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कुंभ तैयारियों की हकीकत/भाग-नौ

 

कुंभ में कोरोना की गाइड लाइन का कहीं भी पालन नहीं
दूसरे शाही स्नान पर 31 लाख 23 हजार श्रद्धालुओं ने लगाई डुबकी, मगर कोरोना जांच हुई मात्र 28 हजार की
कोरोना पर अंकुश के लिए हाईकोर्ट के निर्देशों का नहीं हो रहा पालन
12 दिनों में संक्रमण के 3561 नए मामले
अखाड़ों के दर्जनों संत कोरोना पाॅजिटिव
संतों से मिले यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव भी कोरोना पाॅजिटिव

कुंभ की अव्यवस्थाओं को ‘दि संडे पोस्ट’ निरंतर उजागर करता आ रहा है। राज्य सरकार और मेला प्रशासन की तैयारियां हर मोर्चे पर लड़खड़ाई हैं। कोरोना के सामने तो मानो सरकार और प्रशासन ने आत्मसमर्पण ही कर दिया। कहीं भी संक्रमण के रोकथाम को लेकर कोई तैयारी नजर नहीं आई। इसी का नतीजा रहा कि कोरोना ने कुंभ को अपनी गिरफ्त में ले लिया। आम श्रद्धालु तो भगवान भरोसे रहे, लेकिन जिन साधुओं को भगवान का करीबी माना जाता है, वे भी कोरोना की चपेट में आए। कुंभ में अखाड़ों के दर्जनों मुख्य संत संक्रमित हो चुके हैं। बावजूद इसके अखाड़ों में बड़ी संख्या में ठहरे साधुओं ने तीसरे शाही स्नान से पूर्व कोविड़ जांच कराने से ही इनकार कर दिया। दूसरी ओर अपने बयानों को लेकर अक्सर विवादों में घिरे रहने वाले सूबे के मुखिया तीरथ सिंह रावत ने एक बार फिर विवादित बयान दिया है। उन्होंने कहा कि ‘चूंकि कुंभ मेला 16 किलोमीटर के खुले क्षेत्र में आयोजित हो रहा है इसलिए संक्रमण की तुलना तबलीगी जमात से करना सही नहीं है।’

मुख्यमंत्री का बयान उस समय आया है जब अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि सहित जूना और निरंजनी अखाड़े के दर्जनों संत संक्रमण का शिकार हो चुके हैं। मेला क्षेत्र में आकर्षण का केंद्र बने रुद्राक्ष बाबा भी संक्रमित हैं। बताते चलें कि निरंजनी अखाड़े से जुड़े हरियाणा निवासी रुद्राक्ष बाबा ने निरंजनी अखाड़े के सामने की ओर गंगा घाट पर कपड़ा धोना जमाया हुआ था जहां प्रतिदिन सैकड़ों श्रद्धालुओं का आना जाना लगा रहता था। अब रुद्राक्ष बाबा के संक्रमित पाए जाने के पश्चात उनसे मिलने- जुलने वाले श्रद्धालुओं में भी संक्रमण का खतरा बढ़ गया है। यही नहीं 13 अप्रैल को हरिद्वार में संक्रमितों की संख्या 657 पहुंच गई जिसके चलते महाकुंभ में कोरोना संक्रमण फैलने की आशंका बढ़ गई है। सोमवती अमावस्या को दूसरे शाही स्नान पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने पर मेला पुलिस-प्रशासन ने भी कोविड के दिशा निर्देशों (एसओपी) के पालन कराए जाने से हाथ खींच लिए हैं। मेला प्रशासन के अनुसार स्नान के लिए बाहरी राज्यों से श्रद्धालुओं का रैला उमड़ा है, लेकिन कोविड 19 के संक्रमण को रोकने के लिए केंद्र सरकार द्वारा जारी एसओपी का पालन पूरे मेला क्षेत्र में कहीं होता नजर नहीं आया। ‘दो गज की दूरी मास्क है जरूरी’ के स्लोगन सरकारी होर्डिंग और मेला कंट्रोल रूम की उद्घोषणा तक सिमटकर रह गए हैं। शाही स्नान वाले दिन मेला क्षेत्र में श्रद्धालु बिना मास्क लगाए आवाजाही करते नजर आए। घाटों और मेला क्षेत्र में एसओपी की धज्जियां उड़ रही हैं। इसी बीच सबसे बड़े संन्यासी अखाड़े श्री पंचदशनाम जूना अखाड़ा और पंचायती अखाड़ा श्री निरंजनी के कई संत कोविड संक्रमित मिले हैं।

इससे अखाड़ों में अब संक्रमण के फैलने की आशंका बढ़ गई है। स्वास्थ्य विभाग ने संक्रमित संतों के संपर्क में आए सभी संतों का चिन्हीकरण शुरू कर दिया है। सभी संतों को आइसोलेट होने की सलाह के साथ कोविड जांच कराने के लिए कहा गया है। लेकिन संत अपनी जांच कराने से डर रहे हैं। संतों ने कहा कि 14 अप्रैल तक हम अपनी जांच नही कराएंगे। अब तक जूना अखाड़े के एक दर्जन संत संक्रमित पाए गए हंै तो वहीं दूसरी ओर निरंजनी अखाड़े के भी आधा दर्जन से अधिक संत कोरोना पाॅजीटिव पाए जाने से मेला क्षेत्र में हड़कंप की स्थिति है।बड़ी बात यह है कि संक्रमण के चलते अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष और महामंत्री दूसरा शाही स्नान नहीं कर सके। कुंभ जैसे बड़े आयोजन के दौरान होने वाले शाही स्नान के साथ ही कोविड का खतरा भी बढ़ रहा है। महंत नरेंद्र गिरी की रिपोर्ट पाॅजीटिव आने से पहले उनसे मेला अधिकारी दीपक रावत और मेला एसएसपी मेला जन्मेजय खंडूड़ी असपताल में उनका हाल चाल पूछने के लिए मिले थे, यही नहीं मेले से जुड़े अधिकारियों के पश्चात उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भी कुंभ नगरी पहुंचकर महंत नरेन्द्र गिरी से मुलाकात की थी। अब अखिलेश यादव के भी कोरोना पाॅजिटिव होने पर सवाल उठ रहा है कि मेला क्षेत्र में आखिर संक्रमण कितने बड़े पैमाने पर फैल चुका है शायद ही इसका अंदाजा लगाना मुश्किल हो? इससे पूर्व कुंभ नगरी पहुंचे लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, नए मुखिया तीरथ सिंह रावत सहित नगर निगम में तैनात कनिष्ठ अधिकारी भी संक्रमण का शिकार हो चुके हैं।

 

अब ऐसे में ये सवाल भी सामने आकर खड़ा हो रहा है कि शाही स्नान से पहले 10 दिन के भीतर महंत नरेंद्र गिरी के सम्पर्क में आए सभी संतों, अधिकारियांे और लोगों को आइसोलेट किया जाएगा या नहीं? जो निकट भविष्य में होता नजर नहीं आ रहा है, क्योंकि मेला प्रशासन और राज्य सरकार का पूरा जोर संक्रमण फैलने से रोकने पर नहीं शाही स्नान संपन्न कराने को लेकर बना हुआ है जिसके चलते कुंभ नगरी में कोरोना की रफ्तार दिन-प्रतिदिन तेज होती नजर आ रही है। पिछले एक सप्ताह की ही बात करें तो सरकारी कुंभ 1 अप्रैल से दूसरे शाही स्नान तक ही संक्रमण के तमाम रिकाॅर्ड ध्वस्त हो गए हैं। जहां पिछले सप्ताह कुंभ नगरी में 2771 संक्रमण के मामले सामने आए तो वहीं दूसरी ओर 1 अप्रैल से अभी तक की यह संख्या काफी भयावह नजर आ रही है। बीते 12 दिनों में 3561 संक्रमण के नए मामले कुंभ नगरी में काफी डरावनी तस्वीर पेश करने को काफी हैं। यह हाल तब है जब हाईकोर्ट कोविड की रोकथाम को लेकर मेले के दौरान काफी सख्त रवैया अपनाते हुए प्रतिदिन 50,000 टेस्ट किए जाने का आदेश जारी कर चुका है, परंतु हाई कोर्ट के आदेश का पालन मेला क्षेत्र में होता नजर नहीं आ रहा है। प्रमुख अखाड़ों के मुख्य संतों के कोरोना संक्रमित पाए जाने के बावजूद दूसरे शाही स्नान पर हर की पैड़ी ब्रह्मकुंड पर शायद ही कोई संत सोशल डिस्टेंस और मास्क का उपयोग करता नजर आया हो। कोरोना की भयावह स्थिति सामने आने के बावजूद तीसरे शाही स्नान के दौरान भी मेला प्रशासन केंद्र सरकार द्वारा जारी गाइड लाइन का पालन कराने को लेकर कहीं भी गंभीर नजर नहीं आया।

यही नहीं मेला आईजी द्वारा अत्यंत ही हास्यास्पद तरीके से मेला प्रशासन की नाकामी को छिपाते हुए बयान जारी किया गया कि अगर मेला क्षेत्र में श्रद्धालुओं अथवा संतांे को रोककर कोविड टेस्ट कराया गया तो भगदड़ होने की आशंका है जिसके चलते बिना कोविड टेस्ट कराए श्रद्धालुओं को गंगा स्नान करने दिया जा रहा है। जिसका परिणाम पिछले 12 दिनों में 3000 से अधिक संक्रमित कोरना विस्फोट के तौर पर सामने आ चुका है। कोरोना महामारी के बीच अब हरिद्वार में कुंभ का तीसरा शाही स्नान सम्पन्न हो चुका है। इस दौरान कोविड नियमों का जमकर उलंघन होता दिखाई दिया। भारी भीड़ के बावजूद न सोशल डिस्टेंसिंग का पालन हुआ और न ही कोई मास्क लगाए नजर आया। मेला प्रशासन के अनुसार महाकुंभ के दूसरे शाही स्नान के अवसर पर 31 लाख 23 हजार श्रद्धालुओं ने सोमवती अमावस्या पर गंगा में डुबकी लगाई। लेकिन टेस्टिंग मात्र 28 हजार की ही होना पूरी तैयारियों पर सवालिया निशान लगाता है? तीसरे शाही स्नान पर साढ़े 13 लाख से ज्यादा लोगों ने डुबकी लगाई।

अव्यवस्थाओं को ‘दि संडे पोस्ट’ निरंतर उजागर  करता आ रहा है। राज्य सरकार और मेला प्रशासन की तैयारियां हर मोर्चे पर लड़खड़ाई हंै। कोरोना के सामने तो मानो सरकार और प्रशासन ने आत्मसमर्पण ही कर दिया। कहीं भी संक्रमण के रोकथाम को लेकर कोई तैयारी नजर नहीं आई। इसी का नतीजा रहा कि कोरोना ने कुंभ को अपनी गिरफ्त में ले लिया। आम श्रद्धालु तो भगवान भरोसे रहे, लेकिन जिन साधुओं को भगवान का करीबी माना जाता है, वे भी कोरोना की चपेट में आए। कुंभ में अखाड़ों के दर्जनों मुख्य संत संक्रमित हो चुके हैं। बावजूद इसके अखाड़ों में बड़ी संख्या में ठहरे साधुओं ने तीसरे शाही स्नान से पूर्व कोविड़ जांच कराने से ही इनकार कर दिया। दूसरी ओर अपने बयानों को लेकर अक्सर विवादों में घिरे रहने वाले सूबे के मुखिया तीरथ सिंह रावत ने एक बार फिर विवादित बयान दिया है। उन्होंने कहा कि ‘चूंकि कुंभ मेला 16 किलोमीटर के खुले क्षेत्र में आयोजित हो रहा है इसलिए संक्रमण की तुलना तबलीगी जमात से करना सही नहीं है।’

मुख्यमंत्री का बयान उस समय आया है जब अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि सहित जूना और निरंजनी अखाड़े के दर्जनों संत संक्रमण का शिकार हो चुके हैं। मेला क्षेत्र में आकर्षण का केंद्र बने रुद्राक्ष बाबा भी संक्रमित हैं। बताते चलें कि निरंजनी अखाड़े से जुड़े हरियाणा निवासी रुद्राक्ष बाबा ने निरंजनी अखाड़े के सामने की ओर गंगा घाट पर कपड़ा धोना जमाया हुआ था जहां प्रतिदिन सैकड़ों श्रद्धालुओं का आना जाना लगा रहता था। अब रुद्राक्ष बाबा के संक्रमित पाए जाने के पश्चात उनसे मिलने- जुलने वाले श्रद्धालुओं में भी संक्रमण का खतरा बढ़ गया है। यही नहीं 13 अप्रैल को हरिद्वार में संक्रमितों की संख्या 657 पहुंच गई जिसके चलते महाकुंभ में कोरोना संक्रमण फैलने की आशंका बढ़ गई है। सोमवती अमावस्या को दूसरे शाही स्नान पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने पर मेला पुलिस-प्रशासन ने भी कोविड के दिशा निर्देशों (एसओपी) के पालन कराए जाने से हाथ खींच लिए हैं।

मेला प्रशासन के अनुसार स्नान के लिए बाहरी राज्यों से श्रद्धालुओं का रैला उमड़ा है, लेकिन कोविड 19 के संक्रमण को रोकने के लिए केंद्र सरकार द्वारा जारी एसओपी का पालन पूरे मेला क्षेत्र में कहीं होता नजर नहीं आया। ‘दो गज की दूरी मास्क है जरूरी’ के स्लोगन सरकारी होर्डिंग और मेला कंट्रोल रूम की उद्घोषणा तक सिमटकर रह गए हैं। शाही स्नान वाले दिन मेला क्षेत्र में श्रद्धालु बिना मास्क लगाए आवाजाही करते नजर आए। घाटों और मेला क्षेत्र में एसओपी की धज्जियां उड़ रही हैं। इसी बीच सबसे बड़े संन्यासी अखाड़े श्री पंचदशनाम जूना अखाड़ा और पंचायती अखाड़ा श्री निरंजनी के कई संत कोविड संक्रमित मिले हैं। इससे अखाड़ों में अब संक्रमण के फैलने की आशंका बढ़ गई है। स्वास्थ्य विभाग ने संक्रमित संतों के संपर्क में आए सभी संतों का चिन्हीकरण शुरू कर दिया है। सभी संतों को आइसोलेट होने की सलाह के साथ कोविड जांच कराने के लिए कहा गया है। लेकिन संत अपनी जांच कराने से डर रहे हैं। संतों ने कहा कि 14 अप्रैल तक हम अपनी जांच नही कराएंगे। अब तक जूना अखाड़े के एक दर्जन संत संक्रमित पाए गए हंै तो वहीं दूसरी ओर निरंजनी अखाड़े के भी आधा दर्जन से अधिक संत कोरोना पाॅजीटिव पाए जाने से मेला क्षेत्र में हड़कंप की स्थिति है।बड़ी बात यह है कि संक्रमण के चलते अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष और महामंत्री दूसरा शाही स्नान नहीं कर सके।

कुंभ जैसे बड़े आयोजन के दौरान होने वाले शाही स्नान के साथ ही कोविड का खतरा भी बढ़ रहा है। महंत नरेंद्र गिरी की रिपोर्ट पाॅजीटिव आने से पहले उनसे मेला अधिकारी दीपक रावत और मेला एसएसपी मेला जन्मेजय खंडूड़ी असपताल में उनका हाल चाल पूछने के लिए मिले थे, यही नहीं मेले से जुड़े अधिकारियों के पश्चात उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भी कुंभ नगरी पहुंचकर महंत नरेन्द्र गिरी से मुलाकात की थी। अब अखिलेश यादव के भी कोरोना पाॅजिटिव होने पर सवाल उठ रहा है कि मेला क्षेत्र में आखिर संक्रमण कितने बड़े पैमाने पर फैल चुका है शायद ही इसका अंदाजा लगाना मुश्किल हो? इससे पूर्व कुंभ नगरी पहुंचे लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, नए मुखिया तीरथ सिंह रावत सहित नगर निगम में तैनात कनिष्ठ अधिकारी भी संक्रमण का शिकार हो चुके हैं। अब ऐसे में ये सवाल भी सामने आकर खड़ा हो रहा है कि शाही स्नान से पहले 10 दिन के भीतर महंत नरेंद्र गिरी के सम्पर्क में आए सभी संतों, अधिकारियांे और लोगों को आइसोलेट किया जाएगा या नहीं? जो निकट भविष्य में होता नजर नहीं आ रहा है, क्योंकि मेला प्रशासन और राज्य सरकार का पूरा जोर संक्रमण फैलने से रोकने पर नहीं शाही स्नान संपन्न कराने को लेकर बना हुआ है जिसके चलते कुंभ नगरी में कोरोना की रफ्तार दिन-प्रतिदिन तेज होती नजर आ रही है।

पिछले एक सप्ताह की ही बात करें तो सरकारी कुंभ 1 अप्रैल से दूसरे शाही स्नान तक ही संक्रमण के तमाम रिकाॅर्ड ध्वस्त हो गए हैं। जहां पिछले सप्ताह कुंभ नगरी में 2771 संक्रमण के मामले सामने आए तो वहीं दूसरी ओर 1 अप्रैल से अभी तक की यह संख्या काफी भयावह नजर आ रही है। बीते 12 दिनों में 3561 संक्रमण के नए मामले कुंभ नगरी में काफी डरावनी तस्वीर पेश करने को काफी हैं। यह हाल तब है जब हाईकोर्ट कोविड की रोकथाम को लेकर मेले के दौरान काफी सख्त रवैया अपनाते हुए प्रतिदिन 50,000 टेस्ट किए जाने का आदेश जारी कर चुका है, परंतु हाई कोर्ट के आदेश का पालन मेला क्षेत्र में होता नजर नहीं आ रहा है। प्रमुख अखाड़ों के मुख्य संतों के कोरोना संक्रमित पाए जाने के बावजूद दूसरे शाही स्नान पर हर की पैड़ी ब्रह्मकुंड पर शायद ही कोई संत सोशल डिस्टेंस और मास्क का उपयोग करता नजर आया हो। कोरोना की भयावह स्थिति सामने आने के बावजूद तीसरे शाही स्नान के दौरान भी मेला प्रशासन केंद्र सरकार द्वारा जारी गाइड लाइन का पालन कराने को लेकर कहीं भी गंभीर नजर नहीं आया।

यही नहीं मेला आईजी द्वारा अत्यंत ही हास्यास्पद तरीके से मेला प्रशासन की नाकामी को छिपाते हुए बयान जारी किया गया कि अगर मेला क्षेत्र में श्रद्धालुओं अथवा संतो को रोककर कोविड टेस्ट कराया गया तो भगदड़ होने की आशंका है जिसके चलते बिना कोविड टेस्ट कराए श्रद्धालुओं को गंगा स्नान करने दिया जा रहा है। जिसका परिणाम पिछले 12 दिनों में 3000 से अधिक संक्रमित कोरना विस्फोट के तौर पर सामने आ चुका है। कोरोना महामारी के बीच अब हरिद्वार में कुंभ का तीसरा शाही स्नान सम्पन्न हो चुका है। इस दौरान कोविड नियमों का जमकर उलंघन होता दिखाई दिया। भारी भीड़ के बावजूद न सोशल डिस्टेंसिंग का पालन हुआ और न ही कोई मास्क लगाए नजर आया। मेला प्रशासन के अनुसार महाकुंभ के दूसरे शाही स्नान के अवसर पर 31 लाख 23 हजार श्रद्धालुओं ने सोमवती अमावस्या पर गंगा में डुबकी लगाई। लेकिन टेस्टिंग मात्र 28 हजार की ही होना पूरी तैयारियों पर सवालिया निशान लगाता है? तीसरे शाही स्नान पर साढ़े 13 लाख से ज्यादा लोगों ने डुबकी लगाई।

 

बात अपनी-अपनी

भारी भीड़ को देखते हुए यहां घाट पर सामाजिक दूरी जैसे नियम का पालन करा पाना नामुमकिन है। अगर हमने ऐसा कराने की कोशिश की तो भगदड़ जैसी स्थिति पैदा हो सकती है इसलिए हम ऐसा नहीं कर रहे हैं।
संजय गुंजियाल, आईजी कुंभ मेला

टेस्टिंग की जा रही है। हां, यह सही बात है कि शाही स्नान के दौरान न तो सोशल डिस्टेसिंग और न ही मास्क लगा रहे हैं, जहां तक अखाड़ों में संक्रमण की बात है तो मैं खुद अखाड़ों में संतों के पास टेस्टिंग के लिए टीम लेकर गया था, लेकिन संतों ने टेस्ट कराने से इंकार कर दिया। अब कल से अखाड़ों में टेस्टिंग पर जोर दिया जाएगा।
डाॅ. अर्जुन सिंह सेंगर, कुंभ मेला स्वास्थ अधिकारी

 

 

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