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Uttarakhand

बहुगुणा पुत्र की राह पर संकट के बादल

सितारगंज सीट को राज्य की एक वीआईपी सीट इस लिहाज से कहा जा सकता है क्योंकि यहां के सीटिंग विधायक पूर्व सीएम विजय बहुगुणा के सुपुत्र हैं। वहीं विजय बहुगुणा जिन्हें 2013 में आई केदारनाथ आपदा के बाद सत्ता से हाथ धोना पड़ा था। नाराज बहुगुणा सत्तामोह में विचारधारा ही बदल बैठे। वे अब भाजपा में हैं। इस बार सीट निकाल पाना उनके बेटे सौरभ बहुगुणा के लिए खासा कठिन नजर आ रहा है। न केवल यहां का किसान मतदाता बल्कि बहुतायत संख्या में मौजूद मुस्लिम और बंगाली मतदाता के साथ अनुसूचित जाति के लोग अपने विधायक से खासा नाराज है। कांग्रेस इस सीट पर मजबूत तो है लेकिन आम आदमी पार्टी की बढ़ती सक्रियता उसके लिए खतरे की घंटी समान है

वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव से पहले ही सितारगंज विधानसभा सीट नानकमत्ता से अलग अस्तित्व में आ चुके थी। 2012 से पहले सितारगंज और नानकमत्ता दोनों एक ही विधानसभा सीट हुआ करती थी। तब यहां थारु और बंगाली मतदाताओं का वर्चस्व रहता था। थारू वोट जहां नानकमत्ता में ज्यादा थे तो सितारगंज बंगाली बहुल था। लेकिन सितारगंज सीट बनते ही यह बंगाली बाहुल्य सीट बन गई। सितारगंज विधानसभा के शक्ति फार्म में बंगाली वोट सबसे ज्यादा है। इसी शक्ति फार्म पर ज्यादातर नेताओं की नजर रहती है। शक्ति फार्म में बंगाली वोट 34000 हैं। 2017 के विधानसभा चुनाव की बात करें तो भाजपा के सौरव बहुगुणा ने बंगाली समुदाय को अपने पक्ष में किया। तब सितारगंज के विधायक एक बंगाली किरण मंडल हुआ करते थे। वह इस्तीफा देकर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा के समर्थन में आ गए थे। हालांकि इसके बाद बंगाली समुदाय के लोगों का अपने समुदाय के नेताओं पर विश्वास कम हो गया। शायद यही वजह रही कि 2017 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का बंगाली दांव नहीं चल पाया।

2022 में एक बार फिर सितारगंज में शक्ति फार्म राजनीति का शक्ति केंद्र बनेगा। यहां से आम आदमी पार्टी अजय जायसवाल को चुनाव लड़ाने का मन बना चुकी है। अजय जायसवाल पूर्व में शक्ति फार्म नगर पंचायत के चेयरमैन रह चुके हैं तो वही बहुजन समाजवादी पार्टी ने भी यही के एक नेता रविंद्र को टिकट दे दिया है। रविंद्र की पत्नी अनीमा जिला पंचायत सदस्य हैं। जबकि कांग्रेस से टिकट पाने को एक बार फिर बंगाली समुदाय की मालती विश्वास जोर आजमाइश में लगी हुई हैं। मालती विश्वास 2017 में यहां से विधानसभा का कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ी थीं लेकिन भाजपा के सौरभ बहुगुणा से हार गई थी। 2017 के विधानसभा चुनाव में सौरभ बहुगुणा को 50597 वोट मिले थे। जबकि कांग्रेस की मालती विश्वास दूसरे नंबर पर रही। उन्हें मात्र 22147 वोट मिले थे। यहां से बसपा के टिकट पर नव तेजपाल सिंह चुनाव लड़े। जिन्होंने 11892 वोट लेकर सबको चौंका दिया था।

उत्तराखण्ड बनने के बाद से अब तक हुए चार विधानसभा चुनावों में कांग्रेस सितारगंज सीट पर सिर्फ एक बार चुनाव जीती। 2002 से लेकर 2012 तक दस साल बहुजन समाज पार्टी के टिकट पर यहां से नारायण पाल विधायक रहे। 2012 में भाजपा ने बंगाली कार्ड खेलते हुए किरन चंद्र मंडल को टिकट दे दिया और किरन मंडल यहां से विधायक बने। कांग्रेस की सरकार आई तो किरन ने मुख्यमंत्री के लिए अपनी सीट छोड़ दी। फिर उपचुनाव जीतकर कांग्रेस के विजय बहुगुणा यहां से विधायक बने। 2017 का चुनाव आने से पहले पूर्व सीएम विजय बहुगुणा भाजपा में शामिल हो गए। उनके बेटे सौरभ बहुगुणा भाजपा के टिकट पर यहां से चुनाव लड़कर जीते।

कांग्रेस नेता मालती विश्वास सितारगंज से जिला पंचायत सदस्य रह चुकी हैं। उनके पति श्याम विश्वास का बीड़ी का बड़ा कारोबार है। श्याम बीड़ी वाले के नाम से वह प्रसिद्ध है। मालती विश्वास की बात करें तो वह 2017 का चुनाव लड़ने के बाद फिर कभी जनता के बीच दिखाई नहीं दीं। पिछले दिनों जब कांग्रेस ने परिवर्तन यात्रा निकाली तो तब मालती विश्वास अपने समर्थक लोगों के साथ इस यात्रा में नजर अवश्य आईं। कांग्रेस के दूसरे दावेदार नव तेजपाल सिंह हैं। नव तेजपाल सिंह बसपा से कांग्रेस में आए हैं। उनका किसान समुदाय में खासा दबदबा है। वह पिछले साल से हो रहे किसान आंदोलन को तराई में धार दिए हुए हैं। नव तेजपाल अक्सर किसानों के बीच में गाजीपुर बॉर्डर पर मिलते हैं। पिछले दिनों कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा में अधिकतर किसान वर्ग दिखाई दिया था। इस किसान वर्ग को परिवर्तन यात्रा में भागीदार बनाने के लिए नव तेजपाल ने काफी मेहनत की थी। वैसे भी तराई में किसान भाजपा से नाराज है। खासकर सिख समुदाय। सिख समुदाय के द्वारा सितारगंज के कई गांवों में भाजपा की एंट्री बैन करने के बोर्ड भी लगाए जा चुके हैं। मालती विश्वास और नव तेजपाल के साथ ही कांग्रेस से नारायण पाल भी टिकट के दावेदार हैं। दो बार वह सितारगंज के विधायक रह चुके हैं। लेकिन तब स्थिति कुछ और थी। एक तो यह है कि तब सितारगंज और नानकमत्ता दोनों एक ही विधानसभा सीट हुआ करती थी दूसरी है कि तब यह विधानसभा सीट अनुसूचित जाति और जनजाति के लिए आरक्षित थी। इसके बाद सामान्य सीट होने पर नारायण पाल के लिए सितारगंज की डगर मुश्किल भरी हो गई। हालांकि पिछली बार भी वह कांग्रेस से टिकट की लाइन में थे। लेकिन ऐन वक्त पर कांग्रेस ने बंगाली वोटों के आधिपत्य के चलते मालती विश्वास को टिकट दे दिया था। इसके अलावा राज्य आंदोलनकारी फकीर सिंह कन्याल भी टिकट पाने की चाह लिए हुए हैं। जबकि मंजू तिवारी भी पोस्टर और बैनर में कांग्रेस प्रत्याशी की दावेदारी करती दिखाई दे रही है। सितारगंज से तीन बार के चेयरमैन रहें और अल्पसंख्यक आयोग के उपाध्यक्ष रहे हाजी अनवर अहमद भी चुनाव लड़ने वालों की लिस्ट में शामिल हैं। 2012 में हाजी अनवर निर्दलीय विधानसभा का चुनाव लड़े थे। तब अनवर को 8000 वोट मिले थे।

ऊधमसिंह नगर के पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष सुरेश गंगवार भी टिकट के दावेदारों में शामिल हैं। गंगवार परिवार पूर्व कैबिनेट मंत्री यशपाल आर्य के खासम खास बताए जाते हैं। यशपाल आर्य 2017 के विधानसभा चुनाव में जब कांग्रेस छोड़ भाजपा में गए गंगवार परिवार की श्रद्धा भी कांग्रेस से हटकर बीजेपी में हो गई। हालांकि गंगवार परिवार मन से भाजपा को स्वीकार नहीं कर पाया। इसका उदाहरण है सितारगंज विधानसभा क्षेत्र। जहां के भाजपा विधायक सौरभ बहुगुणा और गंगवार परिवार के वारिस सुरेश गंगवार में 36 का आंकड़ा रहा। पिछले 5 सालों के दौरान बहुगुणा और गंगवार कभी भी एक दूसरे को सहयोग करते नजर नहीं आए। फिलहाल, एक बार फिर गंगवार परिवार राजनीति के दोराहे पर खड़ा दिखाई दे रहा है। जिसमें एक तरफ भाजपा तो दूसरी तरफ कांग्रेस है। हालांकि अभी वह यशपाल आर्य के साथ भाजपा से कांग्रेस में विधिवत नहीं आ सके हैं। ऐसे में गंगवार परिवार और खासकर सुरेश गंगवार के टिकट पर स्पष्ट नहीं कहा जा सकता है कि वह कांग्रेस से दावेदारी करेंगे या भाजपा से। वर्तमान परिस्थितियों को देखें तो सितारगंज में गंगवार परिवार ‘वेट एंड वॉच’ की स्थिति में है। गंगवार परिवार सितारगंज से विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए कई सालों से प्रयासरत है। 2012 में सुरेश गंगवार यहां से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़े थे। तब यहां से भाजपा के किरण मंडल चुनाव जीते थे।
सितारगंज में भाजपा के विधायक सौरभ बहुगुणा के समर्थक उन्हें विकास पुरुष की संज्ञा देते हैं। पत्रकार एवं सभासद रवि रस्तोगी के अनुसार शक्ति फार्म और सिरसा क्षेत्र में बहुप्रतीक्षित रोड का काम शुरू हो गया है। इसके अलावा सुखी नदी पर भी पुल बनकर तैयार हो गए हैं। इसी के साथ ही डिग्री कॉलेज में बीकॉम तथा बीएससी की कक्षाएं शुरू हो गई है।

यह डिग्री कॉलेज 2012 में सौरभ बहुगुणा के पिता तत्कालीन मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने बनवाया था। रस्तोगी के अनुसार विधायक सौरभ बहुगुणा के द्वारा शक्ति फार्म में सड़कों का जाल बिछा दिया गया है। इसी के साथ सितारगंज का सौंदर्यीकरण अंतिम चरण में है। रवि रस्तोगी बताते हैं कि पिछले 35 साल से टीचर कॉलोनी वाला मामला अटका हुआ था। इस कॉलोनी में रहने वाले शिक्षकों के वेतन से कॉलोनी के टूट फूट आदि की मरम्मत का पैसा भी कटता था। लेकिन उसके बावजूद भी कॉलोनी में मरम्मत कार्य नहीं कराए गए थे। विधायक सौरभ बहुगुणा ने नारायण दत्त तिवारी के समय में बनी टीचर कॉलोनी के मरम्मत तथा सड़कों आदि के कार्य के लिए 35 लाख रुपए स्वीकृत कर दिया गया है। वहीं दूसरी तरफ सितारगंज के चेयरमैन हरीश दुबे विधायक सौरभ बहुगुणा के विकास कार्य को नकारते हैं। वह कहते हैं कि जो लोग विधायक को विकास पुरुष कह रहे हैं उन्हें विकास की परिभाषा ही नहीं पता है। अगर 5-10 रोड बना दी गई तो यह कोई विकास थोड़े ही होता है? अकेले ही मैंने 136 सड़कों का निर्माण अपने ढाई साल के कार्यकाल में किया है। चेयरमैन हरीश दुबे के अनुसार सितारगंज में रोडवेज डिपो बनाया जाना था। लेकिन उसे बस अड्डा बना दिया गया। वह भी ड्राइंग बदलकर।

पूर्व में जब सितारगंज की एसडीएम निर्मला बिष्ट थी, तब बस अड्डे का ड्राइंग बनाया गया था। जिसका मुख्य द्वार बाईपास की तरफ खुलता था। लेकिन जो अब बस अड्डा बनाया गया है उसका द्वार दूसरी तरफ कर दिया गया है। यह इसलिए किया गया है कि इससे पूंजीपतियों का कब्जा बरकरार रह सके। जबकि गरीबों को उजाड़ दिया गया है। गरीबों को अकेले बस अड्डे के निर्माण मामले में ही नहीं उजाड़ा गया है, बल्कि सौंदर्यीकरण के नाम पर भी उनके साथ छलावा किया गया है। उनके खोखे पटरी आदि थे। जिससे वह परिवार पालते थे। उन्हें उजाड़ दिया गया। पिछले 10 साल से शहर में सौंदर्यीकरण हो रहा है। यह साढ़े सात करोड़ का प्रोजेक्ट था। जिसमें 10 साल बीतने को आए हैं लेकिन अभी भी सौंदर्यीकरण पूरा नहीं हुआ। दो ठेकेदार भाग गए तो अब तीसरा ठेकेदार काम कर रहा है। सौंदर्यीकरण के लिए रोड चौडे़ अवश्य हुए, लेकिन सड़कों पर लगे बिजली के खंभे पीछे नहीं हटाए गए। बिजली के खंभे अभी भी वही खड़े हैं जहां पहले थे। इन खंभों में टकराकर बहुत से लोग घायल हो गए हैं और कई लोग अपनी जान गंवा बैठे हैं। अब जब चुनाव आने को है तब पुरानी नालियों पर ही नालियां बना दी गई। जब उन नालियों पर ही नालियां बनानी थी तो उन्हें पहले तोड़ा क्यों गया? यह सब धन की बर्बादी नहीं तो और क्या है? इसी के साथ ही चेयरमैन हरीश दुबे कहते हैं कि सितारगंज में विकास का अनोखा उदाहरण नालियों के ऊपर देखने को मिलता है। जहां उनके ऊपर लेंटर डाल कर टाइल्स लगा दी गई है। अगर इन नालियों को साफ करेंगे तो पहले लेंटर तोड़ना पड़ेगा और जो टाइल्स लगाई गई है वह भी तोड़ने के बाद। इसी तरह नालिया साफ हो सकेंगी। इस तरह नालियों के ऊपर सौंदर्यीकरण करा कर भाजपा विधायक कोरी वाह वाही लूट रहे हैं।

सितारगंज शहर में जलभराव सबसे बड़ी समस्या है। इसके साथ ही यहां के गांवों में ‘रोड नहीं तो वोट नहीं’ के नारों के साथ ही धरना प्रदर्शन होते रहे हैं। गोठा गांव तथा लोका गांवों के लोग भूमि अधिकार को लेकर धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। इस गांव के मास्टर सत्येंद्र कुमार की गिरफ्तारी को लेकर बहुगुणा विपक्ष के निशाने पर हैें। इसी के साथ विधायक सौरभ बहुगुणा के लिए किसान आंदोलन भी मिशन 2022 के लिए अवरोधक बना हुआ है। किसान क्षेत्र बाहुल्य होने के कारण यहां के किसानों में खासकर सिख समुदाय के लोगों में विधायक बहुगुणा के खिलाफ रोष व्याप्त है। हालांकि रोष को कम करने के उद्देश्य से बहुगुणा ने अपने साथ सिख समुदाय के कई नेताओं को लगाने का प्रयास जरूर किया। इसका नतीजा लेकिन ऐसे नेताओं के खिलाफ गया है। इन नेताओं के पोस्टर इत्यादि पर कालिख पोछ दी गई है।

मेरी राजनीति की शुरुआत 1995 में खटीमा विश्वविद्यालय से हुई थी। 2017 में मुझे बहुजन समाज पार्टी से सितारगंज विधानसभा का टिकट मिला। तब मुझे जनता का अपार प्यार मिला और 11982 वोट मिले। मेरे पिताजी स्व. अमरजीत सिंह महार तराई में किसानों के प्रसिद्ध नेता रहे हैं। 2007 में उन्हें कृषि उत्पादन मंडी समिति का निर्विरोध चेयरमैन बनाया गया था। उनके ही आशीर्वाद से आज में किसानों की समस्याओं को लेकर आवाज बुलंद कर रहा हूं। हमारी धर्मपत्नी नवरीत कौर दक्षिणी किसान सेवा सहकारी समिति के चेयरमैन रहीं तथा माताजी निर्विरोध क्षेत्र पंचायत सदस्य रही हैं। मेरी आस्था कांग्रेस में है। मुझे उम्मीद है कि मुझे पार्टी 2022 के विधानसभा चुनाव में अपना कैंडिडेट बनाएगी।
नव तेजपाल सिंह, प्रदेश सचिव उत्तराखण्ड कांग्रेस

वर्ष 1992 में मैं इंटर क्लास का छात्र था। तब से मैंने जनसेवा शुरू कर दी थी। तब हम सभी छात्रों ने मिलकर ‘युवा शक्ति क्लब’ बनाया था। यह क्ल्ब आज भी शक्ति फार्म की समस्याओं के लिए संघर्ष कर रहा है। वर्ष 2003 में मुझे मेडिकल एसोसिएशन का अध्यक्ष बनाया गया। इसके बाद वर्ष 2005 में मैं व्यापार मंडल शक्ति फार्म का अध्यक्ष बना। 2008 में शक्ति फार्म की जनता के मिले प्यार ने मुझे नगरपालिका का चेयरमैन बनने का मौका दिया। तब हमने नगरपालिका के अंतर्गत कई विकास कार्य कराए थे। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि शक्ति फार्म में रास्ते चलने लायक नहीं थे। हमने वहां खडंजा आदि लगाकर लोगों के लिए रास्ते बनाए। जब मैं नगरपालिका का चेयरमैन बना तो पहले दिन ही मैंने पूर्व चेयरमैन की डेस्क बोर्ड में कुछ कागज पड़े पाए। जब उनको देखा गया तो वह पेंशन के फार्म मिले। कुल 800 पेंशन बनवाने वाले लोगों के फार्म थे। जिनकी जांच करवाई गई तो पता चला कि 800 फार्म भरने वाले लोगों में 700 इस दुनिया से रुखसत हो चुके हैं। इसके बाद हमने पेंशन बनवाने के लिए अभियान चलाया। अंदाजा लगा सकते हैं कि हमारे शक्ति फार्म का चेयरमैन बनने से पहले शक्ति फार्म में सिर्फ 100 लोगों की पेंशन थी। लेकिन आज शत-प्रतिशत लोगों की पेंशन बनवा दी गई है। इसी तरह हमने शक्ति फार्म के अलावा सितारगंज के करीब 3000 लोगों के निःशुल्क ड्राइविंग लाइसेंस बनवाए हैं। जनता का कोई भी काम हो हम उस काम को कराने जनता के द्वार जाते हैं। 2010 में जब सितारगंज शक्ति फार्म में बाढ़ आई थी तब हमने बकायदा एक महीने तक कैंप चलाया था। जहां लोगों को खाना, दाना, दवा सब दी गई। इसी तरह कोरोना काल में भी हमने घर-घर कच्चा राशन पहुंचाया। अब आम आदमी पार्टी के टिकट पर मैं जनता के बीच जा रहा हूं। आम आदमी पार्टी उत्तराखण्ड में दिल्ली मॉडल को लेकर काम कर रही है। इस बार उत्तराखण्ड में हमारी पार्टी को बड़ी सफलता मिलेगी।
अजय जायसवाल, प्रत्याशी आम आदमी पार्टी सितारगंज

लोका और गोठा गांव के लोग वर्षों से भूमिधरी अधिकार के लिए मांग कर रहे हैं। इस मुद्दे को सांसद अजय भट्ट ने संसद में भी उठाया है। यही नहीं बल्कि इस मामले पर 2006 में सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन भी आई है। जिसके अनुसार ऐसे गांवों को रेवन्यू घोषित करने पर रोक लगाई गई। मेरे द्वारा गोठा और लोका के ग्रामीणों को समझाया गया कि यह काम इतना आसान नहीं है। इसके बाद भी एक व्यक्ति बार-बार मुझसे इस मुद्दे पर सवाल करता रहा। जहां भी मैं जाता वही वह आ जाता और बेवजह मुद्दा बना कर उसको हवा देने का काम कर रहा था। इसके पीछे कुछ विपक्ष के नेता है। मैं अभी कुछ दिन पहले क्षेत्र में जनसंपर्क के लिए निकला था तो उस व्यक्ति विशेष ने फिर से मेरी गाड़ी रोकने का प्रयास किया। मैं तो गाड़ी में ही बैठा रहा। लेकिन मेरा गनर नीचे उतर कर उनको समझाने लगा। वह लोग नहीं माने और गनर के साथ बदतमीजी की। उसकी वर्दी तक फाड़ दी गई। जिसके बाद सरकारी काम में बाधा डालने के मामले में थाने में रिपोर्ट दर्ज की गई। बाद में उस व्यक्ति की गिरफ्तारी की गई। फिलहाल विपक्षी इस मुद्दे को एससी एक्ट से जोड़कर राजनीति करने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन जनता सब जानती है। सितारगंज की जनता यह भी जानती है कि हमने पिछले 5 साल में इस विधानसभा में वह काम कर दिखाए हैं जो पिछले 50 साल में नहीं हुए थे। मेरी विधानसभा के आसपास के विधानसभाओं में बस अड्डा नहीं बना है। चाहें वह किच्छा हो या दूसरी विधानसभा। लेकिन हमने बस अड्डा बनवाया है। यही नहीं बल्कि डिग्री कॉलेज बनवाया और उसमें कई कोर्स शुरू कराएं। आज वहां अट्ठारह सौ बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। वर्षों से सिरसा रोड नहीं बनी थी। 16 किलोमीटर की यह सड़क 16 गांवांे को जोड़ती है। इस सड़क को हमने बनाया। सिडकुल को जोड़ने वाली सुखी नदी का पुल बहुत महत्वपूर्ण था। इसे बनवाया गया। क्षेत्र में आईटीआई, पॉलिटेक्निक नहीं थे, वे बनवाए गए। जब मैं विधायक बना था तब सरकारी अस्पताल में सिर्फ तीन डॉक्टर थे। लेकिन अब वहां 10 डॉक्टर कार्यरत है। क्षेत्र में रोड़ों का जाल बिछाया है। सितारगंज में मेरे विधायक बनने से पहले एक भी एंबुलेंस नहीं थी वहां अब तीन एंबुलेंस काम कर रही है।
सौरभ बहुगुणा, विधायक सितारगंज

मैं भाजपा में प्रदेश अध्यक्ष महिला मोर्चा रही हूं। वर्ष 2013 से 2015 तक मैंने भाजपा में रहकर महिलाओं को पार्टी से जोड़ने का काम किया। 2019 में जब लोकसभा चुनाव हुए तो यहां के कैंडिडेट हरीश रावत के कहने पर मैंने भाजपा छोड़ कांग्रेस ज्वाइन कर ली। फिलहाल में महिला कांग्रेस में राष्ट्रीय सचिव हूं। पिछले लोकसभा चुनाव से ही मैं सितारगंज से विधानसभा चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही हूं। जिस दिन से प्रियंका गांधी ने कहा है कि महिलाओं को 40 प्रतिशत आरक्षण दिया जाएगा उस दिन से ही मुझे पूरा विश्वास हो गया है कि सितारगंज में महिला को प्रमुखता देते हुए कांग्रेस मुझे ही टिकट देगी। वैसे भी हमारा राज्य महिला प्रधान है। एक महिला का दर्द एक महिला ही जान सकती है।
मंजू तिवारी, राष्ट्रीय सचिव महिला कांग्रेस

 

 

जो लोग इस गफलत में है कि वह पैसे के दम पर सितारगंज में विधानसभा चुनाव लड़कर विधायक बन जाएंगे, उन्हें जनता मुंह तोड़ जवाब देगी। चाहे वह किसी भी पार्टी का हो। यह मैं नहीं मेरी विधानसभा क्षेत्र की जनता कह रही है। इसलिए अगर कोई नेता पैसे के दम पर वोट खरीदने का ख्वाब पाले हुए हैं तो अपने मन से इसे निकाल दें। हम और हमारा परिवार पिछले 20 साल से जिला पंचायत के काम कर रहा है। पूरे जिले में हमने इतने विकास कार्य किए हैं जितना कोई विधायक नहीं कर पाया है। अभी तक सितारगंज की जनता के साथ यूज एंड थ्रो होता रहा है। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। 2012 में हमने कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ कर जनता का दिल जीता था। तब बंगाली समुदाय से किरण मंडल को पहली बार टिकट मिला था। सभी लोग आंख मूंदकर उनके साथ जुट गए थे। खासकर बंगाली समुदाय। लेकिन बाद में बंगाली समुदाय अपने आप को ठगा हुआ महसूस करने लगा था। अभी हम यह नहीं कह सकते कि कौन-सी पार्टी से चुनाव लड़ेंगे। फिलहाल हमारी स्थिति वेट एंड वॉच की है। लेकिन यह तय है कि हम चुनाव जरूर लड़ेंगे।
सुरेश गंगवार, भाजपा नेता

 

कांग्रेस सरकार के राज में मैं अल्पसंख्यक आयोग के उपाध्यक्ष पद पर रह चुका हूं। सितारगंज का तीन बार चेयरमैन रहकर मैंने शहर को विकास की मुख्यधारा से जोड़ा है। सितारगंज विधानसभा क्षेत्र में 35000 मुस्लिम हैं। इसके चलते मेरी दावेदारी मजबूत है। अल्पसंख्यकों के बाद दूसरे नंबर पर बंगाली आते हैं। बंगाली समुदाय की महिला को पिछली बार कांग्रेस ने टिकट का मौका दिया। लेकिन वह हार गईं। इस बार एक मुस्लिम को भी मौका मिलना चाहिए। इसके लिए पार्टी से मैं सशक्त उम्मीदवार हूं।
हाजी अनवर अहमद, पूर्व चेयरमैन सितारगंज

 

 

मैं जनता का सेवक हूं। समस्या का समाधान कराना मेरा फर्ज है। इसके लिए मैंने 40 सदस्य टीम बनाई हुई है जो डोर टू डोर जाकर लोगों की समस्याओं का समाधान करा रहे हैं। लोगों की पेंशन बनवा रहे हैं। आधार कार्ड और अन्य डॉक्यूमेंट बनवाकर उनके घर पहुंचा रहे हैं। पिछले दिनों आई बाढ़ में मैंने नाव भर भर के लोगों को राशन पहुंचाया तथा उन्हें भूखे पेट नहीं रहने दिया। लोगों को रजाई कंबल भी बांटे हैं। मैंने अपनी सरकारी नौकरी से रिजाइन किया है। 1994 से मैं एफ आर आई देहरादून में रिसर्च के काम पर था। शक्ति फार्म में उप तहसील की मांग मेरे द्वारा की गई। सितारगंज में खेल स्टेडियम नहीं है उसकी मांग भी बरसों से कर रहा हूं। मेरी मांग है कि शहीद बिरज्ञानंद के नाम से खेल स्टेडियम बनाया जाए।
फकीर सिंह कन्याल, राज्य आंदोलनकारी

 

 

दो बार सितारगंज का विधायक बनकर जनता की सेवा कर चुका हूं। आगे भी जनता जनार्दन की सेवा करने का मन है। अगर पार्टी मुझे इस काबिल समझेगी तो मैं निश्चित तौर पर एक बार फिर चुनाव लडूंगा। मेरे 10 साल की विधायकी काल के विकास कार्यों को देखते हुए मुझे पूरा विश्वास है कि कांग्रेस मुझे ही टिकट देगी।
नारायण पाल, पूर्व विधायक सितारगंज

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