[gtranslate]
Uttarakhand

अपनों पर सितम, गैरों पर करम

मंगलौर की तरह ही सत्तारूढ़ भाजपा ने बदरीनाथ विधानसभा सीट के लिए होने जा रहे उपचुनाव में कांग्रेस से आयातित नेता पर ही भरोसा जताया है। लोकसभा चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस छोड़ भगवा धारण करने वाले राजेंद्र सिंह भंडारी और उनकी पत्नी रजनी भंडारी पर भाजपा गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप लगाती रही है। अब उसकी ‘वाशिंग मशीन’ ने ऐसे सारे आरोपों को धो डाला है। भंडारी की लेकिन इस बार राह आसान नहीं बताई जा रही है। कांग्रेस ने इस उपचुनाव में लखपत बुटोला को मैदान में उतार भंडारी को कड़ी चुनौती दे डाली है। भंडारी के गांव से ही ताल्लुक रखने वाले बुटोला जमीनी नेता हैं। कभी भंडारी के चुनावी रणनीतिकार रहे बुटोला अब पूरे दमखम के साथ मैदान में उतर चुके हैं

आखिरकार राजेंद्र भंडारी को भाजपा ने बदरीनाथ विधनसभा उपचुनाव में अपना उम्मीदवार बना ही दिया है जिसकी पूर्व में ही संभावनाएं जताई जा रही थी। राजेंद्र भंडारी लोकसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस पार्टी को छोड़कर भाजपा में शामिल हुए थे, साथ ही उन्होंने अपनी विधायकी से भी त्याग पत्र दे दिया था जिसके चलते इस सीट पर उपचुनाव हो रहा है। जबकि कांग्रेस ने पूर्व जिला पंचायत सदस्य रहे और मौजूदा समय में कांग्रेस प्रवक्ता लखपत सिंह बुटोला को अपना उम्मीदवार बनाकर मैदान में उतारा है। दिलचस्प बात यह है कि कांग्रेस ने मंगलौर और बदरीनाथ सीट से पार्टी नेताओं को ही टिकट दिया है जबकि भाजपा ने बाहर से आए नेताओं पर भरोसा जताया है। इससे चुनाव खासा दिलचस्प बन गया है।

लोकसभा चुनाव के दौरान भंडारी को भाजपा में शामिल करने के पीछे उपचुनाव में राजेंद्र भंडारी को ही भाजपा से टिकट दिए जाने की शर्त चर्चाओं में थी। अब भंडारी को टिकट देने से यह साफ हो गया कि भाजपा के पास बदरीनाथ सीट से कोई बड़ा चेहरा नहीं बचा है जिसके चलते आयातित नेता पर ही पार्टी को दांव खेलना पड़ा है। बदरीनाथ सीट से पूर्व विधायक महेंद्र प्रसाद भट्ट 2022 में भंडारी के हाथों पराजय का स्वाद चख चुके हैं जबकि 2007 में भी नंदप्रयाग सीट से भंडारी भट्ट को पराजित कर चुके हैं। महेंद्र भट्ट अब राज्यसभा सदस्य बन चुके हैं और हाल-फिलहाल उनकी दिलचस्पी और सक्रियता इस सीट पर कम हो चली है।

अगर बदरीनाथ सीट के राजनीतिक इतिहास को देखें तो भाजपा और कांग्रेस दोनों का ही इस सीट पर बोलबाला रहा है। वर्ष 1991, 93 और 1996 तक लगातार तीन बार भाजपा के केदारसिंह फोनिया इस सीट से चुनाव जीतते रहे हैं। जबकि राज्य बनने के बाद 2002 फिर से केदारसिंह फोनिया भाजपा से चुनाव जीते। 2007 में कांग्रेस के अनुसूया प्रसाद मैखूरी चुनाव जीत थे। 2012 में राजेंद्र भंडारी बदरनीथ सीट से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीते तो 2017 में इसी सीट पर भाजपा के महेंद्र प्रसाद भट्ट से चुनाव हार गए। 2022 में फिर से राजेंद्र भंडारी ने महेंद्र प्रसाद भट्ट को हराकर इस सीट को कांग्रेस के खाते में वापस की।

इस तरह से देखा जाए तो जहां राज्य बनने से पूर्व इस सीट पर भाजपा ने तीन बार लगातार जीत हासिल की है तो वहीं राज्य बनने के बाद भी भाजपा ने सिर्फ एक बार ही 2017 में ही जीत हासिल की है। जबकि राज्य बनने के बाद कांग्रेस ने 2007, 2012 और 2022 के विधानसभा चुनाव में तीन बार जीत हासिल की है। एक तरह से कांग्रेस ने इस सीट पर भाजपा से ज्यादा कब्जा किया है।
2022 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के राजेंद्र भंडारी ने भाजपा के महेंद्र प्रसाद भट्ट को करारी शिकस्त दी थी। वर्ष 2007 में राजेंद्र भंडारी ने नंदप्रयाग सीट से निर्दलीय उम्मीदवार चुनाव में उतरे थे और महेंद्र प्रसाद भट्ट को चुनाव में हरा तत्कालीन भाजपा की अल्पमत की खण्डूड़ी सरकार को समर्थन देकर कैबिनेट मंत्री बने। 2009 में नंदप्रयाग सीट खत्म हो गई और इसके आधे हिस्से दशौली, पोखरी और जोशीमठ विकास खंडों को बदरीनाथ सीट में जोड़ दिया गया। इससे एक बात तो साफ है कि राजेंद्र भंडारी का जनाधार समूचे बदरीनाथ विधानसभा क्षेत्र में फैला हुआ है। इसके चलते भाजपा को भंडारी को टिकट देने के लिए मजबूर होना पड़ा।

कांग्रेस के लखपथ बुटोला की बात करें तो बुटोला कई वर्षों से कांग्रेस पार्टी से जुड़े हुए हैं। बुटोला पोखरी ब्लॉक के चौड़ी गांव के रहने वाले हैें। दिलचस्प बात यह है कि राजेेंद्र भंडारी का भी गांव यही है। इसके चलते कांग्रेस को बुटोला से उम्मीदें बढ़ गई है। बुटोला अपने क्षेत्र में खासे जनाधार वाले नेता बताए जाते हैं। राजेंद्र भंडारी की जीत में भी बुटोला की मेहनत और उनके जनाधार को बताया जाता है। राजनीतिक जानकारांे का कहना है कि बुटोला कांग्रेस में सबसे ज्यादा सक्रिय नेता रहे हैं और कार्यकर्ताओं में भी उनकी लोकप्रियता बनी हुई है। भंडारी के कांग्रेस में रहते हुए बुटोला को राजनीति में आगे आने के लिए रास्ता नहीं मिल रहा था लेकिन अब भंडारी के भाजपा में आने के बाद मतदताओं में भंडारी की अपेक्षा बुटाला पर ज्यादा भरोसा जताया जा रहा है जिसका असर चुनाव में देखने को मिल सकता है।

भाजपा वाशिंग मशीन से धुलकर साफ हुए भंडारी दम्पत्ति ‘‘कानून अपना काम करेगा। रजनी भंडारी जी पर जो भी आरोप है उस पर कानून को काम करने से कोई रोक नहीं है। इस पर किसी को कोई मुगालता नहीं होना चाहिए। वैसे भी रजनी भंडारी भाजपा में शामिल नहीं हुई हैं। राजेंद्र भंडारी जी विकास के नाम पर भाजपा में शामिल हुए हैं। प्रधानमंत्री मोदी जी के नेतृत्व और देश के विकास के लिए उनकी सोच कई नेताओं को प्रभावित करती है। इसी से प्रभावित होकर राजेंद्र भंडारी जी भाजपा में आए हैं।’’

‘‘रजनी भंडारी जी भाजपा में नही हैं लेकिन राजेंद्र भंडारी जी भाजपा में हैं और एक परिवार के लोग एक ही पार्टी में रहे तो अच्छा होता है। जल्द ही रजनी भंडारी जी भी भाजपा में शामिल होंगी।’’
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट के उपरोक्त दोनों बयानांे से एक बात तो साफ हो गई है कि भाजपा अपनी नीति और नियत के साथ-साथ चाल भी बदल चुकी है, साथ ही पार्टी नेताओं की भी नीति में एक बड़ा परिवर्तन आ चुका है जिसका प्रमाण स्वयं प्रदेश अध्यक्ष के बयानों में नजर आ रहा है। जिन राजेंद्र भंडारी पर महेंद्र भट्ट विगत पांच वर्षों से भ्रष्टाचार के आरोप लगाते रहे हैं, उन्हीं भंडारी को भाजपा में शामिल करके चुनाव में उतारने से भी भाजपा को कोई गुरेज नहीं है। गौरतलब है कि चमोली जिला पंचायत अध्यक्ष और राजेंद्र भंडारी की पत्नी रजनी भंडारी पर करोड़ों के घोटाले करने के आरोप समूचे भाजपा संगठन और उनके वरिष्ठ नेता लगाते रहे हैं। अब ऐसी कथित दागी नेता काो भी भाजपा में शामिल करने के प्रयास किए जा रहे हैं।

गौर करने वाली बात यह है कि लोकसभा चुनाव के दौरान अनिल बलूनी की जीत को सुनिश्चित करने के लिए राजेंद्र भंडारी को भाजपा में शामिल करवाया गया था तब भी भ्रष्टाचार के आरोपांे की बातें उठी थी तो महेंद्र भट्ट ने साफ कर दिया था कि आरोप रजनी भंडारी पर है न कि राजेंद्र भंडारी पर। साथ ही यह भी स्पष्ट कर दिया था कि रजनी भंडारी पर लगे आरोपों पर कानून अपना काम करेगा। तब एक बारगी लगा था कि भाजपा में कम से कम कुछ तो नैतिकता बची है जिसके तहत रजनी भंडारी को भाजपा में शामिल नहीं किया गया है। परंतु बदरीनाथ विधानसभा उपचुनाव के चलते अब भाजपा स्वघोषित नैतिकता को भी ताक पर रखकर रजनी भंडारी को भी भाजपा में शामिल करवाने का मूड बना चुकी है।

माना जा रहा है कि भाजपा बदरीनाथ सीट पर कोई जोखिम नहीं लेना चाहती है। इसके लिए राजेंद्र भंडारी को पार्टी ने चुनाव में उतारा है और भंडारी के जनाधार का फायदा भाजपा को मिल सके इसके लिए उनकी पत्नी रजनी भंडारी को हर हाल में भाजपा में शामिल करवाने की रणनीति पर काम कर रही है। जानकारों की मानें तो रजनी भंडारी को भाजपा में शामिल करवाने के लिए महज औपचारिकता ही बची है।

ऐसा नहीं है कि रजनी भंडारी पर भ्रष्टाचार के आरोप नए-नए लगे हैं। 2012 में नंदा देवी राजजात के दौरान रजनी भंडारी पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे थे जिसकी जांच भी हो चुकी है लेकिन राजनीतिक रसूख के चलते भंडारी दम्पत्ति पर कोई कार्यवाही नहीं हो पाई। महेंद्र भट्ट और राजेंद्र भंडारी चिर-परिचित राजनीतिक प्रतिद्वंदी रहे हैं। भंडारी ने दो बार भट्ट को चुनाव में पटखनी देकर हराया है। इसके चलते दोनांे में आरोप-प्रत्यारोप लगाए जाते रहे हैं। स्वयं महेंद्र प्रसाद भट्ट भंडारी दम्पति के खिलाफ भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाते रहे हैं। 2022 के विधानसभा चुनाव में महेंद्र प्रसाद भट्ट ने प्रचार के दौरान दाव किया था कि अगर फिर से भाजपा की सरकार बनी तो भंडारी दम्पत्ति को जेल भेजा जाएगा।

पंरतु राजनीतिक समीकरणों के चलते अब स्वयं महेंद्र प्रसाद भट्ट उन्हीं राजेंद्र भंडारी के लिए वोट मांगने चुनाव प्रचार में उतरेंगे, साथ ही रजनी भंडारी को भाजपा में शामिल करवाने की रणनीति भी बना रहे हैं। इससे भाजपा की चाल और नीति पर सवाल खड़े हो रहे हैं। देखना दिलचस्प होगा कि भंडारी भाजपा के टिकट पर चुनाव जीत कर अपनी सीट को बरकरार रख पाते हैं या नहीं। साथ ही मौजूदा सांसद अनिल बलूनी के लिए भी यह चुनाव किसी बड़ी परीक्षा से कम नहीं है क्योंकि लोकसभा चुनाव में बदरीनाथ सीट पर बलूनी को 8 हजार मतांे की बढ़त हासिल हुई है। अब बलूनी को फिर से भंडारी को बड़े अंतर से जितवाने की भी चुनौती बनी हुई है।

You may also like

MERA DDDD DDD DD