[gtranslate]
Uttarakhand

‘अतिक्रमणकारियों को ही मुआवजा’

हरिद्वार में नालों पर अतिक्रमण की वजह से जलभराव और जाम की समस्या खड़ी हो जाती है। लेकिन दिलचस्प यह है कि अतिक्रमण करने वाले बड़े राजनेताओं के चहेते होते हैं। लिहाजा उन्हें सरकारी भूमि से हटाने के बजाय आपदा की आड़ में फर्जी तरीके से मुआवजा भी दे दिया जाता है
अ तिक्रमण धर्मनगरी की सबसे बड़ी समस्या मानी जाती है। इसने सड़कों पर जाम और जलभराव जैसी बड़ी समस्याएं भी पैदा की हैं। जो धीरे-धीरे यहां आम हो गई हैं। हालांकि जिलाधिकारी दीपक रावत समय-समय पर खुद दल-बल के साथ निकलकर सड़कों से अतिक्रमण हटाते हैं और अपने अधीनस्थ अधिकारियों को भी इसके लिए निर्देश देते रहते हैं, पर धर्मनगरी में अतिक्रमण की गंभीरता को देखते हुए यह सब नाकाफी सा लगता है। मध्य हरिद्वार में हर बार बारिश के बाद होने वाले जलभराव और उसके बाद लगने वाले भंयकर जाम से हर शहरवासी परिचित है।
जलभराव का सबसे बड़ा कारण बरसात के पानी की सही तरह से निकासी न होना है। जिसका बड़ा कारण बरसाती नालों पर अतिक्रमण है। मध्य हरिद्वार में गोविंदपुरी और नए हरिद्वार के बीच स्थित बरसाती नाले पर दोनों तरफ अतिक्रमण कर पूरी तरह कब्जा कर लिया गया है। उस नाले को सिकोड़ कर रख दिया गया है। नतीजा यहां से पर्याप्त जल की निकासी नहीं हो पाती जिसका खामियाजा पूरे शहरवासी भुगतते हैं, पर हद तो तब हो जाती है जब इन अतिक्रमणकारियों के विरुद्ध कार्यवाही होने के बजाय इन्हें बाढ़ पीड़ित घोषित कर आपदा राहत कोष से मुआवजे का पैसा दिया जाता है। यानी जो जलभराव के लिए जिम्मेदार है उसे ही पीड़ित घोषित कर सहायता के रूप में सरकारी धनराशि दी जाती है। इसकी अधिक जानकारी के लिए हमें नगर निगम द्वारा जारी उन 39 लोगों की सूची भी टटोलनी पड़ी जिन्होंने गोविंदपुरी, नए हरिद्वार में अवैध रूप से कब्जा कर रखे हैं। जिनमें अधिकतर नाले के दोनों तरफ कब्जे हैं। गौर करने वाली बात यह है कि इन सबने 40 से लेकर 100  वर्ग मीटर तक नाले की सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा कर रखा है। नगर निगम मानता है कि इस नाले के आस-पास कुल 24 हजार वर्ग मीटर से भी ज्यादा सरकारी भूमि पर लोगों का कब्जा है। कुल 39 लोगों को चिÐत कर उनके नाम की सूची जारी की गई। भूमि की पैमाइश भी की जाती है, पर आश्चर्य की सभी सीमाएं तब टूट जाती हैं जब चिÐत कब्जाधारियों को ही आपदा राहत कोष से बाढ़ पीड़ित घोषित कर उन्हें मुआवजा दिया जाता है।
नगर निगम द्वारा जारी 39 कब्जाधारियों में से करीब डेढ़ दर्जन लोग आपदा राहत कोष की बंदरबांट में धनराशि प्राप्त कर चुके हैं।  थोड़ी सी पड़ताल के बाद इसका कारण भी हमें समझ आ गया। दरअसल, इस क्षेत्र में प्रदेश के बड़े नेताओं का वोट बैंक है। यही वजह है कि कब्जाधारियों से सरकारी भूमि छुड़वाने के बजाय उन्हें प्रोत्साहित करने के लिए पीड़ित घोषित कर मुआवजा भी दिया जाता है। इनमें से कई लोग ऐसे भी हैं जिनके घरों को बाढ़ के पानी ने छुआ तक नहीं फिर भी उन्हें फर्जी तरीके से मुआवजा दिलाया गया। भारतीय समाज सुधार संस्था के जिला अध्यक्ष मनोज धीमान और नया हरिद्वार के बाढ़ प्रभावित 58 लोगों ने जिलाधिकारी को दिए गए शिकायती पत्र में बताया कि प्रशासनिक अधिकारियों की मिलीभगत से एक तो ऐसे लोगों को मुआवजा दिया गया जो पात्र नहीं दूसरे ऐसे लोगों को मुआवजा दिया गया जो खुद अतिक्रमणकारी हैं, जबकि वास्तविकता में जो बाढ़ पीड़ित हैं उन्हें मुआवजे के नाम पर प्रशासनिक अधिकारियों ने ठेंगा दिखा दिया।
किसी भी तरह का अतिक्रमण धर्मनगरी में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अगर ऐसा मामला है तो कांवड़ मेले के बाद इन अतिक्रमणों को मुक्त कर दिया जाएगा। जहां तक मुआवजे की बात है इसकी जांच कराई जाएगी। आपदा के दौरान क्षतिपूर्ति का पैसा सबके लिए होता है। चाहे वह अतिक्रमणकारी हो या न हो।
दीपक रावत, जिलाधिकारी हरिद्वार

You may also like

MERA DDDD DDD DD