Uttarakhand

कांग्रेस को प्रत्याशी का टोटा

प्रकाश पंत के निधन के बाद भाजपा में पिथौरागढ़ से उपचुनाव लड़ने वाले नेताओं की लंबी लाइन है। दूसरी तरफ कांग्रेस को यहां प्रत्याशी ढूंढ़ने के लिए ­मशक्त करनी पड़ेगी। मयूख महर जैसे नेता चुनाव लड़ने की अनिच्छा जाहिर कर चुके हैं

कैबिनेट मंत्री प्रकाश पंत के असामयिक निधन के बाद पिथौरागढ़ विधानसभा सीट खाली हो गई है। जिसके मद्देनजर क्षेत्र में विधानसभा उपचुनाव को लेकर सरगर्मियां शुरू हो गई हैं। भाजपा के कई वरिष्ठ नेता विधानसभा चुनाव लड़ने का मन बनाए हुए हैं। हालांकि सूत्रों के मुताबिक प्रदेश सरकार और भाजपा संगठन की तरफ से प्राथमिकता दिवंगत प्रकाश पंत के परिवार को दी जाएगी। पार्टी पंत परिवार के प्रति सहानुभूति का लाभ उठाने की रणनीति में है। इसके बावजूद पार्टी के कई नेताओं ने टिकट की उम्मीद नहीं छोड़ी है। उनमें टिकट पाने को लेकर रस्साकशी जारी है।

गौरतलब है कि गत 5 जून को उत्तराखण्ड सरकार में कैबिनेट मंत्री और पिथौरागढ़ के विधायक प्रकाश पंत की विदेश के एक अस्पताल में इलाज कराने के दौरान मौत हो गई थी। यह मौत प्रदेशवासियों को गहरा सदमा दे गई। उत्तराखण्ड सरकार ने उनकी मौत पर 3 दिन के राजकीय शोक की घोषणा की थी, जबकि इसके बाद बजट सत्र में प्रकाश पंत को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इसी दौरान प्रदेश के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत द्वारा दिवंगत नेता प्रकाश पंत की पत्नी चंद्रा पंत का नाम विशेष तौर पर लिया गया। मुख्यमंत्री द्वारा चंद्रा पंत को एक मजबूत और सक्रिय सामाजिक महिला होने की बात कही गई थी। इससे लग रहा है कि प्रदेश सरकार दिवंगत प्रकाश पंत की मौत के बाद उनकी पत्नी चंद्रा पंत को पिथौरागढ़ सीट से चुनाव लड़ाने की इच्छुक है। पार्टी प्रकाश पंत के भाई भूपेश पंत को भी चुनाव में उतार सकती है। भूपेश पंत पिथौरागढ़ में ही उस मेडिकल स्टोर को चलाते हैं जिसकी स्थापना प्रकाश पंत ने की थी। प्रकाश पंत की राजनीति की शुरुआत इसी पंत मेडिकल स्टोर से हुई थी।

बताया जाता है कि भूपेश पंत पिथौरागढ़ में जनता की समस्याओं को गौर से सुना करते हैं और उनका निदान भी कराते हैं। ऐसा वह ज्यादातर तब करते थे जब प्रकाश पंत या तो देहरादून में होते थे या प्रदेश में कहीं दूसरी जगह दौरा कर रहे होते थे। भूपेश पंत की दूसरी खासियत यह है कि वह प्रकाश पंत की तरह ही सौम्य और शालीन हैं। हालांकि प्रकाश पंत की तरह भूपेश पंत का सामाजिक दायरा विस्तृत नहीं है। फिर भी पिथौरागढ़ में शायद ही ऐसा कोई व्यक्ति होगा जो भूपेश पंत को नहीं जानता होगा। प्रकाश पंत की विरासत को संभालने के लिए मुख्य तौर पर उनकी पत्नी चंद्रा पंत और भाई भूपेश पंत के नाम की चर्चा है। चर्चा यह भी है कि पत्नी और भाई में से पार्टी किसी एक को आगामी उपचुनाव में टिकट दे सकती है।

पिथौरागढ़ उपचुनाव में पार्टी के प्रवक्ता सुरेश जोशी और कुमाऊं मंडल विकास निगम के अध्यक्ष केदार जोशी की भी दावेदारी है। केदार जोशी की अगर बात करें तो वह फिलहाल राज्य मंत्री का दर्जा पाकर खुश हैं और पार्टी के लिए काम कर रहे हैं। वह अमूमन शांत और गंभीर प्रवृत्ति के आदमी हैं जो शालीनता से पार्टी के लिए काम करते रहे हैं, जबकि पिथौरागढ़ के दूसरे भाजपा के वरिष्ठ नेता सुरेश जोशी पार्टी के प्रवक्ता हैं। सुरेश जोशी पिछले कई बार से पिथौरागढ़ विधानसभा क्षेत्र का चुनाव लड़ने की दावेदारी करते रहे हैं। लेकिन उनकी इस दावेदारी पर प्रकाश पंत की मजबूत पकड़ हर बार भारी पड़ जाती थी। 2017 के विधानसभा चुनाव में जब यह कहा जाने लगा था कि प्रकाश पंत लाल कुआं से चुनाव लड़ेंगे तब सुरेश जोशी का नाम पिथौरागढ़ से में प्राथमिकता में था। लेकिन ऐन वक्त पर प्रकाश पंत ने लाल कुआं की बजाए पिथौरागढ़ से ही चुनाव लड़ना बेहतर समझा था।

कांग्रेस के मजबूत दावेदार मयूख महर के उपचुनाव न लड़ने की घोषणा के बाद यह चर्चा जोरों से चल गई है कि आखिर पार्टी का प्रत्याशी कौन होगा? अभी पिछले दिनों जब पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह और नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश पिथौरागढ़ में दौरा करते हुए पहुंचे तो उपचुनाव को लेकर चर्चा हुई जिसमें पिथौरागढ़ के पूर्व विधायक मयूख महर का नाम प्राथमिकता से सामने आया, क्योंकि पिछली बार थोड़े ही वोटों के अंतराल से मयूख महर पिथौरागढ़ से चुनाव हारे थे। इससे पहले वह दो बार पिथौरागढ़ से विधायक रह चुके हैं। मयूख महर का नाम आना इसलिए भी जरूरी था। लेकिन बताया जाता है कि मयूख महर ने उप चुनाव लड़ने से स्पष्ट मना कर दिया है। इसके पीछे का कारण यह बताया जा रहा है कि प्रकाश पंत की मौत के बाद सहानुभूति लहर चलेगी। जिसमें पंत परिवार का व्यक्ति जीत सकता है। संभवतः मयूख महर के चुनाव लड़ने के बाद प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के पिथौरागढ़ उपचुनाव लड़ने की चर्चा चल रही है। लेकिन इसी चर्चा को हरीश रावत ने यह कहकर विराम दे दिया है कि वह पिथौरागढ़ उपचुनाव में पार्टी प्रत्याशी नहीं बनेंगे। ऐसे में सवाल यह है कि कांग्रेस का पिथौरागढ़ उपचुनाव में प्रत्याशी कौन होगा?

 

बात अपनी-अपनी

इस बार मैं चुनाव नहीं लड़ रहा हूं। मैंने पार्टी के सामने भी अपनी राय स्पष्ट कर दी है। अब नए लोगों को मौका मिलना चाहिए।
मयूख महर, पूर्व विधायक पिथौरागढ़

मेरी व्यक्तिगत राय यह है कि मैं पिथौरागढ़ उपचुनाव में कंडीडेट नहीं हूं। मुझसे इस बाबत आपने पूछा जबकि पार्टी ने तो मुझसे इस संबंध में कोई बात भी नहीं की है।
सुरेश जोशी, प्रवक्ता भाजपा उत्तराखण्ड

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