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Uttarakhand

‘नगरीकरण से पहाड़ पर बढ़ता अपराध’

नैनीताल के एसएसपी जन्मेजय खण्डूड़ी से बातचीत

नैनीताल मैदानी और पर्वतीय क्षेत्र का समावेश है। इस भौगोलिक असमानता के बीच अपराधों में किस प्रकार का अंतर देखते हैं?
मूलतः देखा जाए तो अपराधी किसी क्षेत्र विशेष में तो रहता नहीं है। कभी मैदानी क्षेत्र तो कभी पर्वतीय क्षेत्र में अपराध करता है। वैसे पहाड़ों में अपराध की कमी है। सड़कों की कमी या कहें अपराध करने के बाद भागने की सुगमता पर्वतीय क्षेत्रों में नहीं है। मैदानी क्षेत्रों में अपराध कर भागने के अनेक रास्ते हैं। इसलिए मैदानी क्षेत्रों में अपराध पर्वतीय क्षेत्रों के बनिस्पत ज्यादा हैं।

पिछले कुछ वर्षों में देखने में आया है कि पर्वतीय क्षेत्रों में भी हत्या, बलात्कार जैसे अपराट्टां में वृद्धि हुई है? समग्र पर्वतीय क्षेत्र के परिप्रेक्ष्य में इसके आप क्या कारण मानते हैं?
देखिए, अगर हम देखें तो पहाड़ के इलाकों में होता नगरीकरण एक बड़ा कारण है। गांवों का जैसे-जैसे शहरीकरण होता है तो अपराधों की संख्या में वृद्धि होती है। शहरीकरण एवं समृद्धि अपने साथ अपराध भी लाते हैं। गांव की संस्कøति से शहर की संस्कøति में कायांतरण हुआ। भूमि विवाद एवं अन्य कारक बढ़े हैं पर्वतीय क्षेत्रों में। सामाजिक दायरों एवं संबंधों में बदलाव भी एक बड़ा कारण है। संयुक्त परिवार की जगह एकल परिवारों ने ले ली है। परिवार की बदलती परिभाषा ने लोगों के सोचने की प्रवृति भी बदल दी है।

नैनीताल पर्यटक स्थल है। यहां आने वाले पर्यटकों की सुरक्षा के लिए आपके द्वारा कोई खास पहल की गई है?
पर्यटकों की सहायता के लिए हमने प्रत्येक होटल में हैल्पलाइन नंबर दिए हैं। अगर पर्यटकों के साथ कोई दुर्व्यवहार हो तो वे हमें इसकी जानकारी दे सकते हैं। पर्यटकों की सुविधा के लिए हमने कुमाऊं मंडल विकास निगम के सहयोग से एक फैसिलिटेशन केंद्र खोला था जहां से पर्यटक अपने मतलब की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। और जो यातायात का प्लान हमने बनाया था वो पहले ही समाचार पत्रों एवं अन्य संचार माध्यमों में सार्वजनिक कर दिया था जिससे पर्यटकों को असुविधा न हो।

नैनीताल में वीवीआईपी का अक्सर आगमन होता रहता है, उच्च न्यायालय भी यहां है। ऐसे में वीआईपी सुरक्षा एवं आम लोगों की सुरक्षा के बीच कैसे सामंजस्य बिठाते हैं जबकि पूरे प्रदेश में सुरक्षा बलों की कमी है?
मूलतः हमारा कर्तव्य सुरक्षा करना ही है फिर वो सिक्योरिटी आमजन की हो या वीआईपी की हो। उसके लिए जिम्मेदारी एवं जवाबदेही हमारी ही तय है और हम उसे बखूबी से निभाते भी हैं। जो हमारी प्लानिंग होती है उसमें प्रयास रहता है कि मैनेजमेंट भी सही हो और हर व्यक्ति से कार्य ले पाएं। कभी तो हमें 24 घंटे भी काम करना पड़ता है जिसके लिए हम ट्रेंड भी हैं।

हल्द्वानी धीरे-धीरे अपराधियों का अड्डा बनता जा रहा है। अपराट्टा होने के बाद तो पुलिस कार्रवाई करती है लेकिन अपराध न हो इसके लिए पुलिस कौन से प्रो-एक्टिव कदम उठा रही है?
हमारे द्वारा कॉन्फिडेंस बिल्डिंग मेजर्स उठाए गए हैं। जगह-जगह जाकर गोष्ठियां करना। गांवों एवं बाहरी क्षेत्रों में भी हम गोष्ठियां कर लोगों को जागरूक कर रहे हैं। अपराध होने की आशंका से किस प्रकार पुलिस को त्वरित सूचित किया जाए इसके लिए लोगों को जानकारी दी जा रही है। हमने रात्रि में गश्तों की संख्या एवं क्षेत्र बढ़ा दिए हैं। इसके लिए हमनें ऑफिस में कर्मचारियों को आस-पास के थानों में शिफ्ट किया है। वाहनों की संख्या भी बढ़ाई है। पीएसी की दो कंपनियां अतिरिक्त तैनात की हैं। जहां तक अपराध का पैटर्न है तो मानसिक विकृति एवं अन्य कारणों से हो सकता है। कई केस हमने सुलझा लिए हैं हम प्रोफेशनल गैंगों पे कार्य कर रहे हैं।

क्या निचले स्तर पर कर्मियों की कमी पुलिस के काम पर फर्क डालती है?
पहले काफी कमी थी लेकिन समय-समय पर होती रही भर्तियों के चलते थानों में फोर्स की कमी एक हद तक पूरी हो गई है। फोर्स की बढ़ोतरी का असर क्राइम पर भी पड़ा है। अपराधों में कमी आई है।

सामान्यतः देखा गया है कि पुलिस किसी केस को खोलने में असफल हो तो आलोचना एवं प्रचार ज्यादा होता है। लेकिन किसी अपराध की गुल्थी सुलझा ले तो वो प्रशंसा नहीं मिल पाती जिसकी वो हकदार है, क्या कहेंगे?
हमारा कार्य ही जनता की सेवा है। हमारी तनख्वाह सरकारी खजाने से आती है। अगर हमें जनता की प्रशंसा मिलती है तो वो हमारे लिए प्रोत्साहन होता है। हम अपना कर्तव्य किसी प्रशंसा की अपेक्षा के लिए नहीं करते। हमारी भी कहीं कुछ गलतियां हो सकती हैं जैसा कि आप भी जानते हैं असफलताओं का प्रचार ज्यादा कर दिया जाता है। सफलता को उतना स्थान नहीं मिलता। मेरी अपील है कि पुलिस अगर कोई अच्छा कार्य करती है तो उसकी भी प्रशंसा होनी चाहिए।

नशे खासकर ड्रग्स के खिलाफ आपकी मुहिम की सर्वत्र प्रशंसा हो रही है। अपनी इस मुहिम में पुलिस के इतर समाज के अन्य तबके की भूमिका आप किस रूप में देखते हैं?
इसमें सबसे बड़ी भूमिका मीडिया की है और हमें उसके सहयोग की जरूरत है। इस मुहिम में जब हम नशे के खिलाफ कोई जागरूकता अभियान या गोष्ठी करते हैं तो मीडिया के माध्यम से इसका संदेश हम प्रत्येक व्यक्ति तक पहुंचा सकते हैं।

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