[gtranslate]
सेंचुरी पल्प एण्ड पेपर मिल के प्रदूषण से आस-पास की करीब एक लाख आबादी बुरी तरह प्रभावित है। अस्थमा, दमा, पीलिया, एलर्जी से लेकर कैंसर जैसी घातक बीमारियों के शिकार लोग असमय काल-कवलित हो रहे हैं। पिछले ढाई दशक से लोग निरंतर आंदोलनरत हैं कि उनकी जिंदगियां यूं तबाह न की जाएं। महिलाएं तो अपने परिजनांे की जीवन रक्षा के लिए कंपनी के संचालकों को राखी बांधने तक पहुंची हैं। प्रदूषण की जांच के लिए उच्च अधिकारियों की कमेटी गठित किए जाने के बावजूद प्रभावित जनता को राहत नहीं मिल सकी है ,
तीन दशक पूर्व नैनीताल जिले के लालकुआं में सेंचुरी पल्प एण्ड पेपर मिल कंपनी स्थापित की गई थी। उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी के अथक प्रयासों से यह कंपनी यहां लग सकी थी। बिरला गु्रप की इस कंपनी के लगने से पहले ही लालकुआं, बिन्दुखत्ता घोड़ानाला, राजीव नगर में काफी आबादी बस गई थी। तब पहाड़ से बड़ी संख्या में पलायन कर लोग यहां आकर इस उम्मीद से बसे कि उन्हें इस कंपनी में रोजगार मिलेगा। उन्हें रोजगार मिला हो या ना मिला हो, लेकिन बीमारियां जरूर मिली। स्थानीय लोगों को कंपनी में ठेकेदारी के अंतर्गत रोजगार मिला है। स्थाई नौकरी में ज्यादातर बाहर के लोग हैं, जबकि कंपनी दावा करती है कि वह 70 प्रतिशत  स्थानीय लोगों को रोजगार दे रही है। 10 हजार लोग कंपनी में काम कर रहे हैं। इसी के साथ कंपनी आस-पास के लोगों को समुचित विकास देने की भी बात करती है। विकास की एक तस्वीर यह है कि पिछले 30 साल में यहां 6 हैंडपंप लगाए गए हैं। जिनमें से 2 हैंडपंप खराब हैं। हालाकि कंपनी 10 हैंडपंप लगाने का दावा करती है। यहां के लोगों को नाराजगी यह भी है कि कंपनी के जल, वायु और ध्वनि प्रदूषण की मार वह झेल रहे रहे हैं, लेकिन पार्क नैनीताल, हल्द्वानी और रुद्रपुर में बनाए जाते हैं।
सेंचुरी पेपर मिल से आस-पास की करीब एक लाख आबादी प्रभावित है। लालकुआं, बिन्दुखत्ता,  कार रोड के अलावा, पूर्वी घोड़ानाला, पश्चिमी घोड़ानाला, राजीव नगर, सुभाष नगर, शास्त्री नगर, पटेल नगर, ज्वाहर नगर और पाहा बैराज के लोग कंपनी से निकलने वाली बदबूदार गैस से इस कदर परेशान हैं कि वह सांस लेते हुए भी घबराते हैं। भूमिगत पानी की गुणवत्ता इतनी खराब हो चुकी है कि लोग इसे पीते हुए डरते हैं। इसके अलावा स्थानीय लोग कंपनी के ध्वनि प्रदूषण से भी प्रभावित हैं। जिसके चलते लोग आंदोलन कर रहे हैं। पिछले सात माह से यहां के हजारों लोग कंपनी के प्रदूषण से निजात दिलाने की गुहार लगा रहे हैं। जब कोई सुनवाई नहीं हो रही है तो जनता आंदोलन पर उतारू है। हालात यह हैं कि क्षेत्र की आंदोलनरत महिलाएं जब रक्षाबंधन के दिन कंपनी के सीईओ जेपी नारायण को राखी बांधकर अपनी तथा अपने परिवार की जान माल की सुरक्षा का वचन लेने के लिए आती हैं, तो कंपनी संचालक उनसे मिलना तो दूर सामने तक नहीं आते हैं। इसके बाद मायूस सैकड़ों महिलाएं कंपनी के गेट पर ही राखी बांधकर अपने-अपने घरों को लौट जाती हैं। इस वर्ष 31 अक्टूबर को स्थानीय लोगों ने कंपनी के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। सैकड़ों महिलाआंे एवं पुरुषों ने कंपनी के खिलाफ नारेबाजी करते हुए घोड़ानाला ग्राउंड से लालकुआं तहसील मुख्यालय तक प्रदर्शन किया। इसके बाद आंदोलन कर रहे लोगों ने तहसील प्रांगण में धरना दिया। तब लालकुआं के उपजिलाधिकारी विवेक राय ने उन्हें आश्वस्त किया कि वह कंपनी के प्रदूषण की जांच कराएंगे। इसके बाद आंदोलनरत लोग नैनीताल के जिलाधिकारी सबिन बंसल से मिले। जिलाधिकारी ने तत्काल प्रभाव से एक सात सदस्यी कमेटी का गठन किया। जिसमें वन विभाग, एसटीएच, पर्यावरण, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, सिंचाई विभाग, मुख्य चिकित्सा अधिकारी एवं लालकुआं के उपजिलाधिकारी भी शामिल थे। 15 सितंबर तक जांच पूर्ण करने की डेड लाईन भी जारी की। जिलाधिकारी द्वारा जारी की गई समयावधि में किसी विभाग का कोई अधिकारी जांच करने नहीं पहुंचा। तब बहाना बनाया गया कि पंचायत चुनावों के चलते आचार संहिता लग गई थी। इसके बाद नवंबर में एक दिन सभी जांच कमेटी के अधिकारी लालकुआं तहसील मुख्यालय के सभागार में पहुंचे जहां शिकायतकर्ताओं से सुझाव मांगे गए।
आंदोलनकारी हर्ष बिष्ट के अनुसार जांच कमेटी के समक्ष हम सभी ने यह मांग रखी कि जांच सिर्फ प्रोफेसर रैंक के अधिकारियों से कराई जाए। इसके बाद जांच कमेटी का कोई भी सदस्य क्षेत्र में कहीं दिखाई नहीं दिया। बहरहाल, सेंचुरी पेपर मिल के खिलाफ आंदोलन कर रही पर्यावरण संरक्षण संघर्ष समिति के संयोजक हर्ष बिष्ट, अध्यक्ष नंदन वोरा, हरीश विशोती, आनंद गोपाल बिष्ट, कुंदन सिंह सोरांगी बसंत पांडे, रणजीत कनवाल, गोपाल नेगी आदि लोगों ने  पिछले दिनों एक बार फिर नैनीताल के जिलाधिकारी के समक्ष जांच शीघ्र कराने  की मांग की। यह पहली बार नहीं है कि जब सेंचुरी पल्प एंड पेपर मिल के खिलाफ लोग आक्रोशित हुए हों, बल्कि इससे पहले भी कई बार कंपनी के प्रदूषण को लेकर आंदोलन हुए हैं। कंपनी के खिलाफ लोगों का आक्रोश पहली बार वर्ष 1994 में देखने को मिला था। तब स्थानीय लोगों ने 70 फीसदी रोजगार के साथ ही प्रदूषण से निजात दिलाने की आवाज उठाई थी। यह आंदोलन पूरे एक साल चला था। जिसका नेतृत्व कामरेड बहादुर सिंह जंगी ने किया था। इसके बाद दूसरा आंदोलन वर्ष 2005 में शुरू हुआ। सेंचुरी पेपर मिल कंपनी के खिलाफ दूसरा आंदोलन करने वाले प्रकाश उत्तराखंडी थे। तब उत्तराखंडी को प्रशासन ने प्रदूषण बंद कराने का आश्वासन दिया था। लेकिन प्रदूषण जारी रहा। इसके पांच साल बाद एक बार फिर प्रकाश उत्तराखंडी ने कंपनी के खिलाफ आंदोलन किया। उत्तराखण्डी के बाद आंदोलन की कमान गजेन्द्र सिंह बिष्ट उर्फ गज्जी बिष्ट ने संभाली। गज्जी बिष्ट ने आंदोलन का दमदार नेतृत्व किया। लेकिन लोगों की मानंे तो प्रदूषण का स्थाई हल नहीं हो सका। फिलहाल अप्रैल 2019 से आंदोलन का नेतृत्व पर्यावरण संरक्षण संघर्ष समिति द्वारा किया जा रहा है। हालांकि स्थानीय लोग आंदोलन के नाम पर हर बार कंपनी के खिलाफ एकजुट हुए और हर बार ठगे गए। लेकिन इस बार लोगों को उम्मीद है कि कंपनी के प्रदूषण से उन्हें जरूर कोई स्थाई समाधान मिलेगा।
‘दि संडे पोस्ट’ ने लालकुआं, बिन्दुखत्ता सहित घोड़ानाला और उसके आस-पास के इलाके में लोगों के घर-घर जाकर उनकी दुखद दास्तां को सुना। लोगों के अनुसार इस इलाके में पिछले दो साल में 9 लोग कैंसर का शिकार होकर स्वर्ग सिधार चुके हैं। इसी के साथ देखने में यह भी आया कि यहां के करीब 80 से 90 प्रतिशत लोगों में एलर्जी एक महामारी का रूप धारण कर चुकी है। शायद ही कोई घर ऐसा बचा होगा कि जिसमें एलर्जी रोगी न हो। इसके अलावा दमा और अस्थमा की बीमारी भी यहां बहुतायत में देखने को मिल रही है। हेपेटाइटिस यानी पीलिया तो यहां इस कदर भयंकर रूप धारण कर चुका है कि गर्भस्थ शिशु भी जब जन्म लेता है तो इस बीमारी से ग्रसित पाया जाता है। पिछले एक साल की ही बात करें तो शायद ही यहां कोई बच्चा ऐसा होगा जो मां के पेट से ही पीलियाग्रस्त न हो चुका हो। इसके पीछे प्रदूषित पानी और हवा को बताया जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सेंचुरी पल्प एंड पेपर मिल ने भूमिगत जल को प्रदूषित कर दिया है। इसके पीछे का कारण घोड़ानाला को बताया जा रहा है। घोड़ानाला का पानी इतना विषैला और प्रदूषित है कि जब ‘दि संडे पोस्ट’ टीम कंपनी की दीवार के पीछे से निकल रहे पानी की कवरेज करने पहुंची तो वहां खड़ा होना और सांस लेना दूभर हो गया। खुद कवरेज कर रहा संवाददाता पानी के अंदर से निकल रही भयंकर भाप के दुष्प्रभाव में आ गया। सांस नहीं ली जा रही थी और एक बारगी तो संवाददाता को लगा कि उसका गला जाम हो गया है और उसे चक्कर से आने लगे। अगर एक दो मिनट और वहां संवाददाता खड़ा रहता तो बेहोश होकर गिर जाता। पानी घोड़ानाला में जहां गिर रहा था वहां गंदगी का आलम यह था कि पानी की जगह झाग ही झाग नजर आ रहे थे। पानी, काला और लाल रंग का निकल रहा था। इसी नाले के साथ कंपनी की दीवार तोड़कर पानी बाहर निकलने का रास्ता बनाया हुआ था। जिस तरह हाथी के दांत खाने के और दिखाने के कुछ और होते हैं उसी तरह यहां कंपनी का पानी बाहर निकलने के दो रास्ते हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार जब कोई संस्था या अधिकारी कंपनी के पानी का प्रदूषण मापने और देखने आते हैं तो एक नाले को बंद कर दिया जाता है जबकि दीवार तोड़कर बनाया गए दूसरे नाले से साफ और स्वच्छ पानी बाहर निकाला जाता है। बताया जाता है कि कंपनी के ईटीपी संयंत्र उस दौरान चलाए जाते हैं और उनसे निकला साफ सुथरा पानी ही जांचकर्ता अधिकारियों के सामने बहाया जाता है। कंपनी यह भी दावा करती है कि उसके द्वारा छोड़े गए इस पानी का किसान अपनी फसलों को सिचिंत करने में प्रयोग करता है। लेकिन उनके इस दावे को खारिज करते हैं किसान पनीराम। पनीराम के खेत नालों के बिल्कुल किनारे पर बने हैं। उनसे जब पूछा गया कि वह घोड़ानाला में बह रहे पानी का प्रयोग खेती में करते हैं क्या? इसके जवाब में उन्होंने कहा कि हम कभी इस पानी को खेती में नहीं डालते। अगर खेतों में डालेंगे तो वह बर्बाद हो जाएंगे। इसी के साथ किसान पनीराम बताते हैं कि नाले से ओवरफ्लो होने के बाद पानी उनके खेतों में आ जाता है और उनकी फसल बर्बाद कर देता है। पूर्वी राजीव नगर निवासी मुन्नी देवी की मानें तो कंपनी की धूल से उनके घर भर जाते हैं। वह और उनका परिवार दमा और अस्थमा की दवाई खा खाकर परेशान रहता है, जबकि एलर्जी तो उनके घर में  मेहमान ही बन गई है। बिन्दुखत्ता निवासी लक्ष्मण रावत के अनुसार लोग कंपनी के प्रदूषण से मर रहे हैं। कंपनी द्वारा बहाए गए पानी में इतना प्रदूषण होता है कि वह जमीन से उनके हैंडपंपों में आने लगा है। इस पानी को पीकर वह बीमारियों का शिकार हो रहे हैं। कंपनी से उड़ने वाली धूल का गुबार ऐसा है कि उनके पास बने मकानों के अंदर तक के फर्श तक भी धूल से भरे रहते हैं। पूर्वी राजीव नगर में ऐसे ही मकान में लाखों रूपये निर्माण में लगाकर अब मकान मालिक पछता रहे हैं और वह घर में बसने से ही डरने लगे हैं।
पूर्वी राजीव नगर निवासी कैप्टन जोत सिंह बिष्ट के अनुसार घोड़ानाला के पानी के प्रदूषण से बचने के लिए उसका पाईपीकरण कर दिया जाना चाहिए। जब -जब हम प्रदूषण के खिलाफ आवाज उठाते हैं तो हमें धमकी दी जाती है कि कंपनी बंदकर देंगे। अगर कंपनी बंद कर भी दी गई तो क्या होगा। स्थानीय लोगों को तो सिर्फ 2 प्रतिशत ही यहां रोजगार मिला है। बाकी तो सब बाहर के लोग हैं। लक्ष्मण सिंह अपने पिता की तस्वीर लिए बैठे थे। जब उसे पूछा कि क्या हुआ इनको तो वह बोले कि स्वर्ग सिधार गए। कैसे, तो वह कहते हैं कि बीमारी से कंपनी के प्रदूषण से उनके पिता कैंसर की बीमारी का शिकार हो गए। इसी तरह 17 साल की एक लड़की कामना देवराड़ी भी बीमारी का शिकार होकर असमय काल के गाल में समा गई। कामना को पीलिया की बीमारी हुई थी। उसके परिजन जब उसे हल्द्वानी स्थित सुशीला तिवारी अस्पताल ले गए तो डाॅक्टरों ने स्पष्ट लिखा कि वह जलजनित बीमारी का शिकार हुई है। डाॅक्टरों ने कहा कि प्रदूषित पानी पीने से वह पीलिया की चपेट में आई। 17 जुलाई को कामना देवराड़ी लाख कोशिशों के बाद भी बचाई नहीं जा सकी। जिस दिन कामना अलविदा हुई तो लालकुआं बिन्दुखत्ता, घोड़ानाला, राजीव नगर इलाके के बाशिंदे उस रात सो नहीं सके। अपने बच्चों के भविष्य और स्वास्थ्य को लेकर चिंतित लोग अगले दिन एक जगह पर इकट्ठा हुए और वहां से ही सेंचुरी पल्प एंड पेपर मिल कंपनी के प्रदूषण के खिलाफ लामबंद हुए। उसी दिन कंपनी के खिलाफ स्थानीय लोगों ने सड़कों पर उतरने का निर्णय लिया। तब से लेकर अब तक 7 माह हो गए लोग सेंचुरी मिल के प्रदूषण के खिलाफ आंदोलनरत हैं।
-साथ में मनीषा नागर
कहां गई तीस लाख जुर्माना राशि
वर्ष 2018 में एनजीटी ने सेंचुरी पल्प एण्ड पेपर मिल की जांच की थी। जिसमें कम्पनी को क्षेत्र में प्रदूषण फैलाने के लिए जिम्मेदार माना गया था। तब एनजीटी ने सेंचुरी कम्पनी पर 30 लाख का जुर्माना लगाया था, साथ ही यह भी निर्देश दिए थे कि जुर्माने की राशि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड हल्द्वानी के खाते में जमा होगी और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड जुर्माने की उस राशि को प्रदूषण प्रभावित क्षेत्र में खर्च करेगा, लेकिन बताया जा रहा है कि अभी तक जुर्माने की राशि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पास जमा नहीं हुई है।
कैंसर से हुई मौतें
तारा सिंह किरमोलिया
राधेश्याम
मान सिंह कार्की
गोपाल सिंह राठौर
नंदन सिंह
गोपाल सिंह
बहादुर सिंह चैहान
नंदन सिंह सोरांगी
कामना देवरानी
(सभी मृतक पश्चिमी राजीव नगर घोड़ानाला और पूर्वी घोड़ानाला के निवासी हैं।)
बात अपनी-अपनी
कुछ लोगों की प्रदूषण की शिकायत मिली है। उसके आधार पर जांच बिठा दी गई है। लोगों का कहना है कि नाले से बहने वाले पानी ने उनकी खेती को और जनजीवन को प्रभावित किया है। इसकी हमने सैम्पलिंग करा ली है। उसके रिजल्ट आने के बाद कार्यवाही की जाएगी।
सबिन बंसल, जिलाधिकारी नैनीताल
कंपनी को चाहिए कि गंदे पानी को नाले में डालने से पहले उसे साफ कर ले। लेकिन देखने में आया है कि कंपनी ऐसा करने के बजाय पानी को सीधा घोड़ानाला में बहा देती है। कंपनी किसानों की फसलों को इस पानी से फायदे की बात करती है, लेकिन फायदा नहीं नुकसान होता है।
गोपाल महरोत्रा, पर्यावरणविद्
सेंचुरी पल्प पेपर मिल कंपनी ने पिछले छत्तीस साल में लालकुआं-बिन्दुखत्ता, घोड़ानाला और राजीव नगर के लोगों को सौगात में बीमारियां बांटी हैं। हालत यह है कि पिछले 6 माह में 9 लोग कैंसर की बीमारी से मर चुके हैं। मृतक सेंचुरी के प्रदूषण से प्रभावित हुए हैं। यहां की हवा और पानी में जहर घुल चुका है।
हर्ष बिष्ट, संयोजक पर्यावरण संरक्षण संघर्ष समिति
पूरे लालकुआं, बिन्दुखत्ता क्षेत्र में लोग सेंचुरी की राख से परेशान हैं। लोगों की सांस में भी राख के कण पहुंचते हैं जिससे वे बीमार हो रहे हैं। लोगों के कपड़े जब छत पर सूखते हैं तो वह सुबह दागदार हुए मिलते हैं। सफेद कपड़ा पहनना यहां अभिशाप है।
आनंद गोपाल बिष्ट, अध्यक्ष पर्यावरण संरक्षण संघर्ष समिति
जब भी लोग कंपनी के प्रदूषण के खिलाफ आवाज उठाते हैं तो उन्हें मैनेज कर लिया जाता है। किसी को कंपनी में ठेकेदारी तो किसी को ठेकेदार के नीचे नौकरी लगवाकर मामला शांत करा दिया जाता है।
हरीश विशोती, समाजसेवी लालकुआं-बिन्दुखत्ता
कंपनी क्षेत्र के लोगों के लिए काफी विकास करती है। कई गरीब परिवारों का पालन-पोषण कर रही है। किसानों को जागरूक करने के लिए किसान गोष्ठियां कराई जाती हैं। साफ पानी पिलाने के लिए हमने हैंडपंप भी लगवाए हैं। एनजीटी ने जो 30 लाख का जुर्माना किया था वह लोगों के विकास पर लगा दिया गया है। हमने 50 शौचालय बनवाए हैं। निशुल्क कैंप भी लगाए जाते हैं।
जगमोहन उप्रेती, जनसंपर्क अधिकारी सेंचुरी पल्प एण्ड पेपर मिल

You may also like

MERA DDDD DDD DD