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विवाद हैं कि पायलट बाबा का पीछा ही नहीं छोड़ते। इस बार तो धोखाधड़ी के एक मामले में उन्हें जेल की हवा खानी पड़ रही है, जबकि मामले में बाबा के सहयोगी रहे अन्य आरोपी सलाखों में जाने के डर से फरार हैं। विवादों से बाबा का पुराना रिश्ता रहा है। पूर्व में बाबा अपनी जापानी शिष्या केको आईकावा के चलते चर्चा में रहे। आरोप है कि आईकावा जिस इंटरनेशनल एजुकेशन संस्था की वाइस प्रेसीडेंट हैं उसने महज एक रुपए में कंप्यूटर शिक्षा देने के नाम पर लोगों से 500 करोड़ की उगाही कर डाली। बाबा इस संस्था के अध्यक्ष थे। उत्तरकाशी में बाबा 16 नाली सरकारी भूमि पर कब्जा कर वहां हैलीपैड बनाने को लेकर सुर्खियों में रहे। वर्ष 2010 के हरिद्वार कुंभ में बाबा का वाहन भगदड़ का कारण बना और सात लोगों की जानें चली गईं। बाबा चीनी ड्रैगन के प्रति मोह के चलते भी चर्चा में रहे हैं। उनके आश्रमों में ड्रैगन की मूर्तियों के कारण कई बार लोगों को विरोध जताना पड़ा

धोखाधड़ी के मामले में एक और आध्यात्मिक गुरु एवं बहुचर्चित बाबा जेल के सींखचों के पीछे चला गया है। अदालत ने नैनीताल के चर्चित नामी गिरामी पायलट बाबा उर्फ कपिल अद्वैत को 14 अप्रैल तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। पुलिस ने पायलट बाबा को 4 अप्रैल 2019 को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। पायलट बाबा का नैनीताल से 15 किमी दूर गेठिया में बड़ा व भव्य आश्रम मौजूद है। उच्च न्यायालय ने धोखाधड़ी के मामले में पायलट बाबा को निचली अदालत में आत्मसमर्पण करने को कहा था। साथ ही उसी दिन जमानत प्रार्थना पत्र पेश करने को कहा था।

पायलट बाबा ने 4 अप्रैल 2019 को दोपहर में नैनीताल के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी मुकेश चंद्रा की कोर्ट में आत्म समर्पण किया और उसके बाद जिला व सत्र न्यायाधीश नरेंद्र दत्त की अदालत में जमानत प्रार्थना पत्र पेश किया। जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने मामले को सुनने के बाद रात आठ बजे निर्णय सुनाया और पायलट बाबा के जमानत प्रार्थना पत्र को खारिज कर दिया। साथ ही 14 अप्रैल 2019 तक न्यायिक रिमांड पर भेजने के निर्देश दिए। दरअसल, मामला वर्ष 2008 का है। हल्द्वानी निवासी हरीश पाल नामक व्यक्ति ने पायलट बाबा सहित सात लोगों के खिलाफ नैनीताल के तल्लीताल में धोखाधड़ी का मामला दर्ज कराया था। मामले के अनुसार आईकावा इंटरनेशनल एजुकेशन कम्प्यूटर सेंटर खोले जाने के नाम पर बाबा एवं उनके सहयोगियों ने उससे 67,760 रुपये हड़प लिए। उससे कहा गया था कि इसके बदले में उसे 50,000 रुपये की मासिक आय होगी। इसी प्रकार अन्य लोगों से पैसे वसूले गये और उनके पैसे वापस नहीं किए गए। पैसे वापस मांगने पर उन्हें जान से मारने की धमकी दी गयी। धोखाधड़ी के मामले में पायलट बाबा के अलावा उनके अन्य सहयोगियों हिमांशु राय, इशरत खान, इरफान खान, विजय यादव, पीसी भंडारी और मंगल गिरी के नाम शामिल थे। रिपोर्ट में कहा गया कि आईकावा इंटरनेशनल के खिलाफ धोखाधड़ी और ठगी के मामले बरेली, हरियाणा और मध्य प्रदेश में भी दर्ज किए गए हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस के आला अधिकारियों ने सीबीसीआईडी को जांच सौंपी। सीबीसीआईडी ने आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र तय कर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट नैनीताल की कोर्ट में पेश किए। अभी पायलट बाबा जेल में हैं। बाकी अन्य सभी आरोपी फरार हैं। सवाल यह भी है कि बाबा की जापानी शिष्या केको आईकावा का नाम जांच रिपोर्ट से बाहर क्यों रखा गया? फिलहाल वह जेल में जाते ही बीमार हो गए हैं। इस मामले की तह में जाएं तो पता चलता है कि असली सूत्रधार पायलट बाबा की जापानी शिष्या और जूना अखाड़े की महामंडलेश्वर केको आईकावा थी। जो ज्यादातर हरिद्वार और मध्य प्रदेश के सिंहस्थ शिविर में रहती थी। लेकिन उसने शिविर कई साल पहले ही छोड़ दिया था। उनके द्वारा बनाई गई केको आइकावा इंटरनेशनल एजुकेशनल संस्था पर 500 करोड़ रुपए की ठगी का आरोप है।

महामंडलेश्वर केको आईकावा इंटरनेशनल एजुकेशन सेंटर की वाइस प्रेसीडेंट हैं। इस संस्था पर आरोप है कि कम्प्यूटर शिक्षा के नाम पर उसने कई लोगों से 500 करोड़ रुपए की उगाही की। संस्था ने दावा किया था कि सिर्फ एक रुपए में कम्प्यूटर की शिक्षा दी जाएगी। इसके लिए देशभर में विभिन्न संस्थाओं से 50-50 हजार रुपए लेकर फ्रेंचाइजी दी गई। कहा गया था कि पढ़ाई का पूरा खर्च एजुकेशन संस्था वहन करेगी। मगर कोई शिक्षा नहीं दी गई। मामले में संस्था के पदाधिकारियों के खिलाफ डेढ़ दर्जन से अधिक मुकदमे भी दर्ज किए गए थे। बताया जाता है कि आईकावा के गुरु पायलट बाबा इस संस्था के अध्यक्ष थे। चार साल पहले जिस आध्यात्मिक गुरु पायलट बाबा का स्टिंग ऑपरेशन करके उन्हें काले धन को सफेद करते हुए दिखाया गया था, खुद को महायोगी बताने वाले उन्हीं सोमनाथ गिरी उर्फ पायलट बाबा को 13 सितंबर 2011को एसडीएम भटवाड़ी, चंद्र सिंह धर्मशक्तू की निचली अदालत ने आदेश दिया है कि वे एक महीने के भीतर सरकारी जमीन से अपने आश्रम का अवैध कब्जा हटा लें।

उत्तरकाशी जिला मुख्यालय से 25 किमी दूर गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर कुमाल्टा गांव के निकट गंगा-भगीरथी के तट पर बने अपने आश्रम के लिए बाबा ने न सिर्फ 16 नाली (0.324 हेक्टेयर) से अधिक सरकारी जमीन पर कब्जा जमाया है, बल्कि सीमा स्थित संवेदनशील क्षेत्र में देश की सुरक्षा को ताक पर रखते हुए इस पर निजी हैलीपैड भी बना डाला था। यही नहीं, आश्रम में आने वाले विदेशियों का ब्यौरा भी बाबा स्थानीय पुलिस को देना जरूरी नहीं समझते, जबकि फॉरनर्स रजिस्ट्रेशन एक्ट के तहत
विदेशियों की जानकारी फॉर्म-सी के जरिए 24 घंटे के अंदर स्थानीय पुलिस को देनी होती है।

आश्रम ने जिस जमीन पर कब्जा कर रखा है, वहां से कुमाल्टा गांव के किसानों के खेत के लिए एक नहर गुजरती थी। जिसे पाटकर बाबा ने देवी-देवताओं की मूर्तियां स्थापित कर दी थी। इससे गांववालों के सिंचित खेत सूख गए। बाबा ने 4 इंच मोटी पाइपलाइन भी अवैध ढंग से अपने आश्रम से जोड़ रखी थी। पायलट बाबा ने गंगा भगीरथी के प्रवाह क्षेत्र में कब्जा करने के साथ-साथ गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग के खासे भूभाग पर भी कब्जा जमा रखा था।

बाबा के आश्रम में अवैध कब्जों और संदिग्ध गतिविधियों का यह खेल 2009 में उजागर हुआ। जब उत्तराखण्ड स्वाभिमान मंच के अध्यक्ष विनोद नौटियाल ने उत्तरकाशी के जिलाधिकारी को पत्र लिखकर बाबा के अवैध रूप से सरकारी जमीन पर कब्जा जमाने, हाइवे पर अतिक्रमण करने, कुमाल्टा के किसानों के खेत में जा रही नहर को दबाकर अवैध रूप से मूर्तियां स्थापित करने, सीमांत क्षेत्र में बिना सरकारी अनुमति के हैलीपैड का निर्माण करने के साथ ही कुमाऊं वॉटर रूल्स का खुला उल्लंघन करते हुए बिना जल और वन विभाग की एनओसी के सीधे नदी से आश्रम तक पाइपलाइन ले जाने के मामलों की जांच की मांग की थी। भटवाड़ी के नायब तहसीलदार को इसकी जांच का काम सौंपा गया। उन्होंने अपनी रिपोर्ट में सारे आरोपों को सही पाया था। हालांकि बाद में कोर्ट के आदेशों पर अवैध अतिक्रमण हटा दिया गया था। लेकिन इसमें पायलट बाबा की जमकर किरकिरी हुई थी।

गौरतलब है कि 2009 में सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद राज्य सरकार ने ऐसे धार्मिक स्थलों को चिन्हित करना शुरू किया, जिन्होंने सरकारी जमीन पर कब्जा किया था। उत्तरकाशी जिले से ऐसे 9 स्थल चिन्हित किए गए, लेकिन इनमें पायलट बाबा के आश्रम को छोड़ दिया गया था। राजस्व विभाग ने मिलीभगत कर पायलट बाबा के कब्जों को 10 साल से भी पुराना दर्शाया। जबकि वह 2005 के बाद बनना शुरू हुआ था। आश्रम के लिए भूमि भी 2005 में खरीदी गई थी। यही नहीं, बाबा ने नहर वाले जिस स्थान पर कब्जा जमाया, उसे छोटे-छोटे मंदिरों के रूप में दर्शाने की कोशिश की। प्रशासन इस मामले में सरकार के साथ ही सुप्रीम कोर्ट को भी गुमराह कर रहा है। अवैध स्थलों पर शिकंजा कसने के बजाए राजस्व प्रशासन आश्रम का पक्ष मजबूत कर रहा है। दिल्ली, नैनीताल, हरिद्वार, उत्तरकाशी, मध्य प्रदेश, बिहार और वृंदावन से लेकर तोक्यो तक फैले बाबा के आश्रमों पर तरह-तरह के आरोप लगते रहे हैं।

अल्मोड़ा में भाजपा के एक नेता के प्रयास से बाबा का कारोबार निर्बाध रूप से बढ़ता रहा है। बाबा के आश्रमों में भी विदेशी बालाओं के पहुंचने के खूब चर्चे रहते हैं। चर्चा उस इनोवा गाड़ी की भी रही जो बाबा ने कथित रूप से राज्य के एक पूर्व मंत्री को दी थी। 14 अप्रैल 2010 का वह मनहूस दिन भी लोग आज तक नहीं भूले हैं जब हरिद्वार कुंभ में 7 लोगों की भगदड़ से मौत हो गई थी। इसके पीछे भी पायलट बाबा के ड्राइवर की गलती मानी गई थी। बताया जाता है कि ड्राइवर के हूटर बजाने से लोग घबरा गए थे और उनमें भगदड़ मच गई थी। जिससे 7 लोगों की जान चली गई थी। 2013 के प्रयाग कुंभ से पायलट बाबा को बकायदा निलंबित किया गया था तब उन पर आरोप लगे थे कि उन्होंने सर्वोच्च अखाड़ों के समकक्ष महामंडलेश्वर परिषद का गठन किया था। अखाड़ों के संविधान के अनुसार ऐसा करना अनुचित माना जाता है। उस समय पायलट बाबा के साथ परिषद में शामिल किसी भी महामंडलेश्वर को कुंभ स्नान नहीं करने दिया गया था। बाद में उन्होंने खेद प्रकट करते हुए महामंडलेश्वर परिषद भंग कर दी थी। जिसके बाद ही उन्हें जूना अखाड़े में वापस लिया गया। धर्म नगरी हरिद्वार में जूना अखाड़े के सबसे ताकतवर माने जाने वाले पायलट बाबा का गंगा किनारे भव्य आश्रम है। बता दें कि ये आश्रम उन्हीं पायलट बाबा का है जिनकी संत समाज और जूना अखाड़े में तूती बोलती है। माना जाता है कि बाबा अखाड़ों के संतों में सबसे बड़े धन-कुबेर हैं और इसकी वजह भी है। वजह यह है कि बाबा के देश ही नहीं, विदेशों में भी खूब भक्त फैले हैं। बाबा के विदेशी भक्तों में चीन के भक्तों की संख्या ज्यादा है।

पायलट बाबा के आश्रमों में वैसे तो देवी-देवताओं और महापुरुषों की प्रतिमाओं की भरमार है। लेकिन बाबा के आश्रमों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि उनके आश्रमों में विशालकाय चीनी ड्रैगन बहुत प्रमुखता के साथ दिखाई देते हैं। पायलट बाबा को ड्रैगन इतना लुभाता है कि इस ड्रैगन की प्रतिमाओं को वे अपने हर आश्रम में लगवाते हैं। ड्रैगन प्रेम की वजह से ही पायलट बाबा को कई बार विरोध का सामना भी करना पड़ा है।

जब पायलट बाबा का उत्तरकाशी में आश्रम बन रह था तो उस आश्रम में भी विशालकाय ड्रैगन लगवाए गए थे, इस पर स्थानीय लोगों ने आपत्ति जताई और वहां जमकर हंगामा किया। लोगों के विरोध को देखते हुए ही उन्हें न केवल आश्रम से ड्रैगन की मूर्तियां हटवानी पड़ीं, बल्कि उन्हें हमेशा के लिए उत्तरकाशी का आश्रम भी छोड़ना पड़ गया था।

कौन हैं पायलट बाबा

पायलट बाबा का पुराना नाम कपिल सिंह है। इनका जन्म बिहार के रोहतास जिले के सासाराम में एक राजपूत परिवार में हुआ। बाबा ने काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से उच्च शिक्षा प्राप्त की। जिसके बाद उनका भारतीय वायु सेना में चयन हुआ। बाबा यहां विंग कमांडर के पद पर थे। सिर्फ इतना ही नहीं बाबा ने 1962, 1965 और 1971 की लड़ाइयों भी भाग लिया था। बताया जाता है कि सन 1996 में जब वे मिग विमान भारत के पूर्वोत्तर में उड़ा रहे थे तब उनके साथ एक हादसा हुआ था। उनका विमान से नियंत्रण खो गया। उसी दौरान बाबा को उनके गुरु हरि गिरी महाराज के दर्शन प्राप्त हुए और वे उन्हें वहां से सुरक्षित निकाल लाए। यही वो क्षण था जब बाबा को वैराग्य प्राप्त हुआ और वे सेना से दूर शांति और अध्यात्म की तरफ हो गए। संन्यास लेने से पहले बाबा कुछ दिन तक बॉलीवुड से भी जुड़े रहे हैं, उन्होंने ंएक फूल दो माली में अभिनय भी किया है। बाबा के अनुसार वे बॉलीवुड की कई नामचीन हस्तियों के साथ काम कर चुके हैं। बॉलीवुड की जानी-मानी अभीनेत्री मनीषा कोईराला के आध्यात्मिक गुरु बाबाजी ही हैं। मनीषा कोईराला कई बार उनके आश्रम में आई हैं। बाबा के आश्रम में ज्यादातर विदेशी भक्त रहते हैं। पायलट बाबा के बारे में यह भी कहा जाता है कि उन्होंने 16 साल तक हिमालय की नन्दा देवी घाटी में तपस्या, ध्यान व योग किया। 100 से भी अधिक बार वे समाधि ले चुके हैं, इसमें सबसे लंबी समाधि 30 दिनों की थी। कहते हैं कि वे 9 दिन तक जल समाधि भी ले चुके हैं और एक दिन तक ऑक्सीजन रहित कमरे में रहे हैं। लेकिन अब उन्हें जेल में रहने को मजबूर होना पड़ रहा है।

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