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Uttarakhand

क्रिकेट के नाम पर करोड़ों का खेल

  • उत्तराखण्ड में खेल प्रतिभाओं को तराशने के बड़े-बड़े दावे होते रहे हैं। असलियत यह है कि यहां राजनीतिक संरक्षण में खेल प्रतिभाओं को लूट लिया जाता है। सीमांत उत्तरकाशी जिले के दो भाइयों ने भारतीय टीम के जाने-माने खिलाड़ी युवराज सिंह और स्थानीय विधायक राजकुमार के नाम का इस्तेमाल कर करोड़ों की ठगी कर डाली। क्रिकेट के होनहार खिलाड़ियों को इन्होंने आईपीएल और रणजी ट्राॅफी में चयन कराने का ऐसा झांसा दिया कि लोग खुद उनके जाल में फंसते गए। इसके लिए इन्होंने बाकायदा अपनी कंपनियां तक बनाई। पुरोला में प्रीमियर लीग के बहाने युवा खिलाड़ियों को आकर्षित करने के लिए युवराज सिंह को बुलाया गया। खास बात यह है कि इस प्रीमियर लीग के आयोजन और युवराज के हैलीकाॅप्टर लैंडिंग के लिए स्थानीय प्रशासन से अनुमति लेने में विधायक राजकुमार ने जोरदार उत्साह दिखाया। यही नहीं जब ठगे गए एक व्यक्ति ने कानूनी कार्रवाई का रास्ता अपनाया तो तब भी विधायक ने आपसी सुलह से मामले को शांत करवाने में दिलचस्पी दिखाई। राज्य के लोग मानते हैं कि उच्च राजनीतिक संरक्षण के बिना क्रिकेट में ठगी का यह बड़ा खेल नहीं हो सकता

उत्तराखण्ड में निरंतर नए-नए घोटाले  सामने आते रहे हैं। राजनीतिक सरंक्षण के बिना न तो कोई इस तरह के बड़े घोटाले कर सकता है और न ही बच सकता है। हैरानी इस बात है कि क्रिकेट जैसे खेल को भी एक बड़े घोटाले के लिए सहारा बनाया गया। जिसमें रणजी ट्राॅफी और आईपीएल में चयन के नाम पर करोड़ों की ठगी का मामला सामने आया है। स्थानीय स्तर पर जिस तरह से एक बड़े घाटाले को अंजाम दिया गया है, वह साफ दिखाता है कि आज भी घोटालेबाजांे को राजनीतिक सरंक्षण मिल रहा है। इस पूरे घोटाले को देखें तो भले ही यह मामला दो स्थानीय युवकों द्वारा करोड़ों की ठगी का दिख रहा हो, लेकिन इसके पीछे कहीं न कहीं सम्भ्रांत खेल माने जाने वाले क्रिकेट टीमों और आयोजकों की मिलीभगत की आशंकाएं जताई जा रही हंै। यह मामला महज उत्तराखण्ड के छोटे से कस्बे पुरोला के खलाड़ी गांव के दो युवकों द्वारा करोड़ों की ठगी का नहीं हों सकता, अगर इसके पीछे बड़े हाथ न हों।
पटकथाः 
क्रिकेट की रणजी ट्राॅफी और इंडियन प्रीमियर लीग यानी आईपीएल टीम में चयन के नाम पर करोड़ों की ठगी की पटकथा बड़ी दिलचस्प है। किस तरह से ठगी के लिए बड़े- बड़े नामों का सहारा लिया गया है, औेर किस तरह से स्थानीय स्तर पर राजनीतिक संरक्षण दिया जाता रहा है, वह भी अपने आप में बड़ा ही दिलचस्प है। महज दो मामलांे में ही एक करोड़ की ठगी हुई। जिसमें उत्तराखण्ड के क्रिकेट प्रेमी युवाओं को रणजी ट्राफी और आईपीएल में चयन के नाम पर लूटा गया है। हैरत की बात यह है कि इस लूट को अमलीजामा पहनाने के लिए भारतीय क्रिकेट टीम के मशहूर खिलाड़ी युवराज सिंह का सहारा लिया गया और इसके चलते आसानी से करोड़ों की ठगी करने में कामयाब हुए।
पात्र परिचय: 
वैसे तो इस कहानी में मुख्यतः तीन पात्र ही हैं, लेकिन इस पूरे घटनाक्रम को अमलीजामा पहनाने में कई ऐसे पात्रों का भी नाम सामने आया है जिनके संरक्षण में इस बड़ी ठगी को अंजाम दिया गया।
अंकित रावत: उत्तरकाशी जिले की पुरोला तहसील के खलाड़ी गांव का युवक अंकित रावत पुत्र सोबत सिंह रावत इस प्रकरण का मुख्य पात्र है जिसके द्वारा यह पूरा ठगी का तानाबाना बुना गया। लग्जरी जीवनशैली से ओत-प्रोत अंकित रावत के बारे में स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि महज पांच वर्ष में ही अंकित रावत करोड़ों की संपत्ति का मालिक बना है। कहा जाता है कि इसके पिता सोबत सिंह रावत किसानों की उपज को मंडी में बिकवाने के लिए कमीशन के खेल में भी शामिल रहे हैं। इसके अलावा अंकित रावत द्वारा दो कंपनियां बनाई गई हंै जिनमें एक रावत जी निवेशम परमर्शम प्राइवेट लिमिटेड और दूसरी एपीआर स्पोटर्स ईवेशन प्राइवेट लिमिटेड के नाम से पंजीकøत है। बताया जाता है कि अंकित रावत ने इन दोनों ही कंपनियों से प्रदेश के अलावा अन्य प्रदेशों में भी निवेश के नाम पर करोड़ांे की ठगी की है। साथ ही अपनी एपीआर स्पोट्र्स ईवेशन प्राइवेट लिमिटेड के नाम पर कई खेलों में टीम में चयन के नाम पर ठगी की है। उत्तराखण्ड में भी इसी कंपनी को सहारा बनाकर करोड़ों की ठगी की गई है।
संदीप रावत: अंकित रावत का सगा भाई संदीप रावत भी इस पूरे मामले में शामिल है। अपने छोटे भाई अंकित रावत के साथ दो कंपनियों में साझीदार संदीप रावत करोड़ों की धोखाधड़ी करने का आरोपी है। ‘चोर-चोर मौसेरे भाई’ की कहावत को चरितार्थ करने वाले संदीप रावत के कारनामे स्थानीय स्तर पर बड़े चर्चित रहे हैं।
राजकुमार: पुरोला के विधायक और कांग्रेस पार्टी के बड़े नेता के तौर पर राजकुमार को जाना जाता है। मोदी लहर के बावजूद राजकुमार अपनी सीट बचाने में कामयाब रहे हैं। इस करोड़ों की ठगी के मामले में आरोपी अंकित और संदीप रावत के संरक्षणकर्ता के तौर पर विधायक राजकुमार का नाम सामने आया है। उन्होंने शासन- प्रशासन से आयोजन करवाने के लिए व्यक्तिगत तौर पर पत्र भी लिखा है। इसके अलावा पीड़ित पक्ष का आरोप है कि विधायक राजकुमार द्वारा दोनों आरोपी भाइयों के खिलाफ कानूनी कार्यवाही न करने और मध्यस्थता करने का दबाव बनाया गया।
सोशल मीडिया और व्हाट्सएप ग्रुप में एक आॅडियो तेजी से वायरल हुआ जिसके बारे में कहा जाता है कि यह आॅडियो क्लीपिंग पुरोला के विधायक राजकुमार की है जिसमें वह पीड़ित हाकम सिंह पर दोनों ठग भाइयों के खिलाफ कानूनी कार्यवाही न करने के लिए दबाव बना रहे हैं और हाकम सिंह को चार से पांच लाख की किस्त पर धनराशि लौटाने का वादा कर रहे हं। हालांकि ‘दि संडे पोस्ट’ इस आॅडियो क्लीपिंग की पुष्टि नहीं करता है, लेकिन जिस तरह से इस आॅडियो में सुना जा रहा है वह साफ करता है कि दोनांे ठग भाइयों को पूरी तरह से स्थानीय राजनीतिक और प्रशासनिक संरक्षण दिया जाता रहा है।
युवराज सिंह: भारतीय क्रिकेट टीम के बड़े खिलाड़ी हैं। अंकित रावत के इनके साथ पुराने रिश्ते बताए जाते हैं। स्वय युवराज ने पुरोला के आयोजन में अंकित रावत को अपना पारिवारिक सदस्य और छोटा भाई कहकर संबोधित किया। साथ ही पुरोला में क्रिकेट अकादमी की स्थापना करने का वादा भी किया। युवराज सिंह द्वारा अनजाने में किए गए इस संबोधन का नाजायज फायदा उठाते हुए संदीप और अंकित रावत ने ठगी का ऐसा वातावरण तेैयार किया कि कई लोगों से करोड़ों की ठगी करने में कामयाबी हासिल की।
हाकम सिंह: पुरोला के स्थानीय निवासी और देहरादून में रहने वाले सरकारी ठेकेदार हाकम सिंह को दोनों रावत भाइयों ने 90 लाख रुपए का चूना लगाया है। हैरत की बात यह है कि हाकम सिंह को आईपीएल के नाम पर नहीं, बल्कि निवेशम परमर्शम प्राइवेट लिमिटेड और एपीआर स्पोट्र्स ईवेशन प्राइवेट लिमिटेड कंपनी में निवेश के नाम पर लूटा गया है। इस लूट को इस तरह से सुनियोजित तरीके से आंजाम दिया गया कि सरकारी निर्माण कार्यों को करने वाले हाकम सिंह रावत भी इनके झांसे में आ गए। तकरीबन 90 लाख की ठगी हाकम सिंह के साथ की गई। हाकम सिंह का आरोप है कि इसके पीछे स्थानीय राजनीतिक संरक्षण मिला हुआ है, क्यांेकि उनको बताया गया कि इन कंपनियों में विधायक राजकुमार द्वारा भी लाखों का निवेश किया गया था। जिसके चलते वे इन फर्जी कंपनियों में निवेश के लिए उत्साहित हुए थे।
राजेंद्र चैधरी: रायवाला के एक टैक्सी ड्राइवर राजेंद्र चैधरी के बेटे से रणजी ट्राॅफी और आईपीएल के चयन में नाम पर 11 लाख की ठगी रावत भाइयों द्वारा की गई है।
भूमिका: 
करोड़ों की ठगी के लिए सबसे पहले अंकित और संदीप रावत द्वारा एक वातावरण तैयार किया गया। इसके लिए सबसे पहले उत्तरकाशी जिले के पुरोला में एक स्पोर्ट प्रीमियर लीग का आयोजन करने का निर्णय लिया गया। इस आयोजन को भव्य और चर्चित बनाने के लिए स्थानीय प्रशासन पर दबाब बनाए जाने और अनुमति के लिए स्थानीय विधायक राजकुमार को इस आयेाजन में शामिल किया गया। राजकुमार के द्वारा बड़े-बड़े पोस्टर बैनर अपने नाम से लगाए गए जिससे यह लगता था कि मानो यह कार्यक्रम विधायक द्वारा ही किया जा रहा है। स्थानीय प्रशासन से कार्यक्रम स्थल की अनुमति लेने और क्रिकेटर युवराज सिंह को हैलीकाॅप्टर से लाए जाने के लिए लैंडिग की अनुमति लेने के लिए स्वयं विधायक द्वारा स्थानीय प्रशासन को पत्र लिखा गया।
करोड़ों की ठगी का मजबूत वातावरण बनाया जा सके, इसके लिए भारतीय टीम के युवराज सिंह को इस कार्यक्रम का मुख्य अतिथि बनाया गया। युवराज  द्वारा पुरोला में एक क्रिकेट अकादमी की स्थापना करने का जो वादा किया गया उसे रावत भाइयों यानी अंकित रावत और संदीप रावत ने अपने हित में जमकर भुनाया। स्थानीय प्रशासन ओैर जनता पर अपना प्रभाव इस कदर बनाया कि वे क्षेत्र के एक बड़े और प्रभावशाली व्यक्ति बन चुके थे। बेहद कीमती और आलीशान जैगुआर कारों में घूमने के साथ-साथ बाउंसर तक रावत भाइयों ने रखे। जिससे उनका प्रभाव बढ़ता ही चला गया।
2018 में रणजी ट्राॅफी के खेल होने तय हुए तो रावत बंधुओं ने इसको अपने लिए एक बड़ा सुनहरा अवसर माना। प्रचार किया कि वे रणजी ट्राॅफी में खिलाड़ियों का चयन कर सकते हैं। इसके चलते कई स्थानीय युवाओं ने उनसे संपर्क साधा और लाखों रुपए इस बात के लिए दिए कि रावत भाई उनका चयन रणजी ट्राॅफी में करवा देंगे। इस दौरान रायवाला के राजेंद्र चैधरी के पुत्र अंकित चैधरी को इन दोनों भाइयों ने अपने झूठे जाल में फांसा और उनके पिता को सब्जबाग दिखाए। रावत भाइयों के झांसे में आकर राजेंद्र चैधरी ने ग्याराह लाख का चैक दिया। लेकिन जब रणजी ट्राॅफी में आंकित चैधरी का चयन नहीं हुआ तो राजेंद्र चैधरी ने अपने पैसे वापस मांगे इस पर उनको जो चैक दिया गया वह खाते में धनराशि न होने के चलते बांउस हो गया।
वैसे आईपीएल और क्रिकेट के नाम पर ठगी की पूरी पटकथा भी बेहद दिलचस्प है। आदतन धोखेबाजी में शामिल दोनों भाइयों ने सबसे पहले दो कंपनियों को पंजीकøत करवाया। इनके नाम रावतजी निवेशम परमर्शम प्राइवेट लिमिटेड और एपीआर स्पोटर्स ईवेशन प्राइवेट लिमिटेड रख लिए। इनमें रावत जी निवेशम कई बड़े-बड़े प्रोजेक्टों में निवेश के नाम पर लोगों से निवेश करती थी तो दूसरी कंपनी एपीआर स्पोट्र्स ईवेशन प्राइवेट लिमिटेड खेल जगत में निवेश के नाम पर खोली गई थी। इन्हीं कंपनियों से रावत भाइयों ने हाकम सिंह और उन जैसे कई लोगों से करोड़ों की ठगी निवेश के नाम पर की। माना जता है कि निवेश के नाम पर जो धन कमाया गया वह दोनों भाइयों ने अपने रहन-सहन और अय्याशियों में उड़ा दिया, जबकि कंपनी खुलने के बाद कोई  गतिविधियां कंपनी में नहीं हुई। एक तरह से फर्जी सेल कंपनियां खोली गई।
राजेंद्र चैधरी के अलावा सबसे बड़ी ठगी मारी ब्लाॅक के लवाड़ी गांव के भेड़ पालक और काॅन्ट्रेक्टर हाकम सिंह रावत के साथ की। रावत के साथ की गई ठगी का मामला भी बड़ा दिलचस्प है। इसमें राजनीतिक सरंक्षण द्वारा ठगी का जाल बुना गया। इसके लिए दोनों रावत भाइयों अंकित और सदीप रावत ने हाकम सिंह को अपनी दो कंपनियों रावत जी निवेशम परमर्शम प्राइवेट लिमिटेड और एपीआर स्पोट्र्स ईवेशन प्राइवेट लिमिटेड के बारे में बताया और बकायदा गौतमबुद्ध नगर में आईथ्म्बा टावर में स्थित बहुत बड़े और आलीशान आॅफिस में विजिट करवाई गई। दोनों भाई जैगुआर और कई लग्जरी गाड़ियों में घूमते थे। चंदर रोड देहरादून में दो बड़े-बड़े फ्लैट भी हाकम सिंह को इसलिए दिखाए कि जिससे प्रभाव और बड़ा पड़े। विदेश से भी बड़ा निवेश करवाने की बात हाकम सिंह को बताई गई।
इस पर हाकम सिंह द्वारा फरवरी माह 2018 में रावत जी निवेशम परमर्शम प्राइवेट लिमिटेड के बैंक आईसीआईसीआई बैंक खाते नंबर 1580डी 500 1488 में तकरीबन 85 लाख रुपए निवेश के लिए कंपनी को ट्रांसफर कर दिए। इसके बदले हाकम सिंह को रावत भाइयों ने कंपनी में निवेश के मुनाफे के साथ-साथ निवेश की कुल रकम को जोड़कर 99 लाख 72 हजार 717 रुपए का पोस्ट डेटेड 27 सितंबर 2018 का चेक दिया। हाकम सिंह ने तय समय पर चेक अपने खाते में डाला, लेकिन धनराशि न होने के चलते चेक का भुगतान नहीं हुआ और बाउंस हो गया। इस पर परेशान होकर हाकम सिंह ने दोनों भाइयों  के खिलाफ धोखाधड़ी का मुकदमा करने की बात कही तो रावत भाई अपने पिता सोबत सिंह रावत और पुरोला के विधायक राजकुमार को लेकर हाकम सिंह पर दबाव बनाने के लिए देहरादून के आवास पर आए। विश्वास दिलाया गया कि सारे पैसे जल्द ही हाकम सिंह को मिल जाएंगे। इसके बाद हाकम सिंह को रावत इंटर प्राइजेज के नाम से फिर से चेक दिया और 15 फरवरी 2019 तक सारे पेैसे मिल जाने का वादा किया। लेकिन उक्त चेक भी फिर से बाउंस हो गया।
अब हाकम सिंह को पूरी तरह से विश्वास हो गया कि उनके साथ बहुत बड़ा धोखा किया गया है। इसके बाद 27 मार्च 2019 को हाकम सिंह ने पुलिस महानिदेशक कानून व्यवस्था अशोक कुमार को इस प्रकरण में शिकायती पत्र लिखकर कानूनी कार्यवाही करने की मांग की। पुलिस महानिदेशक अशोक कुमार ने इस प्रकरण में त्वरित कार्यवाही के लिए उत्तर काशी पुलिस अधीक्षक को निर्देश दिए और तब जाकर पुलिस ने अंकित रावत को गिरफ्तार किया। लेकिन संदीप रावत अभी भी पुलिस की पकड़ से बाहर है। हाकम सिंह का कहना है कि पुलिस अंकित को गिरफ्तार करके चुप बैठ गई है, न तो आगे कोई कार्यवाही कर रही है और न ही जांच कर रही है। अगर सही तरीके से जांच हो जाए तो तकरीबन 7 करोड़ रुपए की ठगी इन दोनों भाइयों ने पुरोला से ही की है। एक बच्चे के आईपीएल में सेलेक्शन के नाम पर 6 लाख भी ठगे हंै, लेकिन वह कमजोर है और उसने नगद पैसा दिया है जिसके चलते उसके पास कोई प्रमाण नहीं है। ऐसे ही इन रावत भाइयों ने लोगों को ठगा है।
इस पूरे प्रकरण में एक बात साफ हो गई है कि करोड़ांे की ठगी जिसमें क्रिकेट को भी शामिल किया गया है, में केवल अंकित रावत और संदीप रावत ही अकेले जिम्मेदार नहीं हैं। इसमें राजनीतिक संरक्षण की बात सामने आ रही है। आॅडियो क्लीपिंग में जिस तरह से हाकम सिंह रावत पर राजनीतिक दल के विधायक द्वारा दबाव बनाया जा रहा है वह अपने आप में यह साबित करता है कि रावत भाइयों पर राजनीतिक हाथ जरूर है। आॅडियो क्लीपिंग में कहा जा रहा है कि अंकित रावत के पास विदेश से एक बड़ी
धनराशि आने वाली है। ‘दि संडे पोस्ट’ को दिए बयान में विधायक राजकुमार ने माना है कि  स्थानीय विधायक होने के नाते  उन्होंने अंकित और संदीप रावत के पिता के साथ हाकम सिंह से बात की है। किश्त में धनराशि लैटाने की भी बात मानी है। साथ ही यह भी माना है कि पुरोला में स्पोर्ट प्रीमियर लीग के आयोजन के लिए उन्हांेने प्रशासन से अनुमति के लिए पत्र लिखा है। हालांकि उनका कहना है कि वे न तो अंकित के किसी मामले में शामिल हंै और न ही उसके बारे में जानते हंैे कि वह क्या करता था।

बात अपनी-अपनी

देखिए, भाई साहब मैं स्थानीय विधायक हूं। अंकित रावत के पिता को जानता हूं और उनके कहने पर ही मैंने हाकम सिंह को मुकदमा न करने के लिए कहा था। मैं चाहता था कि मामला स्थानीय है और शांति से सुलझ जाए। मंै विधायक हूं और मेरे क्षेत्र में युवराज जेैसा खिलाड़ी आ रहा है तो मेरे और क्षेत्र के लिए अच्छा ही होगा। हाकम सिंह ने जब अंकित रावत को पैसे दिए तो मुझसे पूछकर तो नहीं दिए। यह उनका और हाकम सिंह का मामला है। इसमंे आप मुझे क्यों रख रहे हंै। स्पोर्ट प्रीमियर लीग और युवराज के हैलीकाॅप्टर लैंडिंग के लिए मैंने जरूर अनुमति के उद्देश्य पत्र लिखा था, क्योंकि यह मेरे क्षेत्र के लिए एक बड़ा अवसर था। न मैं उनकी कंपनी के बारे में जानता हूं और न ही उनके किसी काम में हिस्सेदार रहा हंू। कानून अपना काम कर रहा है। आज अंकित जेल में है।
राजकुमार, विधायक पुरोला
अंकित रावत को हमने गुड़गांव से गिरफ्तार किया था। इसके भाई को गिरफ्तार करने का प्रयास किया लेकिन वह हाथ नहीं आया। यह बड़े ठग हैं। महंगी जैगुआर गाड़ी में घूमते थे। युवराज को पुरोला लेकर आए थे, उन्हें ठगी के लिए इस्तेमाल किया है। ओैर कोई अन्य मामले सामने नहीं आए हंै। मैंने सबको कहा है कि अगर इन भाइयों ने उनके साथ ठगी की है, तो तुरंत रिपोर्ट दर्ज करवाएं। पुलिस उनका पूरा साथ देगी। आप पत्रकार हंै, अगर कोई व्यक्ति आपसे कहता हेै कि अंकित रावत ने उसके साथ ठगी की है, तो आप उसे मेरे पास भेज दंे। मैं तो तैयार हूं रिपोर्ट दर्ज करवाने के लिए, लेकिन कोई आगे नहीं आया है। अभी चारधाम यात्रा के चलते जिले में व्यवस्था बनाने में व्यस्त हैं। जैसे ही समय मिलेगा हम संदीप को भी गिरफ्तार कर लेंगे।
पंकज भट्ट, पुलिस अधीक्षक उत्तरकाशी
अभी संदीप रावत गिरफ्तार नहीं हुआ है। हम प्रयास कर रहे हंै। अभी कानपुर में कंपनी रजिस्ट्रार को हमने जानकारी के लिए लिखा है। जानकारी मिलने के बाद ही पता चलेगा कि इनकी कंपनी की क्या स्थिति है और कितना इन लोगांे ने निवेश किया है। चार्जशीट अभी दाखिल नहीं हुई है। जमानत का चार्जशीट से कोई लेना-देना नहीं है। जमानत देना या न देना कोर्ट के ऊपर निर्भर करता है। फिलहाल हमारे पास ऐसा कोई अन्य व्यक्ति नहीं आया है जिसके साथ इन दोनों भाइयों ने कोई ठगी की हो।
ऋतुराज, थाना इंचार्ज पुरोला
अभी जांच चल रही है। संदीप रावत को भी हम हिरासत में लेने के लिए प्रयास कर रहे हंै। दो मामलों के अलावा कोई अन्य मामले सामने नहीं आए हैं। सिर्फ हवा में ही चर्चा हो रही है कि करोड़ांे की ठगी की गई है। हमारे पास कोई और मामला तो नहीं आया है इसलिए इस पर कुछ नहीं कहा जा सकता।
नवीन कुमार, जांच अधिकारी पुरोला थाना
मेरा पुत्र अंकित चैधरी स्पोटर््स काॅलेज देहरादून में पढ़ता था और अब वह डीएई काॅलेज में पढ़ रहा है। मेरे पुत्र के साथ एक जूनियर कपिल नाम का छात्र रहता है जिसने मेरे लड़के से अंकित रावत की मुलाकात करवाई। अंकित रावत ने मेरे पुत्र को कहा कि रणजी ट्राॅफी के लिए जो सेलेक्शन कमेटी बनी हुई है उसमें रत्नाकर सेठी, ईश्वरन, महिम वर्मा तथा रचित वर्मा उसके खास हैं। इन चार लोगांे का नाम लेकर अंकित रावत ने मेरे लड़के को गुमराह किया कि ये सभी उसके बहुत बड़े परिचित हैं। अंकित रावत ने कहा कि मैं तुम्हारा सेलेक्शन रणजी ट्राॅफी में करवा दूंगा। मेरे लड़के ने मेरे से यह बात बताई तो मैंने मना भी किया। लेकिन लड़के के बहुत कहने के बाद मैं मान गया और मैंने अंकित रावत के कहने पर उसे ग्याारह लाख रुपए दिए जिसमें 1 लाख 80 हजार मैंने नकद दिए, 9 लाख 20 हजार उसके पंजाब नेशनल बैंक एकाउंट 2780000100074177 में जमा करवा दिए। कई दिनों तक अंकित रावत ने कोई काम नहीं किया और जब रणजी ट्राॅफी की टीम का सेलेक्शन पूरा हो गया तो मैंने अंकित रावत से कहा कि जब मेरे पुत्र सेलेक्ट नहीं हुआ है तो मेरा पेैसे वापस कर दो। इस पर अंकित रावत ने मुझे 11 लाख का चेक दे दिया। लेकिन चेक बाउंस हो गया। मैंने चेक बाउंस  का केस करवाने की धमकी दी तो अंकित रावत मिन्नतंे करने लगा कि मैं जल्द ही सारे पैसे लौटा दूंगा, आप केस न करो। इस पर मैंने केस नहीं किया, लेकिन उसने मुझे साढ़े पांच- पांच लाख के दो चेक दिए और कहा जल्द ही आपको पूरे पैसे बैंक से मिल जाएंगे। लेकिन दोनों चेक फिर से खाते में पैसे नहीं होने के कारण बाउंस हो गए तो मैंने अंकित रावत के खिलाफ चेक बाउंस का केस कर दिया। मैंने अपने वकील द्वारा कोर्ट में केस दर्ज करवाया ओैर रायवाला पुलिस को मुकदमा दर्ज करने के लिए लिखा, लेकिन पुलिस ने मेरा मुकदमा दर्ज नहीं किया। जब हाकम सिंह का मामला अखबारों में आया तब रायवाला पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज की।
राजेंद्र सिंह चैधरी, अंकित के पिता
दोनों भाई बहुत बड़े ठग हंै। जब मैंने मुकदमा करवाने की बात कही तो एक ने मुझ पर विधायक राजकुमार जी के साथ मिलकर दबाव बनाया। स्वयं विधायक जी ने मुझे कहा कि ‘मैं चार-पांच लाख रुपए महीने की किश्त बनवा दूंगा जिससे मुझे मेरे पेैसे मिल जाएंगे।’ मैेंने 85 लाख रुपए अपनी जीवन भर की कमाई इनको चेक से दी है। लेकिन मुझे फर्जी चेक देकर लूटा गया है। पुलिस पूरी तरह से जांच करे तो कई मामले और भी निकलेंगे। मंहगी गड़ियों में घूमना और बाउंसर रखने से इनका प्रभाव प्रशासन और राजनीति में रहा है। संदीप रावत को अभी पुलिस पकड़ नहीं पाई है। दोनों ही भाई बड़े शातिर हैं और इनका पिता भी मिला हुआ है। मैं इनको छोड़ने वाला नहीं हूं। चाहे मुझे सुप्रीम कोर्ट तक जाना पड़े।
हाकम सिंह रावत, पीड़ित

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