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Uttarakhand

गहरा रहा है मानव-वन्यजीव संघर्ष

पहाड़ों में मानव और वन्यजीव संघर्ष का पुराना इतिहास है। इससे दिनों-दिन जनहानि बढ़ती ही जा रही है। गढ़वाल मंडल में इस साल 29 लोगों की मौत होने से हड़कंप मचा है। वन विभाग इस खूनी संघर्ष को रोकने में नाकाम साबित हो रहा है

पहाड़ों में मानव व वन्य जीवों के बीच खूनी संघर्ष कोई नई बात नहीं है। लेकिन बीते वर्षों से अभी तक जो घटनाएं घटी वे दिल दहला देने वाली रही हैं। बीते कई वर्षों से चल रहे इस खूनी संघर्ष मेंं पिछले तीन वर्षां की तरफ नजर डालें तो अकेले गढ़वाल मंडल में वर्ष 2020 में 23 लोगों की मृत्यु एवं 123 लोग घायल हुए, वर्ष 2021 में जहां 18 लोगों की मृत्यु हुई वहीं 151 लोग घायल हुए। वर्ष 2022 में अभी तक जानवरों के हमले में 29 लोगां की मृत्यु हो चुकी है और 159 लोग घायल हुए हैं। इससे पता चलता है कि मानव वन्य जीवों के बीच साल-दर-साल घटनाएं बढ़ रही हैं, जबकि विभाग इस पर रोकथाम लगाने की बजाय मात्र मुआवजा देकर खाना पूर्ति तक सीमित है।

लोग चर्चा कर रहे हैं कि क्या वन विभाग का काम मात्र मुआवजा बांटने तक ही सीमित रह गया है। वर्ष 2019 से वर्तमान तक वन विभाग जानवरों के हमले से मृतकों को 3 करोड. 43 लाख 29 हजार एवं घायलों को 59.72 लाख मुआवजा बांट चुका है जिसमें मृतक को 4 लाख, साधारण घायल को 50 हजार गंभीर घायल को 1 लाख तक मुआवजा दिया जाता है। कुछ घटनाओं में जो मुआवजा वितरित किया जाता है उसमें भी कई बार पेंचीदा कानून आड़े आ जाते हैं।

जानवरों से हुए खूनी संघर्ष की दर्दनाक वारदातें ऐसी भी हैं जिनमें गांव तो गांव शहरों में भी जंगली जानवरों के खूनी खेल ने कई लोगों को अपना निवाला बनाया। आए दिन शहरी क्षेत्रों में भी गुलदार चहलकदमी करते हुए घरों में लगे सीसीटीवी कैमरों में कैद हो रहे हैं, जबकि वन विभाग और पूरा तंत्र लाचार बना है।

खास बात यह है कि गढ़वाल मंडल के विभिन्न जनपदों में जंगली जानवरों व मानव के बीच हुए खूनी संघर्ष को देखें तो यह बीते कुछ वर्षों से लगातार बढ़ता ही जा रहा है। जंगली जानवरों का आतंक ऐसा है कि पहाड़ी गांवों में खेत-खलिहान तो जानवर नष्ट करते ही हैं ग्रामीण महिलाओं को चारा-पत्ती के लिए घरों से बाहर निकलना भी मुश्किल रहता है।

जंगली जानवरों द्वारा फसलों को पहुंचाए जाने वाले नुकसान के कारण अब गांवों में लोग खेती-बाड़ी से भी दूर होते जा रहे हैं। कई बार तो ऐसी स्थिति आ जाती है कि अभिभावक अपने बच्चों को स्कूल तक भेजने में घबराते हैं। अभी कुछ दिन पूर्व पौड़ी जनपद के पावां ब्लाक के निसणी गाव में गुलदार ने रविंद्र सिंह के पांच वर्षीय पुत्र पीयुष को अपना निवाला बना दिया। वहीं पोखड़ा ब्लॉक के अर्न्तगत मंजगांव में गुलदार ने जब महिला पर हमला किया तो लहूलुहान होने के बाद भी उसने हिम्मत दिखाते हुए गुलदार पर दरांती से हमला कर अपनी जान बचाई। एक के बाद एक ऐसे ही मामले गुलदार से हमले के सामने आ रही हैं। वही जंगली जानवरों द्वारा काश्तकारों की वर्ष भर की कमाई रौंद कर नुकसान किया जाता है। वैसे तो जंगली जानवरों से ग्रामीण क्षेत्रों में हमेशा से ही भय रहता है लेकिन बीते कुछ सालों से यह समस्या अधिक बढ़ गई है।

तीन साल में 161 लोग शिकार
उत्तराखण्ड में पिछले तीन साल के आंकड़ों की बात करें तो वन्य जीवों ने 161 लोगों को अपना निवाला बनाया है। यह जानकारी गत् 30 नवंबर को विधानसभा में उस समय दी गई जब कांग्रेस विधायकों ने इस बाबत सवाल किया। प्रदेश के वन मंत्री सुबोध उनियाल ने जानकारी देते हुए बताया कि 2020 से अब तक मानव-वन्य जीव संघर्ष में कुल 16 लोगों की मौत हो चुकी है। जिनमें लेपर्ड ने 66, हाथी ने 28, टाइगर ने 13, भालू ने 5, सांप ने 44 और अन्य जीवों ने 6 लोगों की जान ली है। घायल करने वालों में सबसे पहला नंबर तेंदुए का है जिसने 186 लोगों पर हमला कर उन्हें गंभीर रूप से घायल किया। जबकि भालू ने 178, हाथी ने 27, टाइगर ने 23, सांप ने 145 लोगों को चोट पहुंचाई। इस तरह कुल 641 लोग वन्य जीवों के हमले में घायल हुए।

बात अपनी-अपनी
गुलदार के हमलों को रोकने के लिए वन विभाग, राजस्व विभाग, नगर पालिका एवं उरेडा विभाग को इस संबंध में आवश्यक दिशा निर्देश दिए गए हैं। गुलदार वाले इलाकों में जीआईएस मैपिंग की तकनीक से विशेष निगरानी रखने जा रहे हैं। कहीं भी गुलदार दिखाई दे तो उसकी तस्वीर सार्वजनिक करने की योजना भी जिला प्रशासन बना रहा है जिससे इलाके के लोगां को सतर्क किया जा सके। जिला प्रशासन ऐसे इलाकों में गश्त बढ़ाने की योजना भी बना रहा है। जहां गुलदार का खतरा ज्यादा है।
डॉ. आशीष चौहान, जिलाधिकारी पौड़ी

बढ़ती घटनाओं को देखते हुए विभाग अलर्ट मोड में है। पौड़ी के शहरी क्षेत्र में 3 स्थानों पर पिंजरे लगाए गए हैं। संवेदनशील क्षेत्रों में रात को नियमित रूप से गस्त की जा रही है साथ ही नगर पालिका, राजस्व विभाग के साथ मिलकर गुलदार के छुपने की जगह पर घनी झाड़ियों का कटान जारी है। ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए जन जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। जिलाधिकारी महोदय की पहल पर अंधेरे स्थानों पर उरेडा की ओर से प्रकाश की व्यवस्था की जा रही है।
मुकेश कुमार, डीएफओ, गढ़वाल वन प्रभाग

जिस तरह से आज मानव और वन्य जीवों के बीच का संघर्ष गहराता जा रहा है यह चिंता का विषय तो है ही साथ ही भविष्य के लिए भी यह गंभीर चिंता का विषय है, राज्य सरकार को चाहिए कि वन विभाग को ज्यादा मजबूती और आधुनिक बनाया जाए ताकि आदमखोर वन्यजीवों से समय रहते निपटा जा सके और इस तरह की घटनाओं पर रोक लगाई जा सके।
नमन चंदोला, संयोजक, पौड़ी बचाओ संघर्ष समिति

 

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