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Uttarakhand

भ्रष्ट अधिकारियों की प्लांटिंग

उत्तराखण्ड देश का ऐसा अनूठा राज्य है जहां भ्रष्ट अधिकारियों को नियम विरुद्ध उच्च पदों पर बिठाने के लिए हर हथकंडे अपनाए जाते हैं। चयन समिति में प्रदेश के वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों से लेकर मुख्य सचिव तक की मौजूदगी के बावजूद उत्तराखण्ड जल विद्युत निगम लिमिटेड में एक ऐसे ही अधिकारी बीसीके मिश्रा की उच्च पद पर नियुक्ति हुई। योग्यता और अनुभव न होने के बावजूद उनकी नियुक्ति के लिए संशोधित विज्ञप्ति निकाली गई। पहले उन्हें कार्यकारी निदेशक तो फिर निदेशक परिचालन भी बना दिया गया। अधिकारी मिश्रा ने निगम में अपनी ताकत का भरपूर इस्तेमाल किया और जो काम लाखों में हो सकता था उसे करोड़ों में करवाया। इस मामले में मिश्रा के खिलाफ विजिलेंस जांच भी बिठाई गई। जांच रिपोर्ट अभी तक ठंडे बस्ते में पड़ी हुई है। मिश्रा ने यूपीसीएल में करोड़ों रुपए के मीटर घोटाले को भी अंजाम दिया
3 अक्टूबर 2006 : इकोनॉमिक्स टाइम्स में एक विज्ञापन जारी हुआ जिसमें चेयरमैन कम मैनेजिंग डायरेक्टर यूजेवीएनएल (उत्तराखण्ड जल विद्युत निगम लिमिटेड) के पद पर नियुक्ति
निकाली जाती है। एक मैनेजिंग डायरेक्टर के अलावा सात डायरेक्टरों की भी पोस्ट निकाली गई।
25 नवंबर नवंबर 2006 : इकोनॉमिक्स टाइम्स में संशोधन निकाला गया, जिसके तहत मैनेजिंग डायरेक्टर और डायरेक्टर के लिए जो शैक्षिक योग्यता ‘डिग्री इन इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग’ मांगी गई थी वह संशोधित करके ‘डिग्री इन इलेक्ट्रिकल/सिविल/मैकेनिकल इंजीनियरिंग’ कर दी गई।
शैक्षिक योग्यता में संशोधन का कारण : बीसीके मिश्रा की नियुक्ति के लिए संशोधन किया गया। क्योंकि मिश्रा सिविल इंजीनियर हैं। मैनेजिंग डायरेक्टर पद के लिए पहले 20 साल का हाइड्रो सेक्टर का अनुभव मांगा गया था। वह संशोधित करके 15 वर्ष कर दिया गया।
12 जुलाई 2007 : यूजेवीएनएल के डायरेक्टर प्रोजेक्ट पद के लिए साक्षात्कार लिया गया। जिसमें कुल 47 आवेदन प्राप्त हुए थे।  इस पद के लिए 21 आवेदकों को योग्य पाया गया। सभी योग्य उम्मीदवारों को 12 जुलाई 2007 को उत्तराखण्ड सचिवालय में इंटरव्यू के लिए बुलाया गया। जिसमें से 16 अभ्यर्थी ही इंटरव्यू के लिए पहुंचे। जिनमें से एक बीसीके मिश्रा भी शामिल थे।
सलेक्शन कमेटी के सदस्यों में एसके दास (मुख्य सचिव उत्तराखण्ड), इंदु कुमार पांडे (अपर मुख्य सचिव उत्तराखण्ड सरकार), वीसी शर्मा (प्रमुख सचिव सार्वजनिक उद्यम ब्यूरो), वीएन सिंह (अपर सचिव वित्त), शत्रुघ्न सिंह (ऊर्जा सचिव), एसके चतुर्वेदी (निदेशक कर्मिक एनएचवीसी), योगेद्र प्रसाद (चेयरमैन यूजेवीएनएल) शामिल थे।
सलेक्शन कमेटी का अनुमोदन : बिंदु संख्या सात के अनुसार राजेंद्र प्रसाद थपलियाल को डायरेक्टर प्रोजेक्ट यूजीवीएनएल के लिए सलेक्ट कर लिए जाता है और बीसीके मिश्रा एवं एसएस चौधरी के नाम की एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर पद के लिए संस्तुति कर दी गई। यह नियम विरुद्ध हुआ, क्योंकि एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर का पद समाचार पत्रों में विज्ञापित किया ही नहीं गया था। बिना विज्ञप्ति के बीसीके मिश्रा और एसएस चौधरी के नाम की संस्तुति करना समानता के अधिकार का हनन है। यहां पर ध्यान देने वाली बात यह है कि एनएचवीसी के निदेशक कार्मिक तथा यूजीवीएनएल के चेयरमैन योगेंद्र प्रसाद के अलावा चयन कमेटी के बाकी सभी अन्य सदस्य वरिष्ठ आईएसएस हैं। चयन कमेटी के अध्यक्ष मुख्य सचिव स्वयं हैं। फिर भी उन्होंने ऐसे व्यक्ति का नाम उस पद के लिए चयनित कर लिया जिस पद के लिए कोई विज्ञापन निकाला ही नहीं गया था।
17 अप्रैल अप्रैल 2008 : दैनिक जागरण में यूजेवीएनएल के प्रबंध निदेशक तथा पिटकुल के निदेशक परिचालन के लिए विज्ञापन निकाला गया।
4 दिसंबर 2008 : यूजेवीएनएल के प्रबंध निदेशक के पद का साक्षात्कार आयोजित किया गया। जिसमें 35 आवेदन प्राप्त हुए। 21 योग्य अभ्यार्थियों को बुलाया गया। केवल 15 अभ्यर्थी ही
उपस्थित हुए। जिनमें एक बीसीके मिश्रा थे। मुख्य सचिव उत्तराखण्ड इंदु कुमार पांडे की अध्यक्षता में चयन समिति बनाई गई। चयन समिति में इंदु कुमार पांडे के अलावा अपर मुख्य सचिव एनएस नपल्चयाल, वित्त सचिव आलोक जैन, प्रमुख सचिव पब्लिक इंटरप्राईज ब्यूरो वीसी शर्मा, मुख्यमंत्री के सचिव शत्रुघ्न सिंह, यूजेवीएनएल के चैयरमेन योगेंद्र प्रसाद, उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत परिषद के चेयरमैन जीवी सिंह शामिल थे।
सलेक्शन कमेटी के अनुमोदन : बिन्दु संख्या आठ के अनुसार यूजेवीएनएल के प्रबंध निदेशक के लिए कोई भी योग्य उम्मीदवार नहीं मिला। लेकिन बीसीके मिश्रा की यूजीवीएनएल के निदेशक परिचालन पद के लिए संस्तुति सलेक्शन कमेटी द्वारा कर दी गई। जो कि एक बार फिर नियम विरूद्ध हुआ, क्योंकि यूजेवीएनएल के निदेशक परिचालन पद की विज्ञप्ति नहीं निकाली गई थी। जब पद ही विज्ञापित नहीं किया गया तो संस्तुति किस आधार पर कर दी गई? एक बार फिर समानता के अधिकारों का हनन किया गया। सवाल यह है कि हर बार नियम विरुद्ध चयन बीसीके मिश्रा का ही क्यों होता रहा, जबकि चयन कमेटी में दो सदस्यों को छोड़कर बाकी सब प्रदेश के वरिष्ठ आईएएस हैं। चयन कमेटी के अध्यक्ष तत्कालीन मुख्य सचिव हैं।
भ्रष्टाचार की शुरुआत
 
21 अगस्त 2008 : बीसीके मिश्रा जो कि उस समय यूजेवीएनएल में एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर (सिविल) के पद पर कार्यरत थे, उन्होंने इस दिन एक कार्यालय ज्ञाप निकाला। जिसमें उन्होंने मनेरी भाली फेज टू के जोशीयाड़ा बैराज (उत्तराकाशी) के सेडिमेंटेशन टैंक से सिल्ट (गाद) निकालने के कार्य हेतु वित्तीय वर्ष 2008-2009 में 7 करोड़ 13 लाख रुपया स्वीकøत किया। जोकि कार्य की वास्तविक लागत से कहीं अधिक था। इस कार्य की वास्तविक लागत महज 50 से 60 लाख के बीच होती है। उत्तराखण्ड राज्य आंदोलन के कार्यकर्ता विजय सिंह महर निवासी शिवपुर कॉलोनी डाक पत्थर देहरादून ने इसकी शिकायत तत्कालीन गढ़वाल मंडल के आयुक्त धीरज गर्ब्याल से 11 फरवरी 2014 को की। जिसके आधार पर तत्कालीन आयुक्त गढ़वाल धीरज गर्ब्याल ने प्रारंभिक जांच रिपोर्ट तत्कालीन प्रमुख सचिव ऊर्जा उमाकांत पवार को 22 फरवरी 2014 को सौंप दी थी। जिसमें कई बिंदु उठाए गए। जैसे कि उक्त कार्य का इस्टीमेट अधिशासी अभियंता एवं अधीक्षण अभियंता द्वारा तैयार किया गया था, जबकि समान्यतः इस्टीमेट जूनियर इंजीनियर एवं असिस्टेंट इंजीनियर द्वारा ही तैयार किया जाता है। कार्य में ऐसी मशीनों का प्रयोग किया गया जिनकी आवश्यकता नहीं थी। मशीन को केवल साईट पर खड़ा रखने का इतना ज्यादा किराया भुगतान कर दिया गया कि इतने में तो नई हापर बीन मशीन खरीदी जा सकती थी। इस कार्य के लिए जब निविदाएं आमंत्रित की गई थी तो उसमें विशेष कंडीशन डाली गई थी कि इन  निविदाओं में वही फर्म प्रतिभाग कर सकती है जिनका कि वार्षिक टर्नओवर 50 करोड़ से अधिक हो। इसके पीछे कि मंशा यह बताई जाती है कि  स्थानीय ठेकेदार या अन्य फर्म जो उक्त कार्य को कर रहे हैं, उनको टेंडर से बाहर किया जा सके। बीसीके मिश्रा अपनी चहेती फर्म को टेंडर देकर भ्रष्टाचारी मंसूबों को अंजाम देने में सफल हो सकें। तत्कालीन गढ़वाल के आयुक्त धीरज गर्ब्याल ने अपनी जांच में यह सभी स्पष्ट किया है। आखिर में उन्होंने इस कार्य से संबंधित सभी अधिकारियों को जांच कार्य संपन्न होने तक अन्यत्र जगह पर संबद्ध करने तथा सेवानिवृत होने वाले सभी अधिकारियों के समस्त देयकों को रोकने एवं विजलेंस जांच कराए जाने की संस्तुति की थी। इसके बाद मिश्रा पर 2016 में विजिलेंस जांच बिठाई गई। लेकिन जांच अभी तक भी ठंडे बस्ते में पड़ी है। दो साल बाद भी  जांच की कोई रिपोर्ट अभी तक सार्वजनिक नहीं हुई।
4 जनवरी 2013 : बीसीके मिश्रा को यूजेवीएनएल के निदेशक परिचालन पद से हटा दिया गया था। जिसके एक दिन बाद ही मिश्रा पुनः अपने रसूख और धन बल के सहारे एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर के पद पर बहाल कर दिए गए। यह नियम विरुद्ध है, क्योंकि इनको हटाने के बाद वित्तीय हस्तपुस्तिका खंड दो भाग दो के अनुसार एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर सिविल के पद पर इनका धारणाधिकार समाप्त हो गया था।
24 जुलाई 2014 : बीसीके मिश्रा को एक बार फिर यूजीवीएनएल का निदेशक परिचालन नियुक्त कर दिया गया।
अप्रैल 2017 : बीसीके मिश्रा को उत्तराखण्ड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपीसीएल) में प्रबंध निदेशक के पद पर नियुक्त कर दिया गया। वर्तमान में अभी तक यूपीसीएल के प्रबंधक निदेशक के पद पर कार्यरत हैं। प्रबंधक निदेशक के पद पर भी इनका नियम विरुद्ध चयन किया गया। क्योंकि बीसीके मिश्रा के उपर अभी तक बिजिलेंस जांच चल रही है। इस जांच में अभी तक मिश्रा को दोषमुक्त सिद्ध नहीं किया गया है। यूपीसीएल में प्रबंध निदेशक के विज्ञापन में साफ तौर पर यह शर्त डाली गई थी कि इन्हें विजलेश जांच से दोषमुक्त होने का प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना पड़ेगा। जो कि अभी तक नहीं हो पाया है।
यूपीसीएल में मीटर घोटाला : यूपीसीएल में आते ही बीसीके मिश्रा ने एक घोटाले को अंजाम दे डाला। इसे मीटर घोटाला कहा गया। मई 2018 में यूपीसीएल मुख्यालय ने अपने पत्रांक संख्या 250/यूपीसीएल/सीई/शीवीवी2/18/2017-18(एलएनटी) दिनांक 16-06-2018 के द्वारा दो लाख सिंगल फेस मीटरों के खरीदने का ऑर्डर किया गया। जो कि 662 रुपया प्रति मीटर (जीएसटी अतिरिक्त) के हिसाब से कुल 13 करोड़ 25 लाख 98 हजार रुपये का ऑर्डर किया गया। लेकिन दो महीने बाद ही यूपीसीएल मुख्यालय ने अपने कार्यालय पत्रांक 618/यूपीसीएल/दिनांक 23-7-2018 द्वारा मैसर्स जीनस पावर कंपनी को 795 रुपये प्रति मीटर के हिसाब से 2 लाख 84 हजार सिंगल फेस मीटरों का ऑर्डर कुल 22 करोड़ 57 लाख 80 हजार रुपए का किया जो कि संदेहास्पद है, क्योंकि मात्र दो महीने में ही मीटरों की कीमत 662 से 795 कैसे हो गई। इसी जीनस कंपनी को उत्तर प्रदेश के कानपुर में इलेक्ट्रीसिटी सप्लाई कंपनी (केसको) द्वारा 2 मई 2018 को 600 ़85 रुपया प्रति मीटर के हिसाब से मीटर सप्लाई करने का ऑर्डर दिया गया। उत्तर प्रदेश में ही पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड वाराणसी द्वारा दिनांक 12 फरवरी 2018 को 545 ़76 रुपया प्रति मीटर के हिसाब से मीटर सप्लाई करने का ऑर्डर दिया गया। इससे स्पष्ट है कि यूपीसीएल में मीटर खरीद के नाम पर बड़ा खेल खेला गया तथा अफसरों ने कॉरपोरेशन को हानि पहुंचाते हुए महंगी कीमतों पर मीटर खरीदे हैं। कमीशनखोरी से अपनी जेबें भरने का काम किया।
बात अपनी-अपनी
मेरे संज्ञान में मामला नहीं है। अगर नियम विरुद्ध नियक्ति हुई है तो उसकी जांच कराई जाएगी। बिजली मीटर खरीद घोटाले की भी जांच कराई जाएगी।
उत्पल कुमार, मुख्य सचिव उत्तराखण्ड शासन
मुझे इस मामले की ज्यादा जानकारी नहीं है। मैं इस मामले को दिखवाती हूं। अगर कहीं भी कोई अनियमितता हुई है तो इस पर कार्यवाही की जाएगी।
राधिका झा, ऊर्जा सचिव उत्तराखण्ड शासन
नोट : ‘दि संडे पोस्ट’ ने बीसीके मिश्रा को उनका पक्ष जानने के लिए फोन किया गया। पूरी बात बताने के बाद जब उनसे अपना पक्ष रखने की बात कही गई तो उन्होंने बिना कुछ बताए फोन काट दिया। उसके बाद बार-बार फोन मिलाने पर भी रिसीव नहीं किया।

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