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Uttarakhand

कोरोना संकट को बढ़ाते सूबे के नौकरशाह

उत्तराखण्ड में नौकरशाही के बेलगाम होने और मनमर्जी के काम करने के आरोप लगते रहे है। खास तौर पर मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र रावत के चहेतो और खास नौकरशाहों पर इस तरह के आरोप कई बार लग चुके है। आज हालत यहां तक पहुंच चुके है कि अपने खास और चहेतो हाई प्रोफाईन व्यक्तियों के लिये ऐ नौकरशाह लाॅकडाउन के नियमो तक को तोड़ने का काम कर रहे हैं जिस से प्रदेश में कोरोना से चल रही लड़ाई पर ही सवाल खड़े हो ने लगे है साथ ही सरकार और शासन की नियत पर भी सवाल खड़े होने लगे है।

दरअसल मामला खासा दिलचस्प है। उत्तर प्रदेश के महाराजगंज के बाहुबली नेता और निदर्लीय विधायक अमन मणी त्रिपाठी को प्रदेश के अपर मुख्य सचिव ओम प्रकाश के द्वारा बदीनाथ केदारनाथ की यात्रा करने के लिये देहरादून जिला प्रशासन को पास जारी करने की अनुमति देने के लिये पत्र लिखते है। हैरत की बात यह हे कि जिला प्रशासन भी उसी दिन अमनमणी त्रिपाठी को यात्रा करने की अनुमति प्रदान कर देता है। जबकि प्रदेश में लाॅकडाउन के चलते बदरीनाथ धाम के कपाट पूरी तरह से बंद है और 15 मई को ही कपाट खोले जायेंगे। इसके अलावा केदारनाथ धाम में कपाट खोले जाने के बावजूद तीर्थयात्रा पर प्रतिबंध लगाया हुआ है। बावजूद इसके अमनमणी त्रिपाठी को शासन और प्रशासन केदारनाथ यात्रा का पास जारी किया जाता है  उनको तीन वाहनो को यात्रा में ले जाने की अनुमति तक प्रदान कर दी जाती है।

इस पूरे मामले में बड़ा दिलचस्प पहलु यह निकाल कर आया है कि अमनमणी त्रिपाठी को अपर मुख्य सचिव ओमप्रकाश के द्वारा देहरादून जिलाधिकारी को लिये गये पत्र, संख्या 66/ नि0स0/ अ0मु0स0 2020 देहरादून दिनाकं 02 मई 2020 मे लिखा गया है कि अमनमणी त्रिपाठी माननीस विधायक उत्तर प्रदेश सरकार एवं उनके दस अन्य सदस्यों को माननीय मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश के स्वर्गीय पिता जी के पितृ कार्य हेतु बद्रीनाथ धाम जाना हेै तथा वहां से केदारनाथ धाम भी जायेंगे।

 

 

इस पत्र में अमनमणी के सभी दस साथियों के नामो का उल्लेख किया गया है साथ ही यात्रा के दिनो का विवरण ओर वाहनो के पंजिकरण नंम्बर तक लिखे

गये है जिनसे 2 मई से 7 मई तक यात्रा करने का विवरण दिया हुआ है। इसी पत्र मे यह उल्लेख किया गया है कि उक्त तिथियो में देहरादून से बद्रीनाथ और केदारनाथ तक आने जाने की यात्रा की अनुमति प्रदान करने की कृपा करें।

दो मई को ही जिला देहरादून प्रशासन के अपर जिलाधिकारी रामजीशरण शर्मा के द्वारा तत्काल की अमनमणी त्रिपाठी के अलावा उनके 8 साथियों को उनके तीन वाहनो के नम्बरो के सहित भारत सरकार के द्वारा जारी की गई गईडलाईन के अनुसार नियमों के तहत अनुमति प्रदान कर दी गई जिसमे ंएक वाहन पर केवल तीन व्यक्तियों के ही यात्रा करने का उल्लेख किया गया है।

जिला देहरादून प्रशासन के द्वारा बद्रीनाथ धाम के कपाट बंद होने और केदारनाथ धाम में यात्रा पर प्रतिबंध होने के बावजूद सहजता से अमनमणी त्रिपाठी को यात्रा की अनुमति प्रदान कर दी गई जबकि जिला प्रशासन अनुमति देने के पत्र को असानी से रदद कर सकता था बावजूद जिला देहरादून प्रशासन भी हाई प्रोफाईल और बाहुबली विधायक को यात्रा की अनुमति प्रदेश कर देता है।

सबसे ज्याद गौर करने वाली बात यह है कि अपर मुख्य सचिव ओमप्रकाश के द्वारा पत्र मे यह लिखा गया है कि अमनमणी त्रिपाठी उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पिता जिनकी कुद समय पूर्व मृत्यु हो चुकी है कि मृतक संस्कार पितृ कर्म के लिये बदरीनाथ यात्रा के लिये अनुमति देने का पत्र लिखते है जबकि अमनम

णी त्रिपाठी का योगी आदित्यनाथ के परिवार से दूर दूर तक कोई नाता नही हैं। मृतक संस्कार ओैर पितृ कर्म मृतक के परिवार के जनो के द्वारा किये जाते है बाहरी व्यक्तियों को इस तरह के काम को धर्म और सामाजिक संगत से सही नही माना जाता। फिर किस आधार पर अपर मुख्य सचिव ओम प्रकाश के द्वार अमनमणी त्रिपाठी को यात्रा की अनुमति दी गई जिसको अक्षरशः जिला देहरादून प्रशासन के द्वारा पालन किया गया।

इसी यात्रा पास को लेकर अमनमणी त्रिपाठी और उनसके साथी जो कि कुछ 12 लेाग थे आसानी से बदरीनाथ यात्रा के लिये निकल पड़ा। बताया जा रहा है कि जहां जहां से अमन मणी त्रिपाठी का काफिला गुजरा वहां वहां जिला देहरादून प्रशासन के द्वारा जारी की गई यात्रा अनुमति औेर अपर मुख्यसचिव ओमप्रकाश क ेद्वार जारी किये गये पत्र के चलते मनमणी त्रिपाठी को रोका ही नही गया। चमोली जिले के कर्णप्रयाग में पहुंचने पर उपजिलाधिकारी के द्वारा अमनमणी त्रिपाठी के काफिले को रोका गया तो अमनमणी त्रिपाठी ने सत्ता की हनक दिखाते हुये प्रशासन के साथ बदससूकी की जिस पर प्रशासन के द्वारा अमनमणी त्रिपाठी को वापिस भेज दिया।

टिहरी जिले के मुनी की रेती थाने में अमनमणी त्रिपाठी को गिरफतार कर के मुदकमा तो दर्ज किया गया लेकिन कुद ही समय के बाद उसको नीजी मुचलके पर छोड़ दिया गया। जबकि यह साफ था कि चाहे यात्रा के लिये जारी पास किस भी आधार या नियमों के खिलाफ जारी किया गया था और उसमें केवल 8 ही व्यक्तियों के यात्र.ा करने की अनुमति दी गई थी जबकि अमनमणी त्रिपाठी के काफिले मे ं12 लेाग शमिल थे। यह पूरी तरह से लाॅकडाउन के नियामों का घोर उल्घन है बावजूद इसके अमनमणी त्रिपाठी को थाने से ही निजी मुचलके पर छोड़ दिया गया।

इस पूरे मामले को लेकर प्रदेश में कई तरह की चर्चाये हो रही है। अब मामले को लेकर जांच किये जाने की बात कही जा रही है। जबकि मामला बहुत ही स्पष्ठ है। इस में उत्तर प्रदेश का शासन औेर प्रशासन भी पूरी तरह से जिम्मेदार है। एक राज्य ये दूसरे राज्य मे ंयात्रा करने पर अनुमति शासन के द्वारा ही जारी की जाती है। अमनमणी त्रिपाठी के उत्तराखण्ड की यात्रा करने के लिये उत्तर प्रदेश का शासन भी जिम्मेदार है जिसके द्वारा अमनमणी त्रिपाठी आसानी से दो वाहनो के द्वारा उत्तराखण्ड की सीमा में प्रेवश कर के देहरादून आने मे ंसफल रहा। जबकि हरिद्वार जिला रेड जोन में है। उत्तराखण्ड शासन भी आसानी से अमनमणी त्रि.पाठी को येागी आदित्यनााि के स्वंर्गीय पिता के पितृ कर्म के लिये बदरीनाथ केदारनाथ जाने के लिये या.त्रा पास दिये जाने के लिये पत्र आसानी से लिख देता है और जिला प्र्रशासन भी आंखे मूंद का यात्रा पास जारी कर देता है।

अब सवाल सरकार, शासन ओैर प्रशासन के अलावा पुलिस विभाग पर भी उठ रहे है। लाॅकडाउन के नियमों मे स्पष्ठ है कि रेड जोन और आरेंज जोन के ग्रीन जोन में आने वाले हर व्यक्ति को 14 दिनो का क्वारंटीन होना जरूरी है। अमनमणी त्रिपाठी उत्तर प्रदेश से उत्तराखण्ड में आने मे सफल रहा और देहरादून से ग्रीन जोन टिहरी, पौड़ी, रूद्र प्रयाग और चमोली जिले में यात्रा करता रहा। मुनी की रेती थाने में उसके खिलाफ मुकदमा भी दर्ज हुआ लेकिन उसे नीजि मुचलके पर ही छोड़ दिया गया जबकि नियमानुसार उसे और उसके सभी सथियों को 14 दिनो के लिये क्वांरटीन होना चाहिये था।

ममला अब बेहद चर्चित हो चुका है। बताया जा रहा है कि इस पूरे मामले को लेकर उत्तर प्रदेश शासन भी मामले की जांच करने की बात कह रहा है। लेकिन उत्तराखण्ड सरकार ओैर शासन इस पर चुप्पी साधे हुये है। अपरमुख्य सचिव ओमप्रकाश के द्वारा यात्रा के लिये अनुमति देने का पत्र होने के चलते देहरादून जिला प्रशासन के अलावा टिहरी ,और चमोली प्रशासन भी चुप्पी साधे हुये है। इस मामले से एक बात ता साफ हो गई कि कोरोना संकट से लड़ने के लिये बनाई गये सभी नियम कानून केवल आम आदमी के लिये ही बनाये गये है हाई प्रोफाईल और सत्ता से नजदीक लोगो के लिये नियमों का पालन किया जाये ऐसा उत्तराखण्ड में नही दिखाई देरहा है कम से कम अमनमणी त्रिपाठी के मामले में तो ऐसा ही दिखाई दे रहा है।

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