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Uttarakhand

प्रीतम सिंह,इंदिरा हृदयेश की जोड़ी पर भारी पड़े हरीश रावत

कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और पार्टी की शीर्ष डिसीजन मेकिंग बॉडी कांग्रेस वर्किंग कमेटी के सदस्य उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत एक बार फिर अपने विरोधियों पर भारी पड़े हैं पार्टी ने राज्य नेतृत्व के भारी विरोध को दरकिनार कर हरीश रावत को नैनीताल लोकसभा सीट से कल देर रात अपना प्रत्याशी घोषित कर डाला| गौरतलब है कि प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने हरीश रावत का नाम हरिद्वार लोकसभा सीट के लिए प्रस्तावित किया था | सूत्रों की मानें तो उत्तराखंड कांग्रेस अध्यक्ष प्रीतम सिंह और राज्य विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष डॉ इंदिरा हृदयेश किसी भी सूरते हाल में हरीश रावत को नैनीताल लोकसभा सीट से चुनाव लड़ाने के पक्षधर नहीं थे | उत्तराखंड के लिए कांग्रेस के केंद्रीय प्रभारी अनुग्रह नारायण सिंह संग मिलकर प्रीतम सिंह और इंदिरा हृदयेश ने हरीश रावत की दावेदारी को रोकने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा दिया था |   जानकारों का दावा है कि प्रीतम सिंह और इंदिरा हृदयेश के तेवर तो बगावती हो चले थे दोनों ने हरीश रावत को नैनीताल लोकसभा सीट से टिकट दिए जाने का भारी विरोध करते हुए पार्टी से इस्तीफा तक दिए जाने की बात कह डाली थी | यही कारण है कि उत्तराखंड की पांचों सीटों में पार्टी प्रत्याशियों की घोषणा अंतिम समय में की गई |पौड़ी लोक सभा सीट् से पार्टी के प्रत्याशी बनाए गए मनीष खंडूरी अल्मोड़ा लोकसभा सीट से प्रदीप टम्टा’ हरिद्वार लोकसभा सीट से अमरीश कुमार कट्टर |हरीश रावत समर्थक पिछले दिनों देहरादून में कांग्रेसी अध्यक्ष राहुल गांधी की रैली में पार्टी जॉइन करने वाले भाजपा के दिग्गज नेता मेजर जनरल भुवन चंद खंडूरी के पुत्र मनीष खंडूरी को कांग्रेस में लाने का श्रेय हरीश रावत का है|  यही कारण है पार्टी ज्वाइन करते समय मनीष खंडूरी ने सार्वजनिक रूप से देहरादून की रैली में मंच पर मौजूद हरीश रावत के पैर छुए थे | दरअसल पीतम सिंह और इंदिरा हृदयेश हरीश रावत की दावेदारी को रोक पाने के लिए पूरी तरह अनुग्रह नारायण सिंह पर डिपेंड हो गए थे | इन दोनों नेताओं को भरोसा था कि राज्य प्रभारी होने के नाते अनुग्रह नारायण सिंह केंद्रीय नेतृत्व को इस बाबत समझाने में सफल होंगे | लेकिन हरीश रावत की पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी संग  शनिवार की देर रात हुई बैठक में बाजी हरीश रावत के पाले में डाल दी | जानकारों की माने तो हरीश रावत ने  पार्टी नेतृत्व को प्रदेश के राजनीतिक समीकरणों की जानकारी देते हुए स्पष्ट तौर पर कह दिया था यदि उन्हें लड़ाया जाए तो केवल नैनीताल से अन्यथा वह असम के प्रभारी होने के नाते अपनी ऊर्जा और समता पार्टी को असम में चुनाव दिलाने के लिए लगाना पसंद करेंगे | इतना ही नहीं हरीश रावत ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को प्रमाण सहित यह जानकारी दी कि किस प्रकार प्रदेश का नेतृत्व उन्हें कमजोर करने की नियत से जानबूझकर कांग्रेश के समर्पित  कार्यकर्ताओं को ठिकाने लगा रहा है | हरीश रावत की पार्टी अध्यक्ष से बैठक के बाद उत्तराखंड विधानसभा में पार्टी के 11 विधायकों में से 9 विधायक  दिल्ली पहुंच गए |  इन विधायकों ने एक सुर में हरीश रावत के नेतृत्व में अपनी आस्था जताकर प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम और नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश की रणनीति को विफल करने का काम किया | बहराल अब हरीश रावत के समक्ष ना केवल अपनी सीट जीतने की जिम्मेदारी आन पड़ी है बल्कि तीन अन्य सीटों पर अपने समर्थकों को जिताने का दायित्व उनके कंधों पर आन पड़ा है

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