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Uttarakhand

किताबों का कारवां

पहाड़ों पर पठन.पाठन की संस्कृति को विस्तार देने के उद्देश्य से ष्किताब कौतिकष् के आयोजन लगातार किए जा रहे हैं। किताबों का यह कारवां इस बार प्रसिद्ध पर्यटन नगरी रानीखेत पहुंचा। क्रिएटिव उत्तराखण्ड और ष्म्यर पहाड़ष् के हेम पंत की पहल से पहाड़ों पर हो रहे इस आयोजन की कमान रानीखेत में वरिष्ठ पत्रकार विमल सती के हाथों में थी। 10 से 12 मई तक रानीखेत में हुए ष्किताब कौतिकष् की काफी सराहना हो रही है। पिछले डेढ साल में रानीखेत सहित नौ शहरों में हो चुके इन आयोजनों में पहाड़ी संस्कृति को तो बढ़ावा मिल ही रहा हैए साथ ही प्रदेश के लेखकए साहित्यकारए पत्रकारए रंगकर्मीए प्रशासनिक अधिकारी और लोक संस्कृति को बढ़ावा देने वाले लोगों की रचनात्मक शैली का भी प्रदर्शन होता है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी इस अनोखे पुस्तक मेले में जाकर आयोजकों की हौसला अफजाई कर चुके हैंए साथ ही वे ऐसे आयोजन प्रदेश भर में कराने की जरूरत पर भी बल दे चुके हैं

पर्यावरणविद् प्रोण् शेखर पाठक

किताबें कभी धोखा नहीं देती। छल नहीं करती। बुद्धू नहीं बनातीं। ये किताबें तो जीवन में साथ निभाती हैंए ज्ञान बढ़ाती हैं। जीवन की सभ्यताए संस्कृति से परिचय कराती हैं। साथ रहती हैं तो कितना कुछ बताती हैं। दूर तक जाने का रास्ता बताती हैं। लेकिन आज के डिजिटल दौर में किताबें गुम हो रही हैंए पुस्तकालयों में उदास पड़ी हैंए कहीं धूल खा रही हैं। समय ने जिस गति से अपने आप को भगाया है दुनिया तकनीक के मायाजाल में फंस गई हैए सब कुछ बटनों में सिमट गया है। लेकिन जज्बातों को यूं बटनों से बहलाया नहीं जा सकता। गूगल पर दुनिया को ढूंढ़ तो सकते हैं पर संजो कर रख नहीं सकते। सब कुछ यंत्रवत है पर यही यंत्र यदि धोखा दे गया तो आपका लिखा खा जाता हैए आपका पढ़ा हुआ बिसरा देता हैए पर जब कोई किताब एक बार लिखी जाती है पढ़ी जाती है तो बात दिल तक पहुंचती है। जहां और गहरे पहुंचना चाहती हैं वहां दुबाराए तिबारा पढ़ी जाती है। इसी पढ़ने.पढ़ाने की प्रवृत्ति को आगे बढ़ने का काम किया है रानीखेत में आयोजित नौवें किताब कौतिक ने।ष् यह कहना है प्रसिद्ध जागर गायिका और पद्मश्री से सम्मानित बसंती बिष्ट का।

रानीखेत के बहुउद्देशीय सभागार में आयोजित हुए तीन दिवसीय किताब कौतिक में चर्चित साहित्यकारों एवं लोक कलाकारोंए साहित्य प्रेमियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ.साथ स्थानीय स्कूली छात्र. छात्राओं तथा स्थानीय लोगों की बड़ी संख्या में भागीदारी ने किताब कौतिक आयोजन में चार चांद लगा दिए। यहां विभिन्न प्रकाशन समूह की 70 हजार से अधिक किताबें आई तो वहीं लेखकांे से बात चीतएबाल लेखन कार्यशालाए साहित्यिक परिचर्चाए नेचर वॉकए स्टार गेजिंगएसाहित्यिक संध्या और कवि सम्मेलन का आयोजन हुआ। कार्यक्रम में विचारकोंए साहित्यकारों व लोक कलाकारों में कवि गीत चतुर्वेदीए साहित्यकार भावना पंतए प्रसिद्ध जागर गायिका बसंती बिष्टए रजनीश कार्कीए पर्यावरणविद् शेखर पाठकए चर्चित लोकगायिका कमला देवीए लोकगायक दिवान कनवाल के साथ ही ग्राम पुस्तकालय के फाउंडर सुमन मिश्रा तथा घुघुती जागर टीम की शानदार प्रस्तुति ने जनचेतना का काम किया। इसी के साथ उद्योगपति टी सी उप्रेतीए जीण्बीण् पंत कृषि विश्व विद्यालय पंत नगर के पूर्व कुलपति बी एस बिष्टए जिम कार्बेट पक्षी विशेषज्ञ राजेश भट्टए बागवानी के क्षेत्र में राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त गोपाल उप्रेतीए इतिहासकार प्रोण्अनिल जोशीए व्यवसायी अतुल कुमार अग्रवालए छावनी परिषद मनोनीत सदस्य मोहन नेगीए राजेंद्र पंतए बी एस कडाकोटीए मदन बिष्टए नरेश डोबरियालए वरिष्ठ पत्रकार चारू तिवारीए हिमांशु उपाध्यायए डॉण् ललित उप्रेतीए उत्तराखण्ड परिवर्तन पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष पी सी तिवारी आदि मौजूद रहे।

कई मायनों में महत्वपूर्ण रहा रानीखेत किताब कौतिक
किताब कौतिक का सपना शुरू करने वाले रंगकर्मी और पेशे से इंजीनियर हेम पंत कहते हैं कि उत्तराखण्ड में पढ़ने.लिखने की संस्कृति के साथ ही यहां की विशिष्ट संस्कृति और अनछुए पर्यटक स्थलों के प्रति लोगों में रूचि जागृत करने के अनोखे विचार के साथ किताब कौतिक का विचार पनपा। हमारा यह विचार था कि एक ही कार्यक्रम के साथ हम तीन.चार चीजों को जोड़कर आगे बढ़ें। जैसे शिक्षाए साहित्यए पर्यटन के साथ उत्तराखण्ड की विशिष्ट लोक संस्कृति भी इन कौतिक में शामिल हो। इसको एक सामाजिक दायित्व की तरह ले रहे हैं। अब तक नौ सफल कार्यक्रम हो चुके हैं।

किताब कौतिक को हमने शिक्षाएं साहित्य और पर्यटन का उत्सवष् के बहुआयामी उद्देश्य से आगे बढ़ाया है और रानीखेत में हम अपने सभी उद्देश्यों तक पहुंचने में सफल रहे। उदय किरोला जी के निर्देशन में हुई 5 दिवसीय लेखन कार्यशाला में विभिन्न विद्यालयों के 60 छात्र छात्राओं ने भाग लिया और विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से रचनाशीलता की ओर कदम बढ़ाया। लगभग 15 विषय विशेषज्ञों ने पहले दिन अलग.अलग स्कूलों में जाकर बच्चों को करियर काउंसलिंग टिप्स दिए। अगले दिन तक 60 हजार से ज्यादा किताबों का प्रदर्शन हुआ और अच्छी संख्या में इनकी बिक्री भी हुई। साहित्यिक और समसामयिक विषयों पर अच्छी चर्चाएं हुई और संगीत संध्या में विशुद्ध लोकसंगीत सुनने को मिला। यह अभियान अब और भी तेजी से आगे बढ़ेगा। हमारी कोशिश है कि उत्तराखण्ड से निकलकर यह संदेश पूरे देश और दुनिया में फैले।

सामाजिक कार्यकर्ता हिमांशु उपाध्याय के अनुसार रानीखेत किताब कौतिक नई पीढ़ी को पठन.पाठन व पुस्तकों के करीब लाने का एक सफल प्रयास रहा जिसके लिए श्री हेम पंत तथा उनकी टीम बधाई की पात्र है। साथ ही इस कौतिक के दौरान विभिन्न आयोजन जैसे करियर काउंसलिंगए कुमाऊंनी संस्कृति से जुड़े लोगों द्वारा अपने हुनर की प्रस्तुतिए काव्य गोष्ठीए तथा पद्मश्री से सम्मानित प्रोण् शेखर पाठक का उनकी अस्कोट से आराकोट यात्रा के 50 वर्ष पूरे होने पर व्याख्यान एवं श्रीमती कमला देवी जो कि कोक स्टूडियो में अपनी लोक गायकी द्वारा उत्तराखण्ड का नाम देश.दुनिया में रोशन कर चुकी हैंए ष्किताब कौतिकष् के मुख्य आकर्षण रहे। मेरी राय में ये कौतिक और अच्छा हो सकता था। आशा है कि भविष्य में ये कौतिक पहले से अच्छा निखर कर सामने आएगा।

सार्थक प्रयास संस्था के अध्यक्ष एवं पत्रकार पवन तिवारी कहते हैं कि ष्किताब कौतिकष् मात्र एक आयोजन नहींए बल्कि एक भाव हैए जिसे किताबों से प्रेम करने वाले जरूर समझेंगेए किताबें हमारे जीवन की सबसे अच्छी मित्र होती हैं। किताबें हमें हमारे आस.पास के वातावरण को समझने में सहायता करती हैंए किताबें सदैव मार्गदर्शक या सर्वकालिक शिक्षक के रूप में भी हमारे जीवन में भूमिका निभाती हैं साथ ही ष्किताब कौतिकष् हम सभी को आजकल की आधुनिकता के कोलाहल से दूर एक ठहराव के साथ स्वयं से रूबरू करवाती हैंए किसी को भी स्थाई रूप से किताबों से दोस्ती करना बेहद पसंद है तो उनके लिए पुस्तकालय से अच्छा स्थान कोई दूसरा नहीं हो सकता है।

प्रदेश में पीरुल गर्ल के नाम से मशहूर मंजू आर साह के अनुसार किताबें इसलिए पढ़ो ताकि तुम बहस नहीं तर्क कर सको। किताबें हमारी सच्ची मित्र होती हैं यह हमारे ज्ञान चक्षु को खोलती हैं। परंतु वर्तमान परिपेक्ष्य में हमारी युवा पीढ़ी किताबों से विमुख हो गई हैं। किताबों की जगह मोबाइल ने ले ली है। इन युवा पीढ़ी को पढ़ने की संस्कृति की ओर मोड़ने के लिए किताब कौतिक का आयोजन पिछले डेढ़ साल से क्रिएटिव उत्तराखण्ड के हेम पंत एवं दयाल पांडे और उनकी टीम द्वारा किया जा रहा है। जो वास्तव में एक सराहनीय प्रयास है। इन आयोजनों से न केवल बच्चों को किताबों की ओर लौटने का प्रयास किया जा रहा हैए बल्कि उसके साथ.साथ हमारी संस्कृति और सभ्यता को बढ़ाने का अवसर भी मिल रहा है। किताब मेले में हस्तशिल्पियों का प्रदर्शन हमारी प्राचीन संस्कृति की धरोहर को दर्शाता है। यह आयोजन वृहद स्तर पर होना चाहिए ताकि हमारे युवा पढ़ सके और हमारे आने वाली पीढ़ी को अपने ज्ञान द्वारा अभीसंचित कर सकें। तभी हमारे समाज में बदलाव आएगा और फिर प्रेमचंद मैथिली शरण गुप्तए महावीर प्रसाद द्विवेदीए जयशंकर प्रसाद कालिदास जैसे महान लेखक फिर पैदा हो सकेंगे।

प्रगतिशील किसान समिति उत्तराखण्ड के उपाध्यक्ष उमेश भट्ट ने कहा कि रानीखेत किताब कौतिक में कृषि एवं पशुपालन विषय पर वैज्ञानिकों द्वारा परिचर्चा के माध्यम से छात्र.छात्राओं को रोजगार एवं स्वरोजगार की संभावनाओं पर मार्गदर्शन दिया गया जोकि एक अनूठी पहल है।

प्रदेश के ख्याति प्राप्त समाजसेवी और उद्योगपति टीण्सीण् उप्रेती कहते हैं कि उत्तराखण्ड ने देश को एक से बढ़कर एक राजनेताए वैज्ञानिक और साहित्यकार दिए हैं। यह देवताओं की धरती है जहां से ज्ञान की गंगा पूरे देश में प्रवाहित होती है। वर्तमान समय में पुस्तकों के प्रति युवा पीढ़ी का आकर्षण कम होना बेहद चिंता का विषय है। ष्किताब कौतिकष् जैसे आयोजन इस दृष्टि से बेहद सराहनीय प्रयास है।

भाजपा की कुमाऊं मंडल संयोजक और प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य विमला रावत कहती हैं कि रानीखेत में आयोजित हुआ किताब कौतिक स्थानीय लोगों के लिए लाभदाई रहा। खासकर स्कूली छात्रों के लिए यह बहुत प्रेरणादायक बना। यह कार्यक्रम आज के मीडिया इंटरनेट के युग में किताबों के महत्व को समझने समझाने की एक अनोखी पहल थी। किताब को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाया जाए इसकी भी चिंता इस कार्यक्रम में संगोष्ठी के माध्यम से की गई। देखा जाए तो किताबों से समाज के हर वर्ग की दोस्ती लाभदायक है क्योंकि किताबें किसी भी व्यक्ति के मानसिक स्तर एवं सामाजिक स्तर को सुधारने का एक अनुपम हथियार हैं। रानीखेत ष्किताब कौतिकष् ने लोगों को अपनी संस्कृति परंपराओं से रूबरू कराया जिससे कि हमारे आने वाली पीढ़ी युवा वर्ग हमारे समाज में गाए जाने वाली झूला चाचरी अन्य गीत कविताओं को समझेंगे और उत्तराखण्ड के प्रति संवेदना हमेशा उनके मन में रहेगी। अनेक विभूतियों का आवागमन भी इस किताब कौतिक कार्यक्रम में रहा। किताब कौतिक की आयोजक मंडली द्वारा यह अनुपम प्रयास बहुत ही सराहनीय है।

पूर्व सांसद प्रदीप टम्टा के अनुसार रानीखेत में किया गया किताब कौतिक का कार्यक्रम बहुत ही सारगर्भित और संदेश देने वाला रहा। ऐसे आयोजन पहाड़ों के हर कस्बे और शहरों में होने चाहिए जिससे लोगों में किताबें पढ़ने में रुचि जगे। आज की दुनिया में जब सोशल मीडिया पर अधिकतर लोग पूरा.पूरा दिन बिता देते हैं ऐसे में किताब उनके लिए सच्चे मित्र की तरह हैं जो उन्हें अच्छे बुरे से परिचित कराती हैं। मेरी भी सबसे प्रिय हॉबी पुस्तक पढ़ना ही है। हेम पंत ने जो पहल की है उसका परिणाम बहुत ही सुखद आने लगा है। इस कार्यक्रम में प्रशासनिक अधिकारियों के अलावा राजनेताओंए कवियों और साहित्यकारों का जो समागम होता है और उससे जो मंथन होता है वह हमारे ज्ञान के भंडार को बढ़ाने के लिए बहुत ही सुंदर प्रयास है। प्रगतिशील समाज के लिए ऐसे कार्यक्रम होते रहने चाहिए जिससे हमारी जिंदगी में किताबों का महत्व कम ना हो।

 

रानीखेत ‘किताब कौतिक’ का तीन दिवसीय आयोजन पूर्णतया सफल रहा। आयोजन को लेकर स्कूली बच्चों सहित साहित्य, कला, संस्कृति अनुरागी जनता में अपूर्व उत्साह देखा गया। यह पहला पुस्तकोत्सव था जिसके लिए पिछले दो माह से हम तैयारी में जुटे थे। छावनी परिषद और रानीखेत सांस्कृतिक समिति के सहयोग के बिना यह आयोजन को संभव नहीं था। आयोजन की सफलता इसी बात से आंकी जा सकती है कि पुस्तकों से मुलाकात करने शहर व आस-पास से न सिर्फ बड़ी संख्या में लोग पहुंचे अपितु बड़ी तादाद में पुस्तकें अधिकांश घरों की पुस्तक रैक तक पहुंची जिससे कहा जा सकता है कि साहित्यकारों का पसंदीदा प्रकृति नगर मोबाइल लत के दौर में भी अध्ययनशील लोगों से रीता नहीं है। मैं आयोजन समिति अध्यक्ष के नाते समस्त रानीखेतवासियों को ‘किताब कौतिक’ की सफलता के लिए बधाई देता हूं।
विमल सती, वरिष्ठ पत्रकार एवं ‘किताब कौतिक’ आयोजन समिति के अध्यक्ष

 

 

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