैस्टिंग घोटाला उच्च न्यायालय नैनीताल की चैखट पर जा पहंुचा है। जहां कुंभ में हुए करोड़ों के टैस्टिंग घोटाले की सीबीआई से जांच कराये जाने की मांग को लेकर याचिका दायर की गई है। याचिकाकर्ता के वकील शिव भट्ट ने बताया कि टेस्टिंग घोटाले की जांच को लेकर याचिका दायर की है जिस पर माननीय न्यायालय द्वारा 28 जून के लिए मामले की सुनवाई को सूचीबद्ध किया गया है। करोड़ों के कोरोना टेस्टिंग घोटाले सहित पहली वर्षा में ही कुंभ निधि से निर्मित होने वाले स्नान घाट में हुए भ्रष्टाचार एवं गुणवत्ता को लेकर भले ही मामला सामने आया हो, लेकिन कुंभ में घोटालों की ऐसी अनंत कथा सुनाई पड़ रही है जिसकी जांच हो जाए तो बड़ी मछलियां पकड़ में आते देर नहीं लगेगी।

सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार मीडिया सेंटर, बेस अस्पताल, धार्मिक चित्राकारी, सड़क निर्माण के साथ-साथ कुंभ लाइव दूरदर्शन में करोड़ों रुपये के घाल मेल की बू आ रही है। यहीं नहीं श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़ को कवर किए जाने के नाम पर मेला क्षेत्रा में लगाई गई बल्लियों से बार्डर बैरिकेटिंग में भी बल्लियों के किराए को लेकर करोड़ों का घोटाला बताया जा रहा है। 46 करोड़ की लागत से हुए कांवड़ पटरी चैड़ीकरण में भी करोड़ों का घोटाला है। कांवड़ पटरी की गुणवत्ता इस कदर निचले स्तर की है कि निर्माण के तीन महीने में ही बने बडे़-बड़े गढ्ढ़ों ने गुणवत्ता की पोल खोलकर रख दी है। बताया जा रहा है कि पाप ढकने की मंशा से तकनीकी कमेटी की गुणवत्ता तथा प्रगति रिपोर्ट को भी दबा दिया गया है। चार करोड़ की लागत से निर्मित मेला भवन सीसीआर के रखरखाव, मरम्मत तथा साज सज्जा पर निर्माण लागत से अधिक खर्च किए जाने पर भी सवाल उठ रहे है। यूपीडीसीसी द्वारा भी कुंभ निधि से किए जा रहे 32 करोड़ के सौंदर्यीकरण का कार्य आज तक भी पूरा नहीं हुआ है। यहीं नहीं यूपीडीसीसी ने निर्माण कार्यों में जो पत्थर इस्तेमाल किया वह भी टूटने लगे हैं।

……. साथ में बबीता भाटिया

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